Tuesday, July 14, 2026
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अटल पेंशन योजना को आधार से जोड़ने के लिये नया फार्म कल से

नयी दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक (पीएफआरडीए) ने अटल पेंशन योजना एपीवाई सेवा प्रदाताओं से अंशधारकों के आधार को उनके खाते से जोड़ने के बारे में मंजूरी लेने के लिये संशोधित फार्म का उपयोग करने को कहा है।

सरकार का प्रमुख सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम (एपीवाई) पेंशन की गारंटी देती है। पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण पीएफआरडीए ने एक परिपत्र में कहा कि आधार को एपीवाई से जोड़ने को लेकर वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग तथा एपीवाई सेवा प्रदाताओं के साथ कई बैठकें हुई है।

इस प्रकार की अंतिम बैठक एक महीने पहले हुई। बैठक में पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक आफ बड़ौदा तथा ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स ने भाग लिये।

परिपत्र के अनुसार एपीवाई अंशधारक पंजीकरण फार्म को इसके हिसाब से संशोधित किया है ताकि आधार को खाते से जोड़ने के बारे में सहमति प्राप्त की जा सके और उसका सत्यापन हो सके।

इसमें कहा गया है, सभी एपीवाई सेवा प्रदाताओं को जनवरी 2018 से संशोधित फार्म प्राप्त करना और उसके हिसाब से विस्तृत जानकारी प्राप्त करनी है।आधार के बारे में सूचना प्राप्त करने के बाद सेवा प्रदाताओं को उसे सेंट्रल रिकार्डकीपिंग एजेंसी पर अपलोड कराना होगा।

अटल पेंशन योजना 18 साल से 40 वर्ष के सभी खाताधारकों के लिये है। इसके तहत अंशधारकों को 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद न्यूनतम 1,000 रुपये से 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिलता है जो उनके योगदान पर निर्भर है।

चुनौतियों भरा रहा आईटी उद्योग के लिए ये साल

नयी दिल्ली। देश के 150 अरब डालर के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग के लिए यह साल अनेक चुनौतियों से भरा रहा जिसमें वीजा जांच कड़ी किया जाना व ग्राहक खर्च में कमी शामिल है। हालांकि आटोमेशन व कृत्रिम समझा एआई जैसी नयी प्रौद्योगिकियों के सामने आने से अगला साल 2018 काफी उम्मीदों से भरा है।

साफ्टवेयर कंपनियों के संगठन नास्कॉम के अध्यक्ष आर चंद्रशेखर ने कहा, 2017 का साल बाकी वर्षों जैसा नहीं रहा। राजनीतिक व आर्थिक कारकों ने इसकी जटिलता को बढ़ाया। वीजा जांच कड़ी हुई तो ग्राहकों ने आईटी व्यय को रोक लिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी वादों को पूरा करते हुए वीजा नियमों को कड़ा करने के लिए कई कदम उठाए। सात मुस्लिम बहुल देशों के खिलाफ आव्रजन प्रतिबंधों के विवादास्पद फैसले का अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों गूगल व फेसबुक ने विरोध किया और कहा कि इस तरह के कदमों से प्रतिभाओं को अमेरिका में आकर्षित करने में दिक्कत होगी।

इसके साथ ही अमेरिका ने एच1बी वीजा श्रेणी की प्रीमियम प्रोसेसिंग को रोक दिया। भारत की आईटी निर्यात आय में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है। अमेरिका ने अमेरिकी खरीदो, अमेरिकियों को काम दो को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए।

अमेरिकी प्रशासन अब एच1बी वीजाधारकों के जीवनसाथियों को कामकाजी अधिकार देने संबंधी नियम को समाप्त करने के लिए कदम उठा रहा है। इसका असर हजारों भारतीय कर्मचारियों व परिवारों पर पड़ सकता है।

साइंट के संस्थापक बीवीआर मोहन रेड्डी ने कहा, नयी नियामकीय चुनौतियां ट्रंप प्रशासन की नयी वीजा प्रणाली तथा ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया व सिंगापुर जैसे देशों में वीजा नियमों में बदलाव के रूप में आ रही हैं.. इससे लोगों की आवाजाही कम होगी।

