Sunday, May 10, 2026
Home Blog Page 5723

जीडीपी का आधार वर्ष बदलने की तैयारी में सरकार

0

नई दिल्ली।केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय जीडीपी के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2017-18 करने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण और श्रमबल के आंकड़ो की गणना पूरी हो जाने के बाद 2018 के अंत तक यह काम कर लिया जाएगा।

केंद्रीय सांख्यिकी मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ‘मेरे मंत्रालय ने राष्ट्रीय लेखे-जोखे के आंकड़ों के लिए आधार वर्ष बदलकर 2017-18 करने की योजना बनाई है। इस काम के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।’गौड़ा मोदी सरकार के 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर अपने मंत्रालय की उपलब्धियों के बारे में बता रहे थे।

आधार वर्ष बदलने के मुद्दे पर मुख्य सांख्यिकीविद टी.सी.ए. अनंत ने कहा, ‘ रोजगार सर्वेक्षण और पारिवारिक उपभोग खर्च के आंकडे़ प्राप्त हो जाने के बाद आधार वर्ष को बदलने का काम किया जा सकता है। आधार वर्ष बदलने के मामले में ये आंकडे़ बहुत जरूरी इनपुट हैं।’इसके अलावा अनंत ने चालू तिमाही अप्रैल-जून के दौरान अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद जताई है।

उन्होंने कहा कि मॉनसून की बेहतर स्थिति और नीतिगत उपायों के चलते अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। अनंत ने कहा कि नए श्रमबल सर्वेक्षण और घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आंकडे़ 2018 में उपलब्ध हो जाएंगे।

रिजर्व बैंक ने 500 बड़े बकायेदारों की लिस्ट बनाई

मुंबई। बैंकों के फंसे हुए कर्ज को वसूलने और डिफॉल्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने की दिशा में रिजर्व बैंक ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। आरबीआई ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि उसकी आंतरिक सलाहकार समिति ने सबसे ज्यादा एनपीए वाले 500 खातों की पहचान की है, जिनके खिलाफ इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की जाएगी।

यही नहीं इस मीटिंग के दौरान एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी सामने आया कि 12 खाताधारकों के पास ही कुल एनपीए का 25 पर्सेंट हिस्सा बकाया है। यानी 12 खाताधारकों ने ही कुल कर्ज का एकचौथाई हिस्सा दबा रखा है।आरबीआई की समिति ने इन लोगों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से दिवालियेपन से निपटने के लिए बने कानून के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की।

आरबीआई ने कहा कि बैंकों को अन्य डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए छह महीने के भीतर प्लान तैयार करने को कहा गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि समिति की सिफारिशों के आधार पर डिफॉल्टर के तौर पर पहचाने गए खाताधारकों के खिलाफ इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत कार्रवाई के लिए कहा जाएगा।

इन केसों को नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में प्राथमिकता के साथ चलाया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसे डिफॉल्टर्स के खिलाफ कार्रवाई का पूरा फ्रेमवर्क जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि सोमवार को ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि रिजर्व बैंक बड़े डिफॉल्टरों की सूची तैयार करने में जुटा है और उनके खिलाफ इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हेजर्स एनसीडीईएक्स पर डीगम सोया तेल के वायदे से उत्साहित

0

मुंबई।  कमोडिटी एण्ड डेरीवेटिवज एक्सचेंज,दी नेशनल कमोडिटी एण्ड डेरीवेटिवज एक्सचेंज (NCDEX)को, डीगम सोया तेल के वायदे के आरम्भ के पहले दो दिनों में मूल्य श्रृंखला सहभागियों से ओपन इंटरेस्ट में स्वस्थ बिल्ड-अप के साथ उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है ..इस संविदा ने कुल विक्रय की गई 1810 मे.टन मात्रा के साथ रु. 10.68 करोड़ का वॉल्यूम दर्ज किया है.इस संविदा में 860 मे.टन का ओपन इंटरेस्ट था.

