Sunday, July 12, 2026
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भजन में ताकत लगाओगे तो करूणावतार आएंगे

 कल्याणपुरा में श्रीमद भागवत कथा के समापन पर गौसेवक संत कमलकिशोर ‘नागरजी’ के साथ हजारों श्रद्धालुओं की आंखों से बहा करूणा रस। 

अरविन्द, कोटा। जीवन में पाप दूर करने के लिए हमने साढ़े तीन करोड़ जप करने की बजाय उलटे काम हमने एक भी नहीं छोडे़। हम तीर्थ करने जाते हैं लेकिन अपने आसपास एक इंच जमीन पवित्र और निष्पाप नहीं छोड़ी।

हम गांव से हरिद्वार के लिए निकलते हैं लेकिन गाड़ी बीयर बार पर जाकर रूकती है। यह कलियुग की हवा है। इसे केवल भजन और भक्ति की ताकत से रोकना होगा, तभी करूणावतार आएंगे।

दिव्य गौसेवक संत पूज्य कमलकिशोर ‘नागरजी’ ने कल्याणपुरा में रविवार को श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम सोपान में कहा कि हमारे आचरण से तीर्थ की पवित्रता नष्ट हो रही है।

बद्रीनाथ धाम के अंतिम गांव में एक बोर्ड पर लिखा है- यहां देसी और अंग्रेजी शराब दोनो मिलती है। अब सोचिए कि बद्रीनाथ और कितने उपर जाएं। गंगा जल घर लाए लेकिन घर के पेयजल को शुद्ध नहीं छोड़ा। गंदगी फैलाकर फल, दूध, गाय सब अपवित्र कर दिए।

भजन को भोजन की तरह अपनाओ
धर्म-संस्कृति प्रदूषित होने पर उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी दोषी नहीं हैं। हम दुर्योधन जैसी संगत छोडे़ं, ईश्वर से जुड़ें। कुंभकर्ण ब्राह्मण होकर 6 माह इसलिए सोए कि भाई दुष्ब्ट थे, खाना-पीना दूषित हो जाएगा, इसलिए वे निद्रा में रहे। सुदामा नियम-संयम के पक्के थे।

वे अन्नदोष खुद में नहीं चाहते थे, इसलिए भूखे रहे। उज्जैन के संदीपनी गुरू खेतों में बचा हुआ अन्न खाते थे। उन्होंने भजन को भोजन बना डाला। शरीर छूटा लेकिन उनके वचन जिंदा हैं। हमें ऐसी कथा सुनने को मिले जहां भक्ति रसायन हो।

अर्जुन-भीष्म के पहले बाण संदेश थे
उन्होने कहा कि गायें बेच दी, वो कटने चली गई। फिर गाड़ी, मकान, जेवर और घर के कबाड़ तक बेच दिए। धर्म में जो काम शमशान में वर्जित है, वे मकानों मे हो रहे हैं। जो काम मकानों में नहीं होने चाहिए, वे मंदिरों में हो रहे हैं।

इससे बचो। ईश्वर से प्रार्थना करो कि मेरे कर्मों के अनुसार दुख देना लेकिन क्रूर या नाराज होकर नहीं अपितु दया करके, मुस्कराकर देना।

जिसने दया करके दुख दिया, वहां दुख नहीं हुआ। अर्जुन सुबह का पहला बाण पितामह भीष्म के श्रीचरणों में मारते थे, वह चरणस्पर्श था। बदले में भीष्म अर्जुन के सिरे के पास पहला बाण देते थे, वह आशीर्वाद था। दोनों की नीति और नियति अच्छी थी।

….कोई हाथ आसरे का चाहिए
खचाखच भरे शांत पांडाल में पूज्य नागरजी ने कहा कि संसार में सुख देखो तो उसके साथ एक चीज और जोड़ लेना- ‘सब कुछ मिला पर अभी वो बाकी है।’ राम-लक्ष्मण वन में नहाने के बाद गुरूवर के पास जाकर नममस्तक हो जाते थे, वे सिर पर हाथ रखकर कहते-बेटा प्रसन्न रहो।

