Monday, July 13, 2026
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सभी ट्रेनों में लगेंगे CCTV, निगरानी में होगा पूरा रेल नेटवर्क: रेल मंत्री

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नई दिल्ली। सफर के दौरान पैसेंजर्स की सेफ्टी और सिक्युरिटी बढ़ाने के लिए देश की सभी ट्रेनों में सीसीटीवी लगाए जाएंगे। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि रेलवे 2018 को ‘ह्यूमन ट्रैफकिंग रोकने और महिला सुरक्षा’ के तौर पर मनाएगा।

सुरक्षा के लिहाज से स्टेशन कैंपस के साथ ट्रेनों में क्लोज सर्किट कैमरे (CCTV) लगेंगे और इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलेगी। इस पर विचार किया जा रहा है। कैमरे ऑनलाइन लिंक होने के बाद स्टेशन मास्टर और अफसर इन पर नजर रखेंगे।

स्टेशनों पर 2800 एस्केलेटर लगेंगे
 रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से कई अहम फैसले लिए हैं। इनमें पूरे रेल नेटवर्क को सीसीटीवी कैमरों से जोड़ने और स्टेशनों पर 2800 से ज्यादा एस्केलेटर लगाने की योजना शामिल है। इसके लिए सप्लीमेंट्री बजट में फंड शामिल होगा।
– इसके अलावा रेलवे ने स्टेशन और फुटओवर ब्रिज को ‘सुविधा’ से हटाकर ‘सुरक्षा’ की कैटेगरी रखा है। इससे उनकी मरम्मत और रखरखाव के लिए रेलवे बोर्ड से इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी।
सीसीटीवी पर नजर रखेंगे स्टेशन मास्टर
– पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे के सीनियर अफसरों के साथ ‘विजन फॉर न्यू रेलवे- न्यू इंडिया 2022’ को लेकर चर्चा हो रही है। निर्भया फंड से रकम लेकर सीसीटीवी लगाए जाएंगे।
– सुरक्षा रेलवे की प्राथमिकता है और इसके लिए रेलवे स्टेशनों के साथ ट्रेनों और रेल पटरियों के किनारे भी सीसीटीवी लगाए जाएंगे। रेलवे ट्रैक के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी मुहैया कराकर सभी कैमरों को ऑनलाइन लिंक किया जाएगा, ताकि स्टेशन मास्टर और अफसर भी इस पर नजर रख सकें।

बिटकॉइन भेजने पर 90 साल की सजा, जानिए किसने भेजे

नई दिल्ली। क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन की कीमत एक साल से भी कम समय में 1600 फीसदी से भी अधिक बढ़ चुकी है। कई लोग इसमें निवेश कर मालामाल हो चुके हैं। लेकिन शायद आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि इसे किसी को भेजने पर 90 साल  जेल की सजा भी हो सकती है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका में आया है जिसमें एक महिला जांच एजेंसियों के घेरे में है।

किसको भेजे थे बिटकॉइन : न्यूयॉर्क की 27 साल की जुबैया शहनाज पर आरोप है कि उसने Bitcoin सहित अन्य क्रिप्टो करेंसी में 62 हजार डॉलर दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस को भेजे थे। न्यूयॉर्क न्यामिक विभाग के मुताबिक शहनाज ट्रायल का सामना कर रही है और उसपर दोष साबित हुआ तो उसे 90 साल जेल की सजा हो सकती है।

दर्जनों क्रेडिट कार्ड पकड़े गए: यूएस अर्टानी द्वारा फेडरल कोर्ट में दायर मुकदमें के मुताबिक इस साल की शुरुआत में शहनाज के पास से दर्जनों क्रेडिट कार्ड बरामद हुए। इसकी मदद से उसने पहले राशि निकाली और बाद में उसे क्रिप्टो करेंसी के जरिये आईएसआईएस को भेजा।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शहनाज अब तक कुल मिलाकर 1.50 लाख डॉलर आईएसआईएस को भेज चुकी है। हालांकि, इस बात की जांच अभी चल रही है कि 88 हजार डॉलर की राशि उसने कहां से जुटाई। यह अब तक का पहला मामला है जिसमें आतंकी संगठनों को क्रिप्टो करेंसी के जरिये राशि भेजने की बात सामने आई है।

