Tuesday, July 14, 2026
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दसवीं में अब होम एग्जाम नहीं, सीबीएसई बोर्ड परीक्षा होगी

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बागपत। नए सत्र से कक्षा दस के छात्रों को बोर्ड परीक्षा देनी पड़ेगी। सीबीएसई बोर्ड चैयरमेन अनिता करवाल ने शनिवार को आयोजित सीबीएसई बोर्ड के प्रधानाचार्य व प्रबंधकों की सेमिनार में यह जानकारी दी। इसमें केन्द्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉक्टर सत्यपाल सिंह, सीबीएसई चैयरमेन अनिता करवाल, सीबीएसई सचिव अनुराग त्रिपाठी शामिल रहे। सेमिनार में शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रकाश डाला गया।

सीबीएसई चैयरमेन ने सभी स्कूल संचालकों को हिदायत दी कि वह सभी अध्यापकों को सीबीएसई बोर्ड में रजिस्टर कराए, तथा शिक्षा में सुधार करे। इसके अलावा कक्षा दस की होम एग्जाम परीक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया। अनिता करवाल ने यह भी कहा कि स्कूलों में बच्चों को स्वास्थ्य खानपान व पढाई आदि के लिए टाईम टेबल बनवाकर पढाई कराई जाये।

सोना एक महीने के उच्चतम स्तर पर, बढ़कर 30,400 रुपये हुआ

नई दिल्ली/कोटा। साल के आखिरी कारोबारी सत्र के दौरान सोना एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। शनिवार को सोने के भाव 175 रुपए बढ़कर 30,400 रुपए प्रति दस ग्राम के स्तर पर पहुंच गए। सोने में तेजी की मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में मजबूती का ट्रेंड और लोकल ज्वैलर्स द्वारा खरीद में बढ़ोत्तरी रही।
 
वहीं चांदी में तेजी का रुझान भी जारी रहा और इंडस्ट्रियल यूनिट्स और कॉइन मेकर्स डिमांड से चांदी 280 रुपए बढ़कर 39,980 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गईं।
 
ट्रेडर्स के मुताबिक डॉलर में कमजोरी और राजनीतिक अनिश्चितताओं से ग्लोबल मार्केट में सोना 1,302.50 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर मजबूत बना हुआ है। वहीं लोकल ज्वैलर्स की डिमांड से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।

बीते एक साल की बात करें तो लोकल मार्केट में सोने में 2,100 रुपए या 7.42 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, वहीं चांदी में 580 रुपए यानी 1.47 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
 
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के बीच कमोडिटीज को बूस्ट मिला, जिससे अन्य करंसीज के यूजर्स के लिए ये ज्यादा आकर्षक हो गई हैं।
 
2017 के दौरान सोने ने 31,350 रुपए प्रति दस ग्राम (8 सितंबर) का उच्चतम स्तर और 28,300 रुपए (2 जनवरी) का न्यूनतम स्तर छूआ।

कोटा सर्राफा
चांदी 39600 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 30300 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35340 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 30450रुपये प्रति दस ग्राम,  सोना 35520 रुपये प्रति तोला।

फिल्म पद्मावती में लगेंगे 26 कट, नाम बदलकर होगी रिलीज

मुंबई। सेंसर बोर्ड ने फिल्म पद्मावती का नाम बदलने को कहा है। लिहाजा फिल्म का नाम पद्मावत हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड ने फिल्ममेकर्स को 26 कट्स के साथ फिल्म रिलीज करने को कहा है। इससे पहले करणी सेना समेत कई हिंदू संगठनों ने फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ की बात कही थी।

इसको लेकर 28 दिसंबर को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सेंसर बोर्ड- CBFC) ने पद्मावती का रिव्यू किया था। फिल्म में जरूरी बदलाव करने के लिए एक्सपर्ट्स का एक पैनल भी बनाया गया था। बता दें कि फिल्म को 1 दिसंबर को रिलीज किया जाना था। लेकिन विवादों में आने के चलते रिलीज टाल दी गई थी।