 एनसीडीईएक्स के प्रबंध निदेशक तथा सीईओ समीर शाह,ने कहा,“इस शुरुआती प्रतिक्रया से हम प्रोत्साहित हुए है और खाद्य तेल की मूल्य शृंखला से अधिकतम सहभागिता की आशा करते है. एक मजबूत, व्यापक आधार पर उत्पाद उपलब्ध कराने का हमारा निरंतर प्रयास रहा है, जो कृषि व्यवसायों को आर्थिक मूल्य जोड़ता है.

उत्पाद समूहों में डीगम सोया तेल की संविदा को जोड़ने का उद्देश्य खाद्य तेल के बाजार को एक संपूर्ण और मजबूत जोखिम प्रबंधन प्रस्तुत करना है. ऐसे 80% खाद्य तेलों को कच्चे रूप में आयात किया जा रहा है, जिनमें डीगम सोया तेल(आधार केंद्र –कांडला पोर्ट )की वायदा संविदा होती है,जो आयातित सोया तेल के लिए एक घरेलू संदर्भ प्रदान करेगा.भारत विश्व में सोया तेल का सबसे बड़ा आयातक है.

सोया तेल का आयात पिछले पांच वर्षों से चार गुना बढ़कर वर्ष 2015 -16 में 42 लाख टन हो गया है.अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल की कीमतों में उच्च अस्थिरता को देखते हुए, घरेलू आयातक, रिफाइनर और व्यापारी इस जोखिम से प्रभावित हुए है.डीगम सोया तेल वायदे की शुरुआत यह सुनिश्चित करती है कि सोया व्यापार में अधिकतम हेजिंग का पूरा समाधान होता है.

डीगम सोया तेल यह एक इरादा मिलान संविदा है जिसमें प्रति लाख व्यापार पर रु. 0.10 का व्यवहार प्रभार होता है और कोई जोखिम प्रबंधन शुल्क नही होता है. डीगम सोया तेल (प्रतिक : SYODEGUM,आधार : कांडला )की जुलाई,अगस्त, सितम्बर,अक्टूबर,नवम्बर,दिसम्बर 2017 और जनवरी 2018 के माह में समाप्त होनेवाली संविदा विक्रय के लिए उपलब्ध है.संविदा की विशेषताएं www.ncdex.com पर उपलब्ध है.

 

अब सभी बोर्ड्स का होगा एक पाठ्यक्रम, परीक्षा के नियम भी होंगे समान

नई दिल्ली। केंद्रीय मानव विकास संसाधन (HRD) मंत्रालय अब अलग अलग बोर्डों के अलग-अलग पाठ्यक्रम और मार्किंग नीति को खत्म कर सभी बोर्डों के लिए एक नीति की व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। यह नीति 2018 से सभी बोर्डों के लिए लागू हो जाएगी।

हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस साल सीबीएसई की प्राथमिक शिक्षा को नई नीति से छूट दी है, क्योंकि सीबीएसई बोर्ड की टाइमिंग बाकी बोर्ड से अलग है। एचआरडी मिनिस्ट्री ने एक अतंर-बोर्ड कार्यकारी समूह (IBWG) का गठन किया है। यह समूह आठ बोर्डों की तुलना कर अलग-अलग पाठयक्रम और मार्किंग व्यवस्‍था को खत्म कर एक कॉमन नीति को लागू करने के लिए काम करेगा।

यह ग्रुप बोर्ड की ओर से परीक्षा में दिए जाने वाले ग्रेड अंक, सख्त मार्किंग के नियमों की समीक्षा कर सबके लिए एक नीति तय करेगा।, यह ग्रुप (IBWG) सभी बोर्डों के लिए एक पाठ्यक्रम तैयार करने और नई नीति को लागू कराने के लिए लगातार काम करेगा।अगले साल से देश के सभी प्रमुख बोर्ड को एक पाठ्यक्रम की नीति का पालन करना होगा।

