नई दिल्ली। लाल सागर के रास्ते नौवहन को बाधित करने की ईरान की कथित धमकी भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव डाल सकती है क्योंकि इससे सऊदी अरब से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी जो भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने यमन के हूती आंदोलन से कहा है कि यदि अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे पर हमला करता है तो वे बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट (जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है) को अवरुद्ध करने की तैयारी करें।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन के जरिए लाल सागर बंदरगाहों तक कच्चा तेल पहुंचा रहा है। जून में सऊदी अरब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल स्रोत था जिसने उस महीने भारत के कुल आयात का 7 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दिया।
ऊर्जा विश्लेषक प्रबाल सेन ने कहा, ‘लाल सागर पर खतरा चिंताजनक स्थिति है। सऊदी अरब अपनी क्षमता का 55–60 प्रतिशत लाल सागर के जरिये ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से निर्यात कर रहा है। यदि यह मार्ग भी अवरुद्ध हो गया तो देशों को अपने भंडार का उपयोग करना पड़ेगा लेकिन भारत के पास पर्याप्त भंडारण नहीं है। भारतीय रिफाइनरों के पास केवल लगभग 20 दिनों का वाणिज्यिक या परिचालन भंडारण है। इससे मांग में कटौती करनी पड़ सकती है।’
पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई तो रिफाइनरियों ने रूस, ब्राजील, वेनेजुएला, अंगोला और अमेरिका से आयात बढ़ा दिया। जून में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 25.8 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया, जो उस महीने देश के कुल आयात का आधे से अधिक था। संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे जिनसे क्रमशः लगभग 5.1 लाख बैरल प्रति दिन और 3.6 लाख बैरल प्रति दिन आयात हुआ।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में नौवहन बाधित होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर जोखिम बढ़ सकता है और भारत को अपने कच्चे तेल स्रोतों को और विविध बनाना पड़ेगा। साथ ही तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति पर भी अधिक खतरा हो सकता है।
फिलिपकैपिटल के वाइस प्रेसिडेंट नितिन तिवारी ने कहा, ‘भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए रूस, ब्राजील, अमेरिका और अंगोला जैसे अन्य स्रोतों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। संयुक्त अरब अमीरात ने भी उत्पादन बढ़ाया है, वहां से आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है। लाल सागर का बंद होना असर डालेगा लेकिन भारत स्थिति को और विविधता लाकर संभाल सकता है।’
भारतीय रिफाइनरियों ने पहले ही अपनी कच्चे तेल की रणनीति बदल दी है। उन्होंने रूस से खरीद बढ़ाई है और साथ ही वेनेजुएला, ब्राजील और अंगोला जैसे गैर-पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से आयात बढ़ाकर व्यवधान की भरपाई की है।

