Saturday, July 11, 2026
Home Blog Page 5633

गौवंश को प्रोत्साहन देने के लिए पंचगव्य आयुर्वेद चिकित्सा शिविर 18 से

आ अब लौट चलें… विषययक राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के प्रमुख वैज्ञानिक व विद्वान और समाजसेवी तथा उन्नत किसान भाग लेंगे

कोटा। हाड़ौती गौ सेवा संस्थान के तत्वावधान में दो दिवसीय 18 व 19 नवम्बर को आ अब लौट चलें… विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पंचगव्य आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर टीलेश्वर महादेव मंदिर के सभागार में आयोजित किया जाएगा।

संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राकेश अग्रवाल एवं कार्यक्रम संयोजक सीए जितेंद्र गोयल ने पत्रकारों को बताया कि भारतीय गौवंश को प्रोत्साहन देने एवं गौ आधारित जीवन पद्धति को पुर्नस्थापित करने के क्रम में यह आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश के प्रमुख वैज्ञानिक व विद्वान और समाजसेवी तथा उन्नत किसान भाग लेंगे।

18 नवम्बर को सुबह 9.30 बजे उद्घाटन सत्र में संगोष्टी की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षैत्रीय गौ सेवा प्रमुख नवरंग लाल शर्मा करेंगे तथा मुख्य अतिथि एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंदराम मित्तल होंगे। विशिष्ट अतिथि जिला आयुर्वेद अधिकारी वैद्य कृष्ण कुमार शर्मा तथा मुख्य वक्ता नागपुर के गौ विज्ञान केंद्र के प्रभारी सुनील मानसिंहका होंगे।

कोषाध्यक्ष रवि अग्रवाल ने बताया कि प्रथम सत्र में प्रकृति, गाय से दूरी के दुष्परिणाम एवं गौ विज्ञान में चमत्कारी अनुसंधान विषय पर मानसिंहका का संबोधन होगा। दोपहर को द्वितीय सत्र में गौवंश कृषि विश्व विद्यालय बीएचयू वाराणसी के प्रोफेसर गुरू प्रसाद सिंह मुख्य वक्ता होगे।

तृतीय सत्र में दोपहर 3.30 बजे से जैविक कृषि का आधार केवल गाय विषय पर झालावाड़ के सेवानिव्त डीन मधु सेदन आचार्य तथा जैविक कृषि आसान पर झालावाड़ के हुकंमचंद पाटीदार एवं गौ पालन में नवाचार विषय पर भीलवाड़ा के रवि अग्रवाल का व्याख्यान होगा।

चतुर्थ सत्र में सायं 5 बजे से आधुनिक जीवन में संभव है गौपालन पर प्रसिद्ध उद्योगपति किरून लाल चौधरी,डॉ. पियूष चतर, तरूण मोदी, शिक्षाविद् विनय गुप्ता ,गौ प्रबंध वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र गर्ग का व्याख्यान होगा।

इसी प्रकार 19 नवम्बर को पंचम सत्र में प्रातः9.30 बजे से गौ विज्ञान है चिकित्सा का आधार तथा आधुनिक जीवन की जटिल व्याधियों पर पंचगव्य चिकित्सा के आश्चर्यजनक परिणाम विषय पर जामनगर के वैद्य हितेष जानी तथा गांधी नगर के वैद्य धर्मेंद्र पटेल का व्याख्यान होगा।

षष्टम सत्र में गौ विज्ञान है चिकित्सा का आधार पर पंचगव्य चिकित्सा एवं उसके बढ़ते प्रभाव पर जयपुर के वैद्य योगेश तथा भनुप्राताप, उज्जैन के वैद्य प्रज्ञान त्रिपाठी एवं सप्तम सत्र में हाड़ौती और पंचगव्य चिकित्सा पर कोटा के वैद्य रघुनंदन शर्मा, कैलाश शर्मा, तेजेश गोयल एवं अष्टम सत्र में गौ शाला प्रबंधन चुनौती विषय पर डॉ.महेंद्र गर्ग आदि विचार व्यक्त करेंगे।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इसी दौरान दोनो दिन प्रातः 10 से 4 बजे तक विशाल पंचगव्य चिकित्सा शिविर में प्रतिष्ठित वैद्यों की सेवाऐं उपलब्ध रहेंगी।

