Sunday, July 12, 2026
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क्या 24 कैरेट में भी बन सकती है गोल्ड ज्वैलरी ?

नई दिल्ली । अब जल्द ही 24 कैरेट गोल्ड के आभूषणों की हॉलमार्किंग होने लगेगी। सरकार की ओर से यह फैसला निवेशकों और आम खरीदारों दोनों के लिहाज से बेहतर कहा जा सकता है। पहले यह तकनीक भारत में संभव नहीं थी, लेकिन बदलती तकनीक के कारण अब यह संभव हैं।

हम अपनी इस रिपोर्ट में आपको एक्सपर्ट के जरिए समझाने की कोशिश करेंगे कि 24 कैरेट गोल्ड को मानक बनाना किस लिहाज से आपके लिए फायदेमंद है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट:
केडिया कमोडिटी के प्रबंध निदेशक अजय केडिया ने बताया कि 24 कैरेट की गोल्ड ज्वैलरी के लिए हॉलमार्किंग के मानक तैयार करना एक सकारात्मक कदम है। यह काफी हद तक मालप्रैक्टिसेज (सोने की अवैध खरीद-फरोख्त) को रोकने का काम करेगा।

अभी तक इन पर बीआईएस मानक न होने के कारण आभूषण निर्माता आपको इसे किसी भी दाम पर बेच सकते थे, क्योंकि उन्हें सिर्फ सेलिंग से मतलब होता है। लेकिन मानक बन जाने के कारण इसे एक वाजिब दाम पर ही बेचा जा सकेगा।

वहीं खरीदारों और निवेशकों दोनों के लिए यह काफी बेहतर माना जा रहा है, क्योंकि निवेशक जिस सोने में निवेश करेगा और खरीदार जो सोना खरीदेगा उसमें शुद्धता की पूरी गारंटी होगी।

क्या है सरकार की तैयारी: भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) 24 कैरेट सोने से बने गहनों की हालमार्किंग (गुणवत्ता प्रमाणन) के लिए मानक तैयार करेगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने बताया कि नए मानक तैयार करने के लिए बीआइएस को निर्देश दिए गए हैं।

केंद्र सरकार जल्द ही सोने की हालमार्किंग अनिवार्य कर देगी। पासवान भारतीय मानक ब्यूरो कानून 2016 के लागू होने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब थे। यह कानून इस साल 12 अक्टूबर से अमल में आया है।

भारतीय मानक ब्यूरो की महानिदेशक सुरीना राजन ने कहा कि बीआइएस यह तय करने के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा कि क्या 24 कैरेट सोने के लिए मानक बनाना संभव है। देश में चार लाख से ज्यादा ज्वैलर हैं। अभी उनके लिए जितनी भी टेस्टिंग लैब चलाई जा रही हैं, वे सभी निजी क्षेत्र में हैं। इनकी संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है

क्या है मौजूदा व्यवस्था: फिलहाल भारतीय मानक ब्यूरो 14,18 और 22 कैरेट सोने से बने आभूषणों की ही हालमार्किंग करता है। पहले 24 कैरेट सोने से आभूषण बनाना मुमकिन नहीं था। अब यह संभव हो गया है कि इसलिए इस श्रेणी की हालमार्किंग भी जरूरी हो गई है।

क्या होती है हॉलमार्किंग: सोने की शुद्धता का पहला पैमाना हॉलमार्क का निशान है। इसलिए सोना खरीदते समय हॉलमार्क के निशान वाली ज्वैलरी ही खरीदें। यह मार्क सरकारी गारंटी है। इसका निर्धारण भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) करती है।

हॉलमार्किंग योजना भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम के तहत गोल्ड संचालन, नियम और विनियम का काम करती है। हालमार्क वाली ज्वैलरी पर निशान के साथ और कुछ अंक जैसे 999, 916, 875 लिखे होते हैं। आपको बता दें कि इन्ही अंको से आपके अपने सोने की शुद्धता जांच सकते हैं।

यदि हालमार्क के निशान के साथ 999 नंबर लिखा है तो आपके सोने की ज्वैलरी 24 कैरेट की है। 999 अंक का मतलब यह है कि इसमें सोने की शुद्धता 99.9 फीसदी है। इसी तरह 23 कैरेट सोने पर 958, 22 कैरेट सोने पर 916, 21 कैरेट पर 875, 18 कैरेट पर 750 अंक लिखे होते हैं।

