Saturday, July 11, 2026
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सेंसेक्स 63.37 अंकों की बढ़त के साथ खुला

नई दिल्ली। घरेलू बाजारों में बुधवार को भी अच्छी शुरुआत देखने को मिली। बुधवार को सेंसेक्स जहां 63.37 अंकों की बढ़त के साथ 33,541 पर खुला, वहीं निफ्टी 22.30 अंक चढ़ 10,349 पर खुला।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी दिख रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.15 फीसदी बढ़ा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलैकप इंडेक्स 0.5 फीसदी तक मजबूत हुआ है।

ऑटो, बैंकिंग, एफएमसीजी, मेटल, रियल्टी और कंज्यूमर ड्युरेबल्स शेयरों में खरीदारी आई है। बैंक निफ्टी 0.25 फीसदी बढ़कर 25,815 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हालांकि फार्मा शेयरों में थोड़ा दबाव नजर आ रहा है।

फिलहाल बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 125 अंक यानि 0.4 फीसदी की तेजी के साथ 33,602 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 37 अंक यानि 0.4 फीसदी की मजबूती के साथ 10,364 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

बाजार में कारोबार के इस दौरान दिग्गज शेयरों में जी एंटरटेनमेंट, अदानी पोर्ट्स, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, एचडीएफसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज ऑटो और एशियन पेंट्स 2.9-1 फीसदी तक बढ़े हैं।

हालांकि दिग्गज शेयरों में टाटा पावर, डॉ रेड्डीज, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, भारती इंफ्राटेल, एक्सिस बैंक, सन फार्मा, एचयूएल और भारती एयरटेल 1.7-0.4 फीसदी तक गिरे हैं।

भारत के साथ व्यापारिक समझौता ICJ से ज्यादा महत्वपूर्ण: ब्रिटिश मीडिया

नई दिल्ली। भारत ने इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में दलवीर भंडारी के दोबारा चुने जाने का स्वागत किया है। साथ ही कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की ओर से मिला असाधारण सहयोग देश के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।

भंडारी के दोबारा चुने जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए इसका श्रेय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके मंत्रालय के अधिकारियों के प्रयासों को दिया।

उधर, सुषमा स्वराज ने अपनी ओर से मंत्रालय की टीम की सराहना करने के दौरान यूएन प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन का भी विशेष तौर पर जिक्र किया।

ट्विटर पर उन्होंने कहा, ‘ICJ के जज के तौर पर दोबारा चुने जाने पर जस्टिस दलवीर भंडारी को बधाई। टीम-MEA द्वारा काफी प्रयास किया गया। यूएन में हमारे स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन का भी विशेष तौर पर उल्लेख करना जरूरी है।’

MEA ने एक बयान में कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा ने भारत के समर्थन में वोट दिया और जज भंडारी को सुरक्षा परिषद में सभी 15 वोट मिले जबकि यूएन महासभा में 193 में से 183 वोट मिले।

आगे कहा गया कि यूएन सदस्यों की ओर से मिला अपार सहयोग भारतीय राजनीति की मजबूत संवैधानिक सत्यनिष्ठा और भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।

मंत्रालय ने आगे कहा, ‘भारत विभिन्न मंचों पर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए जस्टिस भंडारी के कैंपेन को सहयोग कर रहा था। करीबी चुनावी मुकाबला होने के बाद यूके ने अपने कैंडिडेट का नाम वापस लेने का फैसला किया।

हम यूके के फैसले की सराहना करते हैं। हम उन सभी सरकारों को भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस चुनाव में भारत का समर्थन किया।’

अरहर-उड़द वायदा कारोबार को मंजूरी मिलने की संभावनाएं बढ़ी

मुंबई। दालों के निर्यात से प्रतिबंध हटाने के साथ ही वायदा कारोबार को मंजूरी मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। एनसीडीईएक्स चना वायदा की तरह अरहर और उड़द वायदा भी शुरू करने की मंजूरी चाहता है। एक्सचेंज अरहर और उड़द वायदा सौदों के लिए पूरी तरह तैयार भी है।

एक्सचेंज की तरफ से लगातार हो रही मांग और प्रस्तुत किए जा रहे आंकड़ों को देखते हुए सेबी इस मुद्दे पर विचार कर रहा है। सरकार की तरफ से कारोबार को मिल रहे प्रोत्साहन को देखते हुए जानकारों का मानना है कि जनवरी तक वायदा कारोबार को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।

किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिले इस उद्देश्य से आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने सभी प्रकार की दालों के निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया है। करीब एक दशक  बाद दालों के निर्यात के दरवाजे दोबारा खोलने को मंजूरी मिली तो वायदा कारोबारियों को भी अपनी मांग पूरी होने की उम्मीद जागी है।

एक दशक से अरहर (तुअर) और उड़द वायदा सौदों पर पाबंदी लगी हुई है। बाजार में कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाकर 23 जनवरी 2007 को तुअर और उड़द के वायदा सौदे बंद कर दिए गए थे। इसके बाद 18 दिसंबर 2009 को मसूर वायदा पर भी रोक लगा दी गई थी।

दलहन फसलों में चना वायदा पर भी 4 दिसंबर 2008 को रोक लगा दी गई थी जिसे 28 जुलाई 2016 को दोबारा शुरू करने की इजाजत दे दी गई। इसके बाद एनसीडीईएक्स लगातार मांग करता रहा है कि तुअर और उड़द वायदा शुरू करने की मंजूरी दी जाए।

दालों से निर्यात प्रतिबंध हटाने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए एनसीडीईएक्स ने कहा कि यह स्वागत योग्य कदम है, जब इनकी कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नीचे हैं तो निर्यात खोलना बेहतर कदम है। यह तुअर और उड़द दालों का वायदा कारोबार शुरू करने का सबसे बेहतर समय भी है।

एनसीडीईएक्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी समीर शाह ने कहा कि चना वायदा से किसानों और उद्योग को सही कीमतों की जानकारी मिल रही है। बाजार के उतार चढ़ाव को आसानी से देखा जा सकता है।

चना वायदा की तरह तुअर और उड़द वायदा भी शुरू किया जाना चाहिए। इससे लाखों किसानों को अपनी उपज के मूल्य का सही संकेत मिलेगा और उनकी कीमतों में सुधार भी होगा।

  एनसीडीईएक्स के अधिकारियों का कहना है कि जुलाई 2017 से तुअर की कीमतों में 48 फीसदी, उड़द 54 फीसदी, मूंग में 72 फीसदी तक का उतार चढ़ाव देखने को मिला, जबकि चने के दाम में घट-बढ़ महज 28 फीसदी हुई है। इससे साबित होता है कि वायदा किसानों के हित में है।

यह समझना होगा कि बाजार में कीमतें मांग और आपूर्ति से प्रभावित होती हैं, जिन्हे समझने में वायदा बाजार सहायक होता है। दाल वायदा शुरू किए जाने की मांग पर सेबी के एक अधिकारी का कहना है कि यह सही है कि जब से चना वायदा दोबारा शुरू किए जाने के बाद से अरहर और उड़द वायदा भी शुरू करने की मांग की जा रही है।

पद्‌मावती फिल्म का विरोध; दीपिका के पोस्टर पर चप्पलें मारी, फिर जलाया

कोटा। शहर में संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को जहां करणी सेना ने लोगों को जोड़ने के लिए हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की।

वहीं दूसरी ओर सर्व समाज की ओर से एरोड्रम सर्किल पर एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के पोस्टर पर चप्पलें मारी और पोस्टर में दीपिका की नाक काटकर पोस्टर को जलाया गया।

