Friday, May 8, 2026
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जीएसटी की जगह फीस कम क्यों नहीं करते कोचिंग संचालक

पेरेंट्स का  कहना है कि  “फ़ीस कम होगी तो नहीं पड़ेगा छात्रों पर भार “

कोटा। कोचिंग पर जीएसटी की दर 18 फीसदी होते ही संचालकों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया। यह तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे पेरेंट्स की जेब से नहीं उनकी जेब से जा रहा हो। कुछ प्रिंट मीडिया भी उनके पक्ष में बयान लेकर छाप रहे हैं। अगर छात्रों और पेरेंट्स के इतने ही हितेषी हैं तो अपनी फीस साल दर साल क्यों बढ़ा रहे हैं। जीएसटी की जगह फीस कम क्यों नहीं करते कोचिंग संचालक पेरेंटस पर तो वैसे ही भार कम हो जायेगा । 

शहर के कोचिंग से लेकर हॉस्टल तक सब मनमाने तरीके से छात्रों के अभिभावकों को से पैसा ऐंठ रहे हैं ।इतना ही नहीं अब तो कोचिंग संचालकों ने भी अपने खुद के हॉस्टल शुरू कर दिए हैं। जो लीज पर चल रहे हैं । प्रॉपर्टी डीलर्स से मिलकर पहले अपने फायदे का सौदा करते हैं , फिर वहां कोचिंग शुरू कर देते हैं । जिस एरिया में यह संस्थान अपने पैर पसारते वहां जमीनों के दाम आसमान छूने लगते हैं। कुछ कोचिंग संचालक तो रियल एस्टेट के मालिक तक हैं।

लंबे समय से हो रही है छूट की मांग 

कोटा के कोचिंग संचालक लंबे समय से सरकार से मांग कर रहे हैं कि कोचिंग काे भी सामान्य शिक्षा की तरह मानकर कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। सर्विस टैक्स में कटौती की मांग भी इसमें शामिल है। कोटा में 1.25 लाख स्टूडेंट्स मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग करते हैं। अब तक सालाना 187 करोड़ रुपए की राशि सरकार के अकाउंट में जाती थी, जो जीएसटी के बाद बढ़कर सालाना 225 करोड़ रुपए के करीब पहुंच जाएगी। जीएसटी का असर मात्र इंजीनियरिंग और मेडिकल पर ही नहीं, सीए, सीएस अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां करवाने वाले इंस्टीट्यूट पर भी पड़ेगा। 

कोचिंग संचालकों का कहना है कि कोचिंग इंडस्ट्री को एजुकेशन सेक्टर नहीं मानने वाली सरकारें ही बच्चों पर बोझ बढ़ाती जा रही हैं। काउंसिल की ओर से जारी नई दरों के बाद अब कोचिंग छात्रों को 15 प्रतिशत सर्विस टैक्स की जगह 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। कोटा में औसतन कोचिंग फीस एक लाख रुपए है।

अब तक जो छात्र एक लाख की फीस पर 15 हजार रुपए बतौर सर्विस टैक्स दे रहा था, अब उसको 18 हजार रुपए देना होगा। दो साल की कोचिंग पर छह और तीन साल की कोचिंग पर नौ हजार रुपए अतिरिक्त टैक्स देना होगा। जीएसटी लागू होने के बाद छात्र पर औसतन तीन हजार रुपए का अतिरिक्त भार जाएगा। पेरेंट्स का  कहना है कि जितना असर टैक्स बढ़ने से पड़ने वाला है , उतनी ही फीस कोचिंग संचालक कम कर दें। 

कोचिंग को ही इंडस्ट्री का नाम
शहर में कोचिंग संचालक दी एएसआई एसोसिएशन के मेंबर बन गए। फिर अधिकारयों से सांठगांठ कर इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया की उद्योगों की सस्ती भूमि खरीद ली।  उद्योगों की जगह खड़ीं हो गई विशालकाय इमारतें। इस तरह औद्यौगिक नगरी बन गई कोचिंग नगरी। अब वह कोचिंग को इंडस्ट्री का नाम देने लगे। 