ब्रिटेन के सेंसर बोर्ड ने पद्मावती की रिलीज को दी मंजूरी

लंदन। इन दिनों सबसे अधिक विवादों में रही संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ जहां अब भी भारत में रिलीज के लिए सेंसर बोर्ड की मंजूरी के इंतजार में है, ब्रिटेन में इसे बिना किसी कट के पास कर दिया गया है।

ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म को 12A ऑडियंस के लिए (12 साल और उससे ऊपर की उम्र के बच्चे, वयस्क के साथ देख सकते हैं) पास कर दिया है। बता दें कि फिल्म की रिलीज की तारीख 1 दिसंबर थी। ऐसे में माना जा रहा है कि ब्रिटेन में मंजूरी मिलने के बाद इसे वहां 1 दिसंबर से दिखाई जा सकती है।

ब्रिटेन में मेकर्स ने फिल्म के इस क्लासिफिकेशन के लिए संभवतः पहले ही अप्लाई कर दिया गया था। हालांकि बाद में भारत में ‘पद्मावती’ को लेकर कुछ संगठनों के तीखे विरोध के बाद फिल्म के निर्माता भंसाली प्रॉडक्शन्स और viacom 18 पिक्चर्स द्वारा फिल्म की रिलीज़ को टालने का फैसला लिया गया।

सेंसर बोर्ड के एक सूत्र ने बताया, ‘सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म को पिछले सप्ताह भेजा गया था। जैसा कि आमतौर पर करते हैं, हमने दस्तावेजों की जांच की। फिल्ममेकर्स को यह बता दिया गया है कि उनका आवेदन अधूरा है।

उन्हें इसे दूर करना होगा और फिर इसे ठीक कर वापस भेजना होगा, जिसके बाद हम उसे फिर से देखेंगे।’ बता दें कि सेंसर बोर्ड ने आवेदन को अधूरा बताते हुए निर्माताओं को लौटा दिया गया था।

फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। संगठनों का कहना है कि ‘पद्मावती’ में सपने के एक दृश्य में अलाउद्दीन और पद्मावती को आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया है। हालांकि फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली लगातार इस बात को खारिज कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पहले ‘पद्मावती’ को 1 दिसंबर को रिलीज किया जाना था, लेकिन अब निर्माता खुद ही इस तारीख से पीछे हट चुके हैं। इस बीच प्रॉडक्शन हाउस के अधिकारियों ने पद्मावती को ब्रिटिश सेंसर बोर्ड के ग्रीन सिग्नल को एक सामान्य प्रक्रिया बताया है। उनके मुताबिक फिल्म को ब्रिटेन के अलावा कई और देशों के सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया है।

अनूठी शादी : भवानीमंडी में आज वर-वधु रक्तदान के बाद लेंगे फेरे

मिसाल – राज्य में रक्तदाता प्रदीप व किरण की पहली अनूठी शादी, जिसमें कन्यादान से पहले होगा रक्तदान

अरविंद, कोटा। राज्य में संभवतः यह पहला विवाह है जिसमें वर-वधु गुरूवार को विवाह बंधन में बंधने से पहले बारातियों, रिश्तेदारों एवं परिचितों के साथ रक्तदान कर सेवा का नया अध्याय रचेंगे।

झालवाड़ जिले में रक्तदाता समूह से जुडे़ युवा प्रदीप राठौर डूंगरगांव की किरण राठौर के साथ पहले संयुक्त रक्तदान करेंगे, उसके बाद रात्रि में पाणिग्रहण समारोह में फेरे लेंगे।

एमए बीएड शिक्षित प्रदीप ने बताया कि रिश्ता तय होने के बाद दोनों ने निश्चय किया कि शादी में किसी जरूरतमंद को जीवनदान देने जैसा पुण्यकार्य अवश्य करेंगे। वधू किरण बीए पास है और पहली बार रक्तदान से दाम्पत्य जीवन की शुरूआत करेगी।

आरटीएम से रिटायर्ड पिता कामरेड श्यामलाल राठौर ने बताया कि बेटे के विवाहोत्सव में गुरूवार सुबह 10 बजे से सेठ सीताराम धर्मशाला में लगभग 3 हजार लोगों का सामूहिक भोज होगा।

उसके पश्चात् 3 बजे से रक्तदाता समूह द्वारा रक्तदान शिविर में बारातियों, रिश्तेदारों व ईष्टमित्रों सहित 101 से अधिक मेहमान स्वैच्छिक रक्तदान कर इस विवाह समारोह को एतिहासिक बनाएंगे