शादियों की मांग से सोना सुधरा, जानिए क्या रहे गोल्ड के दाम

नई दिल्ली/कोटा । दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। सकारात्मक वैश्विक संकेत के चलते लगातार तीसरे दिन सोने में तेजी देखने को मिली है। सोना 75 रुपये चढ़कर 30625 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

शादियों की मांग से अलावा इसके शादी के सीजन में घरेलू ज्वैलर्स की मांग को पूरा करने के लिए बढ़ी खरीदारी ने भी कीमतों को समर्थन दिया है। हालांकि, चांदी पांच रुपये की मामूली कमजोरी के साथ 40725 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।

यह मामूली गिरावट इंडस्ट्रियल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर से सुस्त उठान के चलते देखने को मिली है।
व्यापारियों का मानना है कि सकारात्मक वैश्विक संकेत के अलावा अमेरिका में अक्टूबर के कंज्यूमर इंफ्लेशन डेटा के आंकड़ें जारी होने से पहले सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

साथ ही घरेलू हाजिर बाजार में शादी के सीजन में मांग को पूरा करने के लिए बढ़ी खरीदारी ने कीमतों को समर्थन दिया है। वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में सोना 0.16 फीसद की गिरावट के साथ 1281.80 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर और चांदी 0.21 फीसद की कमजोरी के साथ 17.04 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है।

 दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 75 रुपये चढ़कर क्रमश: 30625 रुपये और 30475 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। जानकारी के लिए बता दें कि बीते दो सत्रों में सोने की कीमतों में 10 रुपये की तेजी देखने को मिली है। गिन्नी, हालांकि, 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर बरकरार रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर चांदी तैयार 5 रुपये की मामूली गिरावट के साथ 40725 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 15 रुपये की कमजोरी के साथ 39785 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। चांदी के सिक्कों के भाव 74000 रुपये लिवाल और 75000 रुपये बिकवाल प्रति सैकड़ा के स्तर पर बरकरार रहे हैं।

कोटा सर्राफा 
चांदी 40200 रुपए प्रति किलो 
सोना केटबरी 30450 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35520 रुपए प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30600 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35700  रुपए प्रति तोला।

सिक्कों की खनक बन रही मुसीबत का सबब

  • आरबीआई ने तय की थी सिक्के जमा करने की सीमा
  • बैंकों के पास नहीं है सिक्के जमा करने की जगह
  • इनके कारण कारोबारियों को हो रही है भारी दिक्कत
  • एक साल में 40 फीसदी बढ़ी सिक्कों की उपलब्धता

कोलकाता। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जुलाई में एक परिपत्र जारी कर बैंकों में सिक्कों के रूप में जमाओं की अधिकतम सीमा 1,000 रुपये तय की थी।  इससे उन कारोबारियों के लिए बड़ी दिक्कत पैदा हो गई है, जिनके पास बड़ी मात्रा में सिक्के हैं।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादा समस्या 10 रुपये के सिक्कों की वजह से है। पिछले एक साल के दौरान इन सिक्कों की अर्थ तंत्र में उपलब्धता मूल्य के हिसाब से करीब 40 फीसदी बढ़ गई है।

बैंकों के पास पहले से ही नकदी रखने के लिए जगह की भारी किल्लत है। इसलिए वे जागरूकता अभियान चलाकर कारोबारियों को सिक्के स्वीकार करने के लिए राजी कर रहे हैं।