ट्रंप प्रशासन की एच1बी वीजा कार्यक्रम में आमूल चूल बदलाव की योजनाओं ने इस साल भारतीय आईटी कंपनियों की चिंताएं बढ़ाईं तो अनेक कंपनियों ने अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियां बढ़ाने पर जोर दिया ताकि अपने ग्राहकों केा सेवाएं जारी रख सकें।

उदाहरण के लिए इन्फोसिस ने 10,000 अमेरिकियों को रोजगार देने व अमेरिका में चार हब स्थापित करने की घोषणा की। टीसीएस, विप्रो व अन्य ने भी अमेरिका में अपनी स्थानीय उपस्थिति को मजबूत बनाया है।

अब डाटा लॉगर से अपडेट होगा ट्रेन का रनिंग टाइम, ताकि मिले सटीक जानकारी

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जोधपुर/कोटा। आप ट्रेन में हैं और गाड़ी गंतव्य स्टेशन पर तय समय से एक घंटे बाद पंहुचनी है। आप उस वक्त हैरान रह जाते हैं, जब रेलवे के सिस्टम में ट्रेन सही समय पर गंतव्य तक पंहुचना बताती है। ऐसी हजारों शिकायतें रेलवे के ट्विटर हैंडलर पर दर्ज हो रही हैं।

आंकड़ों में अभी देश में 75 फीसदी ट्रेनों को समय पर चलना बताया जा रहा है, जबकि हकीकत उलट है। रेलवे खामी को सुधारने के लिए सिस्टम में सुधार कर रहा है। अब रेलवे अपने सिस्टम को ट्रेन के रवाना होने और आगमन पर दिए जाने वाले सिग्नल से जोड़ने जा रहा है, ताकि यात्रियों को ट्रेन की वास्तविक लोकेशन का पता चल सके।

इसके आधार पर ही अब जोन की समय पालन रिपोर्ट बनेगी, जिसमें प्रतिशत की जगह अब 4 ग्रेड से रैंकिंग दी जाएगी। यह नया सिस्टम 1 जनवरी से लागू होगा। रेलवे के निदेशालय ने परिपत्र जारी कर सभी 16 जोन के महाप्रबंधकों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं।

रेलवे बोर्ड में एफिशिएंसी एंड रिसर्च के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विकास आर्य ने बताया कि परिचालन समय पर उससे जुड़े अधिकारियों को जवाबदेह बनाने के लिए अब सभी जोन में ट्रेनों के समय पालन की परफॉर्मेंस प्रतिशत की जगह ग्रेड से तय होगी। 85% समय पालन वाले जोन को ए-प्लस, 75 से 85 पर ए, 60 से 75 पर बी और 60% या उससे कम पर सी ग्रेड दिया जाए।

सिग्नल टाइम ऑटोमेटिक दर्ज होगा
स्टेशन मास्टर ट्रेन को रवाना करने या प्लेटफार्म पर लेने के लिए जब सिग्नल देगा, तो उसका टाइम डाटा लॉगर में दर्ज होता है। नए सिस्टम के तहत इस डाटा लॉगर को कंट्रोलर के सिस्टम से ऑटोमेटिक मोड पर जोड़ा जाएगा। ऐसे में कंट्रोलर मैनुअली गलत टाइम नहीं डाल सकेगा और यात्रियों या उनके परिजन को ट्रेन की वास्तविक स्थिति और समय का पता लग सकेगा।

अभी मैनुअली डाटा फीड होता है
अभी प्रत्येक मंडल में कंट्रोलर मैनुअली डाटा फीड करते हैं। यही समय यात्रियों को नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) से बताया जाता है। अक्सर देखा गया है कि अपनी रैंक सुधारने के लिए कंट्रोलर एनटीईएस में गलत समय दर्ज करते हैं। इससे यात्री या उन्हें रिसीव करने वाले या छोड़ने स्टेशन आने वाले को सही ट्रेन के समय की सही जानकारी नहीं मिल पाती है।

उड़द की संपूर्ण खरीद नहीं होने से किसानों का सरकार से भरोसा उठा

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कोटा। हाड़ौती किसान यूनियन ने उड़द की संपूर्ण खरीद की मांग को लेकर राजफेड प्रशासक के नाम के शुक्रवार को राजफेड के क्षेत्रीय प्रबंधक को ज्ञापन दिया है। यूनियन के महामंत्री दशरथ कुमार ने बताया कि संभाग के 62 हजार किसानों ने समर्थन मूल्य पर उड़द बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था।