राजस्थान के 3 प्रोफेसर का बनाया गया स्पेशल पैनल
– 28 दिसंबर को सेंसर बोर्ड ने पद्मावती का रिव्यू किया था। इसमें फैसला किया गया कि पद्मावती में कुछ बदलाव के बाद फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही फिल्म का नाम पद्मावत हो सकता है।

– सेंसर बोर्ड ने फिल्म के रिव्यू के लिए स्पेशल पैनल बनाया था, जिसमें कुछ प्रोफेसरों उदयपुर से अरविंद सिंह और जयपुर से डॉ. चंद्रमणि सिंह और प्रो. केके सिंह को बुलाया गया था। एक्सपर्ट्स के पैनल ने फिल्म में ऐतिहासिक-सांस्कृतिक मुद्दे को देखते हुए फिल्म में कुछ बदलाव करने को कहे थे।

– सेंसर बोर्ड का कहना था, “फिल्म को लेकर फिल्ममेकर्स और सोसाइटी का रवैया संतुलित होना चाहिए। हमें फिल्म से जुड़ी कुछ बातों को लेकर चिंता है। स्पेशल पैनल ने फिल्म में कुछ चीजें जोड़ने की बात कही हैं, लिहाजा यही हमारा फैसला है। “

फिल्म पद्मावती को लेकर क्या आपत्ति है?
– राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। फिल्म में रानी पद्मावती को भी घूमर नृत्य करते दिखाया गया है। जबकि राजपूत राजघरानों में रानियां घूमर नहीं करती थीं।
– हालांकि, भंसाली साफ कर चुके हैं कि ड्रीम सीक्वेंस फिल्म में है ही नहीं।

कौन थीं रानी पद्मावती?
पद्मावती चित्तौड़ की महारानी थीं। उन्हें पद्मिनी भी कहा जाता है। वे राजा रतन सिंह की पत्नी थीं। उन्होंने जौहर किया था। उनकी कहानी पर ही संजय लीला भंसाली ने फिल्म बनाई है।

क्या हकीकत में थीं रानी पद्मावती?
वे कोरी कल्पना नहीं थीं। रानी पद्मावती ने 1303 में जौहर किया। मलिक मोहम्मद जायसी ने 1540 में ‘पद्मावत’ लिखी। छिताई चरित, कवि बैन की कथा और गोरा-बादल कविता में भी पद्मावती का जिक्र था।

क्या जायसी ने हकीकत के साथ कल्पना जोड़ी?
इसी पर डिबेट है। कई इतिहासकार कुछ हिस्सों को कल्पना मानते हैं। जायसी ने लिखा कि पद्मावती सुंदर थीं। खिलजी ने उन्हें देखना चाहा। चित्तौड़ पर हमले की धमकी दी। रानी मिलने के लिए राजी नहीं थीं। उन्होंने जौहर कर लिया।

खिलजी हीरो नहीं था
चित्तौड़गढ़ के जौहर स्मृति संस्थान का कहना है- फिल्म में हमलावर खिलजी को नायक बताया है। जबकि राजा रतन सिंह की अहमियत खत्म कर दी है। यही इतिहास से छेड़छाड़ है।

घूमर नृत्य नहीं, सम्मान
फिल्म के एक गाने में घूमर नृत्य दिखाया है। राजपूतों के मुताबिक, घूमर अदब का प्रतीक है। रानी सभी के सामने घूमर कर ही नहीं सकतीं।

GST चोरी : इस ‘बिल’ से बच नहीं पाएगा कोई

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नई दिल्ली। सरकार को उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक (E-way) बिल्स की शुरुआत के बाद गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में 20-25 फीसदी की वृद्धि होगी। इससे माल के आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी और रेवेन्यू लीकेज को रोका जा सकेगा।

टैक्स अधिकारी मानते हैं कि कुछ GST लागू होने के बाद से कुछ उद्योग टैक्स नहीं चुका रहे हैं, क्योंकि GST के तहत आंशिक चोरी असंभव है, या तो आप 0 टैक्स देते हैं या फिर 100 फीसदी। ई-वे बिल वह तरीका है जिससे ऐसे लोगों को सिस्टम में लाया जा सकेगा।