मंदिर में ठाकुर जी के चरण से चोटी तक दर्शन कर हाथ को निहारना। जो नित्य दर्शन करते हैं, वे अंत में उस हाथ के दर्शन भी करेंगे। मोर, मुकुट, हस्तकमल में श्रीविग्रह दिख जाए तो समझ लेना वही है। भजन ‘प्रभू तेरा द्वार न छूटे रे, छूट जाए संसार, तेरा द्वार न छूटे रे..’ सुनकर भक्तों की आंखें नम हो उठीं।

कथा में करूणा रस बरसाया
कथा के अंत में उन्होंने श्री विग्रह की साक्षात अनुभूति कराते हुए बताया कि हाथ में अंगूठा जीवन का आघार शिव है, जिससे आपका आधारकार्ड भी बना। जब भी मन मे करूणा आए तो आंखों से निकला जल इस आधार को चढ़ा देना। इसी भाव से करूणावतार आते हैं। इस जीव को शिव के पास रखो, क्यांकि ये संकट मोचक हैं।

कर्पूर गौरम करूणावतारम…पाठ करते हुए उन्होने कहा कि पेट और ठेठ ये दो चिंता हमें सताती है। जिसे पेट भरने की चिंता हो, पार्वती मां बनकर उसे भर देती है। जिसे ठेठ यानी अधोगति की चिंता रहती है, उसे महाकाल पिता बनकर दूर कर देते हैं।

सार सूत्र.-
– इत्र दिखता नहीं लेकिन खुशबू बिखेरता है। परमतत्व अदृश्य होकर कथाओं में सुगंध फैलाता है।
– जिसने आपको कंचन काया दी, रोज कम से कम 108 बार तो उसका नाम लो।
– ब्रह्मनाद कथा में शब्द बनकर आता है, सबकी दीक्षा हो जाती है।
– कलियुग की उम्र कम करने के लिए हमें कथा-भक्ति का प्रभाव बढ़ाना होगा।

जीडीपी आंकड़ों से तय होगी इस हफ्ते बाजार की चाल

नई दिल्ली। पिछले हफ्ते बाजार लगातार पांच दिन ऊंचाई लेकर बंद होने में कामयाब रहा। लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों की दशा व दिशा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और पीएमआई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

साथ ही स्टेंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) के फैसले का असर भी शुरू में देखने को मिल सकता है। बीते सप्ताह बॉम्बे स्टॉक (बीएसई) का सेंसेक्स 336 अंक चढ़ा। जबकि निफ्टी 106 अंक मजबूत हुआ।

जियोजित फाइनेंसियल सर्विसेज के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि घरेलू बुनियाद बेहतर है तथा एसएंडपी द्वारा सकारात्मक रेटिंग से विदेशी निवेशकों की धारणा और सुधरेगी। रेटिंग में कोई उन्नयन नहीं होने से भारतीय रुपये की शुरुआत कमजोर हो सकती है जिसका फौरी असर शेयर बाजार के प्रदर्शन पर पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि स्टेंडर्ड एंड पुअर्स ने शुक्रवार को भारत के लिए सरकारी रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ बीबीबी माइनस पर अपरिवर्तित रखा। बीबीबी रेटिंग निवेश जोखिम के सबसे निचले दर्जे से एक पायदान ऊपर है। 

एचडीएफसी सिक्यूरिटीज में प्रमुख प्राइवेट क्लाइंट ग्रुप वी. के.शर्मा ने कहा कि शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद एसएंडपी ने भारत की रेटिंग को उसी स्तर पर रखने की घोषणा की। यह छोटा झटका है। अगर रेटिंग में सुधार होता तो बेहतर होता।

सोमवार को थोड़ा झटका लग सकता है लेकिन इससे बाजार की दिशा नहीं बदलेगी जो कि ऊंचाई की ओर जा रहा है। हालांकि, मुख्य आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने रेटिंग में कोई बदलाव नहीं किए जाने को थोड़ा अनुचित करार दिया और कहा निम्न प्रति व्यक्ति आय कर्ज चुकाने की हमारी इच्छा या क्षमता को परिलक्षित नहीं करती है।

रिजर्व बैंक के फैसले पर भी नजर
साम्को सिक्यूरिटीज के संस्थापक जिमीत मोदी ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक सहित कई घटनाएं हैं जो बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती हैं।  

