कोटा। आर्मी पब्लिक स्कूल, कोटा में विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए विद्यार्थियों में स्वस्थ शरीर और स्वस्थ आँखों के लिए उपयोगी सुझाव विषय पर प्रेरणादायक एवं संवादात्मक व्याख्यान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में समग्र स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. संजय सोनी तथा प्रसिद्ध नेत्र सर्जन, लेखक, प्रेरक वक्ता एवं राष्ट्र चिंतक डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय ने विद्यार्थियों को स्वस्थ शरीर, संतुलित जीवनशैली और स्वस्थ आँखों का महत्व समझाया। कर्नल शंभू शरण सिंह ने डॉ. संजय सोनी तथा डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय को स्नेहपूर्वक “खुशियों के डॉक्टर” और “खुशियों के सौदागर” बताया।
डॉ. संजय सोनी ने सही भोजन, सही दिनचर्या, सकारात्मक सोच और संतुलित भावनाओं को स्वस्थ जीवन का आधार बताया। उन्होंने डोज़ हार्मोन्स, गट-ब्रेन एक्सिस, सकारात्मक मिलेट, खपली आटा और वैदिक किचन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को फास्ट फूड, अत्यधिक मैदा, सफेद चीनी और अधिक नमक के दुष्प्रभावों से सावधान करते हुए कहा कि बच्चों का टिफिन केवल भोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण का माध्यम है।
डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से दस सेकंड आँखें बंद कर अंधकार का अनुभव करने को कहा और दृष्टि के महत्व को भावनात्मक रूप से समझाया।
उन्होंने बताया कि विश्व में लगभग 4.3 करोड़ लोग अंधत्व से पीड़ित हैं और 2.2 अरब से अधिक लोगों में दृष्टि संबंधी समस्या है। भारत में लगभग 48 लाख लोग अंधत्व से प्रभावित हैं। उन्होंने मायोपिया, केराटोकोनस, ड्राई आई, आँखों की एलर्जी, डिजिटल विज़न सिंड्रोम और गट-आई एक्सिस पर सरल भाषा में चर्चा की।
डॉ. पाण्डेय ने बच्चों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी। हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। उन्होंने आँखें न रगड़ने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित नेत्र-जांच कराने, बाहर खेलने और बिना सलाह आई ड्रॉप न डालने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का भावनात्मक पक्ष नेत्रदान रहा। डॉ. पाण्डेय ने “नेत्रदान महादान” का संदेश देते हुए कहा कि मृत्यु के बाद भी एक व्यक्ति दो लोगों के जीवन में रोशनी ला सकता है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 11 लाख लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित हैं और हर वर्ष लगभग 25,000 नए मरीज जुड़ते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों को नेत्रदान के लिए जागरूक रहने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और अभिभावकों ने स्वस्थ भोजन, स्क्रीन अनुशासन, नियमित नेत्र-जांच और नेत्रदान के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ आँखें ही उज्ज्वल भविष्य की सच्ची नींव हैं।

