मानसून की बेरुखी और गन्ने से एथेनॉल बनाने से चीनी की कीमतों में जोरदार तेजी

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नई दिल्ली। Sugar Price: दुनिया भर में मौसम के बदलते मिजाज के कारण कमोडिटी बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। अलनीनो और कमजोर मॉनसून के कारण खरीफ फसलों की बुआई में गिरावट आई है।

वैश्विक स्तर पर सप्लाई घटने की आशंकाओं और गन्ने से एथेनॉल बनाने के कारण चीनी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से सरकार पहले ही निर्यात पर रोक ला चुकी है।

मॉनसून में देरी और बारिश की कमी के कारण गन्ने के रकबे में भारी कमी आने की आशंका जताई जा रही है जिससे इस सीजन में चीनी उत्पादन कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कम उत्पादन की खबरों के बीच चीनी के दाम बढ़ना शुरू हो गए हैं।

पिछले एक महीने में घरेलू थोक बाजार में चीनी के दाम तीन फीसदी से ज्यादा जबकि खुदरा बाजार में आठ फीसदी से अधिक चढ़े हैं। वहीं वैश्विक बाजार में एक सप्ताह के अंदर चीनी के दाम करीब सात फीसदी चढ़े चुके हैं।

घरेलू बाजारों में चीनी की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। एक महीने पहले दिल्ली-मुंबई सहित देश के लगभग सभी शहरों में चीनी का खुदरा मूल्य 46 रुपये प्रति किलोग्राम था जो इस समय बढ़कर 50 रुपये प्रति किलोग्राम के पास पहुंच गया है।

थोक बाजार की बात की जाए तो इस समय चीनी एम- 30 किस्म की कीमत दिल्ली में 4,580 रुपये, कानपुर में 4,600 रुपये, मुंबई में 4,400 रुपये, कोलकाता में 4,600 रुपये और चेन्नई में 4,680 रुपये प्रति क्विंटल हो चुके हैं जबकि एक महीने पहले दिल्ली थोक बाजार में चीनी के दाम 4,440 रुपये, कानपुर में 4,450 रुपये, मुंबई में 4,240 रुपये, कोलकत्ता में 4,450 रुपये और चेन्नई में 4,600 रुपये प्रति क्विंटल थे।

दाम बढ़ने के प्रमुख कारण
भारत में गन्ने की खेती वाले इलाकों में इस साल जून महीने में पिछले 12 वर्षों की सबसे कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सामान्य के मुकाबले 38 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। जुलाई में भी कम बारिश की आशंका है। जिसने गन्ना उत्पादन को लेकर चिंताओं को बढ़ा दिया है। चीनी उत्पादन 30-80 लाख टन तक घट सकता है।

इसके अलावा गन्ने से एथेनॉल बनाने के कारण भी चीनी का उत्पादन लगातार प्रभावित हो रहा है। किसानों को गणना चीनी मिलों के पास कम और एथनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियों में जा रहा है। क्योंकि चीनी मिलों से ज्यादा पेमेंट किसानों को एथनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियों से मिलता है। क्योंकि शक्कर बिकती है 40 से 45 रुपये किलो और एथनॉल बिकता है पेट्रोल के भाव यानी तीन गुना ज्यादा कीमत पर। सरकारी खरीद की रेट 58 रुपये लीटर है। एथनॉल बनाने वाली कंपनियों की तो पांचों उंगलिया घी में है।

चीनी निर्यात पर प्रतिबंध
भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को काबू में रखने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीनी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को 30 सितंबर तक के लिए आगे बढ़ा दिया है। साथ ही घरेलू बिक्री के लिए चीनी का आवंटन सीमित कर रही है। खाद्य मंत्रालय ने जुलाई में घरेलू बिक्री के लिए 22 लाख टन मासिक कोटा आवंटित किया है, जो पिछले साल के इस महीने के बराबर है। रिपोर्ट्स की मानें तो जुलाई में हुए आवंटन के साथ, 2025-26 चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के लिए संचयी घरेलू कोटा 223 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले सीजन की इसी अवधि के दौरान आवंटित 229.5 लाख से लगभग 3 फीसदी कम है।