Sunday, July 12, 2026
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ब्लैक फ्राइडे सेल बनता जा रहा है ऑनलाइन फेस्टिवल

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कोटा । भारत में ऑनलाइन खरीदारों में ब्लैक फ्राइडे सेल का उत्साह बढ़ रहा है। अब लोगों को फेस्टिव सीजन सेल की तरह ब्लैक फ्राइडे का भी इंतजार रहता है।

यह सेल आज यानी 24 नवंबर को कुछ ऑनलाइन स्टोर्स जैसे की- इबे, फ्लिपकार्ट, जबोंगम नाइका और अमेजन पर चल रही है। इन साइट्स पर कुछ बेहतरीन डील्स दी जा रही हैं। हालांकि, भारत में थैंक्सगिविंग का चलन नहीं है, लेकिन ब्लैक फ्राइडे सेल का चलन अब शुरू हो चुका है।

ब्लैक फ्राइडे के दौरान ऑनलाइन स्टोर्स पॉपुलर –
ब्लैक फ्राइडे की टर्म से सर्च का आंकड़ा नवम्बर 2014 से नवम्बर 2015 में 31.56 फीसद बढ़ा है। आने वाले साल यानि 2016 में यह आंकड़ा 29.97 फीसद और बढ़ गया। इसका मतलब की नवम्बर के महीने में ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले उपभोक्ता इस इवेंट का इंतजार करते हैं।
– ब्लैक फ्राइडे 2014 से अमेजन इंडिया के कुल 103.02 फीसद सर्च रहे हैं। साइट पर बुक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सर्च की लिस्ट में टॉप पर आते हैं।
– उसी दौरान (2015-2016) भारतियों ने ई-कॉमर्स वेबसाइट पेटीएम को 42.59 फीसद ज्यादा सर्च किया। उससे पहले (2014-2015) गूगल पर पेटीएम के सर्च में 70.96 फीसद का बूस्ट हुआ था।
ब्लैक फ्राइडे 2017 से ये उम्मीद –
– ब्लैक फ्राइडे की पॉपुलैरिटी इस साल 28.02 फीसद बढ़ जाएगी। 2016 में इसके 500 हजार सर्च थे। गूगल के डाटा के अनुसार इस साल इसके काम से कम 100 हजार और सर्च बढ़ेंगे।
– पेटीएम को इसमें 2017 में 14.22 फीसद अतिरिक्त बूस्ट मिलेगा।
भारत में ब्लैक फ्राइडे साल दर साल और पॉपुलर होता जा रहा है। भारत में ऑनलाइन रिटेलिंग बढ़ने से सेल को और बढ़ावा मिल रहा है। यह आंकड़ें और स्टडी गूगल सर्च के नवम्बर 2014, 2015 और 2016 के डाटा के आधार पर की गई है।

‘पद्मावती’ का विरोध : नाहरगढ़ किले की प्राचीर से लटका मिला शव

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जयपुर। फिल्म ‘पद्मावती’ का विरोध राजस्थान में खतरनाक होता जा रहा है। जयपुर के एेतिहासिक नाहरगढ़ किले की प्राचीर से शुक्रवार सुबह एक युवक का शव लटका मिला। मृतक की पहचान जयपुर निवासी चेतन सैनी के तौर पर हुई है।

स्थानीय लोगों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों ने अनाधिकारिक तौर पर बताया है कि ऐसा लग रहा है कि युवक की हत्या कर उसे यहां लटका दिया गया है और मामले को पद्मावती विवाद से जोड़कर उसे पुलिस को भटकाने की कोशिश की गई है।

आपको बता दें कि इस शव के पास कोयले से जगह-जगह पद्मावती का विरोध लिखा है। पास के पत्थरों पर लिखा गया है कि हम पुतले जलाते नहीं लटकाते हैं।

यह शव किले की प्राचीर से लटका हुआ है और इस स्थिति में है कि यहां से इसे छोड़ दिया जाए तो यह 200 फुट गहरी खाई में गिर जाएगा। गौरतलब है कि संजय लीला भंसाली की फिल्‍म ‘पद्मावती’ का देशभर में जमकर विरोध हो रहा है, जिसके चलते इस फिल्‍म की रिलीज भी टाल दी गई है।

