Saturday, July 11, 2026
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शेयर बाजार 94 अंक बढ़ कर 33,452 पर बंद

मुंबई। शेयर बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 94 अंक चढ़कर 33,452 पर और निफ्टी 21 अकं बढ़तकर 10,320 पर बंद हुआ

एशियाई शेयर बाजारों के स्थिर रुख के बीच शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 154 अंक चढ़ गया। ब्रोकरों के अनुसार सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू सांस्थानिक निवेशकों की लिवाली जारी रहने से नई पूंजी का प्रवाह बना रहा। इसमें एशियाई बाजारों और वालस्टरीट दोनों ही जगह सकारात्मक रख देखा गया है।

बंबई शेयर बाजार का 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 154.01 अंक यानी 0.46% बढ़कर 33,513.91 अंक पर खुला है। पिछले तीन सत्र के कारोबार में इसमें 599.46 अंक की बढ़त देखी गई थी। इसी प्रकार नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 39 अंक यानी 0.37% सुधरकर 10,337.75 अंक पर खुला है।

अधिक उत्पादन से चीनी में 3.4 फीसदी की गिरावट

  • आमदनी घटने की वजह से स्टॉक की सीमा हटवाना चाहती हैं चीनी मिलें
  • मुंबई में एम30 चीनी के दाम 3,772 रुपये प्रति क्विंटल हैं जो हैं 22 दिसंबर, 2016 के समान
  • इस्मा ने अक्टूबर-सितंबर के चीनी सत्र के दौरान 25 प्रतिशत अधिक 2.511 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान जताया

मुंबई। इस बार गन्ना पेराई जल्द शुरू होने से चीनी के दामों में गिरावट आई है। नए सीजन के उत्पादन की शुरुआती आवक और चीनी आयात के बाद पिछले तीन महीनों के दौरान मुंबई में चीनी के दामों में 3.4 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे नीति-निर्माताओं और उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने आज कहा कि जहां एक ओर पेराई जल्द शुरू हो गई, वहीं दूसरी ओर सितंबर और अक्टूबर 2017 के त्योहारों के महीनों में भी चीनी मिलों को कमजोर खरीद का सामना करना पड़ा है। इस दौरान बिक्री कुछ कम – लगभग 41 लाख टन रही, जबकि पिछले साल इन दो महीनों में चीनी की बिक्री 42 लाख टन थी।

फिलहाल मुंबई में एम30 चीनी के दाम 3,772 रुपये प्रति क्विंटल हैं जो 22 दिसंबर, 2016 के समान हैं। जुलाई में दाम 3,905 रुपये थे, इस तरह इनमें 3.41 प्रतिशत की कमी आई है। महाराष्ट्र में मिलों के बाहर (एक्स-मिल) दाम 34-35 रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है।

उत्तर प्रदेश में यह अनुमान 35.2-36 रुपये है, जबकि पूरे देश की औसत उत्पादन लागत 37.50 रुपये है। इससे मिलों की आमदनी पर दबाव बन रहा है।

एक मिलर ने कहा कि मिलें पहले ही स्टॉक की सीमा से जूझ रही हैं और जब शुरुआती सीजन में ही चीनी उत्पादन अधिक है, तो स्टॉक की सीमा से मिलों के मुनाफे प रदबाव पड़ेगा जिससे कार्यशील पूंजी में रुकावट आएगी और किसानों के भुगतान पर भी असर पड़ेगा।

इस्मा ने अक्टूबर-सितंबर के चीनी सीजन के दौरान लगभग 25 प्रतिशत अधिक 2.511 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान जताया है।

इस्मा ने कहा कि अब जब चीनी उत्पादन वर्ष 2017-18 में चालू सीजन अधिशेष चीनी उत्पादन की दिशा में संतुलन बनाते हुए बढ़ रहा है, तो ऐसे में इस्मा ने सरकार से तत्काल प्रभाव से चीनी व्यापारियों पर स्टॉक जमा करने की सीमा हटाने का अनुरोध किया है।