उन्होंने कहा कि तापमान में गिरावट तथा चुनावी सरगर्मी जोर पकड़ने के बीच बाजार किसी सार्थक दिशा में बढ़ने से पहले थोड़ा विराम लेगा। कोटक सिक्यूरिटीज के उपाध्यक्ष पीसीजी रिसर्च संजय जोरबड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात में विधानसभा चुनाव के परिणाम बाजार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।   

ईपीएफओ घटा सकता है जमा PF पर ब्याज दर

नई दिल्ली । रिटायरमेंट फंड बॉडी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) चालू वित्त वर्ष (2017-18) के लिए भविष्य निधि जमाओं (पीएफ) पर ब्याज दर को घटा सकता है।

वित्त वर्ष 2016-17 के लिए पीएफ जमाओं पर 8.65 फीसद का ब्याज निर्धारित किया गया था, जिसका फायदा मौजूदा समय में 4.5 करोड़ सब्सक्राइबर्स को मिल रहा है। यह जानकारी श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने दी है।

अधिकारी ने बताया कि बॉन्ड्स पर निम्न आय और ईटीएफ निवेश सीधे अंशधारकों के खातों में डालने की योजना के मद्देनजर ईपीएफओ 2017-18 के लिए भविष्य निधि जमाओं पर रिटर्न की दर में कटौती कर सकता है।

अधिकारी ने बताया कि हालांकि, ईपीएफओ की ओर से मौजूदा वित्त वर्ष के लिए आय अनुमानों को गणना करना अभी बाकी है। इसी के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अंशधारकों के खाते में डाले जाने वाले ब्याज का फैसला होगा।

आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार को ईपीएफओ ने इक्विटी निवेश के मूल्यांकन और एकाउंटिंग के लिए एक एकाउंटिंग नीति को मंजूरी दी।

 ETF यूनिट्स को PF खातों में डालने का प्रस्ताव मंजूर 
रिटायरमेंट फंड बॉडी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) यूनिट्स को भविष्य निधि (पीएफ) खातों में डालने के प्रस्ताव की अनुमति दे दी है।

गौरतलब है कि मौजूदा समय में ईपीएफओ के सब्सक्राइबर्स की संख्या 4.5 करोड़ है। जानकारी के मुताबिक ईपीएफओ के सदस्य ईटीएफ यूनिट्स को अपने पीएफ खातों में अगले साल मार्च अंत तक देख पाएंगे।

ईपीएफओ की सर्वोच्च नीति निर्णायक इकाई सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) ने इक्विटी निवेश के मूल्यांकन और लेखे के लिए लेखा नीति को मंजूरी दी है। इसके लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु (आईआईएम-बेंगलुरु) के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था।

यह जानकारी केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने दी है। गंगवार जो खुद सीबीटी के प्रमुख हैं ने बताया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के निष्कर्ष को भी लेखा नीति में शामिल किया गया है।

रिवर्स चार्ज और ई-वे बिल से जुड़े प्रावधानों में किया जाएगा बदलाव

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जीएसटी काउंसिल की 24वीं बैठक जनवरी के पहले सप्ताह में दिल्ली में होगी

नई दिल्ली । शुरुआती अनुभव के आधार पर जीएसटी कानून की समीक्षा की कोशिश शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि जीएसटी के मौजूदा कानून में रिवर्स चार्ज और ई-वे बिल (इलेक्ट्रॉनिक वे बिल) से संबंधित प्रावधानों को बदला जा सकता है।

जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में इस पर विचार होने की संभावना है। ऐसा होने पर जीएसटी का अनुपालन आसान होगा। इससे कारोबारियों को मदद मिलेगी।

जीएसटी काउंसिल ने छह अक्टूबर को नई दिल्ली में हुई बैठक में जीएसटी के तीन कानूनों-सीजीएसटी, एसजीएसटी और आइजीएसटी कानूनों की समीक्षा करने के लिए एक ‘लॉ रिव्यू कमेटी’ गठित करने का फैसला किया था।

इसके बाद काउंसिल के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस समिति की मदद के लिए दो नवंबर को एक परामर्श यानी एडवाइजरी समूह बनाया।

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के सेवानिवृत्त चीफ कमिश्नर गौतम रे के नेतृत्व वाले इस छह सदस्यीय परामर्श समूह में व्यापारी नेता प्रवीण खंडेलवाल और फियो के महानिदेशक अजय सहाय भी शामिल हैं। फियो निर्यातकों का शीर्ष संगठन है। सूत्रों के अनुसार अब तक इस समूह की तीन बैठकें हो चुकी हैं।