लेकिन अभी तक सिर्फ 42 हजार किसानों को एसएमएस के जरिए समर्थन मूल्य पर उड़द बेचने के लिए निर्धारित तारीख मिली है। ऐसे में करीब 20 हजार किसान अपनी उड़द बेचने के लिए निर्धारित तारीख का एसएमएस आने का इंतजार कर रहे है। खरीद का मैसेज नहीं मिलने से किसानों में सरकार के प्रति विश्वास टूट रहा है।

चूंकि प्रदेश में 10 लाख क्विंटल उड़द राजफेड को समर्थन मूल्य के तहत खरीदनी थी। और अभी तक 8 लाख क्विंटल ही उड़द की खरीद की गई है। वहीं प्रदेश में 92 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था।

सोने ने दिया इस साल 7.42% रिटर्न, 2100 रुपए की तेजी

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में इस साल सोने ने 7.42 फीसदी और चांदी ने 1.47 फीसदी रिटर्न दिया है। पिछले साल 31 दिसंबर को सोना 28,300 रुपए प्रति दस ग्राम था। इस साल यह 2,100 रुपए बढ़ा है।

दिल्ली में शनिवार को इसकी कीमत 175 रुपए बढ़कर 30,400 रुपए प्रति दस ग्राम रही। यह बीते एक माह में इसकी सबसे अधिक कीमत है। वहीं, चांदी पिछले साल 31 दिसंबर को 39,400 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी।

शनिवार को इसकी कीमत 280 रुपए बढ़कर 39,980 रुपए प्रति किलोग्राम रही।  2017 में दो जनवरी को सोना 28,300 रुपए प्रति दस ग्राम के साथ साल के सबसे निचले स्तर पर था।

जबकि आठ सितंबर को यह 31,350 रुपए तक पहुंचा, जो पूरे साल में इसकी सबसे अधिक कीमत रही। वहीं, विश्व स्तर पर सोना 13.17 फीसदी मजबूत हुआ। 2016 के अंत में न्यूयॉर्क में सोने की कीमत 1,150.90 प्रति औंस थी।

शुक्रवार को यह 1,302.50 प्रति औंस रही। इसी तरह, विश्व बाजार में चांदी इस साल 6.49 फीसदी मजबूत हुई। यह 15.88 डॉलर प्रति औंस के मुकाबले बढ़कर 16.91 प्रति औंस पर पहुंच गई।

खनन नीति में संशोधन होगा, अधिक बोली पर ज्यादा शुल्क लगेगा

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जयपुर। 50 फीसदी से अधिक छोटे खान ब्लाॅकों की नीलामी सफल नहीं हो पा रही है। ब्लाॅकों को फंसाने के लिए एक से लेकर तीन हजार फीसदी तक ऊंची बोली लगाई जा रही है। नीलामी शुल्क 7 से 8 हजार लगाकर ब्लाॅकों को रोका जा सके। इसे देखते हुए सरकार माइनर मिनरल पॉलिसी में संशोधन करेगी।

इसमें कोई भी व्यक्ति ब्लाॅकों को फंसा कर नहीं रख पाए। राज्य में ऐसे 59 ब्लाॅकों का आवंटन जनवरी में निरस्त होने की संभावना है। दरअसल मौजूदा नियम के अनुसार कोई भी 7 से 8 हजार रु. न्यूनतम नीलामी जमा कराकर ब्लाॅकों के लिए कितनी भी बोली लगा सकता है, लेकिन ऐसा प्रावधान नहीं है, जिससे वह निश्चित समय सीमा में खनन करे।

कई सालों के लिए एक हजार फीसदी से अधिक बोली लगने वाले ब्लाॅक फंस सकते हैं। पॉलिसी में संशोधन के लिए खान विभाग ने ड्राफ्ट तैयार किया है।

पद्मावती: नाम समेत 5 बदलावों का दिया सुझाव : सेंसर बोर्ड

मुंबई। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC- सेंसर बोर्ड) ने पद्मावती का नाम पद्मावत करने समेत 5 बदलाव करने के सुझाव दिए हैं। साथ ही फिल्म को U/A सर्टिफिकेट देने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पद्मावती में 26 कट लगाए जा सकते हैं। बोर्ड ने कट लगाने की बात से इनकार कर दिया।

वहीं राजपूत करणी सेना अभी भी अपने तेवर नहीं बदले। उन्होंने कहा है कि अगर किसी भी थिएटर में फिल्म लगी तो तोड़फोड़ करेंगे। इसको लेकर 28 दिसंबर को सेंसर बोर्ड ने पद्मावती का रिव्यू किया था।

फिल्म में जरूरी बदलाव करने के लिए एक्सपर्ट्स का एक पैनल भी बनाया गया था। बता दें कि फिल्म को 1 दिसंबर को रिलीज किया जाना था। लेकिन विवादों में आने के चलते रिलीज टाल दी गई थी।

किन 5 बदलावों के बाद ही रिलीज होगी फिल्म?
1. फिल्म का नाम पद्मावती से पद्मावत करना होगा। भंसाली ने कमेटी से कहा था कि फिल्म मोहम्मद जायसी के पद्मावत पर आधारित है।
2. किरदारों की गरिमा के मुताबिक घूमर डांस में सुधार करना होगा। विरोध करने वालों का कहना है कि राजपूत राजघरानों में रानियां घूमर नहीं करती थीं।
3. डिस्क्लेमर देना होगा कि यह सती प्रथा काे महिमामंडित नहीं करती है। विरोध कर रहे संगठन फैक्ट्स से छेड़छाड़ का आरोप लगा रहे हैं।
4. फिल्म काल्पनिक होने का डिस्क्लेमर देना होगा। 28 नवंबर को अाखिरी बार अप्लाई करने के दौरान फिल्म की कॉपी में डिस्क्लेमर नहीं दिया गया था।
5. ऐतिहासिक जगहों के गलत या भ्रामक संदर्भों को बदलना होगा।
(इन पांच बदलावों के बाद यू/ए सर्टिफिकेट के लिए फिल्म दोबारा सेंसर बोर्ड को जमा करवानी हाेगी।)

अंडरवर्ल्ड के दबाव में दी मंजूरी : करणी सेना
– श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने कहा कि अंडरवर्ल्ड के दबाव में फिल्म को मंजूरी दी गई। फिल्म दिखाने वाले सिनेमाघरों में तोड़फोड़ करेंगे।

– करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने दावा किया कि कमेटी ने सेंसर बोर्ड से कहा था कि खामियों की वजह से फिल्म रिलीज नहीं हो सकती। घूमर गाना बैन हो। करणी सेना और जौहर स्मृति संस्थान ने समीक्षा समिति को भंग कर नया पैनल बनाने की मांग की है।

– अखंड राजपूताना सेवा संघ के अध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा कि नाम और दृश्यों में बदलाव से लोगों की भावनाएं नहीं बदल जाएंगी। लगता है कि बोर्ड फिल्म निर्माता भंसाली की मदद का मन बना चुका है।

– मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वराज सिंह ने भी सवाल उठाते हुए इसके प्रमुख प्रसून जोशी को खत लिखा है।
कब हुई थी सेंसर बोर्ड की मीटिंग और क्या तय हुआ?

-28 दिसंबर। तय हुआ कि कुछ बदलावों के साथ फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जहां से कहानी ली गई है, उसके आधार पर फिल्म का नाम भी बदला जा सकता है।

बोर्ड ने क्या सुझाव दिया?
– प्रसून जोशी ने कहा कि फिल्म का टाइटल समेत 5 बदलाव करने को कहा गया है। फिल्म में बाकायदा डिस्क्लेमर भी लगाना होगा।
– सती प्रथा को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया जाएगा। फिल्म में दिखाए घूमर नृत्य में भी बदलाव होंगे।
क्या संजय लीला भंसाली को भी पक्ष रखने के मौका मिला?
– भंसाली पार्लियामेंट्री पैनल के सामने पेश हुए थे। उन्होंने कहा था कि फिल्म में 150 करोड़ रुपए लगे हैं। उनकी फिल्म 1540 में लिेखे गए ग्रंथ पद्मावत पर आधारित है।
– भंसाली प्रोडक्शन ने सेंसर बोर्ड को लेटर लिखा था जिसमें हिस्टॉरियंस और राजपूत कम्युनिटी के लोगों को फिल्म दिखाने की बात कही थी।

