Sunday, July 12, 2026
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आय फाइनेंस का राजस्थान में 125 करोड़ के ऋण वितरण का लक्ष्य

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कोटा। वित्तीय सेवा कंपनी आय फाइनेंस ने मार्च 2018 तक राजस्थान में 125 करोड़ रुपये के ऋण वितरित करने की अपनी योजनाओं की घोषणा की है। आय फाइनेंस जयपुर, कोटा, भरतपुर, जोधपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीवर, चित्तौडगढ़़, भीलवाड़ा, पाली और अलवर में 12 शाखाओं के साथ पूरे राज्य में उपस्थित है।

एनबीएफसी ने अब तक राजस्थान में 78 करोड़ रुपये के ऋण मुहैया कराए हैं। इससे आय फाइनैंस को 7,000 ग्राहकों को वित्तीय समावेशन के दायरे में लाने में मदद मिली है।

आय फाइनेंस के कार्यकारी निदेशक विक्रम जेटली ने इन लक्ष्यों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘राजस्थान में एमएसएमई क्षेत्र ने राज्य के आर्थिक विकास में अहम योगदान दिया है और 2015 की राजस्थान एमएसएमई पॉलिसी इस क्षेत्र के विकास के लिए उपयुक्त माहौल बनाने में मददगार साबित हुई है।

आय फाइनेंस में हम सूक्ष्म और लघु उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और राजस्थान में अपनी 12 शाखाओं के जरिये हम जट्टी मेकिंग, लैक बैंगल्स, गोटा वर्क, मार्बल वर्क और डायरी क्लस्टर समेत 7000 व्यवसायियों को ऋण सुविधा पहले ही मुहैया करा चुके हैं।

कर्ज और फर्ज से ईश्वर ही बचाता है – पं. नागरजी

ब्रम्ह ज्ञान होने पर इंसान भूत नही कहलाता है, इसलिए संसार मे केवल तन लगाओ, लेकिन मन को प्रभु के चरणों मे बसने दो

अरविंद, कल्याणपुरा/कोटा। दिव्य गौसेवक संत पं. कमलकिशोर ‘नागरजी’ ने कहा कि आजकल पद और प्रतिष्ठा का बोध सबको रहता है। सांसारिक जीवन मे ‘ ये मेरा है’ हम इसी भ्रम में उलझे हुए हैं लेकिन ‘ईश्वर मेरा है’ यह कहना और समझना भूल गए।

बुधवार को कोटा- चित्तौड़ फोरलेन पर कल्याणपुरा में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे सोपान में उन्होंने कहा कि फर्ज और कर्ज से ईश्वर ही हमे बचाता है, इसलिए उसकी भक्ति से जुड़े रहो। उन्होंने कहा कि जब घर मे कुंवारी बेटी हो तो पिता को अपने फर्ज की चिंता रहती है।

इसी तरह किसान मेहनत करके भी गले तक कर्ज में डूबे रहते हैं। इससे उबरने के लिए ईश्वर को साक्षी मानकर अपने कर्म करते रहें। अपने और अपनों के कर्म का बोध अवश्य करें।

भक्तों से खचाखच भरे विराट पांडाल में उन्होंने कहा कि जीवन किसलिए मिला था और हमने कहाँ लगा दिया, हम इसका बोध करते चलें। कहीं जिसने ये जीवन दिया, उसे भूल तो नही गए।

एक प्रसंग से उन्होंने समझाया कि छोटी कैंची से बड़ी बोरी काटने लगोगे तो वह खराब हो जाएगी। पहले उसकी क्षमता देखो कितनी है।

आजकल आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर भी दिखावे में बड़े गार्डन या मैरिज हाल में शादियां हो रही हैं। यही खर्च बाद में कर्ज में बदल जाता है। हमे जो दिखता है, वो हम है नहीं, इसी कारण से इंसान उलझनों में घिर जाता है।