नए नियम की प्रमुख बातें-

IBWG ग्रुप – यह ग्रुप गुजरात, तेलंगाना, केरल, छत्तीसगढ़, मणिपुर, जम्मू और कश्मीर, सीबीएसई और सीआईएससीई के पाठ्यक्रम के तुलना कर नया पाठ्यक्रम तैयार करेगा।

ग्रेस मार्क:

  • पास परसेंटेज बढ़ाने के लिए ग्रेस मार्क देने की व्यवस्‍था जारी रहेगी।
  • नए नियम के अनुसार, ग्रेस मार्क देने की नीति का ब्यौरा बोर्ड की वेबसाइट पर दिया जाएगा, साथ ही ग्रेस मार्क पाने वाले छात्र की मार्कशीट में भी इसकी जानकारी दी जाएगी।
  • अतिरिक्त पाठ्यक्रम के लिए दिए जाने वाले ग्रेड और नंबर भी मार्कशीट पर लिखे होंगे।
  • सभी प्रमुख विषयों का पाठ्यक्रम सभी बोर्ड के लिए एक जैसा होगा और यह सभी बोर्डों के लिए लागू होगा।
  • राज्य के बोर्ड सीबीएसई बोर्ड के साथ अपने प्रश्नपत्र शेयर भी कर सकते हैं यानी सभी राज्यों के बोर्ड के प्रश्नपत्र करीब करीब समान होंगे।

जीएसटी के लिए बैंकों को कराना होगा हर राज्य में अलग-अलग पंजीकरण

0

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नई व्यवस्था के तहत बैंकों को हर राज्य में अलग-अलग पंजीकरण कराने की आवश्यकता होगी। इससे वे एक जुलाई से नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के लिए तैयार हो सकेंगे। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने सोमवार को यह जानकारी दी।बैंक अभी की तरह एक केंद्रीकृत पंजीकरण प्रणाली की मांग करते रहे हैं।

उन्हें लगता है कि कई पंजीकरण के कारण प्रक्रियागत और अनुपालन संबंधी समस्याएं सामने आएंगी।अढिया ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों के साथ बैठक के बाद बताया कि जीएसटी के अंतर्गत बैंकों को हर राज्य में अलग-अलग पंजीकरण कराना ही होगा। उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है। जीएसटी के तहत यही कानून है।

इसमें आने वाली परेशानियों को कम करने की कोशिश की जाएगी।अढिया बोले कि बैंकों को जीएसटी के लिए तैयार रहना होगा। वे ऐसा नहीं कह सकते कि तैयार नहीं हैं। बैठक में बैंकों के फंसे कर्जों और जीएसटी की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। उनकी चिंताओं को दूर किया गया है। बैंकों की अन्य समस्याओं का भी समाधान खोजा जाएगा। जानकारी का अभाव अभी एक मुख्य समस्या है। बैंक जीएसटी के सभी कानूनों से अवगत नहीं हैं।

जीएसटी की दर कम कराने के लिए मार्बल, वाहन कलपुर्जा कारोबारी लामबंद

0
  • जीएसटी दर में कमी के लिए राज्यों के वित्त मंत्रियों से दबाव डलवाएंगे कारोबारी
  • मार्बल कारोबारी दबाव बनाने के लिए राष्ट्र्रीय स्तर पर कर सकते हैं बाजार बंद

नई दिल्ली। मार्बल व वाहन के कलपुर्जे बनाने वाले कारोबारी इन उत्पादों पर जीएसटी की दर कम करवाने के लिए जीएसटी परिषद की अगली बैठक से पहले राष्ट्रीय स्तर पर लामबंद हो रहे हैं। ये कारोबारी अब राज्यों के वित्त मंत्रियों पर जीएसटी दर कम करवाने के लिए दबाव डालेंगे। दरअसल जीएसटी परिषद ने रविवार को 66 वस्तुओं पर जीएसटी दर घटा दी, लेकिन मार्बल व ऑटो पाट्र्स पर जीएसटी 28 फीसदी से कम करने की कारोबारियों की मांग फिलहाल नहीं मानी।