ऐसे करती थी काम : यूएस न्यायिक विभाग की एक विज्ञप्ति के मुताबिक शहनाज यह सभी राशि व्यक्तिगत रूप से इस तरह भेजती थी जिसमें लेनदेन के सख्त नियमों से बचा जा सके। विज्ञप्ति के मुताबिक वह पाकिस्तान, चीन और तुर्की में फर्जी कंपनियों के नाम से यह राशि भेजती थी जो बाद में आईएसआएस को मिल जाती थी।

इस देश में भागकर जाने की थी योजना : रिपोर्ट के मुताबिक शहनाज की योजना पाकिस्तान और तुर्की होते हुए सीरिया भागने की थी। लेकिन जांच एजेंसियों ने उसे पहले ही पकड़ लिया। उस पर पांच मुकदमें चल रहे हैं।

चार मनी लॉन्ड्रिंग के और एक बैंक फर्जीवाड़े का है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि वह दोषी साबित होती है तो मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 60 साल और बैंक फर्जीवाड़ें में 30 साल जेल की सजा हो सकती है।

1 फरवरी से लागू होगा ई-वे बिल, जीएसटी काउंसिल की मंजूरी

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नई दिल्ली । जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) काउंसिल ने शनिवार को अपनी 24वीं बैठक में महत्वपूर्ण ई-वे बिल पर हामी भरते हुए इसे 1 फरवरी 2018 से अनिवार्य कर दिया है। अब सामान को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने पर यह नियम लागू होगा। 

कुछ राज्य स्वैच्छिक आधार पर 1 फरवरी से अंतर्राज्यीय (राज्य के भीतर) और अंतरराज्यीय (राज्यों के भीतर) ई-वे बिल दोनों को लागू कर सकते हैं। वहीं ई-वे बिल के लिए सिस्टम 15 जनवरी से उपलब्ध करवा दिया जाएगा। सूत्र के मुताबिक वहीं राज्यों के भीतर ई-वे बिल 1 जून से अनिवार्य होगा। वहीं राज्य के भीतर ई-वे बिल लागू करने का काम फरवरी से ही शुरू कर दिया जाएगा।

क्या है ई-वे बिल: अगर किसी वस्तु का एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर राज्य के भीतर मूवमेंट होता है तो सप्लायर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा। अहम बात यह है कि सप्लायर के लिए यह बिल उन वस्तुओं के पारगमन (ट्रांजिट) के लिए भी बनाना जरूरी होगा जो जीएसटी के दायरे में नहीं आती हैं।\

क्या होता है ई-वे बिल में: इस बिल में सप्लायर, ट्रांसपोर्ट और ग्राही (Recipients) की डिटेल दी जाती है। अगर जिस गुड्स का मूवमेंट एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर एक ही राज्य के भीतर हो रहा है और उसकी कीमत 50,000 रुपए से ज्यादा है तो सप्लायर (आपूर्तिकर्ता) को इसकी जानकरी जीएसटीएन पोर्टल में दर्ज करानी होगी।

सूबेदार जोगिंदर सिंह की बायोग्राफी में नजर आयेगें गिप्पी ग्रेवाल

कोटा। 1962 में भारत और चीन के बीच लड़े गये युद्ध पर बहुत सी फिल्में बनी चुकी है, लेकिन जो कहानी गिप्पी ग्रेवाल अपनी फिल्म में सुनाने जा रहे है वह कहानी है सिख रेजीमेंट के सूबेदार जोगिंदर सिंह की।

जिन्होंने 1962 की लड़ाई में अपने मात्र 21 जवानों के साथ 600 चीनी सैनिकों का मुकाबला किया था और अंतिम सांस तक लड़े थे। भारत सरकार ने उन्हें उनके अदम्य साहस का सम्मान करते हुए मरणोपरांत सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा था।

इस फिल्म को सागा म्यूजिक एवं म्यूनिसिस इन्फो सोल्युशन्स के साथ 7 कलर्स मोशन पिक्चर्स द्वारा रिलीज किया जा रहा है। इस फिल्म को चार भाषाओं पंजाबी, हिंदी, तमिल और तेलुगू में 6 अप्रैल 2018 को रिलीज किया जायेगा।

गिप्पी ग्रेवाल के अलावा इसमें गुग्गु गिल, कुलविंदर बिल्ला, अदिति शर्मा, राजवीर जवंदा, रोशन प्रिंस, करमजीत अनमोल तथा सरदार सोहीस भी नजर आने वाले है।

