Sunday, July 12, 2026
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आवक की कमी से उड़द 150 रुपये क्विंटल तेज

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में सोमवार को लहसुन की आवक 5000 हजार कट्टे की रही, धान की आवक 65 हजार बोरी की रहीं। माल की कुल आवक 80 हजार बोरी की रहीं। धान की आवक 40 हजार बोरी की रही। कमजोर उठाव से धान 100 रुपये प्रति क्विंटल मन्दा, आवक की कमी से उड़द 150 रुपये प्रति क्विंटल तेज बोला गया । 

गेहूं मिल 1550 से 1575 लोकवान 1600 से 1700 पीडी 1650 से 1700 टुकडी 1600 से 1750 रुपये प्रति क्विंटल।  धान सुगंधा 2000 से 2451 पूसा-1 2200 से 2800 पूसा-4 (1121) 2500 से 3050 धान (1509) 2000 से 2650 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 2200 से 2881 सरसो 3200 से 3650 तिल्ली 7400 से 8200 रुपये प्रति क्विंटल। मैथी 2000 से 2875 धनिया बादामी 3400 से 4250 ईगल 3600 से 4500 रंगदार 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंग 3300 से 3600 उडद 2400 से 3950 चना 4000 से 4600 रुपये प्रति क्विंटल। चना काबुली 7000 से 10500 चना पेपसी 4500 से 4800 चना मौसमी 4500 से 5000 मसूर 3000 से 3300रुपये प्रति क्विंटल।

ग्वार 2500 से 3350 मक्का नई 1000 से 1200 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल।लहसुन 800 से 3350 रुपये प्रति क्विंटल। 

सोने का आयात बढ़ा, वित्त वर्ष 2018 में 700 टन रहने का अनुमान

नई दिल्ली । चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत में सोने का आयात बढ़कर 700 टन पहुंचने का अनुमान है। आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान यह आंकड़ा 500 टन का रहा था। यह जानकारी एक शीर्ष उद्योग संगठन ने दी है।

जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष प्रवीणशंकर पांड्या ने मांग की सोने पर आयात शुल्क घटाकर 4 से 5 फीसद के स्तर पर लाया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोने पर 10 फीसद का आयात शुल्क तस्करी को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा, “भारत में कारोबार करने की कठिनाई और 10 फीसद का आयात शुल्क हमारे विकास में बाधा डाल रहा है।” जीजेईपीसी के मुख्य कार्यकारी निदेशक ने कहा सब्यसाची राय ने बताया हमने वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 500 टन सोने का आयात किया था, लेकिन इस वित्त वर्ष हम 700 टन सोने का आयात करेंगे।

जीजेईपीसी के मुताबिक जनवरी 2018 से दुबई की ओर से सोने पर 5 फीसद वैट की शुरुआत और इसी साल जनवरी में खाड़ी देशों की ओर से सोने और हीरे के गहने पर 5 फीसद का आयात शुल्क लगाया जाना इस सेक्टर में भारत के निर्यात को प्रभावित करेगा।

दुबई एक प्रमुख पारगमन बिंदु (ट्रांजिट प्वाइंट) के रूप में कार्य करता है और भारत से होने वाले 7.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सोने के आभूषण निर्यात में से 50 फीसद से अधिक की हिस्सेदारी रखता है। परिषद को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में रत्न और आभूषण निर्यात 43 अरब डॉलर के करीब रह सकता है।

सोने में सुधार, जानिए कितना महंगा हुआ 10 ग्राम गोल्ड

नई दिल्ली/कोटा । सकारात्मक वैश्विक संकेत और ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी खरीदारी के चलते दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। सोमवार के कारोबार में सोना 100 रुपये की तेजी के साथ 30550 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ है।

इसी तरह चांदी की कीमतों में भी 100 रुपए का उछाल देखने को मिला, जिसकी प्रमुख वजह इंडस्ट्रियल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर तेज उठान  रही है। वहीं व्यापारियों का मानना है डॉलर अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं की तुलना में दो महीने के निचले स्तर पर है, इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक रुझान बना हुआ है।

इसके अलावा घरेलू हाजिर बाजार में शादी के सीजन की मांग को पूरा करने के चलते सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में सोना 0.27 फीसद की बढ़त के साथ 1291.40 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.18 फीसद की बढ़त के साथ 17.04 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है।

देश की राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 100 रुपये की बढ़त के साथ क्रमश: 30550 रुपये और 30400 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। जानकारी के लिए बता दें कि बीते दो सत्रों में सोने की कीमतों में 100 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। 

