Friday, June 19, 2026
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सरकारी बैंकों ने 2.5 लाख करोड़ का कर्ज बट्टे खाते में डाला

रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक बैंकों को कर रियायतों का लाभ पाने के लिए फंसे कर्जो की पर्याप्त धन राशि बट्टे खाते में डालनी होती है।

नई दिल्ली । पिछले पांच वित्त वर्षो के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के फंसे कर्ज (एनपीए) बट्टे खाते में डाल दिये यानी इन कर्जो की वसूली नामुमकिन मानकर उनके लिए धनराशि का प्रावधान किया। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के हवाले से वित्त मंत्रलय ने दी है।

भारतीय स्टेट बैंक और उसके पांच सहयोगी बैंकों समेत 27 सार्वजनिक बैंकों ने बीते वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 81,683 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले। पिछले पांच साल में यह सर्वाधिक राशि है। इससे पिछले वित्त वर्ष में बट्टे खाते में डाली गई राशि के मुकाबले यह 41 फीसद ज्यादा है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समूह ने इस दौरान 27,574 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले। मौजूदा वित्त वर्ष में पहले दिन यानी एक अप्रैल को सहयोगी बैंकों का एसबीआई  में विलय हो गया।

बैंकों द्वारा बट्टे खाते में डाली गई राशि के बारे में जारी रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक बैंकों ने वित्त वर्ष 2012-13 में 27,231 करोड़, 2013-14 में 34,409 करोड़, 2014-15 में 49,018 करोड़, 2015-16 में 56586 करोड़ और 2016-17 में 81,683 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले।

बीते वित्त वर्ष में पंजाब नेशनल बैंक ने 9205 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 7346 करोड़ और केनरा बैंक ने 5545 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले। इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा ने 4348 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक ने 3574 करोड़, इंडियन ओवरसीज बैंक ने 3066 करोड़ और आइडीबीआई बैंक ने 2868 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले।

रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक बैंकों को कर रियायतों का लाभ पाने के लिए फंसे कर्जो के लिए पर्याप्त धन राशि बट्टे खाते में डालनी होती है। आरबीआई ने बैंकों को इसकी अनुमति दी है कि वे मुख्यालय स्तर पर किसी फंसे कर्ज के लिए राशि बट्टे खाते में डाल सकते हैं। साथ ही वे शाखा स्तर पर वसूली के लिए प्रयास जारी रख सकते हैं।

रिजर्व बैंक के अनुसार 31 मार्च 2017 को सार्वजनिक बैंकों का कुल एनपीए यानी फंसे कर्ज उनके कुल कर्जो के मुकाबले 12.47 फीसद थे। इन बैंकों के कुल कर्ज 51.42 लाख करोड़ रुपये थे जबकि उनके फंसे कर्ज 6.41 लाख करोड़ रुपये थे। बैंकों का एनपीए तेजी से बढ़ने से सरकार अत्यधिक चिंतित है।

गरीबों के लिए रसोई गैस पर सब्सिडी जारी रहेगी

अगरतला। सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि गरीबों के लिए घरेलू इस्तेमाल के रसोई गैस सिलेंडर (एलपीजी) पर सब्सिडी जारी रहेगी। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारी घरेलू इस्तेमाल के लिए एलपीजी पर सब्सिडी समाप्त करने की कोई योजना नहीं है।

गरीब और आम लोगों के लिए एलपीजी और केरोसिन पर सब्सिडी जारी रहेगी।’ गौरतलब है कि सरकार के आदेश पर पेट्रोलियम कंपनियां हर महीने सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत बढ़ा रही हैं।

प्रधान ने बताया कि पूर्वोत्तर में एलपीजी के संकट से निपटने के लिए चटगांव से त्रिपुरा तक प्राकृतिक गैस के परिवहन को पाइपलाइन बिछाने के लिए उनके मंत्रालय ने बांग्लादेश सरकार से बात की है।

प्रधान ने कहा, ‘हम पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी से बांग्लादेश के पार्वतीपुर में डीजल के परिवहन के लिए पाइपलाइन बिछा रहे हैं। असम में नुमालीगढ़ रिफाइनरी से सिलिगुड़ी तक डीजल के परिवहन के लिए पाइपलाइन है।

इसके बदले में हमने चटगांव से त्रिपुरा तक गैस पाइपलाइन का प्रस्ताव दिया है। हम इस मामले को राजनयिक स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं। मैं जल्द बांग्लादेश जाऊंगा।’