सूबेदार जोगिंदर सिंह की बायोग्राफी की शूटिंग खूबसूरत और खतरनाक जगहों जैसे कारगिल, द्रास, राजस्थान एवं असम की अलग-अलग लोकेशंस पर हुई है। इस फिल्म का एक मुख्य भाग 14,000 फीट की ऊंचाई पर शूट हुआ।

जहाँ पहुँचने में ही क्रू और कास्ट को कई घंटो तक गाड़ी एवं पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। इस फिल्म के मुख्य कलाकार गिप्पी ग्रेवाल ने खुद को शारीरिक तौर परिवर्तित किया हैं तथा फिल्म के ज्यादातर स्टंट्स खुद ही किए हैं।

1962 में जब चीनी घुसपैठ हुई थी तो सूबेदार जोगिंदर सिंह वहां पर अपनी पलटन के साथ तैनात थे। उनको उस दुर्गम क्षेत्र में पोजिशन लेने के ऑर्डर्स दिये गये थे। पूरी पलटन बिना युद्ध की तैयारी और साजो-सामान के वहां पर डटी थी।

चीन के 600 सैनिकों ने तीनों तरफ से औचक आक्रमण कर दिया। सूबेदार जोगिन्दर सिंह की मानसिक दृढ़ता ही थी जिसकी वजह से गोला-बारूद खत्म होने और जांघ पर गोली लगने के बावजूद भी उन्होंने ना सिर्फ अपने सैनिकों को लड़ाई के लिए प्रेरित किया।

बल्कि खुद भी अकेले ही दर्जनों चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। इनकी इस बहादुरी भरी दास्तान को देखने के लिये लोग बेहद उत्साहित महसूस कर रहे हैं।

देसी गाय ही क्यों पालें हम? देखिये वीडियो

कोटा। देसी गाय ही क्यों पालें हम ? हमारे देश में देसी गाय को लेकर एक भ्रम है कि वह दूध कम देती है। इसलिए उनको सड़कों पर छोड़ कर हम अंग्रेजी नस्ल की विदेशी गायों को पाल रहे हैं।

यह कहना है स्वामी चिन्मयानंद का है। वह शनिवार को वह इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया कोटा में स्थित सीमन बैंक विजिट करने आये थे। उन्होंने हमारे चैनल LEN DEN NEWS को एक भेंट में देसी गाय का महत्व बताया।

साथ ही उन्होंने विदेशी गाय के दूध से होने वाले नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि विदेशी गाय जिसके कन्धा नहीं होता, उस गाय का दूध पीने से कैंसर, मधुमेह जैसी बीमारियां हो रही हैं। हमारे बच्चे मंदबुद्धि हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इससे बचने का एक ही रास्ता है कि हम गाय पालें तो देसी ही पालें। क्योंकि इसके दूध में A-2 पाया जाता है। इससे हमारे बच्चे तंदुरुस्त होंगे। उन्होंने देसी गायों की नस्ल सुधार के भी तरीके बताये हैं।

सीमन बैंक संचालक सुरज्ञान गुप्ता ने बताया कि देसी गोवंश के पालन, प्रबंधन पर अब लोग जागरूक होने लगे हैं। 1990 के बाद से एकदम से कृषि कार्य में मशीनरी का अंधाधुंध उपयोग होने लगा। किसानों की पशुओं पर निर्भरता खत्म होने लगी तो उन्होंने गोवंश पालना कम किया।

जो मवेशी उनके पास थे, उन्हें लावारिस छोडऩा शुरू किया। अब लोग दुबारा से गोवंश पालन को जागरूक होने लगे हैं। प्रदेश में कई गोशालाओं में नस्ल सुधार किया जा रहा है।

शेखावाटी, मारवाड़, वागड़ में गिर, थारपारकर, साहीवाल आदि गायों के सीमन का उपयोग किया जा रहा है। धीरे-धीरे पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश में भी कोटा से सीमन की मांग बढऩे लगी है। पूरी जानकारी के लिए देखिये यह वीडियो –

H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार की गाज, नहीं कर पाएंगे डिपेंडेंट काम

वॉशिंटगटन। ट्रंप सरकार एक के बाद एक ओबामा सरकार के फैसलों को पलट रही है। ओबामा केयर और नेट न्यूट्रलिटी के बाद ट्रंप प्रशासन अब H-1B वीजा के नियमों को और सख्त बनाने जा रहा है।