सर्व समाज ने हिम्मत सिंह के नेतृत्व में एरोड्रम सर्किल पर आतिशबाजी की और दीपिका पादुकोण द्वारा प्रचारित किसी भी प्रोडक्ट का उपयोग नहीं करने को कहा गया। राष्ट्रीय नवनिर्माण संस्थान के अध्‍यक्ष हिम्मत सिंह ने कहा कि सभी राज्यों की सरकारें इसे प्रतिबंधित करे।

दीपिका के पोस्टर पर महिलाओं ने पहले चप्पलें मारी और उसके बाद पोस्टर की नाक काटी गई। उसके बाद पोस्टर को पेट्रोल डाल आग के हवाले किया गया। प्रदर्शन में लेखक जावेद अख्तर के बयान पर कड़ा एतराज जताया और उनसे देश में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की, अन्यथा उन्हें देशछोड़ कर जाने के लिए कहा गया।

प्रदर्शन में कमल चतुर्वेदी, जितेंद्र सिंह, विशाल सिंह, श्वेतांक दीक्षित, गोविंद नायक, राहुल खंडेलवाल, अभिषेक शर्मा, निक्कू सुखवानी, महेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, कुलदीप राठौड़, राजेश वर्मा, प्रवीण भारद्वाज, दीपक यादव, अनीसा बानो, रेशमा मौजूद थीं।

 हस्ताक्षर अभियान भी चलाया
राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ओर से पद्मावती फिल्म को बैन की मांग को लेकर मंगलवार को शहर में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। इसमें शहरवासियों ने राजस्थान के इतिहास को मनोरंजन के नाम पर तोड़-मरोड़कर पेश करने के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया।

दोपहर 12 बजे से जेडीबी कॉलेज से हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई। इसमें छात्राओं ने इसे समर्थन देते हुए वाहन पर लगे बैनर पर हस्ताक्षर किए। छात्र शक्ति ने कहा कि जिस फिल्म में भारतीय संस्कृति इतिहास के तथ्यों को तोड़मोड़ कर प्रदर्शित किया जाएगा फिल्म नहीं चलने देंगे।

इसके बाद ये अभियान राजकीय महाविद्यालय, कलेक्ट्रेट चौराहा, नयापुरा चौराहा, छावनी, चौपाटी अंत में गोदावरी धाम वाहन पहुंचा। सब जगहों पर लोगों ने आगे बढ़कर बैनर पर हस्ताक्षर किए और फिल्म को नहीं चलने देने के लिए कहा।  करणी सेना प्रदेश उपाध्यक्ष मंजीत सिंह नाथावत ने कहा कि फिल्म में इतिहास को गलत तरीके से दिखाना सही नहीं है।

इस कार्यक्रम में करणी सेना की प्रदेश महासचिव नीना छापोल, महिला इकाई जिलाध्यक्ष रश्मि राठौड़, जिलाध्यक्ष निर्भय सिंह, पूजा सोलंकी, भारती सोलंकी, नेहा हाड़ा, निशु हाड़ा, प्रताप सिंह, मोहित सिंह, देवेंद्र शक्तावत, भगवान सिंह, पुष्पेंद्र गौड़, महिपाल सिंह, नागेन्द्र हाड़ा, उपेंद्र राठौड़, शिवराज सिंह आदि मौजूद थे।

फिल्म पर रोक लगाकर सीएम ने प्रदेश को जलने से बचाया : राजावत
विधायक भवानी सिंह राजावत ने कहा कि विवादास्पद फिल्म पद्मावती को लेकर केवल राजपूत समाज बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज में आक्रोश भड़क उठा था। उत्तेजित लोग पथराव आगजनी पर उतारू थे।

ऐसे में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाकर प्रदेश को आंदोलन की आग में जलने से बचा लिया। विधायक ने मुख्यमंत्री का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने जनभावनाओं का आदर करके सूझबूझ का परिचय दिया।