जीएसटी से बाजार को बड़ा फायदा होगा : रीमैक्स

नयी दिल्ली । रीयल एस्टेट क्षेत्र के ब्रोकरों के लिए एक नेटवर्क की तरह कार्य करने वाली अमेरिकी कंपनी की भारतीय इकाई रीमैक्स इंडिया का कहना है कि नोटबंदी से लघु अवधि में रीयल एस्टेट को एक धक्का लगा पर इससे एक बड़ा फायदा यह हुआ कि संपत्ति बाजार में जो कीमतें अनाप-शनाप बढ़ी हुईं थी, वे नीचें आई हैं।

रीमैक्स का यह भी मानना है कि जमीन जायदाद बाजार के विनियमन के लिए रीयल एस्टेट विनियमन अधिनियम (रेरा) और नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी से इस क्षेत्र को बड़ा फायदा होगा।

कंपनी के चेयरमैन सैम चोपड़ा ने बातचीत में संपत्ति बाजार की मौजूदा चुनौतियों के बारे में कहा, ‘‘बाजार की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि डेवलपरों ने उन संपत्तियों को खड़ा करने में निवेश किया जिसका खरीदार ही नहीं है। इससे हुआ यह कि इस क्षेत्र में इंवेंटरी बढ़ गई और मांग घट गई।

इससे कई परियोजनाएं अटक गईं और बाजार में ग्राहक एवं विक्रेता के बीच भरोसे की कमी हो गई।’’ हाल में सरकार द्वारा लागू किए गए रेरा के बारे में चोपड़ा ने कहा, ‘ इससे कहीं ना कहीं इसी भरोसे की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

क्योंकि ग्राहक के पास शिकायत करने का एक आधार होगा और सरकार के पास डेवलपरों की जवाबदेही तय करने की सहूलियत होगी। इससे बाजार में भरोसा बढ़ेगा और मांग का अंतर पाटने में भी मदद मिलेगी।’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के लागू होने से वास्तविक खरीदार के पास संपत्ति खरीदने का विकल्प होगा।

क्योंकि सुरक्षित लेनदेन से उसकी खरीद की क्षमता बढ़ेगी।, ‘‘नोटबंदी ने रीयल एस्टेट बाजार को नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रकार से प्रभावित किया। इसमें अच्छाई यह रही कि संपत्ति की कीमतें गलत तरीके से जो बेहताशा बढ़ीं हुईं थी वे नीचे आयी हैं।

जबकि लघु अवधि में नुकसान यह हुआ कि डेवलपरों को उनके निवेश का कुछ भी वापस नहीं मिला।’’ रीमैक्स इंडिया के बारे में कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी यतिन शर्मा ने कहा कि कंपनी फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करती है। देश भर में उसने संपत्ति ब्रोकरों का नेटवर्क खड़ा किया है।

वर्ष 2020 तक वह ऐसे 200 फ्रेंचाइजी केंद्रों की स्थापना करेगी जिससे देशभर में करीब 2,500 संपत्ति ब्रोकर जुड़े होंगे। वह ऐसे केंद्र देश के प्रमुख 25 शहरों में खोलेगी जिनमें महानगरों के अलावा टियर-1, टियर-2 और स्मार्टसिटी भी शामिल हैं।

शर्मा ने कहा कि कंपनी फ्रेंचाइजी आधार पर ब्रोकर कार्यालय खोलती है। यह संपत्ति बाजार में ब्रोकरों को विश्वसनीयता प्रदान करने का काम करती है। इस प्रकार वह उनके लिए एक नेटवर्क बनाने का काम करती है। इससे इस क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ती हैं।

शर्मा ने कहा, ‘‘कंपनी 2009 से भारत में कार्यरत है, लेकिन अब वह अपना विस्तार 200 केंद्रों तक करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए वह 100-150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसका अधिकांश हिस्सा वह ब्रांड बनाने में निवेश करेगी।’’

वॉट्सएप से जुड़ेगा भीम एप, अमेजॉन से बातचीत

नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट का सरकारी भीम ऐप अब वॉट्सएप से भी जुड़ेगा। इसके लिए नेशनल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया और वॉट्सएप के बीच बातचीत चल रही है। समझौता होने पर कई करोड़ लोग एक साथ भीम से जुड़ जाएंगे। अभी करीब दो करोड़ लोगों ने भीम एप डाउनलोड किया है।

इसके जरिये अभी तक 50 लाख ट्रांजेक्शन्स हुए हैं और करीब 15 सौ करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेजॉन, उबर सहित कई अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों से भी बातचीत चल रही है। क्विक रेस्तरां चेन के साथ भी भीम से पेमेंट को लेकर बात चल रही है।