इसमें रिफंड तथा रिटर्न की प्रक्रिया आसान बनाने, ई-वे बिल के प्रावधान को कुछ और समय तक टालने, एचएसएन (हार्मनाइज्ड सिस्टम ऑफ नोमेनक्लेचर) कोड की व्यवस्था को लागू नहीं करने की व्यापारियों की मांग चर्चा की गई।

परामर्श समूह अपनी सिफारिशें 30 नवंबर तक ‘लॉ रिव्यू कमेटी’ को सौंपेगा। इसके बाद यह समिति इन सिफारिशों को जीएसटी काउंसिल के पास भेजेगी।

सूत्रों का कहना है कि जनवरी के पहले सप्ताह में दिल्ली में होने वाली जीएसटी काउंसिल की 24वीं बैठक में इन सिफारिशों पर विचार किया जाएगा।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआइटी) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि जीएसटी में ‘रिवर्स चार्ज’ की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है।

वस्तु एवं सेवा कर कानून में यह प्रावधान जीएसटी की मूल धारणा के प्रतिकूल है। इससे न सिर्फ व्यवसाइयों को परेशानी हो रही है, बल्कि इससे सरकार को भी राजस्व का कुछ खास लाभ नहीं हो रहा है।

क्या है रिवर्स चार्ज
जब कोई पंजीकृत व्यापारी किसी अपंजीकृत डीलर से कोई सामान खरीदता है तो उस स्थिति में खरीद की राशि एक निश्चित सीमा से अधिक होने पर जीएसटी के भुगतान की जिम्मेदारी पंजीकृत व्यापारी की होती है।

हालांकि जीएसटी का जो भुगतान पंजीकृत व्यापारी करेगा, उसके एवज में वह इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा का लाभ ले सकता है। इसी तरह ई-वे बिल एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था है, जो निश्चित धनराशि से ज्यादा के किसी भी सामान को ट्रांसपोर्ट करने के लिए जरूरी है।

इसे माल भेजने से पहले जीएसटीएन पोर्टल से ऑनलाइन रूप से जनरेट करना होता है। ट्रांसपोर्ट करने वाले ट्रक के चालक के पास यह बिल हमेशा होना चाहिए।

प्रतिबंध से राजस्थान का लाइमस्टोन व सीमेंट उद्योग संकट में

नई दिल्ली/जयपुर । दिल्ली में स्मॉग के कारण पेट कोक (पेट्रोलियम कोक) पर लगाए गए प्रतिबंध से राजस्थान के लाइमस्टोन और सीमेंट सहित अन्य उद्योग संकट में पड़ गए हैं। राजस्थान सरकार इस मामले में पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायर करने की तैयारी कर रही है।

राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाल ही में दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पेट कोक व फर्नेस ऑयल के उपयोग पर पाबंदी लगा दी गई है।

पहले यह प्रतिबंध सिर्फ दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए ही था, लेकिन 17 नवंबर के आदेश के बाद चारों राज्यों में इन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे राजस्थान के लाइम स्टोन, सीमेंट, सेरामिक, टेक्सटाइल, फर्टिलाइजर उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ईंट भट्ठे भी बंद होने की कगार पर आ गए हैं।

राजस्थान में पूरे देश का करीब 12 प्रतिशत चूना पत्थर (लाइमस्टोन) निकलता है। इसकी गुणवत्ता भी बहुत अच्छी होती है। यही कारण है कि देश की सभी प्रमुख सीमेंट कंपनियों के प्लांट राजस्थान में लगे हुए हैं। पिछले तीन-चार वर्षो से इन प्लांटों में ईंधन के रूप में पेट कोक का ही इस्तेमाल हो रहा है। कुछ सीमेंट प्लांट तो पूरी तरह पेट कोक पर ही निर्भर हैं।

जानकारों के अनुसार पेट कोक कोयले के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत सस्ता है। यह कोयले के मुकाबले एक तिहाई ही काम आता है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के क्षेत्रीय निदेशक रितुराज तिवारी बताते हैं कि पिछले चार वर्ष में पेट कोक का आयात करीब चार गुना तक बढ़ गया है।

