बीजेपी ने किया सत्ता का दुरूपयोग, रेलवे की जमीन पर बन रहा बीजेपी कार्यालय

0
4

कोटा। सत्ता का दुरुपयोग कैसे होता है, यह कोटा में 80 फीट रोड पर बन रहे बीजेपी कार्यालय में देखने को मिल रहा है। रेलवे की जमीन केडीए पर दबाव बनाकर सत्ताधारियों ने बीजेपी कार्यालय के नाम आवंटित करा ली।

शहर के 80 फीट रोड पर भाजपा का जिला कार्यालय बन रहा है। जिसकी जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। रेलवे ने बीजेपी के दफ्तर को अतिक्रमण बता दिया है। रेलवे ने यहां तक कह दिया है कि केडीए इस संबंध में कार्रवाई करें अन्यथा फिर हम इसे हटाएंगे। इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है।

करीब 3000 वर्गमीटर भूमि पर बन रहे इस कार्यालय को लेकर पश्चिम मध्य रेलवे ने इसे अपनी जमीन पर किया जा रहा अनाधिकृत निर्माण बताते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी। इधर, भाजपा और राज्य सरकार का दावा है कि केडीए के रिकॉर्ड के अनुसार जमीन विधिवत आवंटित है। इस पूरे घटनाक्रम ने सत्ता और विपक्ष के बीच नई सियासी बहस छेड़ दी है।

जमीन पर किसी अन्य उपयोग की अनुमति नहीं थी
रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता की ओर से 16 जून को जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित भूमि वर्ष 2008 में तत्कालीन यूआईटी को 35 वर्ष की लीज पर केवल सड़क निर्माण के उद्देश्य से दी गई थी। लीज की शर्तों के अनुसार इस जमीन का किसी अन्य उपयोग की अनुमति नहीं थी, जबकि मौके पर भाजपा जिला कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे ने केडीए से निर्माण रोकने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने को कहा है।

क्या है विवाद
रेलवे का दावा है कि उसके 1965 के लैंड प्लान के अनुसार संबंधित भूमि रेलवे की है और इसकी चौड़ाई 182.88 मीटर है। हालांकि संयुक्त सर्वे के दौरान राजस्व विभाग ने 1982 के रिकॉर्ड के आधार पर मौके पर रेलवे भूमि की चौड़ाई 72 मीटर बताई। इसी अंतर ने पूरे विवाद को और जटिल बना दिया है। राजनीतिक रूप से यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि वर्ष 2016 में भाजपा सरकार के दौरान यूआईटी ने यह भूखंड भाजपा को आवंटित किया था। कांग्रेस सरकार बनने के बाद 2020 में रेलवे की आपत्ति का हवाला देते हुए आवंटन निरस्त कर दिया गया। फिर 2025 में भाजपा सरकार के दौरान विधानसभा में मामला उठने के बाद यूडीएच विभाग ने दोबारा आवंटन बहाल कर दिया और निर्माण कार्य शुरू हो गया।

मंत्री खर्रा ने केडीए की जमीन बताई
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कोटा प्रवास पर मीडिया से कहा कि केडीए के मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार भूमि केडीए की है और रेलवे के दावे से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। दूसरी ओर रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उनके पास लीज एग्रीमेंट और स्वामित्व से जुड़े पूरे रिकॉर्ड मौजूद हैं, आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह रेलवे और केडीए के बीच का मामला है
पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने रेलवे की आपत्ति और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आवंटन निरस्त किया था। उनका दावा है कि संबंधित भूमि रेलवे की है और उस पर कार्यालय निर्माण लीज की शर्तों के विपरीत है। भाजपा शहर अध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि पार्टी ने केडीए को पूरी राशि जमा कर विधिवत आवंटन प्राप्त किया है। उनके अनुसार यदि कोई विवाद है तो वह रेलवे और केडीए के बीच का प्रशासनिक मामला है।