दिल्ली मार्बल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप भारद्वाज ने कहा कि सरकार मार्बल पर वैट व केंद्रीय उत्पाद शुल्क जोड़कर जीएसटी की उच्च दर की वकालत कर रही है, जबकि छोटे कारोबारी उत्पाद शुल्क के दायरे में नहीं आते हैं और मार्बल के मुख्य केंद्र राजस्थान में 5 फीसदी वैट लगता है। मार्बल व ग्रेनाइट पर वैट की अधिकतम दर 14 फीसदी है।

भारद्वाज ने कहा जीएसटी परिषद ने रविवार को मार्बल पर जीएसटी 28 फीसदी कम करने की मांग नहीं मानी। अब कारोबारी अगली बैठक से पहले जीएसटी दर कम करवाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लामबंद हो रहे हैं। देश भर की मार्बल कारोबारी संगठनों से राज्यों के वित्त मंत्रियों पर दबाव डालने के लिए बातचीत चल रही है। 

दिल्ली के मार्बल कारोबारियों ने दिल्ली के वित्त मंत्री से आज मुलाकात भी की। कारोबारी 15 जून को राष्ट्रीय स्तर पर मार्बल बाजार बंद करने पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ऑटोमोटिव पार्टस मर्चेंट एसोसिएशन (अपमा) के सचिव उमेश सेठ ने कहा ट्रैक्टर पार्ट्स पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया।

लेकिन ऑटो पार्ट्स पर नहीं घटा, जबकि कई पार्ट्स कार व ट्रैक्टर में समान होते हैं। ऐसे में इस विसंगति से कारोबारियों को नुकसान होगा। अपमा ने देश भर के ऑटो पार्ट्स कारोबारी संगठनों को अपने राज्य के वित्त मंत्रियों पर अगली बैठक में ऑटो पार्ट्र्स पर जीएसटी दर घटवाने के लिए दबाव डालने के लिए पत्र लिखा है।

चैंबर ऑफ  ट्रेड एंड इंडस्ट्री के संयोजक बृजेश गोयल कहते हैं कि ऑटो स्पेयर पाट्र्स, मार्बल, टिंबर, इलेक्ट्रिकल पाट्र्स, हार्डवेयर एवं बाथरूम फि टिंग, ब्रांडेड अनाज/ दाल/ चावल /आटा,प्लास्टिक वेस्ट ए गोटा जरी आदि पर जीएसटी की उच्च दर न घटने से कारोबारी निराश हैं। हालांकि ट्रैक्टर पाट्र्स, स्टेनलेस स्टील कटलेरी, मेवे, अगरबत्ती, कंप्यूटर पाट्र्स, प्लास्टिक बीड्स आदि वस्तुओं की दरों में कटौती से कारोबारी खुश हैं।

500 रुपये के नए नोट जारी , इनसेट में लिखा है ‘A’

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ने 500 रुपये के नए नोट जारी किए हैं। नए बैंकनोट समय-समय पर जारी किए जा रहे महात्मा गांधी (नई) सीरीज के ही हैं। 500 रुपये के नए नोट में इनसेट में अंग्रेजी का ए (A) लिखा हुआ है। यह अक्षर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल के हस्ताक्षर वाले दोनों नंबर पैनलों पर अंकित है।