स्टॉक सीमा से नकदी प्रवाह प्रभावित होगा, जो चीनी उत्पादकों के हितों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है और बहुत जल्द गन्ना किसानों को भुगतान करने की उनकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

2017-18 के सीजन का प्रारंभिक स्टॉक पिछले साल के 7.752 करोड़ टन के मुकाबले 39 लाख टन रहने का अनुमान है, लेकिन उत्पादन में 25 प्रतिशत अनुमानित वृद्धि का अर्थ होगा अधिक उत्पादन वाला साल।

इस्मा ने इस वर्ष 2.5 करोड़ टन मांग का अनुमान जताया है, जिसका मतलब है कि इस वर्ष चीनी की कोई कमी नहीं रहेगी। जैसा कि अपेक्षित था, चीनी सीजन 2017-18 के लिए पेराई पिछले सीजनों की तुलना में पहले शुरू हुई है।

15 नवंबर, 2017 को 313 चीनी मिलें पेराई कर रही थीं, जबकि 15 नवंबर, 2016 को 222 चीनी मिलें ही गन्ने की पेराई कर रही थीं। चालू सीजन के शुरुआती 45 दिनों में 13.7 लाख टन चीनी उत्पादन किया गया है, जबकि पिछले साल शुरुआती 45 दिनों में 7.67 लाख टन चीनी उत्पादन किया गया था।

चीनी के इस अधिक उत्पादन में मुख्य योगदान उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलों का है। उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने 5.67 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले साल 1.93 लाख टन उत्पादन था।

महाराष्ट्र में पिछले साल के 1.92 लाख टन चीनी उत्पादन के मुकाबले, इस साल 3.26 लाख टन उत्पादन किया जा चुका है। तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक यानी कर्नाटक ने लगभग उतनी ही मात्रा में उत्पादन किया है, जितना पिछले साल किया था।

चेक बुक बंद कर सकती है मोदी सरकार

सरकार करंसी नोटों की प्रिंटिंग पर 25 हजार और नोटों की सुरक्षा और रखरखाव पर 6 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है

नई दिल्ली। नोटबंदी ने देश की अर्थव्यस्था के साथ-साथ पेमेंट के तरीके को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था। नोटबंदी के पीछे सरकार का एक तर्क देश को लेस कैश इकॉनमी बनाना भी था।

डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए सरकार पिछले साल से कई कार्यक्रम चला रही है। इस दिशा में सरकार एक बड़ा फैसला ले सकती है, चेक बुक खत्म करने का। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य लेन-देन को पूरी तरह डिजिटल करने का है।

कन्फीड्रेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के सेक्रटरी जनरल प्रवीण खंडेवाल ने पीटीआई को बताया था, ‘इसकी पूरी संभावना है कि निकट भविष्य में सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए चेक बुक व्यवस्था को खत्म कर दे।’

खंडेवाल ने ‘डिजिटल रथ’ की लॉन्चिंग पर इसकी जानकारी दी थी। CAIT और मास्टरकार्ड मिलकर इस कार्यक्रम को चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य ट्रेडर्स को डिजिटल ट्रांजैक्शंस के तरीके बताने के साथ-साथ कैशलेस इकॉनमी को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा, ‘सरकार करंसी नोटों की प्रिंटिंग पर 25 हजार रुपये खर्च करती है और नोटों की सुरक्षा और रखरखाव पर 6 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है।

दूसरी तरफ बैंक डेबिट कार्ड पेमेंट के लिए 1 प्रतिशत और क्रेडिट कार्ड के लिए 2 प्रतिशत चार्ज करते हैं। सरकार इस प्रक्रिया में बदलाव कर बैंकों को सीधे सब्सिडी पहुंचाना चाहती है जिससे इस चार्ज को हटाया जा सके।’

चेक बुक बैन करने से कैशलेस इकॉनमी की दिशा में क्या फायदा होगा? अधिकतर व्यापारिक लेन-देन चेक के जरिए ही होता है। अभी 95 प्रतिशत ट्रांजैक्शंस कैश या चेक के जरिए होते हैं।