10 बार रक्तदान
परिवार में चार भाई-बहनों में सबसे छोटे प्रदीप ने एक वर्ष में 10 बार बी-पॉजिटिव रक्तदान किया। झालावाड़ जिले में 6 माह पूर्व डेंगू प्रकोप के दौरान वे सबसे पहले एसडीपी रक्त देने वाले डोनर बने। मां चंद्रकांता ने वर-वधू को इस नेक पहल के लिए आशीर्वाद दिया।

वधु किरण के पिता सुरेश राठौर टेंट हाउस के साथ खेती भी करते हैं। उन्होंने बताया कि जीवन में पहली बार विवाह के दिन कन्यादान से पहले हम बेटी को रक्तदान करते हुए देखेंगे। हमें गर्व है कि दोनों विवाह बंधन के शुभ मुहुर्त में परोपकार का मंगलकार्य करने जा रहे हैं।

रक्तदाता समूह के कॉर्डिनेटर जय गुप्ता ने बताया कि समूह के सभी रक्तवीरों में परिवार जैसा उत्साह है। पूरे राज्य से समूह के युवा सदस्य इस प्रेरक कार्य में रक्तदान करने आ रहे हैं। वे सामूहिक रक्तदान कर दिल से इस जोड़ी को दीर्घायु होने की बधाई देंगे।

सभी को ज्यादा पेंशन देने से ईपीएफओ ने किया इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 4 अक्टूबर 2016 को दिए गए फैसले के बावजूद एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) ने छूट वाली कंपनियों के कर्मचारियों को पूरे वेतन पर पेंशन से इनकार कर दिया है।

जिन कंपनियों के कर्मचारियों का फंड प्राइवेट ट्रस्ट द्वारा मैनेज किया जाता है उन्हें छूट वाली कंपनियां कहा जाता है और जिन कंपनियों का फंड ईपीएफओ मैनेज करता है, उन्हें बगैर छूट वाली कंपनी कहा जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ईपीएफओ इस बात पर राजी हो गया था कि एंप्लॉयी पेंशन स्कीम (ईपीएस) के सदस्यों को पूरे वेतन पर पेंशन देगा, इसमें ईपीएफओ ने इस बात का जिक्र नहीं किया था कि ये सभी तरह की कंपनियां होंगी या सिर्फ बगैर छूट वाली कंपनियां।

लेकिन बाद में, ईपीएफओ ने बगैर छूट वाली कंपनियों के कर्मचारियों को ही यह अवसर देने का फैसला लिया। वर्तमान में, ईपीएफओ 15,000 रुपये वेतन की सीमा के साथ ईपीएस में 8.33% योगदान ही स्वीकार करता है। पेंशन भी 15 हजार रुपये प्रति माह के वेतन पर ही दी जाती है।

यह सीमा पहले 6,500 रुपये थी। यदि पूरे वेतन पर ईपीएस में योगदान स्वीकार किया जाता है तो रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी पूरे वेतन पर ही देनी होगी। पूरे वेतन पर दी जाने वाली पेंशन 15 हजार रुपये की सीमा वाली पेंशन से कई गुना ज्यादा होगी।

फिलहाल ईपीएफओ ने पूरे वेतन पर योगदान स्वीकार नहीं करने की बात कही है। इसके पीछे ईपीएफओ ने दलील दी है कि एंप्लॉयी और एंप्लॉयर्स को तय सीमा से ज्यादा वेतन पर योगदान की जानकारी फैसले के 6 महीने के भीतर देनी चाहिए थी।

जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की 6 महीने वाली दलील को मनमाना बताते हुए इसे खत्म करने का निर्देश दिया था। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने वाले 12 लोगों में 2 छूट वाली कंपनियों से आते हैं।

8 दिसंबर 2015 को अपनी 215वीं मीटिंग में सीबीटी ने फैसला लिया था कि यदि छूट वाली कंपनियों के सदस्य तय सीमा और पूरे वेतन के योगदान के अंतर को पूरा कर दें उन्हें भी पूरे वेतन पर पेंशन दी जाएगी। यदि कोई सदस्य पहले से रिटायर हो चुका है तो उसे यह रकम ब्याज के साथ जमा करनी होगी।