बता दें कि फिल्म ‘पद्मावती’ की रिलीज को भारत में हालांकि स्थगित कर दिया गया है, लेकिन ब्रिटिश बोर्ड ऑफ फिल्म क्लासिफिकेशन (बीबीएफसी) ने फिल्म को मंजूरी दे दी है। विवादों में घिरी यह फिल्म ब्रिटेन में एक दिसंबर को रिलीज होगी।

लेकिन फिल्‍म ‘पद्मावती’ की रिलीज पर विदेशों में भी रोक लगाने की कवायद शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में एक नई अपील दाखिल की गई है, जिसमें ‘पद्मावती’ की रिलीज पर भारत के बाहर भी प्रतिबंध लगाने की गुहार लगई गई है। कोर्ट इस याचिका पर 28 नवंबर को सुनवाई करेगा।

भंसाली की यह पहली फिल्‍म नहीं है, जिसे विरोध का समाना करना पड़ा रहा है। बल्कि अगर दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और संजय लीला भंसाली की अभी तक की फिल्‍मों को देखें तो इस तिकड़ी की अभी तक की दोनों फिल्‍में हिट रही हैं, लेकिन रिलीज से पहले उन्‍हें जमकर विवाद का सामना करना पड़ा।

2.50 लाख से ज्यादा इनकम वालों पर नकेल कसेगी सरकार

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नई दिल्ली। सरकार अब ऐसे लोगों पर अपनी नकेल कसने जा रही है, जिनकी सालाना इनकम 2.5 लाख से अधिक है और वो आईटीआर भी फाइल नहीं करते हैं।

केंद्र सरकार देश में इनकम टैक्स देने वालों की संख्या में इजाफा करने के लिए काफी लंबे समय से जद्दोजहद कर रही है। इस वित्त वर्ष में 1 करोड़ से अधिक लोगों को टैक्स दायरे में लाने का लक्ष्य है। इनकम टैक्स विभाग और वित्त मंत्रालय इसके लिए पूरी तरह से अपनी कोशिशों में लगे हुए हैं कि टैक्स का दायरा बढ़े। 

डिपार्टमेंट भेज रहा है नोटिस
इनकम टैक्स विभाग ऐसे लोगों को नोटिस भेजकर जवाब मांग रहा है, जिनके बड़े ट्रांजेक्शन बहुत ज्यादा हुए हैं या वो देश-विदेश के महंगे होटल में रुके हैं। 

 इनकम प्रोफाइल पर नजर
इसके लिए लोगों की इनकम प्रोफाइल पर इस वक्त काफी नजर रखी जा रही है। सरकार ने आपके पैन और आधार कार्ड को बैंक अकाउंट से लिंक कर दिया है। ऐसे में अब आपकी कोई भी छोटी या बड़ी आर्थिक गतिविधियों का पता लगाने में किसी प्रकार की कोई देरी नहीं होती है। 

उदाहरण के तौर पर अगर आपने इस साल कोई कार या बाइक खरीदी है, तो उसके बारे में सरकार को आसानी से पता चल जाएगा। कार, बाइक खरीदने पर बनने वाली सेल्स इनवॉयस में आपके पैन कार्ड का उल्लेख करना जरूरी है।

अब आपने कार, बाइक को कैश पर खरीदा है और यह आपकी इनकम से मिसमैच करता हुआ पाया गया तो आईटी डिपार्टमेंट नोटिस भेजकर जवाब मांग सकता है। 

बैंक 500 और 2000 रुपये के लिखे हुए नोट लेने से मना नहीं कर सकते

नई दिल्ली। कोई भी बैंक 500 और 2000 रुपये के उन नोटों को लेने से इनकार नहीं कर सकता है जिन पर कुछ लिखा हुआ है। हालांकि ऐसे नोटों को बैंक से बदलवा नहीं सकते, यह नोट सिर्फ जमाकर्ता के व्यक्तिगत खाते में जमा किए जा सकते हैं। आरबीआई के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आर्थिक साक्षरता के तहत मेला आने वाले लोगों को जागरुक कर रहा है। यहां नए नोटों के फीचर समेत लोगों को उनके अधिकारों के प्रति साक्षर किया जा रहा है। 