सेंसर बोर्ड के स्पेशल पैनल में कौन थे?
उदयपुर के अरविंद सिंह और जयपुर यूनिवर्सिटी के डॉ. चंद्रमणि सिंह और प्रो. केके सिंह।
– पैनल ने कहा कि फिल्म में दिखाई ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों की प्रामाणिकता तय होनी चाहिए।

बोर्ड का क्या रुख रहा?
– “फिल्म को लेकर फिल्ममेकर्स और सोसाइटी में संतुलित रवैया रखना चाहिए।”
– “फिल्म की पेचीदगी को देखते हुए हमने एक स्पेशल पैनल गठित किया था। पैनल के सुझाव पर ही बोर्ड अंतिम फैसला लेगा।”

क्या बोली करणी सेना?
राजपूत करणी सेना के सुखदेव सिंह गोगामेडी ने कहा कि हमारे लोग सिनेमा हॉल के बाहर रहेंगे। जिस भी थिएटर में फिल्म दिखाई जाएगी वहां तोड़फोड़ की जाएगी। फिल्म का रिव्यू करने वाली कमेटी ने ही उसका विरोध किया था लेकिन सेंसर बोर्ड ने अंडरवर्ल्ड के दबाव के चलते इसकी मंजूरी दे दी।

सहकारी बैंकों को आयकर में नहीं मिलेगी छूट

नई दिल्ली । सरकार ने मुनाफे वाले सहकारी बैंकों को आयकर में किसी भी तरह की छूट से इन्कार किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में बताया कि सहकारी बैंक भी अन्य वाणिज्यिक बैंकों की तरह ही काम करते हैं। इसलिए उन पर भी वही नियम लागू होते हैं।

एक प्रश्न के जवाब में जेटली ने कहा, ‘सहकारी बैंक आयकर कानून की धारा 80पी के तहत छूट के अधिकारी नहीं हैं। इस धारा में छूट का आधार ‘सहकारिता का सिद्धांत’ है, लेकिन इन बैंकों का कामकाज इससे ज्यादा व्यापक है। आयकर लाभ पर टैक्स है। लाभ में चल रहे सहकारी बैंकों को छूट देना तार्किक नहीं है।’

आइपीओ के बाद 77 कंपनियां गायब: देश में 77 कंपनियां ऐसी हैं, जो आइपीओ के जरिये पैसा जुटाकर गायब हो गईं। कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री पी. पी. चौधरी ने लोकसभा में यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि 1992-2001 के दौरान 238 गायब हुई कंपनियों का मामला सामने आया।

जांच के बाद 161 कंपनियों का पता लगाने के बाद उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। 77 कंपनियां अब भी सूची में हैं। ये ऐसी कंपनियां हैं, जिनके रजिस्टर्ड कार्यालय और निदेशकों का पता नहीं है। 2001 से ऐसा कोई नया मामला सामने नहीं आया है।

ऑनलाइन फ्रॉड के 25,800 मामले उजागर: 2017 में 21 दिसंबर तक ऑनलाइन फ्रॉड के 25,800 से ज्यादा मामले सामने आए। इनमें से अकेले 10,220 मामले अकेले चालू तिमाही के हैं। क्रेडिट व डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग के जरिये इन मामलों में करीब 179 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ।

राजकोषीय घाटा बेकाबू , 112 फीसदी पर पहुंचा

नई दिल्ली। वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों यानी अप्रैल से नवंबर के बीच केंद्र का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 112 फीसदी पर पहुंच चुका है। यह वर्ष 2008-09 के बाद सर्वाधिक है जब दुनिया को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा था।

सरकार के इस साल बाजार से अतिरिक्त उधारी उठाने के फैसले से राजकोषीय घाटे को इस वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 फीसदी पर रखने के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल लग रहा है।  वर्ष 2008-09 में अप्रैल-नवंबर के दौरान राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 132.4 फीसदी पहुंच गया था।

इसके बाद से राजकोषीय घाटा पहले 8 महीने के दौरान कभी भी 100 फीसदी के पार नहीं पहुंचा। लेकिन यह स्थिति अब बदल चुकी है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों के लिए व्यय और राजस्व के बीच अंतर यानी राजकोषीय घाटा 6.12 लाख करोड़ रुपये हो चुका चुका है।