नोटबंदी के बाद नकद लेन-देन में कमी आई और चेक बुक का उपयोग बढ़ गया। सरकार ने इस वित्त वर्ष के अंत तक 2.5 खरब डिजिटल ट्रांजैक्शंस का टारगेट रखा है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए सरकार चेक बुक पर जल्द ही बैन लगा सकती है।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 2024 तक 33 अरब डॉलर निवेश की संभावना

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नयी दिल्ली। भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 2024 तक 33 अरब डॉलर 2145.35 अरब रुपये का निवेश आकर्षित करने की क्षमता है। उद्योग मंडल एसोचैम और शिकागो की ग्रांट थॉर्टन के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आयी है।

वर्ष 2020 तक भारत के खाद्य एवं खुदरा बाजार का आकार 31335.06 अरब रुपये 482 अरब डॉलर को छूने की उम्मीद है। वर्ष 2015 में यह 16772.71 अरब रुपये 258 अरब डॉलर था। हाल में किए गए सुधारों से यह बाजार और अधिक प्रतिस्पर्धी बना है।

अध्ययन के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण तकनीक, कौशल विकास और उपकरण के भारी निवेश की संभावना है और अगले दस सालों में भारत का कुल खाद्य उत्पादन दोगुना होने का अनुमान है।

इस प्रकार 2024 तक इस क्षेत्र में 33 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने और 90 लाख रोजगार सृजित करने की क्षमता है।

अध्ययन के अनुसार एक तरफ इस क्षेत्र में वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं। वहीं दूसरी तरफ इसे उत्पादों में वेश्विक मानकों और गुणवत्ता के अनुरुप समानता लाने की जरुरत है। साथ ही लॉजिस्टिक पर नजर, सुरक्षा, पैकेजिंग की गुणवत्ता और आपूर्ति को भी सुधारने की जरुरत है।

भारत को क्षेत्र से जुड़ी अन्य उप श्रेणियों को वेश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरुप सुधारने के लिए और जमीनी बदलाव लाने के लिए भी नीतिगत हस्तक्षेप करने की जरुरत है।

रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचेगी लग्जरी कारों की बिक्री

नई दिल्ली/मुंबई। लग्जरी कारों की बिक्री इस साल रेकॉर्ड लेवल पर पहुंच सकती है। पिछले साल नोटबंदी और डीजल बैन के चलते इन कारों की बिक्री को तगड़ा झटका लगा था।

ज्यादातर अनिश्चितताओं के दूर होने के चलते लग्जरी गाड़ियों की बिक्री मौजूदा कैलेंडर साल में डबल डिजिट से बढ़ने की उम्मीद है। यह 2015 में हासिल किए गए 36,000 यूनिट के सबसे ऊंचे आंकड़े को भी पीछे छोड़ सकती है।

इंडस्ट्री इनसाइडर्स का मानना है कि गुजरे कुछ महीनों से जारी रफ्तार अंतिम क्वॉर्टर में भी बनी रहेगी। मार्केट 40,000 यूनिट के आंकड़े पर पहुंच सकता है।

नए लॉन्च और बेहतर कंज्यूमर सेंटीमेंट के बूते लग्जरी कारों की बिक्री फर्राटा भर रही है। 2015 में लग्जरी कारों की बिक्री 13 फीसदी बढ़ी थी। इसके बाद यह करीब दो दशक में पहली बार गिरावट का शिकार हुई।

2016 में लग्जरी कारों की बिक्री करीब 8 फीसदी गिरकर 33,00 यूनिट पर आ गई। नैशनल कैपिटल रीजन  में बड़ी डीजल गाड़ियों की बिक्री पर लगे बैन, इन्फ्रा सेस लगने और नोटबंदी के चलते मार्केट पर बुरा असर पड़ा।

मर्सिडीज बेंज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर रोनाल्ड फोल्गर ने बताया कि मार्केट में स्थितियां अब स्टेबल हैं और कंपनी मजबूत आंकड़ों के साथ यह साल पूरा होने की उम्मीद कर रही है।