नींद पूरी हो न हो, सपने पूरे हो
मालवी भाषा में पूज्य नागरजी ने कहा कि गांव में कथा के बाद शांति रहती है लेकिन चुनाव के बाद सरपंच गांव में आए तो शांति भंग हो जाती है। क्योकि दूसरे को पद मिलते ही पहला इंसान भूतपूर्व हो जाता है।

लेकिन कथा में ब्रम्ह ज्ञान होने पर इंसान भूत नही कहलाता है। इसलिए संसार मे केवल तन लगाओ लेकिन मन को प्रभु के चरणों मे बसने दो।

अंत मे उन्होंने कहा कि नींद पूरी हो न हो, सपने पूरे होने चाहिए । भजन-सत्संग के सपने मन मे पालो, वो पूरे हो जाये, यही सत्कर्म है।

आधुनिक फैशन और पहनावे पर उन्होंने कहा कि कलियुग में भारतीय वेशभूषा को बचाकर रखना, ताकि हिन्दुधर्म की पहचान बनी रहे। कथा सूत्र में उन्होंने कहा कि एक लाचार और एक अबला को कभी ताने मत मारना।

पांडाल को बढ़ाया
कथा आयोजकों ने बताया कि तीसरे दिन भक्तों की संख्या बढ़ जाने से पांडाल का विस्तार किया गया। 100 बीघा भूमि पर कथा स्थल में 2 लाख वर्गफीट का विराट पांडाल महिलाओं व पुरुषों से खचाखच भरा रहा। कोटा व बारां जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रवचन सुनने पहुँचे।

मांग में कमी से तीन दिनों में 375 रुपये सस्ता हुआ सोना

नई दिल्ली/कोटा । दिल्ली के सर्राफा बाजर में लगातार तीसरे दिन बुधवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। सकारात्मक संकेतों के बावजूद ज्वैलर्स की ओर से मांग में कमी के चलते सोना 50 रुपये गिरकर 40350 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

व्यापारियों का मानना है कि घरेलू हाजिर बाजार में स्थानीय ज्वैलर्स और रिटेलर्स की ओर से कमजोर मांग के कारण सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में सकारात्मक रुख देखा गया है।

वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में सोना चौथाई फीसद की बढ़त के साथ 1283.20 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर और चांदी 0.38 फीसद की बढ़त के साथ 12 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है।

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इक्विटी बाजार में निवेशकों के बढ़ते रुझान के से भी सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली है। देश की राजधानी दिल्ली में सोना 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 50 रुपये गिरकर क्रमश: 30400 और 30250 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है।

जानकारी के लिए बता दें कि बीते दो सत्रों में सोने की कीमतों में 325 रुपये की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। गिन्नी के भाव हालांकि, 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर स्थिर रहे हैं।

सोने की तरह चांदी तौयार और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 50 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 40350 रुपये और 39345 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। 

कोटा सर्राफा
चांदी 40000 रुपये प्रति किलो ।
सोना केटबरी 30400 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35460 रुपए प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30550 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35630 रुपए प्रति तोला।

लगातार पांचवें दिन बढ़त के साथ बंद हुआ निफ़्टी और सेंसेक्स

मुंबई। शेयर बाजार में तेजी का दौर बुधवार को भी जारी रहा। बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 83.20 अंक बढ़कर 33,561.55 अंक पर और निफ्टी 15.40 अंक चढ़कर 10,342.30 पर बंद हुआ।

सांस्थानिक निवेशकों की लिवाली के चलते शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 112 अंक सुधरकर खुला। ब्रोकरों के अनुसार एशियाई बाजारों में सकारात्मक रख और वाल स्ट्रीट के रेकॉर्ड स्तर पर बंद होने का असर घरेलू बाजार पर पड़ा है।

पिछले चार सत्र के कारोबार में सेंसेक्स में 717.91 अंक की बढ़त देखी गई है। कारोबारियों के मुताबिक घरेलू सांस्थानिक निवेशकों के लिवाली जारी रखने से शेयर बाजारों को समर्थन मिला है।

जेपी ग्रुप को 31 दिसंबर तक 275 करोड़ जमा करने का आदेश

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नई दिल्ली।  दिवालिया होने की कगार पर खड़ी रियल एस्टेट कंपनी जेपी ग्रुप को 31 दिसंबर तक हर हाल में 275 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट में जमा करने पड़ेंगे।

कोर्ट ने कहा है कि ग्रुप के निदेशकों को पैसे जमा करने के लिए काफी बार कहा जा चुका है, लेकिन अभी तक कंपनी ने एक रुपया भी जमा नहीं किया है। कोर्ट ने कहा है कि मामले की अगली सुनवाई वो 10 जनवरी को करेगा। 

निदेशक, प्रमोटर नहीं बेच सकते अपनी संपत्ति
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही कहा है कि कंपनी के प्रमोटर और स्वतंत्र निदेशक पैसा जमा करने के लिए अपनी या परिवार के अन्य सदस्यों की संपत्ति को बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं बेच सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी प्राइवेट सेक्टर में पेंशन

नई दिल्ली। प्रवीण कोहली हरियाणा टूरिजम कॉर्पोरेशन से रिटायर्ड हैं। अपने 37 साल के करियर में उन्हें अपने वेतन में कभी भी उतनी अच्छी बढ़त नहीं मिली, जितनी रिटायर होने के चार साल बाद पेंशन में मिली।

1 नवंबर को कोहली की पेंशन कई गुना बढ़कर 2,372 रुपये से 30,592 रुपये हो गई। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2016 एक आदेश के बाद आया, जिसमें कोर्ट ने ईपीएफओ (एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन) को एंप्लॉसी पेंशन स्कीम (EPS) के तहत 12 याचिकाकर्ताओं की पेंशन रिवाइज करने को कहा था।

पेंशन स्कीम के 5 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं। प्राइवेट सेक्टर में सभी एंप्लॉयी अपनी बेसिक सैलरी का 12 पर्सेंट और महंगाई भत्ता ईपीएफ में जमा करता है। इसके बाद उतनी ही रकम एंप्लॉयर भी जमा करता है। एंप्लॉयर के फंड से 8.33 पर्सेंट ईपीएस के लिए जाता है।

जब लोग नौकरी छोड़ने के बाद ईपीएफ निकालते हैं तो उन्हें ईपीएस नहीं दिया जाता है। इसका भुगतान सेवा निवृत्ति के बाद ही होता है। ईपीएस योगदान पर एक सीमा भी है। वर्तमान में वेतन (बेसिक + डीए) पर सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है।

इसलिए कोई भी 15 हजार रुपये का अधिकतम 8.33 पर्सेंट ही ईपीएस के लिए जमा कर सकता है, जो 1250 रुपये बैठता है। जुलाई 2001 से सितंबर 2014 के बीच, ईपीएस योगदान की सीमा 6,500 रुपये थी। ऐसे में ईपीएस के लिए अधिकतम 541.4 रुपये का ही योगदान हो सकता है।

वहीं 2001 से पहले यह सीमा 5000 रुपये थी, जिसके मुताबिक योगदान 416.5 रुपये ही हो सकता था। अब सवाल उठता है कि कोहली की पेंशन अचानक 30 हजार रुपये से ज्यादा कैसे हो गई। इसके पीछे काफी संघर्ष भी है, जिसमें उन्होंने ईपीएस के लिए एक महत्वपूर्ण संशोधन का हवाला दिया।

2005 में मीडिया रिपोर्टों में, कई निजी ईपीएफ फंड ट्रस्टी और कर्मचारियों ने ईपीएफओ से संपर्क किया और ईपीएस योगदान पर सीमा को हटाने की मांग की और इसे पूरे वेतन पर लागू करने को कहा। ईपीएफओ ने मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रतिक्रिया 1996 के संशोधन के छह महीने के भीतर आनी चाहिए थी।

इसके बाद ईपीएफओ के खिलाफ कई हाई कोर्ट में केस दायर किए गए। 2016 तक एक हाई कोर्ट को छोड़कर ज्यादातर सभी हाई कोर्ट ने ईपीएफओ के खिलाफ फैसला दिया और कहा कि छह महीने की समयसीमा मनमानी थी और कर्मचारियों को अनुमति दी जानी चाहिए कि वे जब चाहें अपना पेंशन अंशदान बढ़ा सकें।

ऑर्डर लागू करने में एक साल लगा :केस सुप्रीम कोर्ट में गया। दो सुनवाई के बाद केस कर्मचारियों के पक्ष में आया। इसके बाद ईपीएफओ को सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को लागू करने में एक साल का समय लगा। इसके बाद नवंबर 2017 से कोहली को ज्यादा पेंशन मिलने लगी। अपनी पेंशन को 2,372 रुपये से 30,592 रुपये कराने के लिए कोहली को 15.37 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा।

यह वह रकम थी जो कोहली अपने पूरे वेतन पर ईपीएस योगदान के लिए भुगतान करना चाहते थे, लेकिन उन्हें पेंशन की एरियर के रूप में 13.23 लाख रुपये भी मिले। ऐसे में महज 2.14 लाख रुपये भुगतान करने से कोहली को अपनी पेंशन करीब कई गुना करने का मौका मिला।

5 करोड़ सदस्य अब उच्च पेंशन के पात्र : ऐसे में ईपीएफओ के सभी 5 करोड़ सदस्य अब उच्च पेंशन के लिए पात्र हैं। इसमें उन सभी लोगों को शामिल किया गया है, जो 1 सितंबर, 2014 से पहले ईपीएफओ में शामिल हुए थे। इस तारीख को ही ईपीएस ने 15,000 रुपये की कैप लगाई थी।

अब पद्मावती की जगह लेगी उस दिन सनी लियोनी

मुंबई। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती ने सिर्फ़ देश भर में ही नहीं बल्कि बॉलीवुड के ट्रेड में भी उथल-पुथल मचा रखी है। पद्मावती के टलने से आने वाली फिल्मों का सारा गणित बिगड़ गया है और इसी कारण अब फिल्मों की रिलीज़ डेट में तेज़ी से बदलाव किया जा रहे हैं। नया नाम सनी लियोनी का जुड़ा है।

बता दें कि मंगलवार को ही कपिल शर्मा की फिरंगी लेकर ख़बर आई थी कि ये फिल्म 24 नवंबर को रिलीज़ नहीं की जाएगी। फिल्म की नई डेट तो अपनी घोषित नहीं की गई है लेकिन माना जा रहा है कि फिल्म को एक या दो हफ़्ते बाद रिलीज़ किया जा सकता है। अब ताज़ा ख़बर सनी लियोनी की फिल्म से जुड़ी है।

राजीव वालिया निर्देशित ‘तेरा इंतज़ार’ की रिलीज़ डेट पहले ही 24 नवंबर को घोषित कर दी गई थी लेकिन ‘पद्मावती प्रकरण’ के बाद के हालात को देखते हुए अब फिल्म को एक दिसंबर को रिलीज़ किया जायेगा। ठीक उसी दिन जिस दिन पहले पद्मावती रिलीज़ की जाने वाली थी और बाद में उसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया।

फिल्म “तेरा इंतज़ार ” एक अमीर आदमी के एक हादसे में फंसने की कहानी पर आधारित है। फिल्म की शूटिंग मारीशस के खूबसूरत बीचेज़ पर की गई है। इस फिल्म में सनी के साथ अरबाज़ खान भी अहम् रोल में हैं। हाल ही में सनी पर फिल्माया गया गाना बार्बी गर्ल काफ़ी चर्चित हुआ था।

वैसे सेंसर बोर्ड में फिल्मों की रिलीज़ डेट को मची उथल पुथल का असर सिर्फ़ इस हफ़्ते की फिल्म पर नहीं नहीं पड़ा है। रिचा चड्ढा और उनकी गैंग स्टारर फुकरे रिटर्न्स को भी अपनी डेट बदलनी पड़ी है। ये फिल्म 15 दिसंबर को रिलीज़ होने वाली थी लेकिन अब एक हफ़्ते पहले आठ दिसंबर को आएगी।