प्रगति मैदान के हॉल संख्या 18 में लगे आरबीआई के स्टॉल में लोग 500 और 2000 रुपये के ऐसे नोटों की वैधता जानना चाह रहे हैं, जिन पर कुछ लिखा हुआ है। तो कोई बैंक के खिलाफ शिकायत के तरीके जानना रहा है।

आरबीआई के अधिकारियों ने बताया, ‘केंद्रीय बैंक पहले भी इस संबंध में भ्रम दूर कर चुका है। मेले के दौरान लोग हमसे 500 और 2000 रुपये के नए नोटों पर कुछ लिखा होने की स्थिति में उनकी वैधता पर सवाल कर रहे हैं।

हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि नोट पर कुछ लिखा होने या रंग लग जाने की स्थिति में भी वह वैध है। बैंक उन्हें लेने से इनकार नहीं कर सकते हैं।’

साथ ही उन्होंने कहा, हालांकि, ग्राहक ऐसे नोटों को बैंक से बदलवा नहीं सकते हैं, लेकिन ऐसे नोट वह अपने व्यक्तिगत खातों में जमा करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई स्वच्छ नोटों की नीति का अनुसरण करता है।

नए नोटों को लेकर अभी रिफंड नीति नहीं आई है इसलिए जिन नोटों पर कुछ लिखा है उन्हें बदलवाया नहीं जा सकता है पर खाते में जमा किया जा सकता है। आरबीआई ने ऐसे नोटों का लीगल टेंडर वापस नहीं लिया है।

अधिकारियों ने कहा कि इसके अलावा हम मेला देखने आने वाले लोगों को नए नोटों के फीचर के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं ताकि वह जाली नोटों की पहचान कर सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमने पैमफ्लैट्स प्रकाशित कराए हैं।

इनपर नोटों के बारे में विस्तृत जानकारी मुद्रित है जिनका अध्ययन करके लोग नोट की सही तरीके से पहचान कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि 500, 2000 और 200 रुपये के नोटों पर 17 फीचर हैं जबकि 50 रुपये के नए नोट पर 14 फीचर हैं।

उन्होंने कहा कि लोग हमारे पास शिकायतें ले कर आ रहे हैं कि दुकानदार 10 रुपये के सिक्के नहीं ले रहे हैं। हमने ऐसी शिकायतें लेकर आ रहे लोगों को स्पष्ट कर दिया है कि 10 रुपये के सभी सिक्के मान्य है।

हमने इस संबंध में अधिसूचना को मेले में लगाया हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हम मेले में डिजिटल लेन-देन के लिए भी लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

नई MRP के साथ वस्तुओं पर पुरानी कीमत लिखें, कंपनियों को आदेश

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नई दिल्ली । सरकार ने उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ी फर्मों से कहा है कि वो अपने मौजूदा स्टॉक्स में प्रिटेंड एमआरपी में यह स्पष्ट करें कि जीएसटी में हुई हालिया कटौती के बाद उसके मूल्य में कितना अंतर पड़ा है। गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक में कई वस्तुओं पर टैक्स दर में संशोधन किया गया था।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के तहत मैट्रोलॉजी डिवीजन, जो माप और लेबलिंग से संबंधित मामलों की देखरेख करता है ने कंपनियों को इस आशय से निर्देश दिया है।

विभाग की ओर से कहा गया, “मैट्रोलॉजी डिवीजन के कानूनी नियमों के संबंध में यह अनुमति दी गई है कि एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) में कितनी कटौती हुई है उसका उल्लेख करने के लिए एक अतिरिक्त स्टिकर चिपकाया जाए।”

आपको बता दें कि जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक में 200 से अधिक वस्तुओं पर कर की दरों में संशोधन किया गया था। इसमें 178 से ज्यादा वस्तुओं पर जो की 28 फीसद के स्लैब में शामिल थीं उन पर कर की दर कम की गई थी।

उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने फर्मों से कहा है कि वो प्रीपैक्ड कमोडिटी की एमआरपी पर एक अतिरिक्त स्टीकर चिपकाकर जीएसटी कटौती का उल्लेख करें।

मैट्रोलॉजी विभाग ने कहा कि वस्तुओं पर दोनों कीमतों को लगाए जाने का आदेश 31 दिसंबर तक लागू रहेगा। जीएसटी में कटौती के बाद स्टिकर पर नए एमआरपी को मुद्रित करने की अनुमति दी गई है। ग्रांट थॉर्टन इंडिया के पार्टनर धनराज भगत ने बताया, “यह उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगा और उन्हें उन पर होने वाले लाभों की जानकारी देगा।”

स्क्रीनिंग कमेटी के पास सबसे ज्यादा रेस्टोरेंट और बिल्डरों की शिकायतें

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नई दिल्ली । जीएसटी के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी विरोधी प्राधिकरण’ के गठन को एक हफ्ते का समय ही बीता है लेकिन जीएसटी की एंटी प्रोफिटियरिंग स्क्रीनिंग कमेटी के पास शिकायतें आने का सिलसिला शुरू हो चुका है।

इस कमेटी के पास अब तक दर्जनों शिकायतें आ चुकी हैं। इस कमेटी के पास जीएसटी न घटाने की सबसे ज्यादा शिकायतें रेस्टोरेंट व बिल्डरों के खिलाफ आ रही हैं।

किस लिए बनाया गया प्राधिकरण:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 16 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी विरोधी प्राधिकरण’ के गठन पर मुहर लगायी गयी थी।

इस बैठक के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा था कि इस प्राधिकरण की स्थापना इसलिए की जा रही है ताकि जीएसटी की दरों में कटौती का फायदा कम हुई कीमतों के रूप में ग्राहकों को मिले। जीएसटी की दरें घटने के बावजूद अगर किसी वस्तु या सेवा के दाम कम नहीं होते हैं तो यह प्राधिकरण कार्रवाई करेगा।

प्राधिकरण में कौन कौन सदस्य:
सरकार ने यह तय किया था कि भारत सरकार में सचिव स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी जीएसटी ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी विरोधी प्राधिकरण’ का प्रमुख होगा जबकि इसमें केंद्र और राज्यों से चार तकनीकी सदस्य होंगे।

प्रसाद ने कहा कि जीएसटी ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी विरोधी प्राधिकरण’ के गठन के लिए कदम मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को प्रकट करता है। जीएसटी की दरों में कटौती का लाभ कीमतों में कमी के रूप में ग्राहकों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी।

ब्लड पर जीएसटी का विरोध, सांसद ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र

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कोटा। ब्लड बैंकों से आमजन को दिए जाने वाले रक्त पर 12.5 फीसदी जीएसटी का विरोध करते हुए रक्तदाताओं ने गुरुवार को कोटा में सांसद ओम बिरला विधायक संदीप शर्मा को ज्ञापन दिए।

न्यू रक्तदान-महादान ग्रुप के संयोजक चेतन पांडेय ने बताया कि जीएसटी लगने के बाद ब्लड ट्रांसफ्यूजन कौंसिल ने ब्लड बैंकों से मिलने वाले रक्त की दर बढ़ा दी है। अब एक यूनिट ब्लड पर 400 रुपए ज्यादा कर दिए हैं, यानी पहले 850 रुपए देने पड़ते थे, अब 1250 रुपए देने होंगे।

राजस्थान में गरीब व्यक्ति को अस्पतालों में हर तरह की राहत मिलती है, जांच दवाइयां तक फ्री उपलब्ध है, ऐसे में ब्लड के दाम बढ़ाना किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने नए अस्पताल में आरडीपी -एसडीपी की व्यवस्था शुरू कराने के लिए ब्लड सेपरेशन मशीन कंपोनेंट तैयार करने की मशीनें भी लगाने की मांग की।