नोट -यदि अभिभावक एवं छात्र हमारी बात से सहमत हैं तो आप कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दीजिये। आप अपना नाम गोपनीय रखना चाहें या कोचिंग के संबंध में कोई शिकायत हो तो दस्तावेज के साथ हमें मेल कीजिये।

Mail id- [email protected] or [email protected]

 

GST के बाद घूमना व होटल में खाना पड़ेगा महंगा

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नई दिल्ली। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो फिर 1 जुलाई के बाद ऐसा करना काफी महंगा शौक हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके घूमने फिरने में शामिल ट्रेन, बस और एयर टिकट से लेकर के होटल में रुकना, खाना आदि महंगा हो जाएगा। हम आपको विस्तार से बता रहे हैं कि कैसे गुड्स एंड सर्विस टैक्स के लागू होने के बाद इन चीजों पर टैक्स की कितनी मार पड़ेगी। 

रेल टिकट
अभी रेल टिकट ऑनलाइन बुक कराने पर 15 फीसदी सर्विस चार्ज देना होना है। जीएसटी के लागू हो जाने के बाद यह 18 फीसदी हो जाएगा। इसके अलावा बैंक भी टिकट बुक कराने पर ट्रांजेक्शन चार्ज लगाता है, जिसकी दर भी जीएसटी के लागू हो जाने के बाद महंगी हो जाएगी। अभी यह 1 से 2 फीसदी है, जिसके 3 फीसदी तक हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा रेलवे ने भी सरकार से ई-टिकट पर सर्विस चार्ज बढ़ाने के लिए कहा है। 

इन पर लगेगा यह टैक्स

एसी बस
अगर आप एसी या फिर वॉल्वो बस से सफर करते हैं और उसके लिए ऑनलाइन टिकट बुक कराते हैं, तो फिर सर्विस टैक्स देना होगा। इसमें भी सर्विस टैक्स रेलवे के समान है।

हवाई टिकट 
हवाई टिकट से यात्रा करने पर आपको टिकट तो सस्ता मिल जाएगा, क्योंकि लो कॉस्ट एयरलाइंस कंपनियों ने अपने किराये में काफी कमी करने की घोषणा की है। लेकिन एयरपोर्ट पर लगने वाले टैक्स की दर में इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे एयर ट्रेवल करना भी महंगा हो जाएगा। 

जीएसटी की नई दरें देख घबराई मार्बल इंडस्ट्रीज

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जयपुर। जीएसटी से पूरी मार्बल इंडस्ट्री डरी हुई है। सारे कर मिलाकर मौजूदा टैक्स 5 फीसदी है जबकि जीएसटी के तहत अब इसे 28 फीसदी स्लैब में रखा गया है। इंडस्ट्री का कहना है कि इससे पूरी इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी और लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

जीएसटी दरों का एलान होते ही मार्बल इंडस्ट्री की चमक फीकी हो गई। इंडस्ट्री का कहना है कि टैक्स में सीधे 23 फीसदी का इजाफा कमर तोड़ देगा। राजस्थान मार्बल कारोबार का गढ़ है।टाइल्स के बढ़ते चलन से मार्बल उद्योग पहले चरमरा रहा है। 

राज्य के 24 जिलों में खनन होता है। मार्बल कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी की ऊंची दरों के कारण यहां की 20,000 इकाइयों पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है। कारोबारियों की मांग है कि मार्बल पर मौजूदा दर के आसपास ही जीएसटी दर रखी जाए।

अगले सप्ताह से पूरे देश में रोज बदलेंगे पेट्रोल- डीजल के दाम

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16 जून से देशभर में रोजाना पेट्रोल -डीजल की कीमतों की होगी समीक्षा 

नई दिल्ली । भारत की तेल विपणन कंपनियां अब देशभर में रोजाना पेट्रोल की कीमतों की समीक्षा करेंगी। यह नई व्यवस्था 16 जून, 2017 से प्रभावी होगी। यह जानकारी पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। देशभर में एक मई से पुडुचेरी, विशाखापट्नम, उदयपुर, जमशेदपुर और चंडीगढ़ में पेट्रोल-डीजल के लिए शुरू की गई दैनिक समीक्षा के पायलट प्रोजेक्ट में सफलता मिलने के बाद यह फैसला लिया गया है।