दरअसल ये सारी उठा-पटक सिर्फ़ पद्मावती विरोध या उसके सेंसर तक दुरुस्त न पहुंच पाने के कारण नहीं है। सेंसर के जिस 68 दिनों के पहले फिल्म की सेंसर कॉपी को सब्मिट करने हवाला दिया जा रहा है वो नियम पहले से ही था।

लेकिन निर्माताओं ने साफ़ कह दिया था कि हर किसी को इतने दिन पहले अपनी फिल्म की कॉपी सेंसर को देना संभव नहीं है। इधर चेंज हो रही डेट्स, पद्मावती के हटने की वजह से ‘ खाली जगह भरो’ को पूरा करने के लिए है।

महाराष्ट्र के बजाय मध्य प्रदेश पहुंच गई ट्रेन, रेलवे की लापरवाही

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महाराष्ट्र के कोल्हापुर के लिए रवाना हुई स्पेशल ट्रेन 160 किलोमीटर गलत रूट पर चलकर मध्य प्रदेश पहुंची

कोटा/ नई दिल्ली/बानमोर। किसानों को लेकर जा रही स्पेशल ट्रेन के साथ रेलवे की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। दिल्ली से 2,500 किसानों को लेकर महाराष्ट्र के कोल्हापुर के लिए रवाना हुई स्पेशल ट्रेन 160 किलोमीटर गलत रूट पर चलकर मध्य प्रदेश पहुंच गई। यह बड़ी लापरवाही हादसे का भी सबब बन सकती थी।

ये किसान दिल्ली से स्पेशल ट्रेन पर सवार होकर महाराष्ट्र के लिए निकले थे, लेकिन इस ट्रेन ने गलत रूट ले लिया। स्पेशल ट्रेन को उत्तर प्रदेश के मथुरा से होकर कोटा, सूरत, मुंबई, पुणे के रास्ते कोल्हापुर जाना था। लेकिन, गलत सिग्नल मिलने के चलते यह गाड़ी मथुरा से आगरा, ग्वालियर होते हुए मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के बानमोर स्टेशन तक जा पहुंची।

बानमोर पहुंचने के बाद किसानों को आभास हुआ कि वह गलत रूट पर आ गए हैं। इसके बाद उन्होंने ट्रेन के ड्राइवर और स्टेशन मास्टर को इसके बारे में बताया। ट्रेन में सवार यात्री सावरकर मदनाइके ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, ‘हमारा रूट मथुरा से कोटा, सूरत, मुंबई, पुणे का था।

लेकिन, मथुरा के स्टेशन मास्टर ने मथुरा से आगरा के रूट पर ट्रेन को भेज दिया और यह 160 किलोमीटर सफर तय करके बानमोर स्टेशन तक पहुंच गई। यहां पर भी यात्रियों ने ही ट्रेन के ड्राइवर को बताया कि हम गलत रूट पर आ गए हैं। पूछने पर ड्राइवर ने बताया कि हमें इधर का सिग्नल मिला तो हम इधर ट्रेन लेकर आ गए।’

जानकारी मिलने के बाद रेलवे ने बानमोर से ट्रेन को ग्वालियर के रास्ते मथुरा के लिए रवाना कर दिया है। मथुरा से यह ट्रेन वापस कोटा, सूरत, मुंबई होते हुए कोल्हापुर जाएगी।

फिलहाल इस ट्रेन के गुरुवार सुबह 6 बजे तक कोल्हापुर पहुंचने की संभावना है। ट्रेन में सवार एक अन्य यात्री महावीर पाटिल ने कहा कि अच्छा हुआ कि कोई हादसा नहीं हुआ, लेकिन ऐसा कुछ हो जाता तो जिम्मेदारी किसकी होती।