साथ ही कहा कि इस सुविधा के अभाव में नए अस्पताल में भर्ती मरीज को प्लेटलेट या एसडीपी के लिए 10 से 15 किमी दूर एमबीएस या अन्य ब्लड बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ज्ञापन के बाद सांसद ओम बिरला ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र भी लिखा और आग्रह किया कि रक्त पर लागू किए गए 12.5 फीसदी जीएसटी को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। 

कोटा में होटल के कचरे से बना रहे रसोई गैस

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हर दिन निकलने वाले गीले कचरे से बन रही 1.50 किलो बायोगैस

कोटा। अधिकतर होटल, मैस, रेस्टोरेंट से निकलने वाला खाद्य पदार्थों के कचरे का स्थायी समाधान कोटा के एक युवा होटल व्यवसायी ने तलाश लिया। इस गीले कचरे को फेंकने की बजाय वो इससे बायोगैस बना रहे है।

हर दिन निकलने वाले गीले कचरे से प्रतिदिन 1.50 किलो बायोगैस बन रही है। जिसका उपयोग वे अपने होटल में खाना बनाने में करते हैं। इस प्रयोग से हर माह ढाई कॉमर्शियल सिलेंडर के बराबर गैस की कम खरीदनी पड़ रही हैं और कचरे को फेंकने की समस्या से निजात भी मिल गया।

कोटा का ये पहला मामला है, जो कचरे की समस्या से इस तरह निजात पा रहे हैं। नयापुरा बस स्टैंड रोड स्थित इस होटल के संचालक मेहुल डागा ने ये सिस्टम अपनाया है। मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान उन्होंने ये सिस्टम चेन्नई में देखा और फिर कोटा आकर अपने होटल में इसका उपयोग किया।

मेहुल बताते हैं कि उन्होंने अपने यहां 15 किलो क्षमता का प्लांट लगा रखा है। उनके होटल से हर दिन 12 से 15 किलो कचरा खाद्य पदार्थ निकलता है। इस कचरे को पानी में घोलकर टैंक नुमा इस प्लांट में डाला जाता है।

इसमें पहले से ही बैक्टेरिया डालकर रखे जाते हैं। इस कचरे से मिथेन बनती, जिससे गैस का चूल्हा जलता है। बस कुछ सावधानी रखनी पड़ी है कि इसमें नींबू नहीं डाला जाए और खाने के अलावा और कोई कचरा नहीं हो।

गीले कचरे से गैस बनाने के साथ ही खाद भी 
मेहुल बताते हैं कि कोटा में निकलने वाले खाद्य पदार्थ के कचरे का उपयोग दो तरह से किया जा सकता है। एक तो गैस बनाई जा सकती है और दूसरी कंपोजिट खाद बनाई जा सकती है।

गैस प्लांट को छत पर भी लगाया जा सकता है। इसको लगाने में जो खर्च आता है, उसकी भरपाई 3 से 4 साल में हो जाती है और इसकी लाइफ 15 से 20 साल होती है।

नगर निगम को वापस लेना पड़ा कोचिंग संस्थानों से शुल्क का प्रस्ताव

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सफाई का पैसा कोचिंग के बच्चों से नहीं लिया जाएगा, महापौर ने कहा

कोटा। शहर की कोचिंग संस्थानों से प्रति स्टूडेंट 1 हजार रुपए लिए जाने के प्रस्ताव को नगर निगम ने वापस ले लिया है। महापौर महेश विजय ने सांसद, सभी विधायकों, आयुक्त, पार्षदों से विचार-विमर्श के बाद घोषणा की कि कोचिंग संस्थानों से शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस मुद्दे को यहीं खत्म कर दिया जाए।

इसको लेकर 3 दिन से शहर में चल रहे आंदोलन और विरोध को देखते हुए गुरुवार को सांसद ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा।  महापौर महेश विजय ने कहा कि कोचिंग से प्रति स्टूडेंट्स 1 हजार रुपए शुल्क नहीं लिया जाएगा।