फोल्गर ने कहा, ‘यह भी बेहद मुश्किल साल था। कुछ नोटबंदी का असर रहा और जीएसटी को लेकर चली आशंकाओं ने भी इस पर असर डाला।

हालांकि अगर सबकुछ हमारी योजनाओं के मुताबिक हुआ तो हम पिछले साल के मुकाबले इस साल अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रहेंगे।’

कंपनी ने 2017 में अब तक भारत में 12 लॉन्च किए हैं। इससे कंपनी को करीब 20 फीसदी सेल्स बढ़ाने में मदद मिली है। साल के शुरुआती नौ महीनों में मर्सिडीज की बिक्री बढ़कर 11,869 यूनिट पर पहुंच गई है।

प्रतिस्पर्धी बीएमडब्ल्यू ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। इस साल सितंबर तक कंपनी की बिक्री 17.3 फीसदी बढ़कर 7,138 यूनिट पर पहुंच गई है।

इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, इस साल जनवरी से सितंबर तक देश में करीब 30,000 लग्जरी कारों की बिक्री हुई है। स्वीडन की लग्जरी कार कंपनी वॉल्वो की सेल्स 2017 में 25 फीसदी बढ़कर 2,000 यूनिट्स पर पहुंच सकती है। 

के मैनेजिंग डायरेक्टर चार्ल्स फ्रंप ने कहा, ‘इस साल हमारी ग्रोथ अभी तक हमारी योजनाओं के मुताबिक रही है।

फेस्टिव सीजन हमारी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन हमें उम्मीद है कि दिसंबर की सेल्स से हम 2017 के अंत तक 2,000 यूनिट्स बेचने के लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहेंगे। इससे हमारी ग्रोथ 25 फीसदी सालाना पर पहुंच जाएगी।’

एक प्रमुख लग्जरी कार कंपनी के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘अगर सितंबर में सेस से बिक्री पर असर नहीं पड़ा होता तो ग्रोथ कहीं ज्यादा मजबूत होती।’

खपत वाले राज्यों में भी कम रहा जीएसटी संग्रह

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नई दिल्ली । वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से खपत वाले राज्यों में राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक के आंकड़े कुछ और ही तस्वीर दिखा रहे हैं।

शुरुआती महीनों में जीएसटी के संग्रह का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि न सिर्फ उत्पादक, बल्कि उपभोग करने वाले राज्यों में भी जीएसटी संग्रह अनुमान से कम रहा है।

माना जा रहा है कि अमल में खामियों के चलते कारोबारियों को हो रही दिक्कतों के चलते ही जीएसटी संग्रह कम रहा है।जीएसटी काउंसिल के सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर में सिर्फ दिल्ली को छोड़ बाकी सभी राज्यों में कर संग्रह पहले के अनुमान से 7,560 करोड़ रुपये कम रहा है।

चिंताजनक बात यह है कि जिन राज्यों की आबादी अधिक है और जिन्हें खपत वाला सूबा माना जाता है, वहां भी जीएसटी का संग्रह लक्ष्य से काफी कम रहा है।

वस्तु व सेवा कर लागू होने से पहले यह दलील दी जाती थी कि इससे मैन्यूफैक्चरिंग वाले राज्यों को भले ही राजस्व में कुछ कमी हो, लेकिन उपभोग करने वाले राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में जीएसटी संग्रह अधिक रहेगा।

अक्टूबर में बिहार में जीएसटी संग्रह अनुमानित लक्ष्य से 41 प्रतिशत कम रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत था। इसी तरह केरल में लक्ष्य के मुकाबले जीएसटी संग्रह 14 प्रतिशत कम रहा।

इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और त्रिपुरा में भी अनुमानित लक्ष्य के मुकाबले जीएसटी संग्रह काफी कम रह गया।

हालांकि नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में प्रत्येक राज्य को राजस्व संग्रह में कमी की भरपाई का प्रावधान है, लेकिन यह रुझान चिंताजनक है।