जिन राज्यों ने VAT के लिए ई-वे बिल्स को लागू किया था उनके सालाना कलेक्शन में 20-25 फीसदी की वृद्धि हुई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमें राष्ट्रीय तौर पर ऐसी ही उम्मीद GST को लेकर भी है।’

17 राज्यों में पहले से ही किसी ना किसी रूप में ई-वे बिल्स मौजूद है, जिनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कई पूर्वी राज्य शामिल हैं, लेकिन महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित 14 राज्य ऐसे हैं जो फरवरी में नए सिस्टम को अपनाएंगे।

कुछ राज्यों के पास राज्य के भीतर और बाहर माल के मूवमेंट पर नजर रखने का सिस्टम मौजूद है। ई-वे बिल्स को जुलाई में GST की शुरुआत से ही लागू किया जाना था, लेकिन सरकार ने सिस्टम तैयार होने तक इसे टाल दिया था।

1 फरवरी से अनिवार्य
राष्ट्रीय ई-वे बिल्स 1 जनवरी तक तैयार हो जाएगा, कंपनियां 15 जनवरी से इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग टूल प्राप्त कर सकती हैं और 1 फरवरी से यह अनिवार्य होगा। अंतर्राज्यीय बिल्स को जून से अनिवार्य किया जाएगा। यह अलग-अलग राज्यों के ई-वे बिल्स के अंतर को दूर करेगा।

कर्नाटक में ट्रायल
इस समय इसका कर्नाटक में ट्रायल चल रहा है और अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम ठीक से काम करा है। राज्य में प्रतिदिन 1.1 लाख ई-वे बिल्स तैयार हो रहे हैं।

पूरे देश में लागू होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि प्रतिदिन 40 लाख ई-वे बिल्स जेनरेट होंगे। इसमें से 15-16 लाख यानी करीब 40 फीसदी अंतरराज्यीय होंगे।

अधिकारी ने बताया कि करीब 50 फीसदी माल, जिनसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार होता है, को छूट होगी और 50,000 और इससे अधिक मूल्य के सामानों के लिए ही ई-वे बिल की जरूरत है। गैर मोटर चालित वाहनों से सामानों की आवाजाही होने पर भी इसकी जरूरत नहीं होगी।

क्या है ई-वे बिल?
यह एक टोकन है, जो माल की आवाजाही के नियमन के लिए ऑनलाइन जेनरेट किया जा सकता है। यह देशभर में वैलिड होगा।

कैसे जेनरेट करते हैं इसे?
-कोई भी आपूर्तिकर्ता, प्राप्तकर्ता, ट्रांसपोर्टर इसे जेनरेट कर सकते हैं।
-ट्रैकिंग के लिए यूनीक ई-वे बिल नंबर और क्यूआर कोड जेनरेट होगा।
-SMS आधारित सुविधा भी उपलब्ध है।

कैसे काम करेगा?
-पूरी यात्रा के दौरान केवल एक बार वेरीफिकेशन होगा।
-जांच और वेरीफिकेशन की ऑनलाइन रिपोर्टिंग होगी।
-30 मिनट से अधिक समय तक मालवाहन के रोके जाने पर ट्रांसपोर्ट्र की इसकी जानकारी अपलोड कर सकते हैं।

किस पर छूट
-50 हजार रुपये से कम मूल्य के सामान।
-अंतरराष्ट्रीय पोर्ट से आंतरिक क्षेत्र में लाए जा रहे सामान।
-केंद्र-राज्य द्वार निर्धारित विशेष क्षेत्र में अंतर्राज्यीय आवाजाही।

फायदा
-चेक पोस्ट पर वेटिंग टाइम में कमी
-पूरी तरह ऑनलाइन प्रोसेस
-भ्रष्टाचार के लिए कोई मौका नहीं।