नए नियमों के अनुसार H-1B वीजा के अंतर्गत अमेरिका में पति या पत्नी के तौर पर रह रहे आश्रितों के लिए नौकरी करना अब बेहद मुश्किल हो जाएगा।

इसका असर वैसे तो अपेक्षाकृत छोटे वर्ग पर ही पड़ने वाला है। H-1B वीजा पर काम कर रहे ऐसे प्रफेशनल जो ग्रीन कार्ड के लिए कोशिश कर रहे हैं, ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से प्रभावित होंगे।

गुरुवार को यूएस डिपार्टमेंट फॉर होमलैंड सिक्यॉरिटी की तरफ से जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई। बयान में हालांकि ज्यादा विस्तार से फैसले का विश्लेषण नहीं किया गया। डिपार्टमेंट की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन के ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन पॉलिसी’ के तहत ही यह फैसला किया गया है।

डीएचएस की तरफ से जारी बयान में H-1B वीजा में होने वाले बदलावों को लेकर ट्रंप प्रशासन की मंशा को स्पष्ट किया गया। डीएचएस के बयान के अनुसार, ‘H-1B वीजा मिलने वाले प्रफेशनलों की पात्रता को फिर से परिभाषित किया जाएगा।’

इंडियन आईटी इंडस्ट्री बॉ़डी के प्रेजिडेंट आर चंद्रशेखर का कहना है कि यह फैसला ट्रंप सरकार के लगातार H-1B वीजा नियमों को कठोर बनाने की दिशा में एक और कदम है।

बता दें कि फरवरी 2015 में ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में रह रहे प्रफेशनलों के ऊपर आर्थिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से निर्भर पति-पत्नियों को काम करने की छूट का प्रावधान बनाया था।

इसके तहत ग्रीन कार्ड के लिए प्रतीक्षा कर रहे प्रफेशनलों के डिपेंडेंट जीवनसाथी को काम करने की छूट का प्रावधान था। ओबामा के इस फैसले को मशहूर उद्यमी स्टीव जॉब्स ने कोर्ट में चुनौती दी थी।

नई टैक्नोलॉजी पर काम करें, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कीअफसरों को सलाह

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जयपुर। अधिकारियों को घिसी पीटी पुरानी टैक्नोलॉजी को छोड़ कर नई लेटेस्ट इनोवेटिव टैक्नोलॉजी पर काम करना चाहिए। इसमें वे विदेशी टैक्नोलॉजी को भी अपना सकते हैं। सरकार नई टैक्नोलॉजी को अपनाने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अधिकारियों को माइंडसेट बदलना होगा।

कुछ अधिकारी नया करना चाहते हैं, लेकिन वे उच्च अधिकारियों के दबाव की वजह से नहीं कर पा रहे हैं। नई सोच-दिशा पर काम करने वाले अधिकारियों को आगे आना चाहिए। विभाग में अभी भी बॉस इज ऑलवेज राइट की प्रथा बनी हुई है।

इस वजह से नई सोच-दिशा में काम नहीं हो पा रहा है। इस इसे बदलना चाहिए। यह कहना है केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का।  गडकरी शुक्रवार को ‘रिपेयर, रिहैबिलिटेशन एंड रेट्रो फिटिंग ऑफ ब्रिजेज एंड स्ट्रक्चर’ सेशन का उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिकारी विदेशों में जाते हैं।

विदेशी डेलीगेशन से मिलते है, उनसे नई टैक्नोलॉजी के बारे में चर्चा करते हैं, लेकिन वह देश में लागू नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार क्वालिटी विंग, टीम वर्क, जल्दी काम और भ्रष्टाचार मुक्त काम कर रही है।

पहली बार ब्रिजों का डेटा एकत्र
गडकरी ने कहा कि सरकार ने पहली बार इंडियन ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से नेशनल हाइवे पर बने ब्रिजों का डेटा एकत्रित किया है।

इसमें 1.70 लाख ब्रिज सामने आए हैं। इसमें से 23 ब्रिज 100 साल और 1626 ब्रिज 50 साल पुराने हैं। 147 जर्जर अवस्था में हैं। 6700 ब्रिजों की मरम्म्त की जाएगी। इनमें से ऐसे ब्रिज जो 30% डेमेज हैं, उन्हें सुधार करके नए सिरे से बनाया जाएगा।