नए नोटों में इनसेट में ‘A’ के अलावा के बड़ा अंतर यह होगा कि इनमें प्रिंटिंग का वर्ष ‘2017’ नोट के पिछले हिस्से में अंकित होगा। नोट के बाकी फीचर्स 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के ऐलान के बाद जारी हुए नोटों जैसे ही हैं। नोटबंदी के बाद जारी हुए 500 के नोटों में इनसेट लेटर ई (E) था।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक प्रेस रिलीज के जरिए यह जानकारी दी है, साथ ही केंद्रीय बैंक ने यह जानकारी ट्वीट भी की है। इसमें कहा गया है, ‘इनसेट में ‘A’ लिखे 500 रुपये के बैंकनोट्स जारी।’ साफ कर दें कि नोटबंदी के बाद जारी हुए 500 के नोट वैध रहेंगे। इनसेट लेटर और छपाई का वर्ष में जो बदलाव किए गए हैं वे केवल 500 के नोट में हुए हैं, 2000 के नोट में ऐसा कोई भी बदलाव नहीं किया गया है।

पेट्रोल-डीजल: एक दिन पहले तय हो जाएंगी अगले दिन की कीमतें

0

नई दिल्ली । सरकारी तेल कंपनियां 16 जून से रोजाना पेट्रोल व डीजल की कीमतों में बदलाव करने की तैयारियों में जुटी हैं, मगर इससे पेट्रोल पंप मालिक संतुष्ट नहीं हैं। पेट्रोल पंप डीलरों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दे रखी है। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से यह व्यवस्था की गई है कि पेट्रोल पंपों को अगले दिन यानी रात 12 बजे के बाद लागू होने वाली कीमतों के बारे में शाम आठ बजे ही सूचना दे दी जाएगी।

तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने एक एप (फ्यूलएटआइओसी) को लांच करने का फैसला किया है। इससे रोजाना कीमतों में हो रहे बदलाव के बारे में जानकारी मिल सकेगी। आइओसी ने बताया है कि पेट्रोल पंप अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है कि ग्राहकों को किसी तरह से परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

पेट्रोल पंपों को समय रहते जानकारी देने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि रात 12 बजे से बदली हुई कीमतें लागू हो सकें। जहां पेट्रोल व डीजल डालने की ऑटोमेटिक व्यवस्था नहीं है, वहां एसएमएस, ईमेल, मोबाइल एप और वेब पोर्टल से जानकारी दी जाएगी।
तेल कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल पंप डीलरों की तरफ से उठाए गए सवाल पूरी तरह से आधारहीन हैं।

जिस तरह से अभी 15 दिनों के बाद पेट्रोल व डीजल की कीमतें तय होती हैं, अब उसी आधार पर रोजाना बदलाव होगा। पेट्रोल पंप डीलरों ने कहा है कि नई व्यवस्था से उन्हें इन्वेंट्री की हानि होगी। मसलन, अगर एक दिन पहले का स्टॉक बचा है, तो कीमतें घटने पर उन्हें कम दर पर बेचना पड़ेगा।

इसके साथ ही डीलरों ने 16 जून, 2017 को हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। साथ ही यह भी कहा है कि अगर उनकी बात पर गौर नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। वैसे, दोनों पक्षों के बीच मंगलवार को बैठक बुलाई गई है, लेकिन तेल कंपनियों ने कहा है कि डीलरों के तर्क में कोई दम नहीं है।

सीबीएसई में वर्ष 2018 से खत्म होगी नंबर बढ़ाकर देने की परंपरा

नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ‘नंबर बढ़ाकर देने की कुप्रथा’ को खत्म करेगा और इसकी जगह 2018 से ज्यादा साइंटिफिक मॉडरेशन पॉलिसी लागू करेगा। वैसे तो सीबीएसई बोर्ड में नंबर बढ़ाकर देने की परंपरा इस साल से ही खत्म होनी थी लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दिया। फैसले पर रोक का मुख्य कारण इसके समय को लेकर था।

इस गलत परंपरा को खत्म करने के लिए एचआरडी मिनिस्ट्री ने एक इंटर बोर्ड वर्किंग ग्रुप (आईबीडब्ल्यूजी) का गठन किया है। आईबीडब्ल्यूजी में आठ बोर्ड्स शामिल हैं, जो नंबर बढ़ाकर देने की परंपरा पर रोक लगाने के लिए विस्तार से योजना तैयार करेंगे। आईबीडब्ल्यूजी नियमित रूप से चर्चा करेगा और एक ऐसा मॉडल तैयार करेगा, जिस पर सभी बोर्ड्स को अमल करना होगा।

