बाजार भाव ऊंचा रहने से इस बार लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोतरी के आसार

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गुंटूर। वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान लालमिर्च के उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि होने की उम्मीद है और इसका कुल रकबा 2024-25 सीजन के करीब या उससे कुछ ऊपर पहुंचने के आसार हैं।

बाजार भाव ऊंचा रहने तथा बकाया स्टॉक कम होने से किसानों को बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का प्रोत्साहन मिल सकता है। आंध्र प्रदश, तेलंगाना, कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में बिजाई क्षेत्र बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

गुंटूर स्थित संस्था- चिली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि लालमिर्च की बिजाई या अल नीनो का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसकी खेती अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्र में भी हो सकती है।

चूंकि बाजार भाव मजबूत बना हुआ है इसलिए दक्षिण भारत के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी रकबा सुधरकर वर्ष 2024 के स्तर तक पहुंच सकता है। मालूम हो कि उस समय लालमिर्च का क्षेत्रफल बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।

लेकिन वर्ष 2025 में किसानों ने बिजाई क्षेत्र घटा दिया क्योंकि उसे लालमिर्च की खेती से आकर्षक आमदनी प्राप्त नहीं हुई थी। 2024-25 सीजन के बम्पर उत्पादन से बाजार भाव नरम पड़ गया था।

एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि चालू वर्ष के दौरान तेजा और आरमूर जैसी निर्यात वैरायटी की लालमिर्च के दाम में लगभग 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जबकि घरेलू प्रभाग में ज्यादा पसंद की जाने वाली किस्मों- नंबर 334 एवं सुपर 10 के दाम में भी लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

दूसरी ओर मसाला प्रोसेसिंग कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाने वाली लालमिर्च की किस्मों- डीडी तथा 341 नंबर की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आ गई है।

वर्षा काल में लालमिर्च पाउडर की बिक्री कुछ हद तक प्रभावित हो जाती है इसलिए साबुत माल की खरीद की गति धीमी है। अगस्त से पाउडर निर्माता लालमिर्च की खरीद में दिलचस्पी दिखा सकते हैं।