ईपीएफ के 8.33 % का सरकार करेगी भुगतान

 इसका लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने 01 अप्रैल 2016 के बाद ज्वाइन किया है, साथ ही जिनका वेतन 15 हजार या इससे कम है।

लखनऊ। प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार ने नियोक्ताओं पर कर्मचारियों को दिए जाने वाले पेंशन के अंशदान (ईपीएस) के भार को कम कर दिया है।

इस योजना के तहत नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को दिए जाने वाले कर्मचारी पेंशन अंशदान (ईपीएस) का 8.33 प्रतिशत का भुगतान अब केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा।

अभी तक कर्मचारी के लिए यह भुगतान नियोक्ता द्वारा किया जाता था। रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए सरकार ने यह सुविधा प्रदान की है। यही नहीं योजना के तहत टेक्सटाइल सेक्टर के नियोक्ता के अंशदान का पूरा 12 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

यह लाभ केवल उन कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने 01 अप्रैल 2016 के बाद ज्वाइन किया है। इसके साथ ही जिनका वेतन 15 हजार या इससे कम है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अधिकारी बताते हैं कि इस सुविधा का लाभ पाने के लिए कर्मचारी का यूनिवर्सल खाता संख्या आधार नम्बर से लिंक होना चाहिए।

यूनिवर्सल खाता संख्या से आधार लिंक होना अनिवार्य है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से पेंशन प्राप्त कर रहे पेंशनरों को आधार जनित डिजिटल लाइफ सार्टिफिकेट जल्द से जल्द ईपीएफओ में जमा करना होगा। यह न करने पर उनकी पेंशन रोक दी जाएगी।

इस बार 25 फीसदी ज्यादा आईटी रिटर्न फाइल

अडवांस टैक्स कलेक्शन (व्यक्तिगत इनकम टैक्स) में 41.79 फीसदी का इजाफा हुआ है

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2016-17 में 2.82 करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है। टैक्स डिपार्टमेंट ने सोमवार को बताया कि नोटबंदी के बाद रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘नोटबंदी और ऑपरेशन क्लीन मनी का नतीजा है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में काफी वृद्धि हुई है।’व्यक्तिगत आईटीआर फाइलिंग में 25.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 5 अगस्त तक 2.79 करोड़ रिटर्न्स प्राप्त किए गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह संख्या 2.2 करोड़ थी।

इस साल बढ़ाई गई डेडलाइन खत्म होने तक 2.82 करोड़ से अधिक रिटर्न्स फाइल हुए, जबकि पिछली बार यह आंकड़ा 2.26 करोड़ था। इसमें 24.7 फीसदी का इजाफा हुआ है।

पिछले साल वृद्धि दर 9.9 फीसदी थी। व्यक्तिगत और एचयूएफ (हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली) के लिए इनकम टैक्स फाइल करने की आखिरी तारिख 5 अगस्त थी।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि आईटीआर में इस इजाफे से पता चलता है कि नोटबंदी के बाद बड़ी संख्या में लोगों को टैक्स के दायरे में लाया जा सका है।

नोटबंदी का असर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में भी देखा जा सकता है। 5 अगस्त तक के आंकड़े बताते हैं कि अडवांस टैक्स कलेक्शन (व्यक्तिगत इनकम टैक्स) में 41.79 फीसदी का इजाफा हुआ है।

सेंसेक्स 51 अंक गिरकर 32273 के स्तर पर बंद

नई दिल्ली । सोमवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर हल्की गिरावट के साथ बंद हुए। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 51 अंक गिरकर 32273 के स्तर पर और निफ्टी 9 अंक की मामूली कमजोरी के साथ 10057 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 1.12 फीसद और स्मॉलकैप में 1.52 फीसद की बढ़त देैखने को मिली है।

सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो आईटी और फार्मा शेयर्स में गिरावट देखने को मिली है। वहीं, बैंक (0.32 फीसद), ऑटो (0.19 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.61 फीसद), एफएमसीजी (0.22 फीसद), मेटल (1,18 फीसद) और रियल्टी (1.55 फीसद) की बढ़त के साथ कारोबार कर बंद हुआ है।

दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 19 हरे निशान में और 32 गिरावट के साथ कारोबार कर बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा तेजी टाटा स्टील, आईओसी, एसबीआईएन, अदानीपोर्ट्स और बीपीसीएल के शेयर्स में हुई है। वहीं, गिरावट इंफ्राटेल, टाटा मोटर डीवीआर, इंफोसिस, एनटीपीसी और डॉ रेड्डी के शेयर्स में हुई है।