खुद बनाएं यूनिवर्सल अकाउंट नंबर, ईपीएफओ सदस्यों के लिए नई सेवा शुरू

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने सदस्यों के लिए नई सेवा शुरू की है। इसके तहत कोई भी अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) जनरेट कर सकता है। हालांकि, इसके लिए मोबाइल नंबर का आधार से लिंक होना जरूरी है। 

इसके बिना यूएएन जनरेट नहीं किया जा सकेगा। गौरतलब है कि पीएफ निकालने, पीएफ ट्रांसफर करने से लेकर अन्य कामों के लिए यूएएन अनिवार्य है। नई नौकरी मिलने पर अब खुद कंपनी को ये नंबर दे सकते हैं और पीएफ अकाउंट उस कंपनी में ट्रांसफर हो जाएगा।

कैसे बनाएं यूएएन
सबसे पहले आप https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/ लिंक के जरिए ईपीएफओ के मेंबर पोर्टल पर जाएं। यहां पर डायरेक्ट यूएएन अलॉटमेंट पर क्लिक करें। क्लिक करने पर जो स्क्रीन सामने आएगी, उसमें आपको आधार नंबर डालना होगा। इसके बाद जनरेट ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) पर क्लिक करें।

ओटीपी आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। ओटीपी लिखने के बाद और डिस्क्लेमर एक्सेप्ट करने पर आपको सबमिट बटन दिखेगा। फिर सबमिट बटन पर क्लिक करें। इससे आपके आधार की डिटेल स्क्रीन पर दिखाई देगी, जैसे आपका नाम, पिता का नाम और डेट ऑफ बर्थ।

यह डेटा वेरिफाई कर स्क्रीन पर मांगी गई दूसरी डिटेल दे सकते हैं। इसके बाद रजिस्टर बटन पर क्लिक करें। रजिस्टर बटन पर क्लिक करने के साथ ही आपको यूएएन अलॉट हो जाएगा। इसका संदेश स्क्रीन पर दिखाई देगा।

यूएएन है जरूरी
सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टी और ईपीएफओ के सदस्य ए. जग्दीश्वर राव का कहना है कि मौजूदा वक्त में पीएफ से जुड़े सारे कामों के लिए यूएएन जरूरी है। अभी सिर्फ कंपनी या दफ्तर ही अपने कर्मचारी का यूएएन जनरेट कर सकता है।

कंपनियों की मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए ईपीएफओ ने यूनिफाइड पोर्टल पर डायरेक्ट यूएएन अलॉट करने की सुविधा दी है। अब कर्मचारी को यूएएन जनरेट कराने के लिए कंपनी के पास नहीं जाना होगा।

पिछले तीन माह की GSTR-3B में सुधार की सुविधा शुरू

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अक्टूबर महीने के लिए रिकॉर्ड 43 लाख लोगों ने जीएसटीआर-3बी भरा

नई दिल्ली/कोटा । जीएसटीएन ने टैक्सपेयर्स को एक बड़ी राहत देते हुए मंगवार से अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीनों के जीएसटीआर-3बी में सुधार करने की सुविधा शुरू कर दी।

हालांकि यह छूट सिर्फ ‘सबमिट’ हो चुके रिटर्न तक मिलेगी, पूरी तरह ‘फाइल्ड’ और प्रोसेस हो चुके रिटर्न में संशोधन अभी मुमकिन नहीं होगा। जीएसटी रिटर्न फाइलिंग में भी अब तेजी आई है और अक्टूबर महीने के लिए सबसे ज्यादा 43.67 लाख लोगों ने जीएसटीआर-3बी भरा है।

इंडस्ट्री की मांग पर जीएसटीएन पिछले कई हफ्तों से असेसीज को ‘रिसेट’ की सुविधा मुहैया कराने पर काम कर रहा था। अधिकारियों और टैक्स प्रोफेशनल्स ने मंगलवार से यह सुविधा शुरू होने की पुष्टि की।