यह अमेरिका से आयात किया जाता है। वर्ष 2013 में इसका आयात 78 लाख टन था। अब बढ़कर तीन करोड़ टन हो गया है। वहीं कोयले का आयात 2015-16 में 20.40 करोड़ टन से 2016-17 में घटकर 19.20 करोड़ टन रह गया है। इसमें और कमी आ रही है। हालांकि अगर पेट कोक पर रोक लगाई जाती है तो कोयले का आयात बढ़ाना पड़ेगा।

प्रदूषण रोकने के लिए पेट कोक पर प्रतिबंध बहुत ज्यादा कारगर नहीं है, क्योंकि यह कोयले के मुकाबले सिर्फ 11 प्रतिशत अधिक ग्रीन हाउसगैस उत्सर्जित करता है। इसका विकल्प प्राकृतिक गैस हो सकती है, मगर यह बहुत महंगी है। सरकार को इसे सस्ता करना चाहिए।

सीबीडीटी ने दिये संशोधित आयकर रिटर्न की जांच के निर्देश

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नयी दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कर अधिकारियों को ऐसे मामलों की तह तक जाने को कहा है जिसमें किसी करदाता ने नोटबंदी के बाद संशोधित आयकर रिटर्न दायर किया हो। बोर्ड ने काला धन से संबंध पाये जाने पर इन मामलों में अधिक कर लगाने के भी निर्देश दिये हैं।

बोर्ड ने विभाग के सभी क्षेत्रीय प्रमुखों को 24 नवंबर को दो पन्नों का दिशानिर्देश जारी किया था। उसमें बोर्ड ने संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों वाले मामलों की जांच करने के तरीकों को स्पष्ट किया था। उसने कहा, जांच में पायी गयी बेहिसाब आय आयकर अधिनियम के तहत अधिक दर पर कर लगाने योग्य है।

 दिशानिर्देश में कर अधिकारियों को विस्तृत बिक्री दावों को पूर्ववर्ती मूल्यवर्धित कर रिटर्न के साथ मिलान करने के लिए भी कहा गया है। एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने कहा, सीबीडीटी के दिशानिर्देश के पीछे यह विचार रहा है कि संशोधित और विलंबित आयकर रिटर्न दायर करने की कानूनी सुविधा का दुरुपयोग न हो और नोटबंदी के बाद कालाधन को सफेद धन दिखाने में इसका इस्तेमाल न हो।

संघर्ष समिति ने बिजली के स्मार्ट मीटर को बताया लूट का नया तरीका

कोटा। बिजली के समार्ट मीटर को जनता से लूट का यंत्र बताते हुए तलवण्डी क्षैत्र के लोगों ने केशवपुरा चौराहे पर रविवार को मुख्य मंत्री व निजी कंपनी सीईएससी तथा केईडीएल का भारत माता की जय के नारे लगाते हुए पुतला फूका।

समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी तलवण्डी सेक्टर -4 निवासी वरिष्ठ स्मार्ट मीटर हटाओ संघर्ष समिति के संयोजक समाजसेवी केदार लाल गुप्ता, जगदीश मेहता, राजेश नामा, श्याम बिहारी त्रि़वेदी, युवा नेता अल्पेश सिंह चौहान ,मनीष शर्मा आदि की अगुवाई में स्मार्ट मीटर एवं राज्य सरकार विरोधी नारे लगाते हुए केशवपुरा चौराहे पर पुतला लेकर प्रदर्शन किया और उसमें आग लगाई। पुतले पर बिजली के बिल भी चिपकाए गए थे।

अल्पेश सिंह चौहान, बीएस चंद्रावत,रमेश चावला,रणजीत मेहरा,बनवारी पंचौली, मदन मोहन विजयवर्गीय व अशोक शर्मा,सुरेश लड्ढा आदि सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने कहा कि पुतला जलाने के पूर्व क्षैत्र के नागरिक प्रभारी मंत्री प्रभु लाल सैनी,सांसद ओम बिरला, महापौर महेश विजय के अलावा सीएससी के अधिकारियों को ज्ञापन देकर प्रदर्शन कर चुके हैं।