कुछ अहम विषयों का सभी बोर्ड्स का सामान्य पाठ्यक्रम भी होगा। ग्रेस मार्क्स पॉलिसी वेबसाइट्स पर अलोड की जाएगी और पाठ्येत्तर विषयों के लिए मार्क्स एवं ग्रेड्स अलग से देने होंगे। इसके अलावा असेसमेंट में समानता लाने के लिए सीबीएसई के साथ बोर्डों को प्रश्नपत्र साझा करने की भी योजना है।

एचआरडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘योजना के मुताबिक इस साल मॉडरेशन पॉलिसी को खत्म नहीं किया जा सका। अगले साल तक इस योजना पर सभी बोर्ड्स अमल करें, हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। वास्तव में सभी बोर्ड्स अगले साल से नंबर बढ़ाकर देने की परंपरा को खत्म करने के लिए तैयार हो गए हैं।

कुछ बोर्ड्स ने इस साल से इस नियम को लागू करने को लेकर 24 अप्रैल, 2017 को हुई मीटिंग में कुछ समस्याएं गिनाई थीं लेकिन 2018 से इसे लागू करने के लिए सभी तैयार हैं।’ अप्रैल में 32 स्कूल एजुकेशन बोर्ड्स ने इस साल से नंबर बढ़ाकर नहीं देने का फैसला किया था। लेकिन एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने इस साल मॉडरेशन पॉलिसी को जारी रखने का निर्देश दिया, जिससे मजबूर होकर सीबीएसई को इस साल मॉडरेशन पॉलिसी की परंपरा को जारी रखना पड़ा।

एचआरडी मिनिस्ट्री के अधिकारी ने बताया, ‘हमने देखा कि कुछ बोर्ड्स ने इस साल मॉडरेशन पॉलिसी को नहीं अपनाया और रिजल्ट्स में इसका असर देखने को भी मिला। ऐसा करने वाले बहुत ही कम बोर्ड्स हैं। इसलिए यह एक शुरुआत है।’ यह भी फैसला लिया गया है कि सीबीएसई उन राज्यों के साथ अपने क्वेस्चन पेपर साझा करेगा, जहां एनसीईआरटी की पुस्तकें चलती हैं। इससे सभी राज्यों में पूछे जाने वाले सवालों में एकरूपता आ सकेगी।

300 करोड़ में लीज पर जाएगा कोटा रेलवे स्टेशन

कोटा। कोटा रेलवे स्टेशन समेत पश्चिम मध्य रेलवे के 17  स्टेशन लीज पर देने की तैयारी हो चुकी है।  दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर स्थित  कोटा स्टेशन 300 करोड़ में लीज पर जा सकता है। कोटा मंडल के सवाईमाधोपुर और भरतपुर स्टेशन भी लीज पर दिए जाएंगे। रेलवे बोर्ड ने देश के 400 रेलवे स्टेशनों को लीज पर देने का फैसला किया है। इसके तहत प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पहले चरण में देश के 23 रेलवे स्टेशनों को लीज पर दिया जाएगा। इसमें राजस्थान का उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन भी शामिल है। पश्चिम मध्य रेलवे के 17 रेलवे स्टेशन को इस योजना में शामिल किया गया है। इसमें प्लस श्रेणी के रेलवे स्टेशन शामिल किए गए हैं। निजी फर्म को रेलवे स्टेशन का बाहरी क्षेत्र लीज पर दिया जाएगा।

फर्म को ही रेलवे स्टेशन को रिडवलप करने के लिए पैसा खर्च करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कोटा रेलवे स्टेशन 300 करोड़ में बिक सकता है। रोजाना कोटा से 102 ट्रेनें चलती गुजरती हैं। सीपीआरओ सुरेंद्र यादव ने बताया कि पश्चिम मध्य रेलवे के हबीबगंज सहित 17 स्टेशनों को लीज पर देना है।