फर्जी टिकट के मामले में प्रेस मालिक गिरफ्तार

  • अधिकांश सरकारी विभागों की प्रिंटिंग के टेंडर एक ही प्रेस के पास
  • सिटी बसों के फर्जी टिकट छापने के मामले में नया खुलासा

कोटा। सिटीबसों के फर्जी टिकट के मामले में पुलिस ने जिस जय दुर्गा प्रिंटिंग प्रेस के मालिक को पकड़ा है, उस परिवार की शहर में तीन फर्में हैं और अधिकांश सरकारी विभागों की प्रिंटिंग इन्हीं के पास है। नगर निगम में फ्लैक्स से लेकर टिकट प्रिंटिंग का काम कई वर्षों से यही कर रहे हैं।

इस घटना के खुलासे के बाद नगर निगम द्वारा जांच की जा रही है। इधर, प्रेस मालिक की तरफ से शुक्रवार को मकबरा थाने में टिकट चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस ने दर्ज नहीं की।

शहर में संचालित सिटी बसों के फर्जी टिकट छापकर कंडक्टरों को दिए जा रहे थे। दो दिन पहले फर्जी टिकट के साथ नगर निगम के जेईएन ने एरोड्रम सर्किल से ललित कुमार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला कि ये टिकट इंदिरा मार्केट स्थित जय दुर्गा प्रिंटिंग प्रेस पर छापे गए थे।

टिकट छापने का ठेका नगर निगम ने इसी प्रेस को दे रखा था। इसमें प्रेस मालिक की भूमिका भी सामने आने के बाद पुलिस ने गुरुवार को मालिक कैलाश गुर्जर को भी गिरफ्तार कर लिया था।

विज्ञाननगर पुलिस के जांच अधिकारी रमेश कुमार के अनुसार पूछताछ में पुलिस को पता चला कि इनकी अलग-अलग नामों से शहर में तीन फर्में हैं पास शहर के 16 जिलों के सरकारी विभागों की प्रिंटिंग का ठेका है।

इस सीरिज के टिकट पहले ही काम में चुके हैं, ये दुबारा छप गए थे जो निगम ने लौटाए थे। जब टिकट वापस लौटाए थे तो उन्हें खत्म क्यों नहीं किया या फिर उसके सीरियल नंबर क्यों नहीं बदले।

वो टिकट वापस बाजार में क्यों पहुंचे। इसके पीछे मंशा क्या थी। पुलिस ने कर्मचारी ललित को एक दिन के रिमांड पर लिया है उससे अन्य कंडक्टरों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

टिकट चोरी की रिपोर्ट दी : इधर,प्रिंटिंग प्रेस की तरफ से मकबरा थाने में शुक्रवार को रिपोर्ट दी गई थी कि निगम की तरफ से ये टिकट रिजेक्ट कर लौटाए गए थे। ये टिकट चोरी हो गए। मकबरा सीआई भैंरुलाल मीणा का कहना है कि उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

जब वे खुद आरोपी है और टिकट विज्ञाननगर थाने में जब्त हो चुके हैं तो फिर चोरी की रिपोर्ट अब क्यों दी जा रही है। यदि चोरी हुए थे तो पहले बताना चाहिए था, विज्ञाननगर में टिकट पकड़े जाने के बाद रिपोर्ट दर्ज करने का कोई औचित्य नहीं है।

50 साल से हुई राजनीति, हमने परवान चढ़ाई परवन-मुख्यमंत्री

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-बारां में राज्य सरकार की चौथी वर्षगांठ का समारोह

जयपुर। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि हाड़ौती की लाइफलाइन परवन सिंचाई परियोजना के नाम पर 50 साल से राजनीति होती रही, वादे कर लोगों के साथ छल किया गया, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ पाई।

हमारी सरकार ने इसे हकीकत में बदलने के लिए दिन-रात एक कर दिया और नतीजा आज आप आपके सामने है। परवन का पानी अब जल्द ही हाड़ौती के कोटा, बूंदी और बारां जिले के लाखों किसानों को सरसब्ज करेगा और यहां के सैकड़ों गांवों की प्यास बुझाएगा।

राजे शुक्रवार को बारां में सरकार की चौथी वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में 6490 करोड़ की महत्वाकांक्षी परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के शिलान्यास सहित 8487 करोड़ रूपए के विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रही थीं।