भारत पैट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉर्प (आईओसी) और हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड (एचपीसीएल) की यह मांग थी कि रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमतें तय की जाएं। आपको बता दें कि इन तीनों तेल कंपनियों के देश में कुल पेट्रोल पंप में से 95 फीसद की हिस्सेदारी रखते हैं। देश में कुल 58000 पेट्रोल पंप हैं।

तीन ऑयल कपनियां करती हैं कीमतों की समीक्षा
मौजूदा समय में देश की तीन ऑयल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम तथा हिंदुस्तान कॉरपोरेशन हर 15 दिन में तेल कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसके आधार पर पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमत तय की जाती है।

तेल कंपनियों की ओर से पांच राज्यों में यह पायलट प्रोजेक्ट इसलिए शुरू किया गया था ताकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव में खुद को ढाला जा सके। इन तीन कंपनियों की फ्यूल रिटेल मार्केट में कुल मिलाकर 90 फीसद से ज्यादा की हिस्सेदारी है।

इस तरह यह कंपनियां व्यावहारिक रूप से ईंधन मूल्य निर्धारण में मानदंड स्थापित करती हैं। माना जा रहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और एस्सार ऑयल भी इन्हीं का अनुसरण कर सकती हैं। दुनिया के कई विकसित देशों में तेल कंपनियां रोजाना कीमतों की समीक्षा करती हैं।

डायनेमिक फ्यूल प्राइसिंग :इसे डायनेमिक फ्यूल प्राइसिंग कहा जाता है। रोजाना पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करती हैं। इस फैसले से तेल कंपनियां रिटेल प्राइस को कच्चे तेल की कीमतों के आसपास रख सकेंगी। साथ ही इससे घाटा कम करने में भी मदद मिलेगी।

उच्च प्रौद्योगिकी सुरक्षा निगरानी केंद्र स्थापित करेगा जीएसटीएन

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नयी दिल्ली। जीएसटी के लिये सूचना प्रौद्योगिकी सुविधा उपलब्ध कराने वाली जीएसटी नेटवर्क हाई-टेक सुरक्षा निगरानी और विश्लेषण केंद्र स्थापित करेगा। यह केंद्र साइबर खतरा के बारे में पूर्व चेतावनी देगा और हर महीने 300 करोड़ इनवायस का रखरखाव करने वाली आईटी प्रणाली के लिए खतरे की पूर्व चेतावनी देगा और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

जीएसटीएन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रकाश कुमार ने कहा कि जीएसटीएन ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत आंकड़ों की सुरक्षा का आश्वासन देने के बाद अब वह अपने साफ्टवेयर सुरक्षा के लिये अतिरिक्त कदम उठाया है। इस सुरक्षा का आडिट सरकार की आईटी प्रमाणन इकाई एसटीक्यूसी ने किया है।

उन्होंने कहा कि अगले महीने से जीएसटी के क्रियान्वयन के साथ जीएसटीएन ने रैंसमवायर के हमले की आशंका को गंभीरता से लिया है और साइबर सुरक्षा इकाई स्थापित करने का निर्णय किया है। हालांकि जीएसटीएन को अबतक गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी नहीं मिली है। इंफोसिस द्वारा तैयार किया जा रहा सिक्योरिटी आपरेशन सेंटर (एसओसी)  के अलावा मौजूदा सुरक्षा पर नजर रखने का काम कर रहा है।

जीएसटीएन एक गैर-सरकारी निजी लिमिटेड कंपनी है। इसका गठन 28 मार्च 2013 को हुआ। भारत सरकार की इसमें 24.5 प्रतिशत तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली समेत सभी राज्यों तथा राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की 24.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है।शेष 51 प्रतिशत हिस्सेदारी गैर-सरकारी वित्तीय संस्थान एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक की है।