लॉजिस्टिक सेक्टर को दिया इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा, अधिसूचना जारी

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने लॉजिस्टिक उद्योग को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दे दिया है। इससे अब इस क्षेत्र में कम दर और आसान शर्तों पर कर्ज लेना संभव होगा। इससे मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहन मिलेगा।

साथ ही आर्थिक विकास में भी मदद मिलेगी। कोल्ड स्टोर और वेयरहाउस की सुविधा जैसे सेक्टर लॉजिस्टिक के तहत आते हैं। देश में लॉजिस्टिक की लागत अन्य विकसित देशों की तुलना में बहुत ज्यादा है। सरकार के इस कदम का लॉजिस्टिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है।

देश में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार परिवहन व लॉजिस्टिक क्षेत्र में और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए प्रयासरत है। यह कदम इसी का हिस्सा है। इस बदलाव के लिए मौजूदा फ्रेमवर्क में संशोधन करते हुए आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने एक की है।

इसमें कहा गया है कि ढांचागत क्षेत्र का दायरा बढ़ाते हुए पहले से मौजूद परिवहन उपश्रेणी में लॉजिस्टिक को भी शामिल कर लिया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि लॉजिस्टिक की लागत ज्यादा होने से घरेलू और निर्यात बाजार में भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित होती है।

इस क्षेत्र को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने से सस्ती दर और आसान शर्तों पर लंबी अवधि के कर्ज लेना संभव होगा। इस क्षेत्र का विकास घरेलू और निर्यात बाजार में मांग को बढ़ाएगा। नतीजतन रोजगार के अवसर भी बनेंगे। इससे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को भी लाभ मिलेगा।

इंटरनेट पर किसी का एकाधिकार नहीं होने देगी सरकार

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नई दिल्ली। सरकार देश में इंटरनेट पर किसी की एकाधिकार नहीं होने देगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इकनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में यह बात कही।

अमेरिका में जिस तरह से इंटरनेट का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए हुआ और भारत ने ऐसे हालात से निपटने के लिए क्या तैयारी की है, इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘हम अभिव्यक्ति की आजादी में यकीन करते हैं, लेकिन मैं भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम इंटरनेट का दुरुपयोग नहीं होने देंगे।’

उन्होंने कहा कि ऐसे हालात से निपटने के लिए देश में कानून हैं और सरकार ‘डिजिटल इनक्लूजन’ की हिमायती है। हालांकि, सरकार ‘डिजिटल मोनोपॉली’ को बर्दाश्त नहीं करेगी। रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘आपको फेसबुक की फ्री बेसिक्स का पूरा कॉन्सेप्ट याद होगा।

उसमें कहा गया था कि फलां चीज तक आप तभी पहुंच पाएंगे, जब आप इसे हमारे गेटवे से हासिल करेंगे। हमने उस मामले में सख्त रवैया अपनाया था।’ प्रसाद कानून मंत्री भी हैं। वहीं, देश में अगला लोकसभा चुनाव 2019 के मध्य में होना है।

दो साल पहले टेलिकॉम रेग्युलेटर ट्राई ने डेटा सर्विसेज की मनमानी प्राइसिंग पर रोक लगा दी थी। इसमें फेसबुक फ्री बेसिक्स और एयरटेल जीरो जैसे जीरो रेटेड प्लान भी शामिल थे। हालांकि, उस वक्त फेसबुक ने अपने प्रोग्राम के पक्ष में काफी समर्थन जुटाया था। वह टेलिकॉम कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करके इसके जरिये मुफ्त में बेसिक इंटरनेट सर्विस देना चाहती थी।

अमेरिका चुनाव का इंटरनेट कनेक्शन
दरअसल, अमेरिका में 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने के आरोप लगे हैं। इस मामले में अमेरिकी सरकार ने अब सोशल मीडिया और इंटरनेट कंपनियों से जानकारी मांगी है और वह इंटरनेट कंपनियों पर फ्रेश कंट्रोल के बारे में विचार कर रही है।