चांदी तैयार 100 रुपये की तेजी के साथ 40400 रुपये प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 90 रुपये बढ़कर 39330 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। चांदी के सिक्कों का भाव 74000 रुपये लिवाल और 75000 रुपये बिकवाल प्रति सैंकड़ा के स्तर पर स्थिर रहा है।

कोटा सर्राफा
चांदी 40000 रुपये प्रति किलो।
सोना केटबरी 30450 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35520  रुपये प्रति तोला।
शुद्ध 30600 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना  35700 रुपये प्रति तोला।

सेंसेक्स 45 अंक चढ़ा और निफ्टी 10,400 पर बंद

नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार की कमजोर शुरुआत हुई लेकिन मार्केट ने बाद में रफ्तार पकड़ी। सेंसेक्स 45 अंकों तक चढ़ने में कामयाब रहा और निफ्टी ने बाद में रिकवरी दर्ज की। बीएसई का सेंसेक्स 45 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 33,724 पर और एनएसई का निफ्टी 10 अंक बढ़ 10,399 पर बंद हुआ।

बाजार की शुरुआती कमजोरी के बावजूद बैंक शेयरों में भी अच्छी खरीददारी रही और बैंक निफ्टी रेकॉर्ड स्तर तक पहुंचा। बैंक निफ्टी 25,892 पर बंद हुआ। एसऐंडपी ने भारत की रेटिंग सुधारने के बजाय BBB- ही कायम रखी थी जिसके कारण सोमवार की सुबह बाजार की सुस्त शुरुआत हुई थी।

कमजोर बाजार में भी मिडकैप शेयरों में तेजी जारी रही। पहली बार निफ्टी का मिडकैप 100 इंडेक्स 20000 के पार पहुंचा। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी मजबूत होकर बंद हुआ है। निफ्टी का मिडकैप 100 इंडेक्स 0.5 फीसदी की तेजी के साथ 20085 के स्तर पर बंद हुआ है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.75 फीसदी बढ़कर बंद हुआ है।

पद्मावती: अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी की एक झलक देखी थी

सूचनापट्ट में लिखा हुआ है कि अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी की एक झलक देखी थी, करणी सेना की धमकी के बाद ASI ने ढका सूचनापट्ट

जयपुर। फिल्म पद्मावती को लेकर विवाद जारी है और अब इसकी आग चितौड़गढ़ के किले तक पहुंच गई है, जहां रानी पद्मावती ने कथित तौर पर जौहर किया था।

राजपूत करणी सेना के सदस्यों की धमकी से डरकर पद्मिनी महल के बाहर लगे सूचनापट्ट को ढक दिया गया है, जिसमें अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा महारानी को देखने का जिक्र है।

भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) के द्वारा स्थापित सूचनापट्ट में यह लिखा हुआ है कि पद्मिनी महल ही वह जगह है, जहां पर अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी की एक झलक देखी थी।

करणी सेना के सदस्यों ने इस सूचनापट्ट पर आपत्ति जताते हुए इसको हटाने की मांग की थी। करणी सेना की धमकी के मद्देनजर विभाग ने अब इस सूचना पट्ट को कपड़े से ढंक दिया है।

वह सूचना पट्ट, जिसमें लिखा है रानी पद्मिनी को अलाउद्दीन खिलजी ने देखा था।

एएसआई के एक अधिकारी ने बताया, ‘जोधपुर के क्षेत्रीय ऑफिस के उच्च प्राधिकरण से अनुमति मिलने के बाद सूचना पट्ट को ढक दिया गया है। पूरे महल में यही एक जगह है, जहां पर लिखा है कि खिलजी ने पद्मिनी को देखा था।’

राजपूत समुदाय इस वाकिये को इतिहास के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करार देते हुए इसे सभी अकादमिक किताबों तथा साइनबोर्ड्स के हटाने की मांग कर रहा है।

इस वर्ष फरवरी में राजपूत सेना ने एएसआई को पत्र लिखकर महल से शीशे को हटाने तथा गाइड्स को शीशे की घटना का जिक्र नहीं करने की धमकी दी थी। एएसआई ने इस धमकी पर प्रतिक्रिया नहीं दी थी, जिसके परिणामस्वरुप 6 मार्च को महल के शीशे को तोड़ दिया गया था।

बैंकरप्सी समिति के सदस्य ने अध्यादेश पर उठाया सवाल

मुंबई। बैंकरप्सी लॉ पर बनी समिति के एक सीनियर मेंबर ने उस अध्यादेश पर सवाल उठाया है, जिसके जरिये दिवालिया कंपनी के प्रमोटरों को अपनी कंपनी पर दोबारा कंट्रोल करने के रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

सरकार की बैंकरप्सी लॉ रिफॉर्म्स समिति के सदस्य एम आर उमरजी ने कहा कि अध्यादेश का फोकस सिर्फ बड़े बॉरोअर्स पर है। हालांकि, इससे दूसरे चांस की कोशिश कर रहीं छोटी और मझोली कंपनियों को नुकसान हो सकता है। इससे डिफॉल्ट करने वाली कंपनियां औनेपौने दाम में बिकने को मजबूर हो सकती हैं।

उमरजी ने कहा, ‘दिवालिया कानून के मामले में ज्यादातर चर्चा बड़ी कंपनियों को लेकर हुई है। हालांकि, अध्यादेश की वजह से बैंकों को लोन के बड़े हिस्से को भूलना होगा। ऐसी छोटी और मझोली कंपनियां भी हैं, जिनके प्रमोटर को कंपनी से अलग करके देखना मुश्किल है।

इन कंपनियों को चलाने की सबसे अधिक योग्यता प्रमोटर ही रखते हैं। इन कंपनियों में बाहरी निवेशकों की दिलचस्पी भी कम रह सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि छोटी कंपनियों की लोन रिस्ट्रक्चरिंग से बैंकों को बहुत नुकसान नहीं होगा। क्या आप ऐसे प्रमोटरों को अपनी कंपनी को दोबारा खड़ा करने का मौका नहीं देंगे?

बड़ी स्टील या सीमेंट कंपनी को खरीदने के लिए कई निवेशक सामने आ सकते हैं, लेकिन तिरुपुर की छोटी दिवालिया टेक्सटाइल यूनिट या अंकलेश्वर की ऐसी केमिकल यूनिट में कितने लोग दिलचस्पी लेंगे?’  उन्होंने कहा कि कोई धूर्त कॉम्पिटीटर इस अध्यादेश का फायदा उठाकर दिवालिया हो चुकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी को बंद करवा सकता है।

ऐसे ‘शिकारी’ संबंधित कंपनी का कुछ लोन या डेट खरीद सकते हैं और उसे बंद कराने के लिए बैंकरप्सी कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। इससे संबंधित सेक्टर में कॉम्पिटीशन कम होगा और शिकार करने वाली कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा।

ऐसे मामलों में दिवालिया छोटी कंपनी का प्रमोटर कुछ नहीं कर पाएगा। सरफेसी कानून के पीछे भी उमरजी का दिमाग माना जाता है। इस कानून में बैंकों को लोन रिकवरी के लिए डिफॉल्ट कर चुकी कंपनी की प्रॉपर्टी बेचने की इजाजत दी गई है। उमरजी ने उम्मीद जताई कि सरकार बैंकरप्सी कानून में और बदलाव कर इस गड़बड़ी को दूर करेगी।

कारोबार से बाहर हुईं देश की 5.35 लाख पंजीकृत कंपनियां

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नई दिल्ली । देश में पंजीकृत कुल 17 लाख कंपनियों में से एक तिहाई से ज्यादा कारोबार से बाहर हो चुकी हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर, 2017 के अंत में सक्रिय या कारोबार कर रहीं रजिस्टर्ड कंपनियों की संख्या 5.35 लाख  रह गई थी।

यह आंकड़ा ऐसे समय में आया है, जब सरकार ने ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रखी है। इनका इस्तेमाल मुखौटा कंपनियों के रूप में हवाला जैसी गतिविधियों में करने का संदेह है। अक्टूबर में आई कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 अक्टूबर को कुल पंजीकृत कंपनियों की संख्या 17,04,319 थी।

इनमें से 11,30,784 कंपनियां सक्रिय थीं। रजिस्टर्ड कंपनियों में से 5.35 लाख कंपनियां बंद हो गई हैं। 1,123 को निष्क्रिय का दर्जा दिया गया है। 5,957 लिक्विडेशन की प्रक्रिया में हैं। जबकि 31,666 का पंजीकरण रद किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक बंद हुई 5,34,674 कंपनियों में से 10,443 कंपनियों को बेच दिया गया। जबकि 4,92,735 कंपनियों को निष्क्रिय होने के कारण बंद कर दिया गया। 19,984 कंपनियों का अन्य में विलय कर दिया गया। इसी तरह 6,719 कंपनियों को लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) में बदल दिया गया।

सक्रिय कंपनियों में से सबसे अधिक 3.34 लाख कंपनियां सेवा क्षेत्र में हैं। वहीं मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों की संख्या 2.30 लाख, व्यापार में 1.50 लाख और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 1.03 लाख है।

मंत्रालय ने बताया कि इस साल अक्टूबर में 7,556 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। पिछले साल अक्टूबर में 6,542 कंपनियों का पंजीकरण हुआ था। अक्टूबर, 2015 से अक्टूबर, 2017 के बीच नई पंजीकृत कंपनियों का आंकड़ा अप्रैल, 2016 में 3,994 का निचला स्तर छूने के बाद से मासिक आधार पर बढ़ने लगा है। 

डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे कमजोर

नई दिल्ली । हफ्ते के पहले कारोबारी दिन में भारतीय रुपए ने डॉलर के मुकाबले कमजोर शुरुआत की। सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 9 पैसे की कमजोरी के साथ 64.69 पर कारोबार कर रहा था। वहीं 11 बजे के आसपास यह गिरावट 12 पैसे की हो गई। यानी इस कमजोरी में 3 पैसे का और इजाफा देखा गया।

इसके साथ रुपया डॉलर के मुकाबले 64.73 पर पहुंच गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डॉलर के मजबूत होने और भारतीय रुपए के कमजोर होने से आम आदमी पर क्या असर पड़ता है, चलिए आपको समझाते हैं। जानिए रुपए की कमजोरी से आम आदमी पर क्या असर पड़ता है।

रुपए के कमजोर से 4 नुकसान:
महंगा होगा विदेश घूमना: रुपए के कमजोर होने से अब विदेश की यात्रा आपको थोड़ी महंगी पड़ेगी क्योंकि आपको डॉलर का भुगतान करने के लिए ज्यादा भारतीय रुपए खर्च करने होंगे। फर्ज कीजिए अगर आप न्यूयॉर्क की हवाई सैर के लिए 3000 डॉलर की टिकट भारत में खरीद रहे हैं तो अब आपको पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।

विदेश में बच्चों की पढ़ाई होगी महंगी: अगर आपका बच्चा विदेश में पढ़ाई कर रहा है तो अब यह भी महंगा हो जाएगा। अब आपको पहले के मुकाबले थोड़े ज्यादा पैसे भेजने होंगे। यानी अगर डॉलर मजबूत है तो आपको ज्यादा रुपए भेजने होंगे। तो इस तरह से विदेश में पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई भारतीय अभिभावकों को परेशान कर सकती है।

डॉलर होगा मजबूत तो बढ़ेगी महंगाई: डॉलर के मजबूत होने से क्रूड ऑयल भी महंगा हो जाएगा। यानि जो देश कच्चे तेल का आयात करते हैं, उन्हें अब पहले के मुकाबले (डॉलर के मुकाबले) ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे। भारत जैसे देश के लिहाज से देखा जाए तो अगर क्रूड आयल महंगा होगा तो सीधे तौर पर महंगाई बढ़ने की संभावना बढ़ेगी।

डॉलर में होने वाले सभी पेमेंट महंगे हो जाएंगे:वहीं अगर डॉलर कमजोर होता है तो डॉलर के मुकाबले भारत जिन भी मदों में पेमेंट करता है वह भी महंगा हो जाएगा। यानी उपभोक्ताओं के लिहाज से भी यह राहत भरी खबर नहीं है। यानी आसान शब्दों में भारत का इंपोर्ट बिल (आयात बिल) बढ़ जाएगा।

जियो के कारण निवेश से पीछे हटीं टेलिकॉम कंपनियां

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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल का कहना है कि रिलायंस जियो के फ्री वॉइस और डेटा ऑफर्स की अवधि बढ़ाने के कारण टेलिकॉम कंपनियां करीब 3,250 अरब रुपये तक के इन्वेस्टमेंट से पीछे हट रही हैं।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कर्ज के बोझ से दबे टेलिकॉम सेक्टर के लिए राहत पैकेज का रिलायंस जियो विरोध कर रही है। मित्तल ने इंटरव्यू में बताया कि भारती एयरटेल को टेलिकॉम इंडस्ट्री में तेजी से हो रहे कंसॉलिडेशन से फायदा मिला है।

उनका कहना था कि वोडाफोन इंडिया-आइडिया सेल्युलर के मर्जर से बनने वाली नई कंपनी को पीछे छोड़कर भारती एयरटेल मार्च 2019 तक मार्केट में रेवेन्यू शेयर के लिहाज से दोबारा पहले स्थान पर पहुंच सकती है।

उन्होंने कहा, ‘मार्केट में एक ऐसे लेवल तक कंसॉलिडेशन हो चुका है जहां एक आकांक्षा है, लेकिन दूसरे स्थान पर मौजूद वोडाफोन और तीसरे स्थान वाली आइडिया के एक साथ आने के बारे में कभी नहीं सोचा था। दो मजबूत कंपनियों के मर्जर को देखना हैरान करने वाला है।’

