नई दिल्ली। परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के कथित मामलों के विरोध में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों से जुड़ी एक और पहल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार दोपहर आयोजित एक बैठक में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन को मंजूरी दे दी।
शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार यह संशोधन विधेयक सोमवार को संसद में पेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य नकल और प्रश्नपत्र लीक रोकने संबंधी कानून को और अधिक सख्त बनाना है जिसके तहत कड़ी सजा और अधिक जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा।
शुक्रवार शाम तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने अपने 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। सरकार ने इसे ‘परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम’ बताया। सरकारी सूत्रों के अनुसार इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। आगे भी कई सुधारात्मक कदम उठाए जाने की बात कही गई। यह कार्रवाई एनटीए के व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है।
यह एजेंसी हाल के प्रश्नपत्र लीक विवादों के कारण लगातार चर्चा में रही है। संसद ने सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक रोकने संबंधी कानून को 9 फरवरी 2024 को पारित किया था। उसमें संशोधन को मंत्रिमंडल की मंजूरी और एनटीए द्वारा लगभग चार दर्जन अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय सरकार द्वारा गुरुवार सुबह से की जा रही घोषणाओं की कड़ी का एक हिस्सा है।
ये कदम प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार के बदले हुए और नए ढंग से संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। यह बदलाव उस समय सामने आया है जब सोमवार को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के बाद आंदोलन राष्ट्रीय राजधानी से बाहर भी फैल गया है। इन विरोध प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
नए सिरे से समायोजित रणनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट शामिल रही हैं। जिनमें गुरुवार देर रात जारी किया गया एक वीडियो भी शामिल है। इसमें उन्होंने परीक्षा पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाला विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश करने की घोषणा की।
सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में शीर्ष अफसरशाहों का फेरबदल भी किया। गुरुवार देर रात ही दो केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और जितेंद्र सिंह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाने के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे। शुक्रवार शाम तक सरकारी सूत्रों ने उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारियों के साथ गतिरोध जल्दी हल हो सकता है।
हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारियों और संसद में विपक्ष के साथ सरकार का गतिरोध जारी है। गुरुवार को दोपहर राजधानी नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में नड्डा और सिंह ने सीजेपी के प्रतिनिधियों सौरभ दास और अभिषेक रांका के साथ दूसरे दौर की बातचीत की।
सीजेपी के प्रतिनिधियों ने जोर दिया कि सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और उन्होंने कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं करेंगे। सरकार ने प्रधान के इस्तीफे की मांग का जवाब देने के लिए शनिवार तक का समय मांगा है। सीजेपी ने 20 जुलाई को आंदोलनकारियों की बर्बर पिटाई के लिए माफी मांगे जाने की भी मांग की।
इसके अलावा उसने आंदोलनकारियों के विरुद्ध सारे एफआईआर वापस लेने और नीट की परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले बच्चों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग की। संसद का मॉनसून सत्र का पहला सप्ताह बेकार चला गया क्योंकि विपक्ष ने शुक्रवार को भी यह मांग जारी रखी कि प्रधान को इस्तीफा देना होगा और इसके बाद ही दोनों सदनों में पेपर लीक मुद्दे पर बहस हो सकेगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को यह सहमति दी कि सोमवार को दो याचिकाओं की सुनवाई की जाएगी। इनमें 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस बल के अत्यधिक उपयोग का आरोप लगाया गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रदर्शनों से उत्पन्न तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की।
सर्वोच्च न्यायालय में यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने उठाया। उन्होंने कहा कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियां रोज जारी हैं। उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। अनुरोध स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाओं को 27 जुलाई को सूचीबद्ध किया जाए।
सीजेपी ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह एक विशेष वेबसाइट शुरू करेगा, जिसके माध्यम से प्रदर्शनकारियों से फोटो और वीडियो एकत्र किए जाएंगे। इनका उपयोग 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुए पुलिस कार्रवाई में कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान करने के लिए किया जाएगा।
इस कार्रवाई के दौरान कथित रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा अब एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है जबकि दिल्ली पुलिस ने इसके इस्तेमाल से इनकार करते हुए कहा कि बल प्रयोग तभी हुआ जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था में बाधा डालने की कोशिश की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं।
वांगचुक से मुलाकात के बाद नड्डा ने कहा कि सरकार इस बात पर सकारात्मक विचार कर रही है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों तथा 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई मामला दर्ज न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि हाल में नीट प्रश्नपत्र लीक प्रकरण से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा देने पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
वहीं दूसरी ओर शुक्रवार शाम आयोजित प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विदेश से इस प्रदर्शन को मिल रहे कथित समर्थन के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास इस संदर्भ में साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है।
सरकार का रुख बदला हुआ है और अब सीजेपी की इस मांग को भी स्वीकार कर लिया है कि बातचीत किसी मंत्री के आवास पर न हो। इससे पहले 23 जून को एक टीवी साक्षात्कार में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीजेपी को आतंक फैलाने की कोशिश करने वाले लोगों की ‘बी-टीम’ तक बताया था।