सीबीटी के फैसले के बाद ईपीएफओ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के पास इसके अप्रूवल के लिए गया। इस साल 16 मार्च को अप्रूवल मिल गया। मंत्रालय से अप्रूवल मिलने के बाद ईपीएफओ ने 23 मार्च को सर्कुलर जारी कर ईपीएस सदस्यों को पूरे वेतन पर पेंशन देने की बात कही।

सर्कुलर में कहा गया था, ‘श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव के मुताबिक ईपीएस, 1995 के सदस्यों को पूरे वेतन पर पेंशन देने की बात स्वीकार कर ली है।’ सर्कुलर में फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों इसे लागू करने का निर्देश दिया।

बाद में ईपीएफओ ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया कि छूट वाली कंपनियों के सदस्यों से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ आवेदन स्वीकार न किए जाएं।

अब ईपीएफओ का तर्क है कि जिन कर्मचारियों का ईपीएस ईपीएफओ के के पास आता है, पीएफ बॉडी उनके ईपीएस खातों में अतिरिक्त रकम जमा कर देगी, लेकिन लेकिन प्राइवेट ट्रस्ट से ईपीएस अकाउंट में पैसा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। सीबीटी इस मुद्दे पर गुरुवार को बैठक करेगा। 

सेंसेक्स 33,576 और निफ्टी 10,358 पर खुला

नई दिल्ली। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मिलीजुली शुरुआत की, हालांकि बाजार में सुस्ती रही। बाजार खुलने के बाद निफ्टी 10,340 अंकों के करीब और सेंसेक्स 33,550 के आसपास कारोबार कर रहा है।

मिडकैप शेयरों में भी हल्की बिकवाली दिख रही है, जबकि स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी देखने को मिल रही है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.3 प्रतिशत बढ़ा है। पीएसयू बैंक, एफएमसीजी और ऑइल ऐंड गैस शेयरों ने बाजार पर दबाव बनाया है।

बैंक निफ्टी 0.1 प्रतिशत गिरकर 25,750 के नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी के पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

अपनी अतृप्त आकांक्षाओं का बोझ बच्चों पर न डालें : देखिए डॉ. तारे का वीडियो

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कोटा।  डॉ. गणेश तारे को प्लाज्मा भौतिकी में क्वालिटी रिसर्च और महिलाओं की शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए पिछले दिनों एपीजे अब्दुल कलाम एक्सीलेंस अवॉर्ड से नवाजा गया। इसी अवार्ड को लेकर हमारे चैनल LD NEWS ने डॉ. गणेश तारे से बातचीत की। 

उन्होंने अवार्ड को लेकर चर्चा करने से मना कर दिया। उनका कहना है कि वह पब्लिसिटी में विश्वास नहीं करते। काम में विश्वास करते हैं। परन्तु उन्होंने इस बातचीत के जरिये अभिभावकों को एक महत्वपूर्ण सन्देश दिया, जो हम आप तक पहुंचा रहे हैं। 

उनका कहना है कि “बच्चों पर अभिभावकों को कभी भी अपनी अतृप्त आकांक्षाओं को नहीं थोपना चाहिए।” डॉ. तारे की ओर से प्लाज्मा भौतिकी में किया गया शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूयार्क और बर्लिन से प्रकाशित हो चुका है।

उनकी भौतिक शास्त्र, गणित की 96 पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी है। जो NCERT के स्कूली पाठ्यक्रमों में चल रही हैं। वर्तमान में डॉ.तारे इंप्रोवाइज्ड एपेरेटस पर काम कर रहे हैं। पूरी लाइफ में इतने अवार्ड और पुरस्कार मिल चुके हैं, शायद उनका जिक्र यहाँ पर करें तो सूर्य को दीपक दिखाने के समान होगा। 

उन्होंने एक उपन्यास भी लिखा है, “पढ़े सो पंडित होय”। उनका यह उपन्यास इतना लोकप्रिय हुआ कि, दो संस्करण निकाले जा चुके हैं, अब तीसरे संस्करण की तैयारी है। 

उनके दो पुत्र कपिल और क्षितिज दोनों बॉलीवुड में हैं। क्षितिज प्लेबैक सिंगर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं,वहीं कपिल फिल्म निर्माता और निर्देशक के रूप में बॉलीवुड में जाने जाते हैं।

हाल ही में उन्होंने एक मराठी फिल्म का डायरेक्शन किया था। इसके पहले कई वेब सीरीज जारी कर चुके हैं। डॉ. तारे स्वयं भी चार ऑडियो में गीत लेखन कर चुके हैं।