लेकिन नोटबंदी के बाद इनकी उपलब्धता ज्यादा हो गई है। वहीं नोटबंदी के कारण बैंकों की तिजोरियां भरी पड़ी हैं और उनके पास जगह की किल्लत है।

यही वजह है कि आरबीआई ने परिपत्र जारी कर 1 रुपये या उससे अधिक मूल्य के सिक्कों के रूप में दैनिक जमा की सीमा अधिकतम 1,000 रुपये तय की थी।

इस परिपत्र के मुताबिक 50 पैसे के सिक्के अधिकतम 10 रुपये तक ही जमा किए जा सकते थे। स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कारोबारी समुदाय सिक्के स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

सिक्कों को जमा करना एक समस्या है क्योंकि इन्हें गिनने के लिए अधिक कर्मचारियों की जरूरत होती है और ये अधिक जगह घेरते हैं।

 आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 10 रुपये के सिक्कों का मूल्य 31 मार्च 2017 के अंत में 5,204 करोड़ रुपये था, जबकि यह 31 मार्च 2016 को महज 3,703 करोड़ रुपये था। इस तरह करीब 40.53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

आरबीआई की सलाह पर बैंक ‘कॉइन कैंप’ आयोजित कर रहे हैं। सरकारी क्षेत्र के एक बैंक के अधिकारी ने कहा, ‘नोटबंदी के बाद करेंसी नोटों की जगह सिक्के दिए गए हैं।

आरबीआई ने हमें कॉइन कैंप आयोजित करने की सलाह दी थी लेकिन इससे हमें कोई मदद नहीं मिली क्योंकि कोई  भी सिक्के स्वीकार करने को तैयार नहीं है।’  

यूको बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘बैंक जमाएं बढ़ी हैं और जमा नकदी अभी आरबीआई को नहीं भेजी गई है। बैंकों में कोई जगह नहीं है और लोग भी सिक्के स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। इससे बहुत अधिक असुविधा हो रही है।’

आमतौर पर ग्रे बाजार में सिक्के कम आपूर्ति के कारण 10 से 15 फीसदी ज्यादा कीमत पर बिकते हैं, लेकिन अब रुझान उलटा है। अत्यधिक आपूर्ति के कारण वहां सिक्के 10 से 15 फीसदी कम दाम पर बिक रहे हैं।

लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 181 अंक और टूटा

मुंबई। बंबई शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट का सिलसिला कायम रहा। व्यापार घाटे के तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के बीच सेंसेक्स 181 अंक और टूट गया।

इसके अलावा कुछ बड़ी कंपनियों के निराशाजनक तिमाही नतीजों से भी निवेशक हतोत्साहित हुए। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स बुधवार को 32,944.94 अंक पर ऊंचा खुला, लेकिन यह जल्द नकारात्मक दायरे में आ गया। अंत में सेंसेक्स 181.43 अंक या 0.55 प्रतिशत के नुकसान से 32,760.44 अंक पर आ गया।

इससे पिछले दो सत्रों में सेंसेक्स 372.69 अंक टूटा है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 68.55 अंक या 0.67 प्रतिशत के नुकसान से 10,118.05 अंक पर बंद हुआ।

कारोबार के दौरान यह 10,175.45 से 10,094 अंक के दायरे में रहा। कारोबारियों ने कहा कि देश का निर्यात करीब एक साल बाद फिर नकारात्मक दायरे में आ गया है जिससे यहां कारोबारी धारणा प्रभावित हुई।

अक्टूबर में निर्यात 1.12 प्रतिशत घटा है। पिछले महीने व्यापार घाटा बढ़कर 14 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो इसका तीन साल का उच्च स्तर है।

एशियाई बाजारों के कमजोर रुख और यूरोपीय बाजारों की नुकसान के साथ शुरुआत, तेल कीमतों में गिरावटऔर अमेरिका में टैक्स सुधारों को लेकर असमंजस से भी कारोबारी धारणा प्रभावित हुई।

