नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर हुए एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलने जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने भारत के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है।
दुनिया के दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने भारत की आर्थिक तरक्की को लेकर अपनी नई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्डमैन सैक्स ने ‘इंडिया: इम्प्रूव्ड मैक्रो आउटलुक आफ्टर द यूएस-ईरान डील’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बैंक ने कैलेंडर वर्ष 2026 (CY26) के लिए भारत की GDP ग्रोथ रेट के अनुमान को बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है।
इसके साथ ही बैंक ने भारत में महंगाई और चालू खाता घाटे के अनुमान में भी कटौती की है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में देश के आम नागरिकों से लेकर सरकार तक को बड़ी राहत मिलने वाली है।
इससे पहले इस इन्वेस्टमेंट बैंक की रिसर्च विंग ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। दरअसल, गोल्डमैन सैक्स की कमोडिटीज टीम ने कच्चे तेल की कीमतों के अनुमान में बदलाव किया है। अब 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में तेल की औसत कीमत पहले के 92 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले घटकर 82 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि 2027 में यह 75 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। तेल की इसी घटती कीमत के दम पर भारत की रियल GDP ग्रोथ के अनुमान को 0.3 फीसदी बढ़ाकर 6.8% कर दिया गया है।
पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत रही है। इसका बड़ा कारण यह रहा कि सरकार ने कई राजकोषीय कदमों के जरिए ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ने दिया। 2026 की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जिसे मजबूत निवेश और सर्विस सेक्टर में आई तेजी से सहारा मिला।
अब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से आम जनता की जेब पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों का बोझ बढ़ने का खतरा टल गया है। इसी को देखते हुए गोल्डमैन सैक्स ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए भारत की रिटेल महंगाई दर के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया है।
तेल के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में यूरिया की कीमतों में आई भारी गिरावट भारत सरकार के लिए भी बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। इससे सरकार का फर्टिलाइजर (खाद) सब्सिडी पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा और सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की लागत कम होने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई कम होगी।
रिपोर्ट में भारत के बाहरी आर्थिक मोर्चे पर भी भरोसा जताया गया है। देश में बाहर से आने वाले पैसे में मजबूती और सस्ते तेल के कारण कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए चालू खाता घाटे (CAD) के अनुमान को 20 बेसिस पॉइंट घटाकर GDP का 1.1 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही अब देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) भी GDP के 0.7 प्रतिशत के सरप्लस (बढ़त) में रहने की उम्मीद है।
हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कोविड महामारी के बाद वित्त वर्ष 2027 पहला ऐसा साल हो सकता है जब भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत के आंकड़े से नीचे रहेगी, क्योंकि इससे पिछले वित्त वर्ष 2026 में मजबूत खपत और निवेश के बूते देश की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी थी।