इसके अलावा उनके चितन के तीन आयाम, गीत गजानन, “कोई मुझ से प्यार करे” कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। तो लीजिये उनसे बातचीत का यह वीडियो जरूर देखिए-

 

पद्‌मावती को लेकर बिरला ने संसदीय समिति के समक्ष पेश की याचिका

कोटा। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती’ से संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे। अलग-अलग राज्यों में फिल्म बैन होने के बाद अब सांसद ओम बिरला ने चित्तौड़ गढ़ के सांसद सीपी जोशी के साथ इस फिल्म को लेकर संसद की संसदीय याचिका समिति के समक्ष याचिका पेश की है।

इसमें कहा है कि राजस्थान का इतिहास गौरवशाली है। फिल्मों में विरासत संस्कृति पर किसी तरह का हमला नहीं होना चाहिए। इतिहास से जुड़ी फिल्मों में सारे तथ्यों की पड़ताल के बाद ही कोई फिल्म बनानी चाहिए।

बिरला ने कहा कि फिल्म के ट्रेलर में इतिहास से छेड़छाड़ साफ नजर आई है, ऐसे में इस फिल्म को तब तक रिलीज नहीं करने की मांग की है, जब तक इसमें जरूरी सुधार नहीं किए जाते।

उन्होंने कहा कि राजस्थान और देश के लोग मानते हैं कि पद्मावती फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़कर दिखाया गया है। राजस्थान का इतिहास शानदार रहा है। राजस्थान की एक संस्कृति रही है। हम चाहते हैं कि राजस्थान के इतिहास को फिल्म के माध्यम से विकृत नहीं किया जाए।

धर्म या शिक्षाविदों पर फिल्म बनाते समय इन चीजों के बारे में सावधानी बरतनी चाहिए। यह हमेशा सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी धर्म की भावनाएं आहत नहीं हो। इस याचिका पर 30 नवंबर को साक्ष्य है। 

पद्‌मावती फिल्म के विरोध में पोस्टर जलाया
गणेश नगर मंडल द्वारा स्वामी विवेकानंद नगर में पदमावती फिल्म का विरोध किया गया। इस दौरान फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली का पुतला भी जलाया गया। इस अवसर पर मंडल महामंत्री सियाराम वैष्णव ने फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया।

जेईई मेन के लिए ऑनलाइन आवेदन 1 दिसंबर से

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कोटा । जेईई-मेन,2018 के लिए ऑनलाइन आवेदन 1 दिसंबर से प्रारंभ होंगे। सीबीएसई वेबसाइट पर जारी सूचना बुलेटिन के अनुसार, जेईई-मेन की ऑफ लाइन परीक्षा 8 अप्रैल को तथा ऑनलाइन परीक्षा 14 एवं 15 अप्रैल को दो पारियों में होगी।

प्रवेश परीक्षा भारत के 104 शहरों के परीक्षा केंद्रों सहित 9 अन्य देशों श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, सिंगापुर, बहरीन, दुबई, मस्कट, रियाद व शरजाह में होगी।

परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन फॉर्म 1 जनवरी,2018 तक भरने होंगे। इसमे 12वीं पास कर चुके या इस वर्ष 12वीं में अध्ययनरत विद्यार्थी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।

ऑनलाइन फार्म में भी विद्यार्थियों को सुविधा के लिए आधार कार्ड नंबर देने होंगे। आधार कार्ड प्रक्रिया में होने पर आधार नंबर, नाम, जन्म तिथि व लिंग आदि की जानकारी भरनी होगी। 

25 हजार से अधिक सीटों के लिए परीक्षा
उल्लेखनीय है कि जेईई-मेन की रैंक के आधार पर देश के 31 एनआईटी, 20 ट्रिपल आईटी, 22 गवर्नमेंट वित्त पोषित संस्थानां तथा 19 अन्य उच्च तकनीकी संस्थानों की 25 हजार से अधिक बीटेक व बीआर्क सीटों पर प्रवेश दिए जाएंगे।

जेईई-मेन,2018 का पेपर-1 ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों मोड में होगा, जबकि बीआर्क के लिए पेपर-2 केवल ऑनलाइन होगा। 3 घंटे के पेपर-1 में फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स तीनां विषयों से बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे।

जबकि पेपर-2 में मैथ्स, एप्टीट्यूट टेस्ट व ड्राइंग टेस्ट पर आधारित प्रश्न होंगे। जेईई-मेन में शीर्ष रैंक से चयनित 2.24 लाख परीक्षार्थी 20 मई को जेईई-एडवांस्ड,2018 देंगे।