इनकम टैक्स की रेड, कोटा स्टोन माइंस से जुड़ी फर्मो पर दबिश

0

तीन बड़ी कोटा स्टोन माइंस से जुड़ी फर्मो पर दबिश देकर दर्जन भर ठिकानों पर जांच कर रहे अफसर

कोटा| आयकर विभाग उदयपुर की इन्वेस्टिगेशन विंग ने बुधवार को गोल्डन स्टोन एंड माइंस ग्रुप, गुडविल स्टोन एंड माइन्स ग्रुप और बनास कोटा स्टोन एंड माइन्स ग्रुप के 27 ठिकानों पर रेड की कार्रवाई शुरू की, जो देर रात तक जारी रही।

सुबह से कोटा और झालावाड़ जिले की तीन बड़ी कोटा स्टोन माइंस से जुड़ी फर्मो पर दबिश देकर दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। कंपनियों के स्टोन और माइंस कार्यालयों, गोदामों और कंपनी के मालिकों के घर पर तलाशी ली जा रही है.कार्रवाई में बड़ी काली कमाई उजागर होने की सम्भावना बताई जा रही है।

आयकर इन्वेस्टिगेशन विंग के सवा तीन सौ से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मी भी इस कार्रवाई में शामिल हैं। जिन्होंने कोटा स्टोन माइनिंग के तीनों कारोबारी समूहों के 27 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे हैं । इसके साथ ही सीएडी चौराहे पर कपनी के ऑफिस में भी टीम के सदस्य पड़ताल कर रहे है|

इसके अलावा रामंगजमण्डी, चेचट, सुकेत और झालावाड़ में गोल्डन और बनास फर्म के कार्यालय और मालिको के निवासो पर टीम कार्रवाई कर रही है। अभी तक सभी कारोाबरियों के एक दर्जन से अधिक प्रतिष्ठानों पर सर्वे की कार्रवाई जारी है।

झालावाड़ में भी खान होने के दस्तावेज
कोटा स्टोन माइनिंग से जुड़े एक कारोबारी समूह के घर पर हुई आयकर सर्वे की कार्रवाई में खुलासा हुआ कि उनकी एक खदान झालावाड़ जिले में भी है। जिसके दस्तावेज मिलने के बाद आयकर विभाग की एक टीम झालावाड़ जिले में भी उक्त खदान की आय-व्यय के रिकॉर्ड की जांच कर करने पहुंच गई।

खान मालिकों के कोटा में महावीर, इन्द्रविहार, इन्द्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र स्थित फैक्ट्रियों, कार्यालयों व दफ्तरों में आयकर की कार्रवाई चल रही है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि कोटा के खान व्यवसायी के यहां पर आय छिपाने के कई दस्तावेज भी मिले हैं। जिन्हें जब्त कर जांच की जा रही है।

आयकर अधिकारियों से अभद्रता, बुलानी पड़ी पुलिस
सुबह 5 बजे जब सुकेत स्थित कोटा स्टोन व्यवसायी के ठिकाने पर आयकर सर्वे की कार्रवाई शुरू हुई तो व्यवसायी के परिजनों व अन्य लोगों ने आयकर अधिकारियों के साथ अभद्रता कर डाली। उन्हें घर में घुसने तक से रोकने की कोशिश की गई।

जिसके बाद आयकर विभाग की टीम को अतरिक्त पुलिस सुरक्षा मांगनी पड़ी। सूचना मिलते ही रामगंजमंडी थाने से सीआई मनोज सिखरवार पुलिस जाप्ता लेकर मौके पर पहुंचे तब जाकर सर्वे की कार्रवाई शुरू हो सकी।

नोटबंदी के बाद तीन गुना बढ़े पैनकार्ड धारक: सीबीडीटी

0

नई दिल्ली । देश में नोटबंदी के बाद पैन कार्ड आवेदकों के संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मंगलवार को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बताया कि नोटबंदी के बाद पर्मानेंट एकाउंट नंबर (पैन) के आवेदकों में तीन गुना तक का इजाफा देखने को मिला है।

सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्र का कहना है कि नोटबंदी से पहले हर महीने करीब 2.5 लाख पैनकार्ड आवेदन आते थे। लेकिन सरकार के नोटबंदी के आदेश के बाद यह संख्या बढ़कर 7.5 लाख हो गई है।

गौरतलब है कि सरकार ने बीते वर्ष आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद कर दिया था। चंद्र ने बताया है कि कालेधन के खिलाफ विभाग कई कड़े कदम उठा रहा है। इनमें दो लाख रुपये से ज्यादा के कैश ट्रांजेक्शन पर रोक लगाना भी शामिल है।

33 करोड़ पैनधारकों में से सिर्फ 13.28 करोड़ ने ही आधार से कराया लिंक
देशभर में करीब 13.28 करोड़ पर्मानेंट एकाउंट नंबर (पैन) को आधार से जोड़ा जा चुका है। मसलन, कुल 39.5 फीसद पैन और आधार की लिंकिंग हो चुकी है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों के अनुसार है।

सरकार ने आधार और पैन की लिंकिंग के लिए 31 दिसंबर, 2017 अंतिम तारीख निर्धारित की है। यह पहले 31 अगस्त निर्धारित की गई थी। देश में कुल 115 करोड़ लोगों के पास आधार और 33 करोड़ लोगों के पास पैन कार्ड हैं।

जीएसटी और बेस इफेक्ट से घटा अक्टूबर में एक्सपोर्ट

0

नई दिल्ली। लगातार 6 महीने ग्रोथ तक दर्ज करने के बाद अक्टूबर में एक्सपोर्ट घट गया। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) की मुश्किलों के चलते निर्यात में कमी आई जबकि इस दौरान आयात में बढ़ोतरी हुई। इससे ट्रेड डेफिसिट तीन साल में सबसे अधिक हो गया।

अक्टूबर में एक्सपोर्ट पिछले साल के मुकाबले 1.1 पर्सेंट घटा, जबकि आयात 7.6 पर्सेंट बढ़ गया। हालांकि इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच के आंकड़े के हिसाब से एक्सपोर्ट 9.62 पर्सेंट बढ़कर 170.2 अरब डॉलर हो गया है, जबकि इंपोर्ट 22.2 पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ 256.4 अरब डॉलर हो गया है।

इंपोर्ट के मुकाबले एक्सपोर्ट कम होने से अक्टूबर में ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 14 अरब डॉलर हो गया जो नवंबर 2014 के बाद सबसे अधिक है। पिछले साल अक्टूबर में ट्रेड डेफिसिट 11.1 अरब डॉलर रहा था जो उसी साल सितंबर में 9 अरब डॉलर था।

भारत ने पिछले महीने 23.1 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी महीने 23.4 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया था। पिछले महीने 37.1 अरब डॉलर का आयात हुआ, जो साल भर पहले 34.5 अरब डॉलर था।

ट्रेड डेफिसिट के बारे में इकरा की प्रिंसिपल इकनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट अक्टूबर महीने में बढ़ा है, लेकिन यह चिंता वाली बात नहीं है। इस साल सितंबर-अक्टूबर में जितना व्यापार घाटा हुआ है, वह जुलाई-अगस्त के ट्रेंड के अनुरूप है।

एक्सपोर्ट में कमी की वजह बेस इफेक्ट भी है।’ सितंबर में निर्यात 25.67 पर्सेंट बढ़कर 28.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया था जो पिछले 6 महीने में सबसे तेज ग्रोथ थी।

अक्टूबर में इंजिनियरिंग प्रॉडक्ट्स का एक्सपोर्ट 11.8 पर्सेंट बढ़कर 5.9 अरब डॉलर हो गया, जबकि केमिकल्स और पेट्रोलियम एक्सपोर्ट के निर्यात में क्रमश: 22.3 पर्सेंट और 14.7 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई। हालांकि जेम्स ऐंड जूलरी एक्सपोर्ट 24.5 पर्सेंट कम हुआ, जबकि फार्मा निर्यात में 8.75 पर्सेंट की गिरावट आई।

गोल्ड इंपोर्ट भी 16 पर्सेंट घटकर 2.95 अरब डॉलर रह गया। एक्सपोर्टर्स बॉडी फियो ने कहा कि अक्टूबर में निर्यात, खासतौर पर एमएसएमई शिपमेंट में गिरावट आने की आशंका पहले से थी।

खराब ग्लोबल संकेतों के चलते सेंसेक्स में दूसरे दिन भी गिरावट

नई दिल्ली। मार्केट में बुधवार को भी गिरावट का दौर जारी रहा। बुधवार को बाजार लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स जहां लगभग 75 अंक गिरकर 32,944 पर खुला, वहीं निफ्टी 10,166 पर पहुंच गया।

खराब ग्लोबल संकेतों के चलते घरेलू बाजार में यह कमजोरी देखने को मिली। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.1 फीसदी लुढ़का है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.25 फीसदी की कमजोरी आई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.2 फीसदी गिरा है।

मेटल, एफएमसीजी, बैंकिंग, फार्मा और पावर शेयरों अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को मार्केट के टॉप गेनर्स में बैंक ऑफ बड़ौदा, बीपीसीएल, टेक महिंद्रा, डीएलएफ रहे, वहीं टॉप लूजर्स की बात करें तो हिंदुस्तान जिंक, सेल, हिंडालको आदि रहे।

निफ्टी का मेटल इंडेक्स 1.5 फीसदी टूटा है, जबकि बैंक निफ्टी 0.1 फीसदी गिरकर 25,260 के करीब नजर आ रहा है। आईटी शेयरों में थोड़ी खरीदारी दिख रही है।

GST की नई दरें लागू, रेस्तरां में खाना सहित कई चीजें होंगी सस्ती

0

नई दिल्ली। बुधवार से अपने ग्रॉसरी बिल को ज्यादा ध्यान से देखना शुरू करें। मैक्सिमम रिटेल प्राइस पर बेचे जाने वाले चॉकलेट, टूथपेस्ट, शैंपू, वॉशिंग पाउडर और शेविंग क्रीम जैसे कई प्रॉडक्ट्स के दाम घट जाएंगे। ऐसा इन्हें जीएसटी (गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स) के सबसे ऊंचे 28% रेट स्लैब से 18% स्लैब में लाने के चलते होगा।

ग्रॉसरी बिल ही नहीं बल्कि अपने रेस्तरां के फूड बिल को भी अच्छे से चेक करें, क्योंकि रेस्तरां बिल को भी 12% और 18% के स्लैब से निकालकर 5% के दायरे में रखा गया है।

इन सेक्टरों की कंपनियों ने अपने ट्रेड चैनल में यह सूचना देनी शुरू कर दी है कि टैक्स कट का फायदा कंज्यूमर को तुरंत दिया जाए क्योंकि रिवाइज्ड स्टिकर लगाने या नया स्टिकर प्रिंट करने में वक्त लगेगा। एक घड़ी कंपनी और एक प्रिंटर मेकर दाम तुरंत घटने की सूचना कंज्यूमर्स को देने के लिए अखबारों में विज्ञापन देने के बारे में सोच रही है।