केंद्र ने राज्यों को जारी किए 24,500 करोड़, राजस्थान को मिले 1,911 करोड़

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नई दिल्ली/जयपुर/ कोटा। पूरे देश की कर प्रणाली को एकीकृत करने वाले आर्थिक सुधार जीएसटी के लागू होने के बाद राज्यों को बड़ा राजस्व घाटा हुआ है। जुलाई-अक्टूबर तिमाही में राज्यों को हुए राजस्व घाटे को देखते हुए केंद्र सरकार ने 24,500 करोड़ रुपये का मुआवजा जारी किया है। यह जानकारी शुक्रवार को सरकार ने संसद को दी।

जीएसटी मुआवजा के तहत जारी हुए फंड में कर्नाटक को केंद्र से सबसे अधिक 3,271 करोड़ रुपये मिले हैं, उसके बाद गुजरात को 2,282 करोड़ रुपये और पंजाब को 2,098 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। 

राजस्थान को 1,911 करोड़ रुपये, बिहार को 1,746 करोड़ रुपये, यूपी को 1,520 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 1,008 करोड़ रुपये और ओडिशा को 1,020 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। 

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने शुक्रवार को एक लिखित प्रश्न के जवाब में बताया, ‘…जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों को जुलाई से नवंबर के बीच हुए राजस्व घाटे को देखते हुए दो महीने मुआवजा जारी किया गया है।’

जीएसटी के तहत लग्जरी वस्तुओं को जीएसटी के सबसे अधिक स्लैब यानी 28 प्रतिशत में रखा गया था। शुक्ला ने बताया, ‘कुछ वस्तुओं पर लगने वाले सेस का रेट जीएसटी के पहले के रेट के करीब रखना था इसलिए उसमें ज्यादा अंतर नहीं आया है।’ 

वॉलिट कंपनियों को केवाईसी के लिए मिले 2 महीने एक्सट्रा

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नई दिल्ली। आरबीआई ने डिजिटल वॉलिट (ई-वॉलिट) और प्रीपेड इन्सट्रूमेंट यूजर्स के केवाईसी वेरिफेकेशन की मियाद 2 महीने बढ़ा दी है। अब डिजिटल वॉलिट प्रवाइडर कंपनियां फरवरी के अंत तक अपने यूजर्स का केवाईसी वेरिफकेशन कर सकती हैं।

इससे पहले अक्टूबर में आरबीआई ने 31 दिसंबर 2017 तक मिनिमम यूजर्स का केवाईसी वेरिफिकेशन पूरा करने का आदेश दिया था। सूत्रों के अनुसार ,ई-वॉलिट यूजर्स की भारी संख्या को देखते हुए इस डेडलाइन का पालन करने में कंपनियों को मुश्किल हो रही थी।

आरबीआई के इस फैसले से कंपनियों को राहत मिली है। देश के सबसे बड़े ई-वॉलिट सर्विस प्रवाइडर पेटीएम के केवल ऐंड्रॉइड पर ही लगभग 10 करोड़ यूजर्स हैं। पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा का कहना है कि पेटीएम के 5.2 करोड़ यूजर्स की केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

अब पेटीएम ओटीपी बेस्ड केवाईसी लाने पर विचार कर रहा है। कंपनी का मानना है कि इससे तय समय में केवाईसी के टारगेट को पूरा करने में मदद मिलेगी। केवाईसी टारगेट को पूरा करने में आ रही दिक्कतों के मद्देनजर पेंमेट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने आरबीआई से केवाईसी वेरिफिकेशन की डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी।

पमेंट्स काउंसिल का मानना था वेरिफिकेशन की डेडलाइन अगर नहीं बढ़ाई गई तो यूजर्स के अकाउंट फ्रीज होने का खतरा था, इससे लोगों की बेवजह परेशानी सामना करना पड़ेगा। आपको बता दें कि देश में अभी पेटीएम के अलावा मेबिक्विक, जियो,ओला जैसी कई कंपनियों के ई-वॉलिट्स यूजर्स के लिए उपल्ब्ध हैं।

सफाई कर कोटा की जनता ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, देखिए वीडियो

कोटा। डॉक्टर और इंजीनियर तैयार करने वाले शहर कोटा ने शुक्रवार को देश को एक सीख दी। यहां एक साथ सफाई करने का विश्व रिकॉर्ड बना। इस रिकॉर्ड में कोटा व्यापार महासंघ समेत पूरे देश के युवा शामिल हुए। कश्मीर से कन्याकुमारी तथा पश्चिम से पूर्वोत्तर तक से कोटा आकर कोचिंग कर रहे विद्यार्थियों ने आमजन के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाया।

यहां 50 हजार से अधिक लोगों ने सड़कों पर आकर सफाई की, इसमें एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के 35 हजार से अधिक कोचिंग विद्यार्थी एवं 15 हजार से अधिक आमजन तथा विभिन्न सामाजिक, व्यावसायिक, धार्मिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक संस्थाओं के सदस्य शामिल थे। अभियान के तहत कोटा नगर निगम के सभी 65 वार्डों के साथ-साथ शहर के 100 से अधिक स्थानों पर सफाई की गई।

इनमें खेल मैदान, अस्पताल, सरकारी कार्यालय, पुलिस थाने, राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख चौराहे, शिक्षण संस्थान, बाग-बगीचे शामिल थे।गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के नेशनल हेड इण्डिया आलोक कुमार ने इसे विश्व रिकॉर्ड मानते हुए मौके पर ही प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किया।

वहीँ स्वच्छता महाअभियान के तहत कोटा व्यापार महासंघ ने नगर निगम का साथ मिलकर छावनी इलाके में स्वच्छता का अभियान चलाया। इस मौके पर महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने व्यापारियों को स्वच्छता का सन्देश देते हुए व्यापारियों के साथ सफाई की। बाद में उन्होंने व्यापारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

माहेश्वरी ने अपने संदेश में कहा कि स्वच्छता के लिए हर व्यापारी को अपनी जिम्मेदारी निभानी है। यह सिर्फ एक दिन के लिए नहीं, बल्कि हमेशा के लिए अपने संस्थानों के आसपास कचरा एकत्रित न होने दें। प्रतिष्ठानों पर डस्टबिन का उपयोग करें। अभियान में महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं पदाधिकारी मौजूद थे। 

मुख्य कार्यक्रम झालावाड़ रोड स्थित एलन साकार कैम्पस के सामने मैदान में हुआ। यहां 8 हजार विद्यार्थी और आमजन एकत्रित हुए। कार्यक्रम में शहर के महापौर महेश विजय, उपमहापौर सुनीता व्यास, विधायक संदीप शर्मा, जिला कलक्टर रोहित गुप्ता, शहर पुलिस अधीक्षक अंशुमन भौमिया, एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक राजेश माहेश्वरी, नवीन माहेश्वरी, नगर निगम के वार्ड पार्षद एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।

ऐसा कहीं नहीं देखा
हम देश-विदेश में जाते हैं और आयोजनों को देखते हैं लेकिन ऐसा कहीं नहीं देखा। कोटा में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पूरे देश से आए स्टूडेंट्स को इस अभियान में शामिल होते देखकर बहुत अच्छा लगा। यहां मिनी इंडिया का रूप दिखा। उम्मीद है इस अभियान के बाद कोटा बदला हुआ नजर आएगा। – आलोक कुमार, नेशनल हेड (इंडिया), गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड

वर्ष 2017 में स्‍टॉक मार्केट इन्‍वेस्‍टर्स की चांदी, 45.50 लाख करोड़ बढ़ी संपत्ति

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नई दिल्‍ली। भारतीय स्‍टॉक मार्केट इन्‍वेस्‍टर्स के लिए 2017 का साल बेहद खास रहा। इस साल  इन्‍वेस्‍टर्स की संपत्ति 45.5 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई। साल के दौरान बंबई शेयर बाजार, बीएसई  के संवेदी सूचकांक में 28 फीसदी की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। 

बीएसई का सेंसेक्स 7,430.37 अंक चढ़ा
साल के दौरान बीएसई का सेंसेक्स 7,430.37 अंक चढ़ा। यानी इसमें 27.91 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। बीएसई में लिस्‍टेड 30 प्रमुख कंपनियों के शेयर प्राइस पर आधारित सेंसेक्स 27 दिसंबर को कारोबार के दौरान 34,137.97 अंक के अब तक के सर्वोच्च स्तर को छू गया।
 
लिस्‍टेड कंपनियों का मार्केट कैप बढ़ा
बीएसई में लिस्‍टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 45,50,867 करोड़ रुपए बढ़कर 1,51,73,867 करोड़ यानी 2,300 अरब डॉलर हो गया। साल 2017 के आखिरी कारोबारी दिन को आज सेंसेक्स 208.80 अंक यानी 0.62 फीसदी की जोरदार बढ़त के साथ 34,056.83 अंक पर बंद हुआ।

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट 
एंजल ब्रोकिंग के तकनीकी और डेरिवेटिव्ज के मुख्य विश्लेषक समीत च्व्हाण ने कहा, साल 2017 का आखिरी कारोबारी दिन पॉजिटिव रुख के साथ समाप्त हुआ। इसके साथ ही साल के समाप्ति पर मार्केट  रिकार्डं हाई पर बंद हुआ। भारतीय शेयर मार्केट के लिए यह साल महत्वपूर्ण रहा।

यह भी कहा जा सकता है कि ग्‍लोबल मार्केट के लिए यह साल उल्लेखनीय रहा। साल के दौरान कई कंपनियां कैपिटल मार्केट में उतरी। कुल मिलाकर 36 कंपनियों के आईपीओ बाजार में आए और उन्हें इन्‍वेस्‍टर्स का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ।
 
RIL सबसे बड़ी कंपनी 
साल की समाप्ति पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, आरआईएल सबसे मूल्यवान कंपनी रही। इसके शेयरों का मार्केट कैप 5,83,347.34 करोड़ रुपए रहा। इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विस यानी टीसीएस 5,16,934.22 करोड़ रुपए का स्थान रहा। तीसरे स्थान पर एचडीएफसी बैंक रहा।

इसका मार्केट कैप 4,85,272.61 करोड़ रुपए रहा। इसके बाद आईटीसी रहा जिसका मार्केट कैप 3,20,730.92 करोड़ रुपए रहा। पांचवें स्थान पर हिन्दुस्तान यूनिलीवर रहा जिसका मार्केट कैप ,96,122.31 करोड़ रुपये रहा।

चार्टर्ड अकाउंटैंट्स पर सख्त होगी सरकार, संसद में दिए संकेत

नई दिल्ली। सरकार अकाउंटिंग और ऑडिटिंग स्टैंडर्ड्स के कंप्लायंस की देखरेख के साथ ऑडिट प्रोफेशनल्स यानी सीए पर नजर रखने के लिए एक स्वतंत्र रेग्युलेटर के पक्ष में है। सरकार ने संसद में यह जानकारी दी। हालांकि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटैंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने कहा कि रेग्युलेटर का मौजूदा फ्रेमवर्क इस कार्य के लिए ‘पर्याप्त’ है।
 
 सरकार ने संसद में दिए संकेत
स्टेट कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्टर पी पी चौधरी ने लोकसभा में दिए लिखित जवाब में कहा, ‘हालांकि सरकार की राय में आईसीएआई फ्रेमवर्क में मौजूदा सेल्फ रेग्युलेशन मेकैनिज्म के अलावा एक स्वतंत्र रेग्युलेटर की जरूरत है, जो अकाउंटिंग व ऑडिटिंग स्टैंडर्ड्स की देखरेख के साथ ऑडिट प्रोफेशनल्स पर भी नजर रख सके।’

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 देशों में ऐसे काम स्वतंत्र रेग्युलेटर्स भी करते हैं। मिनिस्टर ने कहा कि नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) की स्थापना की दिशा में काम हो रहा है।
 
कंपनी एक्ट में है एनएफआरए की व्यवस्था
कंपनी एक्ट में एनएफआरए की स्थापना की व्यवस्था है, जो अकाउंटिंग और ऑडिटिंग पॉलिसीज, स्टैंडर्ड्स को अपनाने, उनकी कंप्लायंस की निगरानी और ऐसे कंप्लायंस से जुड़े प्रोफेशनल्स की सर्विस की क्वालिटी पर नजर रखने के लिए सरकार को सिफारिशें भेजेगा।

GSTR-1 फाइलिंग की डेट 10 जनवरी तक बढ़ाई

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नई दिल्ली । सरकार ने कारोबारियों और ट्रेडर्स को राहत देते हुए जीएसटीआर-1 फाइलिंग की डेट 10 जनवरी 2018 तक बढ़ा दी है। अब सभी तरह के कारोबारियों को जीएसटीआर-1 रिटर्न भी 10 जनवरी तक फाइल करना है जिसकी पहले डेडलाइन 31 अक्टूबर 2017 थी।

कंपोजिशिन स्कीम नहीं लेने वाले छोटे कारोबारियों को मिली राहत
कंपोजिशिन स्कीम लेने वाले और नहीं लेने वाले 1.50 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले छोटे कारोबारी अपना पहला जीएसटीआर-1 रिटर्न 10 जनवरी 2018 तक फाइल कर पाएंगे। इन कारोबारियों को 31 दिसंबर तक रिटर्न फाइल करनी थी। ये जुलाई से सिंतबर पहले क्वार्टर की रिटर्न है।
 
 मासिक GSTR-1 रिटर्न भरने वालों के लिए भी बढ़ाई डेडलाइन
जो टैक्सपेयर्स जुलाई 2017 का जीएसटीआर-1 रिटर्न फाइल करने से चूक गए, उनके लिए फिर से रिटर्न फाइल करने के लिए जीएसटी पोर्टल पर विंडो खोली गई थी। अब ये भी 10 जनवरी तक रिटर्न फाइल कर पाएंगे। यानी 1.50 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को जुलाई से अक्टूबर महीने तक की सभी मंथली रिटर्न 10 जनवरी तक फाइल करनी है।
 
 यहां से डाउनलोड कर सकते हैं जीएसटीआर-1
कारोबारी और ट्रेडर्स इस लिंक पर क्लिक करके जीएसटीआर-1 रिटर्न फॉर्म और ऑफलाइन टूल डाउनलोड कर सकते हैं। ये एक तरह की जिप फाइल है जिसमें रिटर्न फॉर्मेट से लेकर इन्वॉयस की ऐक्सल शीट भी है।

पोर्टल पर रिटर्न और बिल बनाने का है ऑफलाइन टूल
जीएसटी के पोर्टल पर जीएसटी सॉफ्टवेयर टूल है जिसे कारोबारी अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकते हैं। ये सॉफ्टवेयर टूल एक्सल फॉरमेट और जावा स्क्रिप्ट में है। इस एक्सल फॉरमेट पर आप अपने बिल बना सकते हैं। बिल की जानकारी एक्सेल शीट में सेव करके इसे ही जीएसटी के पोर्टल पर रिटर्न के साथ अपलोड कर सकते हैं।
 
 जीएसटीआर-1 में देनी होगी ये जानकारी
– जीएसटीआर-1 में सप्लायर को आउटवर्ड सप्लाई की डिटेल भरनी है।
– पिछले फाइनेंशियल ईयर का टर्नओवर
– जीएसटीआर-1 सभी कारोबारियों को अपने डीलर को इन्पुट क्रेडिट पास करने पहला स्टेप है।
– जीएसटीआर-1 सभी रजिस्टर्ड कारोबारियों को भरना है।
– जीएसटीआर-1 वैसे ज्यादातर सभी कारोबारियों को भरना है। लेकिन ये रिटर्न ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स, इन्पुट सर्विस डिस्ट्रीब्युटर, कंपोजिशन स्कीम के तहत रजिस्टर्ड डीलर्स, नॉन रेजिडंट डीलर्स और टैक्स डिडक्टर्स को जीएसटीआर-1 फाइल नहीं करना है।