जेईई-मेन में ऑनलाइन फीस आधी
-ऑफलाइन परीक्षा ऑनलाइन परीक्षा
-सामान्य वर्ग आरक्षित वर्ग सामान्य वर्ग आरक्षित वर्ग
-छात्र- 1000 500 छात्र- 500 250
-छात्राएं- 500 500 छात्राएं- 250 500
-9 अन्य देशों के ब्वायज परीक्षार्थियों की फीस 2500 रूपए तथा गर्ल्स की फीस 1250 रूपए है।

नये प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करने के लिए कार्य बल का गठन

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नयी दिल्ली। अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव करने के बाद सरकार ने प्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में भी बदलाव की पहल की है। प्रत्यक्ष कर कानून की समीक्षा और एक नये प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करने के लिये बुधवार को कार्यबल का गठन किया गया। प्रस्तावित नया प्रत्यक्ष कर कानून मौजूदा आयकर अधिनियम का स्थान लेगा जो कि 1961 से लागू है।

देश की आर्थिक जरूरतों के हिसाब से 50 साल से भी ज्यादा पुराने आयकर कानून के स्थान पर नये कानून का मसौदा तैयार करने लिये छह सदस्यीय कार्यबल का आज गठन किया गया। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड सीबीडीटी के सदस्य अरविन्द मोदी इसके संयोजक होंगे।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम इस कार्यबल में स्थायी रूप से विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। प्रत्यक्ष करों के मामले में नया कानून तैयार करने की सरकार की यह पहल नरेन्द्र मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट पेश होने से पहले की गई है।

कार्यबल के अन्य सदस्यों में ई वाई के अध्यक्ष और क्षेत्रीय प्रबंध भागीदार राजीव मेमानी, चार्टर्ड एकाउटेंट गिरीश आहुजा, इक्रियर की सलाहकार मानसी केडिया, कर मामलों के जानकार अधिवक्ता मुकेश पटेल तथा सेवानिवृा भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी जी सी श्रीवास्तव शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर में आयोजित कर अधिकारियों के सालाना सम्मेलन में कहा था कि 1961 से लागू आयकर कानून को 50 वर्ष से अधिक हो चुके हैं और ऐसे में इसका मसौदा दोबारा तैयार करने की जरूरत है।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, इसी को ध्यान में रखते हुये देश की आर्थिक जरूरतों के हिसाब से प्रत्यक्ष कर कानून की समीक्षा तथा नये प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करने के लिये कार्यबल का गठन किया गया है। कार्यबल छह महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को देगा।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम स्थायी विशेष आमंत्रित होंगे। कार्यबल विभिन्न देशों की मौजूदा प्रत्यक्ष कर प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रणाली, देश की आर्थिक जरूरतें और इससे जुड़े किसी अन्य मुद्दे पर विचार कर उपयुक्त प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करेगा।

लिवाली के अभाव में तिल्ली 1000 रुपये प्रति क्विंटल टूटी

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में बुधवार को माल की कुल आवक 90 हजार बोरी की रहीं । धान की आवक 65 हजार बोरी और लहसुन की आवक 6000 हजार कट्टे की रही । आवक घटने से धान 100 रुपये प्रति क्विंटल तेज बिका। लिवाली के अभाव में सोयाबीन 50, गेहू 20, तिल्ली 1000 रुपये प्रति क्विंटल टूटी। 

गेहूं मिल 1550 से 1565 लोकवान 1600 से 1700 पीडी 1650 से 1700 टुकडी 1600 से 1750 रुपये प्रति क्विंटल।  धान सुगंधा 2000 से 2441 पूसा -1 2200 से 2800 पूसा-4 (1121) 2500 से 3175 धान (1509) 2000 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 2200 से 2831 सरसो 3200 से 3600 तिल्ली 5700 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल। मैथी 2000 से 2600 धनिया बादामी 3400 से3 850 ईगल 3600 से 4000 रंगदार 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 3300 से 3600 उडद 2400 से 3650 चना 4000 से 4600 चना काबुली 7000 से 10500 रुपये प्रति क्विंटल।

चना पेपसी 4500 से 4800 चना मौसमी 4500 से 5000 मसूर 3000 से 3300 ग्वार 2500से 3350 मक्का नई 1000 से 1200 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल। लहसुन 800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल।