चीन और जापान को छोड़ भारत बना एशिया का सबसे बड़ा निवेश का ठिकाना

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नई दिल्ली। Global Investment Hub: भारत एशिया प्रशांत (APAC) क्षेत्र में निजी निवेश (प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल) के लिए सबसे पसंदीदा बाजार बन गया है। लेकिन अब सिर्फ तेज आर्थिक विकास देखकर निवेश नहीं हो रहा।

निवेशक अब यह भी देख रहे हैं कि किसी देश में नियम कितने साफ हैं, कारोबार करना कितना आसान है, पैसा निकालने के रास्ते कितने मजबूत हैं और स्थानीय स्तर पर काम करना कितना मुश्किल है।

यह बात विस्त्रा फंड सॉल्यूशंस और डील स्ट्रीट एशिया की नई रिपोर्ट ‘विस्त्रा फ्रिक्शन इंडेक्स 2026’ में सामने आई है। यह रिपोर्ट एशिया प्रशांत के 15 देशों में निवेश करने वाले 105 फंड मैनेजर्स के सर्वे पर आधारित है।

निवेश के मौके में भारत सबसे आगे

देशअवसर सूचकांक (Opportunity Score)
भारत0.78
जापान0.72
चीन (मेन लैंड)0.72
सिंगापुर0.71
दक्षिण कोरिया0.70

रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश के मौके के मामले में भारत पहले नंबर पर है। भारत का स्कोर 0.78 रहा, जबकि पूरे एशिया प्रशांत का औसत 0.64 है। इसका मतलब है कि निवेशकों को भारत में लंबे समय तक अच्छा कारोबार और बेहतर कमाई की सबसे ज्यादा उम्मीद है।

भारत के बाद जापान और चीन का स्कोर 0.72, सिंगापुर का 0.71 और दक्षिण कोरिया का 0.70 रहा। रिपोर्ट के अनुसार, निजी इक्विटी और नए कारोबार में निवेश करने वाले दोनों तरह के निवेशकों की पहली पसंद भारत ही है।

रिपोर्ट में यह भी देखा गया कि किस देश में निवेश के बाद काम करना कितना आसान या मुश्किल है। इस मामले में सिंगापुर सबसे आगे रहा। उसके बाद हांगकांग, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया का स्थान रहा। वहीं कंबोडिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों में नियमों की अनिश्चितता, कमजोर व्यवस्था, निवेश से बाहर निकलने में दिक्कत और आर्थिक उतार चढ़ाव जैसी चुनौतियां ज्यादा बताई गईं।

रिपोर्ट ने देशों को चार हिस्सों में बांटा है। भारत को उन देशों में रखा गया है जहां निवेश के अच्छे मौके हैं और कामकाज में मुश्किलें भी कम हैं। इस लिस्ट में भारत के साथ सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं।

नया फंड जुटाना हुआ मुश्किल
रिपोर्ट के मुताबिक, अब फंड मैनेजर्स के लिए नया पैसा जुटाना पहले से ज्यादा कठिन हो गया है। सिर्फ 19.3 फीसदी लोग ही अपना नया फंड एक साल के भीतर जुटा पाए। इतना ही नहीं, 40 फीसदी फंड मैनेजर्स ने बताया कि उनके पुराने निवेशकों में से 40 फीसदी से भी कम ने उनके नए फंड में दोबारा पैसा लगाया। इससे नए फंड जुटाने की चुनौती और बढ़ गई है।

बदल रही है निवेशकों की रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार, मुश्किलें बढ़ने के बावजूद निवेशक पीछे नहीं हट रहे हैं। करीब 39 फीसदी फंड मैनेजर अब स्थानीय साझेदारों के साथ काम कर रहे हैं, स्थानीय टीम मजबूत बना रहे हैं और नियमों का पालन पहले से बेहतर तरीके से कर रहे हैं।

कुछ निवेशक निवेश से पहले ही कंपनी की व्यवस्था और नियमों की गहराई से जांच कर रहे हैं, जबकि कुछ ऐसे बाजारों में निवेश कम कर रहे हैं जहां जोखिम ज्यादा और कमाई की संभावना कम दिख रही है।

रिपोर्ट का कहना है कि अब एशिया में निवेश सिर्फ तेज विकास देखकर नहीं होगा। निवेशक हर देश को अलग नजर से देख रहे हैं। जहां अच्छे मौके हैं, वहां यह भी देखा जा रहा है कि कारोबार करना कितना आसान है। आने वाले समय में वही निवेशक ज्यादा सफल होंगे जो मौके के साथ साथ चुनौतियों का भी सही आकलन करेंगे।