सुविधाओं के बदले लेंगे शुल्क
एग्जीक्यूटिवलाउंज सहित अन्य बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के बदले लीज होल्डर यात्रियों से पैसा भी वसूलेगा। अभी तक लोकमान्य तिलक, ठाणे, पूना, विशाखापट्टनम, हावड़ा, इलाहाबाद, कानपुर सेन्ट्रल, अजमेर मंडल का उदयपुरसिटी, कामाख्या, जम्मूतवी, फरीदाबाद, विजयवाड़ा, सिकंदराबाद, रांची, बंगलौर कैंट, यशवंतपुर, चेन्नई सेन्ट्रल, कालीकट, भोपाल, इंदौर, मुंबई सेन्ट्रल, बांद्रा टर्मिनस और बोरिवली स्टेशन के लिए टेंडर मांगे गए हैं।

ये सुविधाएं होंगी

  • वीआईपीलाउंज बनवाया जाएगा
  • स्टेशन के पास बजट होटल की सुविधा
  • लगेज कोच तक ले जाने के लिए ट्रॉली
  • मनोरंजन के लिए टीवी सहित अन्य संसाधन
  • अलग-अलग वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग की व्यवस्था 
  • नाश्ता खानपान की सुविधा के लिए फूड प्लाजा

किस स्टेशन पर कितना होगा इन्वेस्ट
लोकमान्य तिलक 250 करोड़, ठाणे 200 करोड़, पुणे 200 करोड़, विशाखापट्टनम 200 करोड़, हावड़ा 400 करोड़, इलाहाबाद 150 करोड़, कानपुर सेन्ट्रल 200 करोड़, उदयपुरसिटी 100 करोड़, कामाख्या 228 करोड़, जम्मूतवी 75 करोड़, फरीदाबाद 70 करोड़, विजयवाड़ा 94 करोड़, सिकंदराबाद 282 करोड़, रांची 100 करोड़, बंगलौर कैंट 80 करोड़, यशवंतपुर 100 करोड़, चेन्नई सेन्ट्रल 350 करोड़, कालीकट 75 करोड़, भोपाल 75 करोड़, इंदौर 75 करोड़, मुंबई सेन्ट्रल 250 करोड़, बांद्रा 200 करोड़, बोरिवली के लिए 280 करोड़ रुपए इन्वेस्टर को खर्च करने होंगे।

ये निजीकरण की शुरुआत, इससे इंडियन रेलवे को घाटा ही होगा 

ये इंडियन रेलवे के निजीकरण की शुरुआत है। पीपीपी का मतलब पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप है, लेकिन इस फैसले से पब्लिक गायब है। साइकिल स्टैंड, स्टॉल्स, रिफ्रेशमेंट रूम, ट्रॉली और कुलियों की लाइसेंस फीस से रेलवे को राजस्व मिलता है। लीज पर दिए जाने पर इनको शामिल नहीं किया जाना चाहिए। रेलवे जमीन उपलब्ध करवाता और फर्म अपने स्तर पर सुविधाएं विकसित कर यात्रियों को उपलब्ध करवाती। स्टेशनों को 45 साल के लिए लीज पर दिया जा रहा है। इतने लंबे समय में बहुत बदलाव जाएगा। रेट आज के हिसाब से तय होगी। इससे भी रेलवे को घाटा होगा।
-मुकेश गालव, सहायक महामंत्री, एआईआरएफ

कोटा जंक्शन की फेक्ट फाइल

  • कोटा जंक्शन का कुल क्षेत्रफल 880 किमी।
  • राजस्थान, एमपी, यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दिल्ली को जोड़ता है
  • 102 ट्रेनें रोजाना कोटा जंक्शन से गुजरती हैं, जिनमें सवार होते हैं 21 हजार यात्री