ऐपल से बातचीत जारी
प्रसाद ने बताया कि ऐपल को भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने के लिए मनाया जा रहा है और इस मामले में उसके साथ बातचीत चल रही है।

आईफोन बनाने वाली कंपनी ने इसके लिए भारत से कई रियायतें मांगी थीं, जिसे खारिज कर दिया गया था। प्रसाद ने कहा कि इसके बावजूद कई लेवल पर कंपनी के साथ बात चल रही है।

उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ ऐपल से एक बात कहना चाहता हूं कि भारत एक मजबूत डिजिटल मार्केट है। यह तेजी से बढ़ रहा है और यह मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र है। इसलिए ऐपल को भारतीय बाजार को अच्छी तरह समझना चाहिए। उसे देखना चाहिए कि यहां कितनी संभावना है।’

एनडीए सरकार के कार्यकाल में करीब 100 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स देश में लगी हैं। सरकार की फेवरेबल नीतियों की वजह से देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग अट्रैक्टिव हो गई है।

प्रसाद ने कहा कि हम डिजिटल इनक्लूजन पर काम कर रहे हैं। हमारा मानना है कि टेक्नॉलजी सस्ती होनी चाहिए। हमने आधार के जरिए ऐसा कर दिखाया है, जहां बिना किसी लागत के 6 करोड़ से अधिक ऑथेंटिकेशन रोज हो रहे हैं।

एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस के शेयर 7% प्रीमियम पर लिस्ट हुए

नई दिल्ली। एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों ने शेयर बाजार में कारोबार की आज अच्छी शुरुआत की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर ये शेयर 311 रुपये की दर से लिस्ट हुए।

यानी, 290 रुपये के इशू प्राइस के मुकाबले इन्हें 7.24 प्रतिशत के प्रीमियम के साथ लिस्टिंग मिली। 8,695 करोड़ रुपये के इनिशल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) की 7 से 9 नवंबर के बीच 275 से 290 रुपये के प्राइस बैंड में बिक्री हुई थी। आईपीओ को 4.89 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।

एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस देश में प्राइवेट सेक्टर की तीसरी बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है। वित्त वर्ष 2017 में इसे प्राइवेट सेक्टर प्रीमियम्स के 16.5 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा हासिल हुआ था।

इस दौरान एचडीएफसी लाइफ का रिटर्न ऑन एंबेडेड वैल्यु (आरओईवी) 21.7 प्रतिशत रहा जो प्रतिस्पर्धी कंपनी आईसीआईसीआई प्रुडेंशल से 16.5 प्रतिशत ज्यादा था।

मामूली बढ़त के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

नई दिल्ली। हफ्ते के दूसरे दिन मंगलवार को बाजार में मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में 0.25 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ कारोबार हो रहा है।

निफ्टी जहां 33 अंकों की बढ़त के साथ 10,334 पर खुला, वहीं सेंसेक्स 119 अंकों की तेजी के साथ 33,479 पर खुला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी नजर आ रही है।

बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.4 फीसदी बढ़ा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी तक मजबूत हुआ है।

बैंकिंग, ऑटो, आईटी, मेटल, फार्मा, रियल्टी, कंज्यूमर ड्युरेबल्स, पावर और ऑयल एंड गैस शेयरों में खरीदारी दिख रही है। बैंक निफ्टी 0.3 फीसदी बढ़कर 25,850 के करीब पहुंच गया है।

बाजार के टॉप गेनर्स में टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, टाटा पावर, अदानी पोर्ट्स, सिप्ला और कोटक महिंद्रा बैंक रहे, जिनके शेयर 2.25-0.9 फीसदी तक उछले हैं। व

हीं एल ऐंड टी, पावर ग्रिड, ओएनजीसी, बीपीसीएल, टीसीएस, एशियन पेंट्स और एक्सिस बैंक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 1-0.2 फीसदी तक गिरे हैं।