सांसद व जन प्रतिनिधियों के जवाब से असंतुष्ट हो कर आंदोलनात्मक कदम उठाना पड़ रहा है। चौहान ने बताया कि स्मार्ट मीटर हटने के बाद ही आंदोलन समाप्त होगा। आगे की रणनीति के लिए शीघ्र ही बैठक बुलाकर निर्णय लिया जाएगा।

हमारे शरीर में घी भोजन को पचाने का काम करता है- डॉ. नीलम

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खराब जीवन शैली से होती है डायबिटीज, अपच, ब्लड प्रेशर, मोटापा, थॉयराइड जैसी बीमारियां

कोटा। आहार विशेषज्ञ एवं क्लीनिकल न्यूट्रिशियन डॉ. नीलम खण्डेलवाल ने कहा है हमारे शरीर में घी भोजन को पचाने का काम करता है। शास्त्रों में तो कहा भी है कि कर्ज लेकर घी पियो यानि ऋणम कृत्या घृते पिवते..।

डॉ. खण्डेलवाल रविवार को बारां रोड़ पर भुवनेश बाल विद्यालय में छात्रों को संबोधित कर रहीं थी। संतुलित आहार प्रबंधन पर उन्होंने कहा कि बच्चों को दूध में बोर्नाविटा, हार्लिक्स आदि से बचना चाहिए इनमें घातक रसायन होता है। ज्यादा तला हुआ खाने से बचें, लेकिन सब्जी में तड़का गलत नहीं है। स्वादिष्ट खाने से ही पाचक रस स्त्रावित होते हैं।

खानपान में बदलाव जीवन शैली से जुड़े होते है। डायबिटीज, अपच, ब्लड प्रेशर, मोटापा, थॉयराइड आदि बीमारियां कॉमन होने के पीछे खराब जीवन शैली ही है। हल्का भोजन लेने से आमाशय स्वाभाविक रूप से संचालित होता है। घर पर बना नाश्ता लेने से बाहर के जंक फूड से बचा जा सकता है।

डॉ. खण्डेलवाल ने कहा कि अभिभावक बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें, तभी भूख लगेगी। उन्होंने कहा कि नमक डले वाला खाना चाहिए न कि प्रोसेस किया हुआ। घट्टी में पिसा नमक श्रेष्ठ होता है। परम्परागत भारतीय भोजन को पश्चिमी प्रभाव में न सेवन करें।

किवी हमारा फल नहीं है लेकिन डेंगू हुआ तो लोग प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए उसे खाने लगे। विद्यालय के निर्देशक शंकर लाल शर्मा ने डॉ. खण्डेलवाल के व्याख्यान को बच्चों की सेहत के लिए उपयोगी बताया और कहा कि शुरुआती उम्र में ही खान पान की गलत आदतों को सुधारा जाए। 

सेंट जोसेफ ग्रुप ने मनाया मल्हार द आनंद वार्षिकोत्सव

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कोटा। सेंट जोसेफ ग्रुप ऑफ स्कूल एजुकेशन ने रविवार को बैराज रोड स्थित स्कूल परिसर में जूनियर ग्रुप का रंगारंग वार्षिकोत्सव “मल्हार द आनंद उत्सव-2017” धूमधाम से मनाया।

मुख्य अतिथी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) अनंत कुमार, विशिष्ट अतिथी कोटा नगर निगम की उप सचिव आरएएस श्वेता फगेड़िया, सेंट जोसेफ ग्रुप के चेयरमेन डॉ अजय शर्मा एवम ग्रुप प्रेसीडेंट पीएल शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर भव्य समारोह का आगाज किया।

झिलमिलाती रोशनी के बीच मंच पर नौनिहालों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उत्सव में सेंट जोसेफ चिल्ड्रन स्कूल, आकाशवाणी, सेंट ग्रीन वेली पब्लिक स्कूल, कुन्हाड़ी, रेक अप केम्ब्रिज, तलवंडी के बच्चों ने “अदभुत भारत” की थीम पर अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया।

सबसे खास बात यह रही कि बच्चों ने राजस्थानी,गुजराती, पंजाबी, असमी, बंगाली, तमिल व गोवा की पारम्परिक वेशभूषा पहनकर विभिन्न लोक भाषाओं के गीतों पर आकर्षक डांस प्रस्तुतियां दी।