राजस्थान करा सकेगा आईजीएनपी की मरम्मत- गडकरी
समारोह को सम्बोधित करते हुए केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राजस्थान इन्दिरा गांधी नहर कैनाल की शीघ्र मरम्मत करवा सकेगा। इसके लिए आवश्यक एनओसी शीघ्र जारी होगी। इस संबंध में उनकी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से चर्चा हो चुकी है। 

राजस्थान को मिलेगा पूरा पानी
गडकरी ने कहा कि जल्द ही वे राजस्थान, हरियाणा, पंजाब तथा दिल्ली के बीच अन्तर्राज्यीय जल विवादों को दूर करेंगे। इससे राजस्थान सहित अन्य राज्यों को अपने-अपने हक का पूरा पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यमुना के सरप्लस पानी का उपयोग राजस्थान कर सके, इसके लिए वे योजना पर काम कर रहे हैं।

नर्मदा के पानी के लिए भी उनका मंत्रालय हर संभव मदद करेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली-जयपुर ग्रीन एक्सप्रेस हाइवे शीघ्र बनेगा इसके लिए जमीन अवाप्ति का काम जल्द शुरू होगा। एक साल में जयपुर रिंग रोड का काम पूरा हो जायेगा। 

बायो ईंधन से बढ़ेगी किसानों की आय
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने एथेनॉल तथा बायो ईंधन के उपयोग की योजना तैयार की है। इससे किसानों की आय बढे़गी और पेट्रोलियम पदार्थों के उपयोग और आयात में कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार भी इस संबंध में नीति बनाकर प्रदेश के किसानों को लाभ पहुंचा सकती है। 

गडकरी ने कहा कि अब नहरों के लिए किसानों की जमीन अवाप्त नहीं होगी, बल्कि भूमिगत लाइन डालकर पानी लाया जायेगा और ड्रिप पद्धति से खेती होगी। इससे जल की बड़ी बचत होगी और उत्पादन में भारी वृद्धि से किसानों की आय बढे़गी।

परवन बदलेगी हाड़ौती की भाग्यरेखा
राजे ने कहा कि परवन सिंचाई परियोजना के पूरा होने पर यह बारां, झालावाड़ और कोटा जिले के लिए जीवनरेखा बनेगी। इस परियोजना में बनने वाले बांध की भराव क्षमता 490 मिलियन घन मीटर है। जिसके पूरा हो जाने से 317 मिलियन घनमीटर पानी सिंचाई के लिए मिलने लगेगा।

परियोजना का पहला चरण पूरा होने पर बारां के 194, झालावाड़ के 81 और कोटा जिले के 38 सहित कुल 313 गांवों की 1 लाख 31 हजार 400 हैक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। 

उन्होंने कहा कि परियोजना का दूसरा चरण पूरा होने पर बारां के 118, झालावाड़ के 36 और कोटा के 170 सहित कुल 324 अतिरिक्त गांवों की 70 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इस परियोजना में सिंचाई जल का उपयोग बून्द-बून्द और फव्वारा पद्धति से किया जाएगा।

सिंचाई के साथ-साथ इस परियोजना से पेयजल की सुविधा भी मिलेगी। परियोजना से 50 मिलियन घन मीटर पानी बारां, झालावाड़ व कोटा जिले के 1 हजार 821 गांवों की प्यास बुझायेगा। इस परियोजना से शेरगढ़ अभयारण्य को 16 मिलियन घन मीटर पानी मिलेगा। परियोजना के 79 मिलियन घनमीटर जल से 2970 मेगावाट तापीय विद्युत उत्पादन हो सकेगा।

सिंचाई तंत्र को बनाया मजबूत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सिंचाई तंत्र को मजबूत बनाना हमारी प्राथमिकता रही है। हमने इंदिरा गांधी नहर परियोजना सहित विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं पर 5 हजार 633 करोड़ रुपये व्यय कर करीब 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई है।

चम्बल नहर प्रणाली में हमने 383 करोड़ से 114 किमी मुख्य नहर और लाइनिंग का काम किया। चम्बल की बांयी मुख्य नहर की मरम्मत के लिए हमने 171 करोड़ रु. और दांयी नहर की मरम्मत के लिए 294 करोड़ रु. स्वीकृत किए। माही, चम्बल, साबरमती, लूनी, सूकली और पश्चिम बनास बेसिन में 540 करोड़ रूपये की लागत से 262 माइक्रो सिंचाई टैंक, 42 माइक्रो स्टोरेज टैंक और 48 चैक डेम बनवाए हैं।

बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में 852 करोड़ रुपये की धौलपुर लिफ्ट परियोजना का काम भी हाथ में लिया जा रहा है। ये वो परियोजना है जो 50 वर्ष में भी जमीन पर नहीं आ पाई। इसे अब हम हकीकत में बदल रहे हैं। 

 कोई पंचायत गौरव पथ से वंचित नहीं रहेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बारां जिले में हमारी सरकार ने इन 4 सालों में विकास के लिए 3787 करोड़ रु. स्वीकृत किये। जबकि पिछली सरकार ने अपने 5 वर्षाें में सिर्फ 1903 करोड़ रुपये ही व्यय किए।

राजे ने कहा कि झालावाड़ और बारां जिले में सड़कों का जैसा जाल बिछा है वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आने वाले साल में बारां और झालावाड़ की कोई ग्राम पंचायत ग्रामीण गौरव पथ से वंचित नहीं रहेगी।

केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने समारोह में राजस्थान को नये नेशनल हाइवे की सैद्धांतिक स्वीकृति एवं उच्च पुलों की सौगात दी। उन्होंने कहा कि इनका कार्य अगले तीन माह में शुरू हो जायेगा। जो इस प्रकार हैं – 

• कोटा-सांगोद-कवाई एनएच 103 किलोमीटर
• झालावाड़-बारां एनएच 78 किलोमीटर 
• बारां-मांगरोल-श्योपुर एनएच 43 किलोमीटर 
• परवन-फतेहगढ़-गुना-टीकमगढ़-गुलगंज एनएच 22 किलोमीटर
• कवाई जंक्शन से छबड़ा-सदा कॉलोनी (एनएच-46) 48 किलोमीटर
• कोटा-रावतभाटा-सिंगोली-रतनगढ़-मोरवा-मनसा-नारायणगढ़-पीपलिया मंडी-मंदसोर 68 किलोमीटर
• लाखेरी-इटावा-मांगरोल 61 किलोमीटर
• उनियारा-इन्द्रगढ़ 27 किलोमीटर
• एनएच 90 पर परवन नदी पर उच्च पुल की 60 करोड़ की डीपीआर मंजूर
• ल्हासी पुल की 16 करोड़ की डीपीआर मंजूर

ये हुए लोकार्पण और शिलान्यास
1. परवन बहुद्देशीय सिंचाई परियोजना (6489.59 करोड़ रू.)
2. अटरू- शेरगढ़ पेयजल परियोजना (89.69 करोड़ रू.)
3. सोनवा पेयजल परियोजना (105.15 करोड़ रू.)
4. राजकीय अभियान्ति्रक महाविद्यालय भवन, बारां (164.00 करोड़ रू.)
5. राजकीय महाविद्यालय भवन, छबड़ा, का निर्माण कार्य (6 करोड़ रू.)
6. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, नाहरगढ़, का भवन निर्माण कार्य (3.89 करोड़ रू.)
7. एनएच- 52 के दर्रा-झालावाड-तीनधार की 4 लेन परियोजना 48.80 किमी (1317 करोड़ रू.)
8. छबड़ा – कुम्भराज सड़क का चौड़ाईकरण, उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण कार्य (40 करोड़ रू.)

लोकार्पण/उद्घाटन
1. नागदा अन्ता बलदेवपुरा जलप्रदाय योजना (78.98 करोड़ रू.)
2. ल्हासी पेयजल परियोेजना, छबड़ा-छीपा बड़ोद, बारां (95.49 करोड़ रू.)
3. राजकीय जिला चिकित्सालय, बारां में अडानी बहिरंग भवन (11 करोड़ रू.)
4. अटरू गऊघाट बडोरा खानपुर सड़क का चौड़ाईकरण एवं सुदृढ़ीकरण (52.88 करोड़ रू.)
5. एडियान मन्दिर से कुम्भराज सड़क पर निर्मित पुलिया (3.40 करोड़ रू.)
6. स्वामी विवेकानन्द मॉडल स्कूल भवन, छीपा बड़ोद(सारथल) (6.46 करोड़ रू.)
7. सहरिया आवासीय विद्यालय भवन, कोयला (9.80 करोड़ रू.)
8. सहरिया आवासीय विद्यालय भवन, कवाई (9.80 करोड़ रू.)
9. बहुद्देशीय जनजाति छात्रावास भवन, बारां (आमापुर) (3.92 करोड़ रू.)