मित्तल ने आगे बताया कि उनकी कंपनी एयरसेल के साथ कंसॉलिडेशन की बातचीत करने के लिए तैयार है। एयरसेल की रिलायंस कम्यूनिकेशंस के साथ मर्जर की बातचीत हाल ही में टूट गई थी। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि एयरसेल के लिए केवल वोडाफोन-आइडिया या हमारे साथ बातचीत की संभावना है।’

एयरटेल ने पिछले वर्ष आठ सर्कल में एयरसेल का 2300 MHz में 4G स्पेक्ट्रम एक ट्रेडिंग डील के जरिए 3,500 करोड़ रुपये में खरीदा था। पिछले वर्ष रिलायंस जियो की फ्री कॉल्स और डेटा टैरिफ के साथ एंट्री से देश की टेलिकॉम इंडस्ट्री में खलबली मच गई थी।

इससे भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया जैसी पुरानी टेलिकॉम कंपनियों को अपने कस्टमर्स को बरकरार रखने और कॉम्पिटिशन में बने रहने के लिए अपने टैरिफ में भारी कमी करनी पड़ी थी। जियो ने इस वर्ष अप्रैल से डेटा के लिए बहुत कम रेट पर चार्ज लेना शुरू कर दिया था, लेकिन कंपनी वॉइस कॉल्स हमेशा के लिए फ्री दे रही है।

टैरिफ को लेकर कड़े कॉम्पिटिशन से सभी टेलिकॉम कंपनियों के रेवेन्यू, प्रॉफिट और कैश फ्लो पर नकारात्मक असर पड़ा है। इस वजह से वोडाफोन और आइडिया एक हुए हैं। इसके अलावा रिलायंस कम्यूनिकेशंस और एयरसेल जैसी छोटी टेलिकॉम कंपनियां बिजनस में बने रहने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

टेलिकॉम इंडस्ट्री की लगातार खराब होती स्थिति के कारण सरकार ने इंडस्ट्री के लिए राहत के उपायों को सुझाने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है। मित्तल ने कहा, ‘मेरा अनुमान है कि कई कंपनियों ने लगभग 3,000 अरब रुपये के इन्वेस्टमेंट का इरादा छोड़ दिया है। इनमें से अधिकतर इंटरनैशनल इन्वेस्टर्स थे। इसका एक बड़ा कारण रिलायंस जियो की प्राइसिंग है।’

सेंसेक्स में तेजी थमी, शुरुआती कारोबार में 107 अंक नीचे

मुंबई। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग की ओर से भारत की सॉवरेन रेटिंग बीबीबी- बरकरार रखने के बाद निवेशकों द्वारा सौदे घटाए जाने से बंबई शेयर बाजार में आज शुरुआती दौर में सेंसेक्स 107 अंक गिरा। इसी के साथ, सात दिन से सेंसेक्स में जारी लगातार तेजी भी थम गई।

एशियाई बाजारों से नकरात्मक संकेतों ने भी घरेलू बाजार को प्रभावित किया। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स आज शुरुआती कारोबार में 106.92 अंक यानी 0.31 प्रतिशत गिरकर 33,572.32 अंक पर आ गया। पिछले सात कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में 918.80 अंक की बढ़त देखी गई थी।

इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी 41.65 अंक यानी 0.40 प्रतिशत गिरकर 10,348.05 अंक पर खुला। बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, तेल एवं गैस तथा रोजर्मा की उपभोग वाली वस्तु निर्माण एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही।

इंफोसिस, अडाणी पोर्ट, सन फार्मा, पावर ग्रिड, भारती एयरटेल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसबीआई, कोटक बैंक, टाटा स्टील, आईटीसी लिमिटेड, बजाज आटो, टाटा मोटर, कोल इंडिया, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस में 1.33 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।

हालांकि, ओएनजीसी, एलएंडटी, ल्यूपिन और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में सकरात्मक रुख देखने को मिला। शेयर ब्रोकरों ने कहा कि एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ बीबीबी- बीबीबी-नकारात्मक पर कायम रखने के चलते शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली।

वहीं, निवेशकों के प्रमुख चीनी आंकड़ों के जारी होने का इंतजार करने के चलते एशियाई बाजारों में सुस्ती ने भी घरेलू शेयर बाजार को प्रभावित किया। एशियाई बाजारों में हांग कांग का हेंग सेंग सूचकांक 0.37 प्रतिशत नीचे रहा। जापान का निक्केई सूचकांक भी शुरुआती कारोबार में 0.34 प्रतिशत गिर गया। शंघाई कंपोजिट सूचकांक भी 0.79 प्रतिशत नीचे रहा।