नई दिल्ली। भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में घटकर 6.5 फीसदी रहने की आशंका है जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा वित्त वर्ष 2026 के लिए अनुमानित 7.7 फीसदी से काफी कम है।
यह अनुमान 10 अर्थशास्त्रियों के एक सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मॉनसून के सामान्य से कम रहने की आशंका का आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की बात कही गई है।
सर्वेक्षण में शामिल एजेंसियों में क्वांटइको रिसर्च का नजरिया सबसे अधिक निराशावादी है और उसने 6.2 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान जाहिर किया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को अर्थव्यवस्था के 6.8 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है।
फरवरी के आखिर में शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष का वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उत्पादन पर सीमित प्रभाव पड़ा था और वृद्धि दर 7.8 फीसदी पर अनुमान से बेहतर रही। मगर अर्थशात्रियों ने आगाह किया है कि इस उथल-पुथल का पूरा असर दिखना अभी बाकी है।
केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, ‘आगामी तिमाहियों में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल में उबाल और मूल्य दबाव के दूसरे दौर के पूर्ण प्रभाव दिखने की उम्मीद है।’ केयरएज रेटिंग्स का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि 6.7 फीसदी रहेगी बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार रहे। मगर उसने आगाह किया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहीं तो जीडीपी वृद्धि गिरकर 6.5 फीसदी तक जा सकती है।
इक्रा ने कच्चे तेल की कीमत औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए अनुमान जाहिर किया है कि वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि दर 6.5 फीसदी के दायरे में रहेगी। उसका कहना है कि ईंधन की ऊंची कीमतें कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव डालेंगी।
इससे निवेश की धारणा कमजोर होगी और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति घट जाएगी। उसने एक शोध पत्र में कहा है, ‘इसके अलावा अल नीनो की आशंका और 2026 के लिए कमजोर मॉनसून के पूर्वानुमान से कृषि परिदृश्य कमजोर हुआ है।
साथ ही इसने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही के लिए ग्रामीण मांग की संभावनाओं को भी धूमिल कर दिया है।’ गौरतलब है कि इक्रा का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 12 फीसदी से अधिक हो जाएगी जो वित्त वर्ष 2026 में 8.9 फीसदी थी। इसकी मुख्य वजह थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी से हुई बढ़ोतरी होगी।
डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, ‘बाजार संभवतः पिछली अवधि के आंकड़ों से आगे बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में संभावित स्पिलओवर जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।’ डीबीएस बैंक ने भी वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान जाहिर किया है। राव ने कहा कि अगर मुद्रास्फीति का रुझान उनकी तिमाही अनुमानों के अनुरूप रही तो नीति निर्माता ब्याज दरों में वृद्धि कर सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 5 जून को समाप्त हुई अपनी समीक्षा बैठक में वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को गिरावट के जोखिम के साथ 6.6 फीसदी रखा। मगर उसने मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने शुक्रवार को जारी जीडीपी अनुमानों के बाद अपने पूर्वानुमान को 6.5–6.8 फीसदी से घटाकर 6.4–6.6 फीसदी कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘यह पूर्वानुमान आरबीआई के अनुमानों पर भी आधारित है। साथ ही हमने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा है कि कृषि उपज प्रभावित होगी।’
सबनवीस ने आर्थिक वृद्धि की राह में तीन बाधाओं का उल्लेख किया: कृषि उपज में कमी, सरकार के व्यय में संभावित कमी और बैंक ऋण वृद्धि में नरमी की आशंका। उनका कहना है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मॉनसून सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान है जिससे कृषि वृद्धि के अनुमान को 2.5-3 फीसदी से घटाकर 2-2.5 फीसदी कर दिया गया है।
आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और युद्ध संबंधी अनिश्चितता के कारण निवेश और खपत दोनों के प्रभावित होने से बैंकों के ऋण वितरण में नरमी आएगी। सबनवीस ने जोर देकर कहा, ‘कृषि अभी भी प्रमुख कारक बनी हुई है।’

