नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के लिए अस्थायी सीट के लिए भारत के अभियान की शुरुआत करते हुए सोमवार को कहा कि भारत की प्राथमिकताओं में से एक यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री जीवन रेखाओं को खतरा न हो और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है, आखिरी बार 2021-22 में रहा था। वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे, जिसमें भारत और ताजिकिस्तान एशिया-प्रशांत समूह श्रेणी की एकमात्र सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि सभी सदस्य देश उसके पक्ष में मतदान करेंगे।
सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र के राजदूतों, राजनयिकों और अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत की प्राथमिकताओं में एक ऐसी दुनिया के लिए काम करने पर ध्यान केंद्रित करना शामिल होगा जहां विकासशील देशों की आवाज को समान रूप से सुना जाए।
उन्होंने कहा कि भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि आतंकवाद के वित्तपोषण, नाविकों की सुरक्षा, महासागरों की सुरक्षा और संरक्षा जैसे मुद्दों को उचित महत्त्व मिले ताकि समुद्री जीवन रेखाओं को कोई खतरा न हो। उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास एक ऐसे विश्व का निर्माण करना होगा जहां जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई और जलवायु न्याय, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और सतत विकास को महत्व दिया जाए और उन्हें बढ़ावा दिया जाए।
विदेश मंत्री ने कहा कि बहुपक्षवाद को समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए और प्रभावी समाधान प्रदान करने चाहिए, न कि मूकदर्शक बने रहना चाहिए, प्रौद्योगिकी के वादे को पूरी तरह से साकार किया जाना चाहिए, जबकि इसके दुरुपयोग और गलत प्रयोग से बचाव किया जाना चाहिए और आतंकवाद के अभिशाप का मुकाबला उन संसाधनों को अवरुद्ध करके किया जाना चाहिए जो इसे बढ़ावा देते हैं।
जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में जहां आपूर्ति श्रृंखलाएं हमारी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ती हैं, वहीं समुद्री संसाधनों की सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘हाल की घटनाओं ने ऐसा करने की आवश्यकता को और भी स्पष्ट कर दिया है।’
उन्होंने कहा, ‘चुनौती प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का पालन सुनिश्चित करने से शुरू होती है।’ उन्होंने कहा, ‘समुद्री व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह को बनाए रखना हमारा सामूहिक हित है।’