मोबाइल वैन्स के माध्यम से करें सिम अपग्रेड और आधार लिंक

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जयपुर। राजस्थान के ग्रामीण निवासियों के जीवन को आसान बनाने और उन्हें बेहतर सेवाएं प्रदान करने के प्रयास में वोडाफोन की दो मोबाइल वैन्स राज्य के गांवों एवं छोटे नगरों में जाकर लोगों को सिम अपग्रेड और आधार वैरिफिकेशन की सुविधाएं मुहैया करा रही हैं।

पिछले 10 महीनों में हज़ारों उपभोक्ता अपने सिम को 4 जी में अपग्रेड करने तथा वोडाफोन सिम को आधार के साथ लिंक कर चुके हैं।’’

ये मोबाइल वैन्स अब तक झुंझुनु, महापुरा, हिंगोनिया, भद्रा, फतेहपुर, बांदीकुई, मकराना, पंचपदरा, फलोदी सहित 450 से ज़्यादा गांवों में यह सुविधा उपलब्ध करा चुकी हैं और अब दूर-दराज के गांवों जैसे नचवा, कास्ली, ढोद, हिंडोंन, मनोहरपुर, किरधौली, सिंगरवत, कुरली, कुलासर, मंगलूना आदि तक पहुंचेगी।

वोडाफोन इण्डिया में राजस्थान के बिजनेस हैड अमित बेदी ने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षो से वोडाफोन ने अपने वोडाफोन सुपरनेटज्ड 4जी को सशक्त बनाने के लिए अतिरिक्त 4जी साईट्स इन्सटॉल की हैं तथा राजस्थान में बड़ी संख्या में गांवों और कस्बों तक ये सेवाएं पहुंचाई हैं।

वोडाफोन की मोबाइल वैन्स सुनिश्चित करेंगी कि 2जी, 3जी उपभोक्ता घर बैठे अपने सिम को 4जी में अपग्रेड कर वोडाफोन सुपरनेट 4जी की सेवाओं का लाभ उठा सकें।

अब आपकी प्रॉपर्टी आधार से लिंक करेगी सरकार

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की तो यह कहते हुए उनकी काफी आलोचना की गई कि ब्लैक मनी कैश नहीं अचल संपत्ति के जरिए जमा की जाती है।

हालांकि सरकार यह कहती रही है कि नोटबंदी ब्लैक मनी के खिलाफ एक कदम है और ऐसे और कई उपाय किए जाएंगे। ब्लैक मनी के खिलाफ सरकार एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है और इस बार निशाने पर प्रॉपर्टी है।

पहली बार एक केंद्रीय मंत्री ने इशारा किया है कि प्रॉपर्टी को आधार से जोड़ना अनिवार्य किया जाएगा।केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि उन्हें कोई शक नहीं है कि यह कदम उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस कदम से रियल एस्टेट से ब्लैक मनी खत्म होने के साथ बेनामी संपत्ति पर भी प्रहार होगा। उन्होंने कहा, ‘आधार को प्रॉपर्टी से जोड़ना बहुत अच्छा विचार है, लेकिन इस पर मैं घोषणा नहीं करने जा रहा हूं।

हम बैंक अकाउंट्स आदि को आधार से जोड़ रहे हैं और हम प्रॉपर्टी मार्केट के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकते हैं।’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार इशारा कर चुके हैं कि सरकार बेनामी संपत्ति पर प्रहार करेगी। आधार लिंकिंग इस मुहिम का एक हिस्सा हो सकता है।

आधार पर जोर देकर अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने की सरकार की मुहिम का तार्किक अंजाम आधार को प्रॉपर्टी से जोड़ना हो सकता है? इस सवाल के जवाब में पुरी ने कहा, ‘बिल्कुल, यह हर तरह से उसी दिशा में बढ़ रहा है। मुझे कोई शक नहीं है कि यह होगा।’

हालांकि पुरी के मुताबिक दो व्यक्तियों के बीच लेनदेन पूरी तरह पारदर्शी नहीं हो सकता, लेकिन अधिक कीमत वाले लेनदेन जैसे प्रॉपर्टी और एयर टिकट की निगरानी की जा सकती है।

कैश के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने कहा, ‘ऐसी कोई अर्थव्यवस्था नहीं जो पूरी तरह नकदी मुक्त हो, लेकिन स्थिर सिस्टम में लोगों को अधिक मात्रा में कैश लेकर चलने की जरूरत नहीं होती। हम भी इसी दिशा में बढ़ रहे हैं।’

जरूरी सेवाओं और सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए आधार लिंकिंग को अनिवार्य बनाए जाने पर काफी बहस छिड़ी हुई है। कोर्ट में कई याचिकाओं पर भी सुनवाई चल रही है।

रोजगार योजनाओं में अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश

  • जिला उद्योग केन्द्रों के कार्यों की योजनाओं के क्रियान्वयन के आधार पर रेंकिंग आधारित समीक्षा 
  • समीक्षा में डूंगरपुर, बीकानेर और बारां पहले तीन स्थानों पर रहे, वहीं बाड़मेर अंतिम स्थान पर

जयपुर । उद्योग विभाग ने पहली वार विभाग की 10 योजनाआें के क्रियान्वयन की रेंकिंग आधारित समीक्षा में समग्र रुप से डूंगरपुर, बीकानेर और बारां पहले तीन स्थानों पर रहे वहीं बाड़मेर अंतिम स्थान पर रहा।

प्रमुख शासन सचिव एमएसएमई डॉ. सुबोध अग्रवाल ने अधिकारियों को कम से कम 10 फीसदी उद्योग आधार मेमोरेंडम का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं वहीं रीको द्वारा आयोजित समस्या समाधान शिविरों में हिस्सा लेकर उद्योगों की समस्याआें के स्थानीय स्तर पर ही समाधान करने को कहा हैं।

प्रमुख सचिव डॉ. अग्रवाल मंगलवार को उद्योग भवन में आयुक्त कुंजी लाल मीणा के साथ राज्य के जिला उद्योग केन्द्रों के महाप्रबंधकों की समीक्षा बैठक ले रहे थे।

उन्होंने कहा कि एमएसएमई उद्योगों को पहचान दिलाने, प्रदेशवासियाें से रुबरु कराने और देश-दुनिया में बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्योग विभाग द्वारा लघु उद्योग भारती के साथ मिलकर आगामी 5 से 8 जनवरी, 18 तक इण्डिया इण्डस्टि्रयल फेयर का जयपुर में आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस फेयर में विभिन्न राज्योेें के 600 से अधिक उद्योगों द्वारा हिस्सा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए सीधे संवाद का महत्वपूर्ण अवसर होने से जिलों से अधिक से अधिक उद्योगों का इस फेयर में भागीदारी तय की जाए।

उद्योेग आयुक्त कुंजी लाल मीणा ने कहा कि विभागीय मोनेटरिंग व्यवस्था को मजबूत करते हुए अब प्रतिमाह 13 बिन्दुओं पर समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने प्रधानंमत्री रोजगार गारंटी योजना और भामाशाह रोजगार सृजन योजना से अधिक से अधिक युवाओं को ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने दोनों ही रोजगारपरक योजनाओं में बैंकों द्वारा ऋण वितरण में देरी पर असंतोष व्यक्त किया।

मीणा ने बताया कि रेंकिंग व्यवस्था के अनुसार पीएमएसवाई में पहले तीन स्थान पर जयपुर ग्रामीण, अलवर व जोधपुर रहा हैं वहीं भामाशाह रोजगार योजना में पाली, करौली और झालावाड़ शीर्ष पर रहे।

उन्होंने औद्योगिक प्रोत्साहन शिविरों के आयोजन, आर्टिजन परिचय पत्र जारी करने में तेजी लाने, रिप्स योजना के क्रियान्वयन, के्रता-विक्रेता सम्मेलन, जिला स्तर पर औद्योगिक मेले एवं प्रदर्शनी के आयोजन और जिला स्तरीय औद्योगिक सलाहकार समिति की नियमित बैठक आयोजित कर औद्योगिक विकास को गति देने के निर्देश दिए।

बैठक में लघु उद्योग भारती के फेयर संयोजक महेन्द्र कुमार खुराना, अतिरिक्त निदेशकों में डीसी गुप्ता, एलसी जैन, पीके जैन, संयुक्त निदेशकों में संजीव सक्सैना, अविन्द्र लढ़ढा, एसएस शाह , विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व जिला उद्योग केन्द्रों के महाप्रबंधक उपस्थित थे।

कोका कोला की विदाई के बाद थम्स-अप की एंट्री, पूरे हुए 40 साल

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नई दिल्ली। थम्सअप और लिम्का जो आज कोका कोला कंपनी के प्रोडक्ट हैं इन्हें कभी भारतीय कंपनी पार्ले ने शुरू किया था।

यह बात शायद आपके लिए चौंकाने वाली होगी कि 70 के दशक में एक समय ऐसा आया था जब देश की सरकार ने कोका कोला कंपनी के सामने ऐसी शर्त रख दी थी कि उसे भारत से अपना बिजनेस बंद करके जाना पड़ा।

कोका कोला की भारत से विदाई के साथ ही देश में थम्स-अप का जन्म हुआ था। अपनी इस स्पेशल रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि क्यों 1977 में कोका कोला को देश छोड़कर जाना पड़ा?

कैसे लिम्पा, थम्सअप और गोल्ड स्पॉट जैसे प्रोडक्ट का जन्म हुआ? कब कोका कोला ने भारत में दोबारा एंट्री की और थम्स-अप, लिम्पा जैसे प्रोडक्ट को खरीद लिया।

कोका कोला की विदाई और थम्सअप का आईडिया: साल 1977 में देश से इमरजेंसी (आपातकाल) हटाए जाने के तुरंत बाद हुए चुनाव में जॉर्ज फर्नाडीज बिहार की मुजफ्फरनगर सीट से जीत गए। इस जीत के साथ ही उन्हें मोरार जी सरकार में केंद्रीय उद्योग मंत्री बना दिया गया।

बतौर केंद्रीय मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अमेरिका की मल्टी नेशनल कंपनी आईबीएम और कोका-कोला को भारत छोड़ने का फरमान जारी कर दिया। इन दोनों कंपनियों पर निवेश संबधी नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था।

सरकार ने यह शर्त रखी थी कि कोका कोला को भारत में संचालन के लिए अपनी 60 फीसद हिस्सेदारी किसी भारतीय कंपनी को देनी होगी, लेकिन कोका कोला ने इससे इनकार कर दिया और भारत से बाहर जाने का फैसला कर लिया।

कोका जाने से पहले देश में शीतल पेय का एक बड़ा बाजार तैयार कर चुका था, जिसके जाते ही भारतीय कंपनी पार्ले ने थम्सअप को फ्लैगशिप प्रोडक्ट के तौर पर लॉन्च कर दिया। इसका साथ दो और प्रोडक्ट लिम्का (लेमन) और गोल्ड स्पॉट (ऑरेंज) को भी लॉन्च किया।

कोका कोला की जमीन पर थम्सअप ने काटा मुनाफा: कोका-कोला शीतल पेय के लिहाज से भारत में एक अच्छा खासा बाजार तैयार कर चुकी थी। इस बाजार और इस बाजार के उपभोक्ताओं को भुनाने के लिए तीन लोगों ने एक नई कंपनी की नींव रखी।

पारले कंपनी के रमेश चौहान और प्रकाश चौहान (पारले बंधु) ने कंपनी के सीईओ भानु वकील के साथ मिलकर थम्स-अप के रुप में अपना फ्लैगशिप ड्रिंक लॉन्च किया।

थम्स-अप ने बेहद कम समय में बाजार में अपनी मोनोपॉली बना ली और मार्केट शेयर में भी इजाफा कर लिया। धीरे धीरे यह लोगों के बीच एक लोकप्रिय ब्रैंड बन गया।

यह उस वक्त के घरेलू ब्रैंड, कैंपा कोला, डबल सेवन, ड्यूक और यूनाइटेड ब्रुअरीज ग्रप का मैक्डॉवल क्रश को काफी पीछे छोड़ चुका था। 1980 तक यह लगातार प्रमुख विज्ञापनदाता बना रहा, हालांकि 80 के मध्य में इसे डबल कोला से जरूर थोड़ी बहुत प्रतिस्पर्धा मिली।

कोका कोला की दोबारा एंट्री: साल 1991 में जैसे ही भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के दरवाजे खोले सबसे पहले पेप्सी ब्रैंड ने भारत में एंट्री मारी। इसके बाद पेप्सी और थम्स-अप के बीच एंडोर्समेंट्स के लिए तगड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलने लगी।

पेप्सी ने थम्स-अप को पछाड़ने के लिए जहां जूही चावला जैसे फिल्मी सितारे का सहारा लिया वहीं दूसरी तरफ थम्स-अप ने क्रिकेट में अपनी स्पांसरशिप बढ़ा दी।

थम्स-अप ने जल्द ही महाकोला नाम से 300 एमएल की नई बोतल भी बाजार में उतारी। महाकोला को छोटे कस्बों में तेजी से लोकप्रियता मिली। इसी बीच साल 1993 में एक बार फिर से कोका कोला ने इंडिया में एंट्री मारी।

जिससे मिला आइडिया उसी ने खरीद ली कंपनी: कोला कोला की एंट्री ने कोल्ड ड्रिंक्स मार्केट में प्रतिस्पर्धा को तिहरा कर दिया। कोका कोला, थम्सअप और पेप्सी तीनों एक दूसरे से मुकाबला कर रहे थे।

दिलचस्प बात यह है कि जिस कंपनी ने पारले को थम्स-अप की नीव रखने का आइडिया दिया था, पारले ने उसी कंपनी को थम्स-अप को 6 करोड़ अमेरिकी डॉलर में बेच दिया।

सोना 250 रुपये सस्ता, जानिए 10 ग्राम गोल्ड के दाम

नई दिल्ली/ कोटा । दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर वैश्विक ट्रैंड और घरेलू स्तर पर घटी मांग के चलते सोना 250 रुपये गिरकर 30450 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

इसी तरह चांदी भी 400 रुपये की गिरावट के साथ 40400 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। कीमतों में गिरावट इंडसिट्रियल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की और से कमजोर उठान के चलते देखने को मिली है।

व्यापारियों का मानना है कि लोगों का कमजोर रुझान मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर गिरावट और अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं की तुलना में डॉलर में मजबूती है। साथ ही घरेलू हाजिर बाजार में ज्वैलर्स और रिटेलर्स की ओर से मांग में कमी के वजह से भी सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

वैश्विक स्तर पर बीते सत्र में न्यूयॉर्क में सोना 1.35 फीसद की कमजोरी के साथ 1276 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर और चांदी 2.43 फीसद की कमजोरी के साथ 16.86 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है।

दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 250 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 30450 रुपये और 30300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। जानकारी के लिए बता दें कि बीते सत्र में सोने की कीमतों में 75 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी। गिन्नी, हालांकि, 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर बरकरार रही है।

चांदी तैयार 400 रुपये की कमजोरी के साथ 40400 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 505 रुपये की गिरावट के साथ 39395 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। चांदी के सिक्कों का भाव 74000 लिवाल और 75000 रुपये बिकवाल प्रति सैंकड़ा के स्तर पर स्थिर रहा है।

कोटा सर्राफा
चांदी 40000 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 30350 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35400 रुपये प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30500 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35580 रुपये प्रति तोला।