जीएसटी एक्सपर्ट सुधीर हालाखंडी ने बताया, ‘यह बड़ी राहत है। अब तक अगर किसी डीलर ने इनपुट और आउटपुट के आंकड़े सबमिट कर दिए तो इसे ठीक करने का कोई प्रावधान नहीं था। इस सबमिटेड रिटर्न को फाइल करने के लिए गलत आंकड़ों से बनी डिमांड को जमा कराना होता था।

ऐसा नहीं करने पर रिटर्न फाइल न होकर सबमिट ही रह जाता था। उसके बाद आप अगला कोई रिटर्न नहीं भर पाते थे।’
जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार ने बताया कि कॉमन पोर्टल को यूजर फ्रेंडली बनाने की दिशा में लगातार कामयाबी मिल रही है। इससे रिटर्न फाइलिंग में भी तेजी आई है।

20 नवंबर तक 56 पर्सेंट लोगों ने अक्टूबर का जीएसटीआर-3बी भरा है, जो एक रिकॉर्ड है। अगस्त में 28.46 लाख और सितंबर में 39.33 लाख जीएसटीआर-3बी भरे गए थे, जबकि अक्टूबर के लिए 43.67 रिटर्न भरे गए हैं। आखिरी दिन 20 नवंबर को सबसे ज्यादा 14.76 लाख रिटर्न भरे गए जो एक नया रिकॉर्ड है।

अब तक रिटर्न भरने में पंजाब के असेसी सबसे आगे हैं। वहां करीब 73 पर्सेंट असेसीज ने अक्टूबर महीने का रिटर्न भरा है। अक्टूबर महीने का टैक्स जमा कराने की आखिरी तारीख भी 20 नवंबर थी और रिटर्न की तादाद से अनुमान लगाया जा रहा है कि इस महीने रेवेन्यू पिछले तीन महीनों के मुकाबले कहीं ज्यादा रह सकता है।

सितंबर की सप्लाई से अक्टूबर में सरकार को कुल करीब 95,000 करोड़ जीएसटी मिला था। इसमें सभी मदों मे दिल्ली की हिस्सेदारी करीब 1900 करोड़ थी, जो कंपनसेशन लॉ के तहत मंथली रेवेन्यू लॉस की सीमा से ज्यादा है। अभी तक ज्यादातर राज्य अपने रेवेन्यू लॉस की सीमा से नीचे चल रहे हैं। अक्टूबर में हुई फेस्टिव से सबसे सबसे ज्यादा टैक्स आने का अनुमान है।

जीएसटी रिटर्न को सरल बनाने पर विचार करेगी समिति
सरकार ने जीएसटीएन के चेयरमैन अजय भूषण पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार एक समिति बनाई, जो मौजूदा वित्त वर्ष में रिटर्न फाइलिंग की जरूरतों पर विचार करेगी।

इस समिति में गुजरात, कर्नाटक, पंजाब और आंध्र प्रदेश के कर आयुक्त शामिल हैं। समिति सुझाव देगी कि क्या नियमों, कानून और प्रारूप में किसी तरह के बदलाव की जरूरत है।

समिति अपनी रिपोर्ट 15 दिसंबर तक दाखिल कर देगी। पांडे ने कहा, ‘सरलीकरण के लिए हम विशेषज्ञों से चर्चा करेंगे और विभिन्न भागीदारों की राय लेंगे। इसके पीछे हमारा कुलमिलाकर उद्देश्य यही है कि मामूली कारोबार वाले या भविष्य में इस्तेमाल के लिए पंजीकरण करा

चुके लोगों के लिए जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी दाखिल करना आसान बनाया जा सके।’ जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) पोर्टल पर रिटर्न दाखिल करने वाली लगभग 40 पर्सेंट इकाइयों की कर देनदारी शून्य है।

जीएसटी परिषद ने रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया सरल बनाने के उपाय सुझाने के लिए यह समिति गठित की है। इसके साथ ही जीएसटीआर-2 व जीएसटीआर-3 की फाइलिंग को 31 मार्च तक स्थगित रखने का फैसला किया गया है।