आईसीआईसीआई बैंक ने बूंदी में 4 लाख के सिक्के और नए नोट बदले

आईसीआईसीआई बैंक के 3 कॉइन एक्सचेंज मेले में करीब 150 लोगों ने शिरकत की

बूंदी। आईसीआईसीआई बैंक ने शहर में स्थित बैंक की तीन शाखाओं में गुरुवार को कॉइन एक्सचेंज मेलों का आयोजन किया। इन कॉइन एक्सचेंज मेलों में करीब 150 लोगो ने भाग लिया, जहां उन्होंने 4 लाख रुपए मूल्य के सिक्के एवं नोट बदलवाए।

इनमें से दो कॉइन एक्सचेंज मेले बूंदी रोड स्थित चौगान गेट और धानमंडी शाखाओं में तथा एक कॉइन एक्सचेंज मेला नजदीक स्थित गुढ़ा नाथावत शाखा में आयोजित किया गया। बैंक अधिकारियों के मुताबिक कॉइन एक्सचेंज मेलों में ग्राहकों ने 10 रु., 5रु., 2रु. और 1रु. के सिक्के तथा 10रु., 20रु. और 50 रुपए के नोट बदलवाए।

बैंक के बारे में 

आईसीआईसीआई बैंक समय-समय पर इस प्रकार के मेलों का आयोजन करता है जिसमें आम जनता को पुराने नोट एवं सिक्के निःशुल्क में बदलने की सुविधा दी जाती है। इन मेलों में कोई भी व्यक्ति इस सुविधा का निःशुल्क लाभ उठा सकता है। आईसीआईसीआई बैंक की पूरे देश में 4,850 शाखाएं और 13,882 एटीएम्स 31 मार्च, 2017 तक थे। बैंक का राजस्थान में 400 से अधिक शाखाओं के साथ निजी बैंकों में सबसे बड़ा शाखा नेटवर्क है।

10th की परीक्षा में छात्रों ने बाजी मारी, RBSE का परिणाम घोषित

अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का सेकंडरी परीक्षा (दसवीं)-2017 का परिणाम गुरुवार को घोषित हो गया। कुल परिणाम 78.96 इस साल छात्रों ने ने बाजी मारी है।  

बोर्ड के राजीव गांधी सभागार में शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री वासुदेव देवनानी ने शाम 4 बजे परिणाम जारी किया। इस अवसर पर बोर्ड अध्यक्ष प्रो. बी. एल. चौधरी, सचिव मेघना चौधरी, निदेशक जी. के. माथुर, वित्त नियंत्रक आशुतोष आनंद और अन्य उपस्थित रहे।

परिणाम                              प्रतिशत 
कुल परिणाम                         78.96 
छात्रों का परिणाम                 79.01
छात्राओं का परिणाम            78.01
सरकारी स्कूलों का परिणाम 76.69
निजी स्कूलों का परिणाम     82.49 

दसवीं की परीक्षा में पंजीकृत विद्यार्थी : 10 लाख 98 हजार 921
छात्रों की संख्या:  6 लाख 30 हजार 342
छात्राओं की संख्या: 4 लाख 68 हजार 579

नहीं जारी हुई मेरिट लिस्ट
बारहवीं कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय की तरह दसवीं में भी बोर्ड कोई राज्य अथवा जिला स्तरीय मेरिट लिस्ट जारी नहीं हुई। सत्र 2015-16 में एक ही स्कूल के आठ से ज्यादा विद्यार्थियों के मेरिट लिस्ट में शामिल होने का मुद्दा जबरदस्त गर्माया था। राज्य सरकार ने तत्काल बोर्ड की मेरिट लिस्ट पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराई थी। विवादों को देखते हुए बोर्ड ने इस साल से बारहवीं और दसवीें कक्षा में मेरिट लिस्ट जारी नहीं करने का फैसला किया है।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड १०वीं के परीक्षा परिणाम यहां देखें

24 कैरट गहनों के निर्यात पर पाबंदी, राउंड-ट्रिपिंग पर लगाम की तैयारी

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  •  राउंड ट्रिपिंग के लिए 125 टन आयातित सोने के इस्तेमाल का अनुमान, जिस पर प्रतिबंध से लग जाएगी लगाम
  •  निर्यात में बढ़े हुए आंकड़े को लेकर रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने भी जताई है चिंता