राजस्व समिति की बैठक में लिए गए इस प्रस्ताव पर गुरुवार को सांसद ओम बिरला, विधायक प्रहलाद गुंजल, संदीप शर्मा, उपमहापौर सुनीता व्यास, राजस्व समिति अध्यक्ष महेश गौतम आयुक्त डॉ. विक्रम जिंदल से बात की।

सभी से विचार-विमर्श के बाद ये निर्णय लिया गया कि कोचिंग संस्थानों से प्रति स्टूडेंट 1 हजार रुपए शुल्क का प्रस्ताव लागू नहीं किया जाएगा।

अब इस मुद्दे को यहीं पर खत्म कर दिया जाए। शहर के विकास के लिए यदि कोचिंग संस्थानों से मदद की जरूरत पड़ेगी तो उनसे मदद ली जाएगी, लेकिन शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

आयुक्त डॉ. विक्रम जिंदल का कहना है कि ये कोई नया प्रस्ताव नहीं था और ही शुल्क को लागू किया गया था। पिछले वर्ष 13 फरवरी को हुई बोर्ड की बजट बैठक में भी आय के स्राेत बढ़ाने के लिए कोचिंग संस्थानों से 2 हजार रुपए प्रति स्टूडेंट्स के हिसाब से रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने का प्रस्ताव रखा गया था।

उस समय पार्षद बृजेश शर्मा नीटू ने 2 हजार रुपए शुल्क को अधिक बताया था। तब ये निर्णय हुआ था कि राजस्व समिति अधिकारी इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर दरों को संशोधित करें।

बोर्ड के इस निर्णय के बाद मेरे कार्यकाल की ये राजस्व समिति की पहली बैठक थी। इसलिए इसमें दर आधी करते हुए प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव पास करना और खारिज करना बोर्ड का काम है।

सेंसर बोर्ड की मंजूरी बिना पद्मावती विदेश में भी रिलीज नहीं

मुंबई/लंदन/जयपुर। विवादों में घिरी फिल्म पद्मावती को ब्रिटिश सेंसर बोर्ड ने बिना कोई कट लगाए मंजूरी दे दी है। ब्रिटिश बोर्ड ऑफ फिल्म क्लासिफिकेशन (बीबीएफसी) ने फिल्म को 12ए रेटिंग दी है।

इसका मतलब यह हुआ कि 12 साल से छोटे बच्चे अकेले यह फिल्म नहीं देख पाएंगे। हालांकि, फिल्म निर्माता कंपनी वायाकॉम18 के सूत्रों ने कहा कि भारत में सेंसर बोर्ड की मंजूरी से पहले फिल्म विदेशों में रिलीज नहीं होगी। पहले फिल्म 1 दिसंबर को दुनियाभर में रिलीज होनी थी।

इसके लिए करीब 50 देशों में इसके सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, इतिहास के साथ छेड़छाड़ के आरोपों पर विवाद बढ़ने और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की मंजूरी में देरी होने के चलते भारत में इसकी रिलीज की तारीख टालनी पड़ी है।

विदेशों में रिलीज रोकने के लिए 28 को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
फिल्म पद्मावती को विदेशों में रिलीज करने पर रोक लगवाने के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। एडवोकेट एमएल शर्मा की याचिका पर कोर्ट 28 नवंबर को सुनवाई करेगा।

शर्मा का दावा है कि फिल्म निर्माता की ओर से तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के लिए उन पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। इससे पहले शर्मा ने विवादित दृश्य हटवाने की याचिका दायर की थी, जो कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

रक्त से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
पद‌्मावती के विरोध में चित्तौड़ दुर्ग के प्रवेश द्वारा पाडनपोल पर गुरुवार को 15वें दिन भी धरना जारी रहा। जौहर स्मृति संस्थान के सदस्यों ने केंद्र सरकार को आगाह किया गया कि संजय लीला भंसाली ने यदि इस फिल्म का प्रदर्शन विदेश में किया तो आंदोलन उग्र किया जाएगा।

सरकार सर्व समाज सर्व धर्म की भावनाओं की कद्र करते हुए फिल्म का प्रदर्शन रोके। उधर, यूथ फॉर चेंज सोसायटी के कार्यकर्ताओं ने रक्त से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन लिखकर सौंपा।