जीएसटी उपकर बढ़ाकर किया 25%, एसयूवी, लक्जरी कारें होंगी महंगी

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नयी दिल्ली। एसयूवी, मध्यम आकार की व बड़ी एवं लक्जरी कारें अब और महंगी हो जाएंगी क्योंकि जीएसटी परिषद ने इन पर उपकर की दर को मौजूदा 15% से बढ़ाकर 25% करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उल्लेखनीय है कि माल एवं सेवाकर जीएसटी के लागू होने के बाद इनकी कीमतें कम हो गईं थी।

जीएसटी के तहत कारों को उच्चतम दर 28% कर की श्रेणी में रखा गया है। इस वर्ग में वस्तुओं वे सेवाओं पर 1-15% तक का उपकर भी लगाया गया है ताकि उससे प्राप्त आय के जरिए जीएसटी में राज्यों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जीएसटी के बाद कारों पर कुल कर जीएसटी और उपकर मिलाकर जीएसटी से पहले वाली व्यवस्था के मुकाबले शुल्क कम हो गया था।

बयान में कहा गया है, जीएसटी परिषद ने 5 अगस्त को हुई अपनी 20वीं बैठक में इस मसले विचार किया और केंद्र सरकार से सिफारिश की कि वह 8702 और 8703 शीर्षक के तहत आने वाले मोटर वाहनों पर अधिकतम उपकर मौजूदा 15% से बढ़ाकर 25% करने के लिए विधायी संशोधन करने का प्रस्ताव रख सकती है।

बढ़ा हुआ उपकर कब से प्रभावी होगा
बढ़ा हुआ उपकर कब से प्रभावी होगा , इसका फैसला कॉउन्सिल बाद में करेगी। उपकर में बढ़ोतरी के लिए जीएसटी राज्यों को राजस्व नुकसान पर मुआवजा अधिनियम-2017 के धारा-8 में संशोधन की जरूरत होगी।

8702 और 8703 शीर्षकों के तहत आने वाले मोटर वाहनों में मध्यम श्रेणी, बड़ी कार, एसयूवी और 10 से ज्यादा लेकिन 13 से कम लोगों के बैठाने की क्षमता वाले वाहन और 1500 सीसी से अधिक क्षमता के इंजन वाले हाइब्रिड वाहन तथा 1500 सीसी से कम इंजन के मध्यम दर्जे की हाइब्रिड कारें आती हैं।

जीएसटी फिटमेंट समिति ने अपनी 25 जुलाई की बैठक में पाया कि इन कारों पर कुल कर जीएसटी से पहले की व्यवस्था की तुलना में कम हो गया है।

 

फ्रिज, एसी या कार वाले कल्याणकारी योजनाओं से होंगे बाहर

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नई दिल्ली। सरकार शहरी क्षेत्र के परिवारों की आर्थिक स्थिति का आकलन करेगी, ताकि पता चल सके कि किसी परिवार को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने की जरूरत है भी या नहीं? सरकार के इस फैसले से अंदाजन 10 में से छह परिवार सरकार के राडार पर आ सकते हैं।

नए गुणा-गणित के मुताबिक शहरी क्षेत्र में जिन परिवारों को पास चार रूम का फ्लैट या चारपहिया वाहन या एयर कंडिशनर हैं, वो कल्याणकारी योजनाओं के लाभुकों की लिस्ट से स्वतः निकल जाएंगे।

सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को लागू करने के लिए बनी बिबेक देबरॉय कमिटी के सुझाव के मुताबिक, जिन परिवारों के पास रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और दोपहिया वाहन- तीनों हैं, वो भी इस लिस्ट से खुद-ब-खुद हट जाएंगे।

रिपोर्ट में उन परिवारों का भी जिक्र है जो स्वतः इस लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। इसके लिए परिवारों के आवास, पेशा और सामाजिक स्थिति को आधार बनाया जाएगा।

जो परिवार बेघर है या जो पॉलिथिन के घेरे या पॉलिथिन की छत के नीचे जीवन गुजार रहा है, जिस परिवार की आमदनी का कोई स्थाई जरिया नहीं है या जिस परिवार में कमाने की उम्र के पुरुष सदस्य नहीं हैं या जिस परिवार का मुखिया कोई बच्चा है, उन्हें कल्याणकारी योजनाओं की लिस्ट में स्वतः जोड़ दिया जाएगा।