मुंबई ।  सोने की राउंड-ट्रिपिंग पर लगाम कसने और बैंकों की रकम का निर्यात के लिए दुरुपयोग रोकने के इरादे से सरकार 24 कैरट आभूषणों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रही है। जब सोने को एक निश्चित कीमत पर किसी को बेचा जाता है और बाद में उससे उसी कीमत पर उसे वापस खरीद लिया जाता है तो इसे राउंड ट्रिपिंग कहते हैं।

हालांकि भारत में 24 कैरट के आभूषण नहीं बनते, इतने शुद्घ सोने का इस्तेमाल सिक्कों और छड़ों में ही किया जाता है। दुनिया भर में चीन के अलावा कहीं और 24 कैरट के आभूषण नहीं चलते। कुछ खास निर्यात कंपनियां ही इनका निर्यात करती हैं और इनमें रिफाइनिंग तथा गढ़ाई के अलावा कोई भी मूल्यवर्धन नहीं किया जाता है। 

इस तरह से तैयार किए गए गहनों को खाड़ी देशों में भेजा जाता है और वहां से सोने की शक्ल में वापस आयात कर लिया जाता है। ऐसी हरकत करने वाली कंपनियां मुट्ठी भर ही हैं। वे अपने निर्यात के आंकड़े बढ़ाने के लिए ऐसा करती हैं और निर्यात के लिए मिलने वाले सस्ते कर्ज का इस्तेमाल कर लेती हैं। इससे उनके दो मकसद पूरे हो जाते हैं।

अधिक निर्यात दिखाने से उनका निर्यातक का दर्जा बरकरार रहता है और निर्यात के लिए मिलने वाले सस्ते कर्ज का वे कहीं भी इस्तेमाल कर लेती हैं। किसी समय देश में सालाना 100 टन सोने की राउंड ट्रिपिंग का अनुमान लगाया जाता था। लेकिन वित्त मंत्रालय का ध्यान अब इस पर है और वह सख्ती बरत रहा है क्योंकि कंपनियां निर्यात के लिए मिले सस्ते कर्ज का इस्तेमाल दूसरे कामों में ही करती हैं।

जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स द्वारा सोने को लेकर कराए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘वर्ष 2016 में शुल्क मुक्त सोने का आयात 15 प्रतिशत तक घटकर 167.3 टन रह गया, जबकि 2015 में यह 196.2 टन पर था। हमारे खयाल से 2016 में इसमें से 125 टन का इस्तेमाल राउंड ट्रिपिंग के लिए हुआ था।’ उद्योग की एक कंपनी ने कहा, ‘राउंड ट्रिपिंग में ज्यादातर 24 कैरट गहने आदि इस्तेमाल हुए क्योंकि उन्हें पिघलाना और गढ़ना आसान है।’ 

उद्योग सूत्रों का कहना है, ‘ऐसे सोने में मूल्यवर्धन बहुत कम होता है और उसकी खपत करने वाले देश भारत से आयात ही नहीं करते।’ उन्होंने कहा कि सरकार अगर प्रतिबंध लगाने का फैसला करती है तो असली निर्यातकों को किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी। परिषद ने इसे लेकर चिंता जताई है कि निर्यात का आंकड़ा अनावश्यक रूप से बढ़ाकर दिखाया गया है

पहली बार दु‌न‌िया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शामिल दिल्ली और मुंबई IIT

नई द‌िल्ली। पहली बार आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मुंबई का नाम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दो सौ उच्च शिक्षण संस्थानों की सूची में शामिल हो गया है। लंदन में बृहस्पतिवार सुबह पांच बजे जारी होने वाली क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के 20 उच्च शिक्षण संस्थानों ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में अपनी जगह बनायी है।

जबकि आईआईएससी बंगलूरू भी टॉप दो सौ में शामिल हैं। खास बात यह है कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2018 में आईआईटी दिल्ली ने आईआईएससी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलूरू) को पछाड़ा है। जबकि आईआईटी कानपुर की रैंकिंग में सुधार तो आईआईटी रुड़की की रैंकिंग में गिरावट है।