जगमग रोशनी में बच्चे राग मल्हार पर थिरकते हुए समां बांध रहे थे। कार्यक्रम के दौरान रेक अप केम्ब्रिज स्कूल, तलवंडी के नन्हे बच्चे जैसे ही अपने पेरेंट्स के साथ रेम्प वॉक पर इठलाते हुए उतरे तो समूचा परिसर तालियों से गूँज उठा। उनके अंदाज को परिजन मोबाइल में कैद करते रहे।

गीत-संगीत की मधुर धुनो के बीच बच्चों ने राजस्थानी गीत-‘आयो रे, आयो रे… म्हारो ढोलना’ पर खूब ठुमके लगाते हुए आनंद बरसाया। असमी गीत-‘ हवाके झोंके आज…’ पर बच्चे असमी परिधानों में झूमते दिखे।

वार्षिकोत्सव में जिन बच्चों ने इस वर्ष विभिन्न प्रतियोगिताओं, इवेंट्स और खेलकूद में अपनी सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस दी, उनको मुख्य अतिथी ने अवार्ड एवम मेडल देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर ग्रुप के सभी स्कूलों के प्रिंसिपल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर पेरेंट्स को बताया कि उनके बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए स्कूल में क्या-क्या विशेष प्रोग्राम होते हैं। अंत मे सीईओ नवीन कुमार ने सभी का आभार जताया।

बी-फार्मा : सेमेस्टर सिस्टम में अंकों की जगह अब ग्रेडिंग

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हर्बल, कॉस्मेटिक, पर्यावरण साइंस, कम्यूनिकेशन स्किल पढ़ाया जाएगा

जयपुर। बी-फार्मा में हर साल होने वाली परीक्षाओं की बजाय अब सेमेस्टर सिस्टम में मिलने वाले अंकों के स्थान पर ग्रेडिंग मिलेगा।

साथ ही फार्मेसी डिग्री करने वाले छात्रों को अब हर्बल ड्रग टेक्नोलॉजी, कॉस्मेटिक एनवायरमेंट साइंस, फार्माकोविजिलेंस, नोवल ड्रग डिलिवरी सिस्टम, फार्मेसी प्रैक्टिस, कम्यूनिकेशन स्किल, बायो फार्मास्यूटिक्स एंड फार्माको काइनेटिक्स, क्वालिटी एश्योरेंस, मेडीसनल केमिस्ट्री, रेमेडियल बायलॉजी मैथेमेटिक्स, पाथफिजियोलोजी बायोस्टेटिक्स रिसर्च के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।

हैल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली की ओर से एकेडेमिक बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक आयोजित कर अध्यादेश में संशोधन कर ‘बी-फार्मेसी रेग्यूलेशन-2014’ सत्र 2017-18 से प्रभावी तरीके से लागू कर दिया गया है।

एनओसी के बाद ही कोर्स संचालित
डिग्री संचालित करने वाले संस्थानों को नए नियमों के तहत राज्य सरकार, पीसीआई नई दिल्ली हैल्थ साइंस यूनिवर्सिटी से एनओसी प्रमाण पत्र लेने के बाद ही डिग्री कोर्स संचालित कर सकेंगे।

फार्मेसी फैकल्टी डॉ. डी.एस. राठौड़ प्रवीण कुमार का कहना है कि रेग्यूलेशन के अनुसार हरेक सेमेस्टर 100 दिन से कम नहीं होगा।

थ्योरी प्रैक्टिकल में अलग-अलग 80% उपस्थिति अनिवार्य होगी। डिग्री लेने से पहले 208 क्रेडिंग पॉइंट लेने पड़ेंगे। 7 वें सेमेस्टर में 150 घंटे की प्रैक्टिस भी करनी पड़ेगी।

दो साल देरी से : फार्मेसीकाउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) नई दिल्ली की रजिस्ट्रार कम सचिव अर्चना मुद्गल के अनुसार दिसंबर -2014 में देश के विश्वविद्यालयों संस्थानों को एक समान कोर्सेज लागू करने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी किया था।

लेकिन आरयूएचएस ने दो साल देरी से लागू करने पर सवाल उठने लगे हैं। हैल्थ साइंस यूनिवर्सिटी की एकेडेमिक काउंसिल की 12 अप्रैल 2017 को बैठक में लागू करने का निर्णय हुआ। इसे 19 अप्रैल को बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) के सदस्यों की आयोजित बैठक में अनुमति ली।