मैक्सिमम रिटेल प्राइस में टैक्स वाला हिस्सा भी होता है, लिहाजा अगर कोई कंपनी किसी प्रॉडक्ट का बेस प्राइस या डिस्ट्रीब्यूटर और डीलर का मार्जिन बढ़ाने का फैसला न करे, तो उसका दाम नीचे आना चाहिए। सरकार ने संशोधित दाम वाले स्टिकर लगाने के बारे में नई गाइडलाइंस अभी जारी नहीं की है।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘कई प्रॉडक्ट्स एमआरपी कैटेगरी में हैं, लिहाजा कंपनियों को या तो स्टिकर लगाना होगा या नए दाम प्रिंट करने होंगे।’ जीएसटी काउंसिल ने पिछले शुक्रवार को अपनी 23वीं बैठक में करीब 200 उत्पादों पर टैक्स रेट घटा दिया था और इनमें से 178 को 28% वाले स्लैब से 18% वाले स्लैब में डाल दिया गया था।

राज्यों और केंद्र ने इस संबंध में नोटिफिकेशंस जारी करने के साथ नए रेट्स मंगलवार आधी रात से लागू हुए। पीडब्ल्यूसी के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, ‘अच्छा है कि जीएसटी काउंसिल ने एक खास तारीख यानी 15 नवंबर से बदलाव लागू करने का निर्णय किया क्योंकि पहले के कुछ मामलों में विभिन्न राज्यों ने अलग-अलग तारीखों पर अधिसूचनाएं जारी की थीं।

हालांकि समय की कमी को देखते हुए अधिकतर कंपनियां प्रॉडक्ट्स के एमआरपी तुरंत नहीं घटा पाएंगी, लेकिन उन्होंने डीलरों और रिटेलरों से कहा है कि कीमतें कम की जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि कस्टमर्स को भी इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि किन प्रॉडक्ट्स के दाम कितने घट सकते हैं, भले ही उस प्रॉडक्ट पर एमआरपी कुछ भी लिखा हो।

अमूल डेयरी ब्रांड से प्रॉडक्ट्स बनाने वाले गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन ने अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स को संशोधित दाम पर उत्पाद बेचने को कहा है। कंपनी के एमडी आरएस सोढी ने कहा, ‘हमने कीमत बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन नए एमआरपी वाले प्रॉडक्ट्स कंज्यूमर्स तक पहुंचने में कुछ समय लगेगा।’

पाठ्य सामग्री और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते निजी स्कूल

0

लोक अदालत ने आदेश में लिखा कि किसी भी विद्यार्थी को स्कूल का प्रशासन सामग्री अपने यहां से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

कोटा। विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने और फीस निर्धारित करने की याचिका पर मंगलवार को कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने आदेश दिया है कि कोई भी निजी स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को स्कूल अन्य किसी भी एजेंसी से स्कूल की गणवेश, बैग पाठ्य पुस्तकें क्रय करने के लिए बाध्य नहीं करें।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि विद्यार्थियों को यह स्वतंत्रता दे कि वे अपने स्तर पर अच्छी क्वालिटी का ड्रेस, बैग पाठ्य पुस्तकें जहां पर उपलब्ध हों, वहीं से क्रय करें। यह आदेश स्थायी लोक अदालत ने मंगलवार को वकील लोकेश कुमार सैनी की याचिका पर कलेक्टर और माध्यमिक प्रारंभिक शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए।

लोक अदालत ने आदेश में लिखा कि किसी भी विद्यार्थी को स्कूल का प्रशासन सामग्री अपने यहां से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। स्कूल की ड्रेस का रंग डिजाइन तय करने का काम स्कूल प्रशासन का होता है। किंतु, ड्रेस, बैग उपलब्ध करवाना उचित नहीं है।

वकील लोकेश कुमार सैनी ने 7 अप्रैल को स्थायी लोक अदालत में याचिका पेश की थी। इसमें कलेक्टर, माध्यमिक और प्रारंभिक जिला शिक्षा अधिकारी और सीबीएसई सिटी कॉर्डिनेटर को पार्टी बनाया था। इस पर कोर्ट ने सभी को जवाब देने के आदेश दिए थे। इस पर सभी पक्षों ने जवाब पेश कर दिया।