क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, 2018 की रैंकिंग तैयार करने में 75015 अकेडमिक और 40,455 कर्मियों ने अपना योगदान दिया है। रैंकिंग को बनाने के दौरान 12.3 मिलियन पेपर और 75.1 मिलियन साइटेशन का विश्लेषण किया गया है। क्यूएस वल्र्ड यूनिवर्स‌िटी रैंकिंग 2018 में एमआईटी पहले, स्टेंनफोर्ड यूनिवर्सिटी दूसरे और हावर्ड यूनिवर्सिटी तीसरे स्थान पर है।

जबकि कैलिर्फोनिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पांचवें से चौथे स्थान पर पहुंच गयी है। वहीं, कैब्रिज यूनिवर्सिटी चौथे से पांचवें स्थान पर पहुंच गयी है। आईआईटी दिल्ली को 172, आईआईटी मुंबई को 179 व आईआईएससी को 190 रैंक हासिल हुआ है।

शिक्षण संस्थान             वर्ष 2017(रैंक)               वर्ष 2018 (रैंक)
आईआईटी मद्रास               249                             264     
आईआईटी कानपुर            302                             293          
आईआईटी खड्गपुर          313                              308      
आईआईटी रुड़की             399                             431-440      
दिल्ली यूनिवर्सिटी               501-550                     481-490      
आईआईटी गुवहाटी           481-490                     501-550      
जादवपुर यूनिवर्सिटी           कोई रैंक नहीं था          601-650      
हैदराबाद यूनिवर्सिटी           कोई रैंक नहीं था         601-650      
अन्ना यूनिवर्सिटी               कोई रैंक नहीं था            651-700      
मनिपाल यूनिवर्सिटी            कोई रैंक नहीं था         701-750      
कोलकात्ता यूनिवर्सिटी        651-700                   751-800

पहली बार एएमयू टॉप 800 प्लस में शामिल तो बीएचयू  व पंजाब यूनि. की रैकिंग में गिरावट

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए खुशी की खबर है कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में जगह मिल गयी है। एएमयू को 801-1000 श्रेणी के बीच स्थान मिला है। जबकि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की रैंकिंग में गिरावट दर्ज है, पहले 701 प्लस की श्रेणी में था, जोकि अब 800 से 1000 के बीच पहुंच गया है। इसी प्रकार पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का नाम 701 प्लस की श्रेणी से खिसकर 800 से 1000 की श्रेणी में पहुंच गया है।

तीन साल के दौरान FDI में रेकॉर्ड उछाल: मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एफडीआई, जीएसटी और इकनॉमिक ग्रोथ को अपने तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियां बताई हैं। उन्होंने प्रफेशनल्स की सोशल मीडिया वेबसाइट लिंक्डइन पर एक आलेख में तीन साल के दौरान उनकी सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर रोशनी डाली है।

उन्होंने कहा कि 2013 से एफडीआई में बड़ी उछाल आई है। 2013 में एफडीआई 34,487 बिलियन डॉलर यानी करीब 22 लाख अरब रुपये थी जो रेकॉर्ड उछाल के साथ अब 61,724 बिलियन डॉलर यानी करीब 40 लाख अरब रुपये है।

उन्होंने कहा कि भारत को अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में चमकता सितारा के रूप में देखा जा रहा है। भारत में व्यापार करने को आसान बनाया गया है। टैक्स व्यवस्था को काफी स्थिर और सुचारू बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी से भी बड़ा फायदा होने जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘जब हमने मई 2014 में कार्यभार संभाला था, उस समय देश कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। सरकार और सरकारी संस्थानों में से लोगों का विश्वास खत्म हो चुका था। भारत में निवेश करने की कोई संभावना नहीं दिख रही थी। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अथॉरिटीज की मनमानी चरम पर थी।’

उन्होंने कहा, ‘हमारी पहली प्राथमिकता इस माहौल को बदलना थी, जिसे हमने पिछले तीन सालों में अंजाम दिया है।’ उन्होंने कहा कि सरकार के सकारात्मक रिजल्ट्स दृष्टिगोचर हैं। पीएम मोदी ने अंत में लिखा है, ‘हमारा लक्ष्य नया भारत है जिसकी शक्ति हमारे युवाओं का कौशल और प्रतिभा होगी।