 
बजट में पूरे वित्त वर्ष के लिए 5.46 लाख करोड़ रुपये राजकोषीय घाटे का अनुमान जताया गया था। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में कमी और अधिक व्यय के कारण राजकोषीय घाटा बढ़ा है। पिछले वर्ष इस अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का करीब 86 फीसदी था।

इस वर्ष अप्रैल-नवंबर के दौरान राजस्व घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 152 फीसदी पहुंच गया है जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में यह 98 फीसदी था। इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘अगर नवंबर तक के राजकोषीय घाटे, नवंबर के निराशाजनक जीएसटी संग्रह और सरकार की अतिरिक्त उधारी जुटाने की घोषणा को साथ मिलाकर देखें तो यह इस वित्त वर्ष राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकने का संकेत है।’
 
इसी सप्ताह सरकार ने बाजार से 50 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी जुटाने की घोषणा की थी जो 5.80 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अलग होगी। साथ ही सरकार ने ट्रेजरी बिलों के जरिये अपनी उधारी में 61,203 करोड़ रुपये की कमी की थी। इससे राजकोषीय घाटे की गणना करना थोड़ा टेढ़ा काम हो गया है।

सरल गणना के हिसाब से देखें तो अतिरिक्त उधारी से इस वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.54 फीसदी पहुंच जाएगा। पिछले वित्त वर्ष में भी यह इतना ही था। दोनों बार बजट में इसे जीडीपी का 3.2 फीसदी रखने का लक्ष्य रखा गया था। अगर ट्रेजरी बिल को एक साल से ज्यादा अवधि का किया जाता है तो इससे राजकोषीय घाटा और बढ़ सकता है।
 
इस बीच नवंबर में जीएसटी संग्रह गिरकर करीब 80 हजार करोड़ रुपये रह गया। अक्टूबर में यह 83,346 करोड़ रुपये था। सरकार ने हर महीने औसतन 91 हजार करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह का लक्ष्य रखा है। आंकड़ों के मुताबिक पहले 8 महीनों के दौरान सरकार को 8.04 लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियां हासिल हुई जो 15.15 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान का करीब 53.1 फीसदी है।

नवंबर अंत तक कुल व्यय 14.78 लाख करोड़ रुपये है जो बजट अनुमान का 68.9 फीसदी है। पिछले वर्ष इस दौरान यह बजट अनुमान का 65 फीसदी था। अदिति ने कहा कि इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा कितना रहता है, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा। यह भी देखना होगा कि जनवरी से मार्च के दौरान जीएसटी संग्रह में तेजी आती है या नहीं।

अधिकतर बैंक मिनिमम बैलेंस पर लगा रहे मनमाने चार्ज

मुंबई। अधिकतर बैंक रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाते हुए सेविंग्स अकाउंट्स में न्यूनतम राशि न रखने पर मनमाने चार्जेस लगा रहे हैं। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, पेनल्टी मिनिमम बैलेंस से जितनी राशि कम है उसके अनुरूप लगनी चाहिए लेकिन अधिकतर बैंक कस्टमर्स पर मनमानी पेनल्टी लगा रहे हैं।

यह भी पाया गया है कि बैंक आरबीआई के निर्देशों को न मानते हुए अधिकतर बैंक उचित पेनल्टी नहीं लगा रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे में गणित विभाग के प्रफेसर आशीष दास द्वारा की गई स्टडी दिखाती है कि अधिकतर बैंक मिनिमम बैलेंस से कम रहने वाले अमाउंट का औसतन 78 प्रतिशत चार्ज करते हैं।

स्टडी के मुताबिक, ‘भले ही मिनिमम बैलेंस पर बैंकों के लिए गाइडलाइंस जारी करने का श्रेय आरबीआई को जाता है लेकिन जारी होने के तीन साल बाद भी इनको लागू नहीं किया गया है।’

रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने निर्देश दिए हैं कि चार्जेस मिनिमम बैलेंस को पूरा करने में कम हो रही राशि के अनुरूप होने चाहिए और सेविंग्स अकाउंट सर्विस उपलब्ध कराने में आने वाले खर्च से लिंक्ड होने चाहिए लेकिन इस रेग्युलेशन का कमजोर पक्ष भी है।

इस रेग्युलेशन का फायदा उठाते हुए बैंक पेनल्टी के कई स्लैब्स बना देते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पेनल्टी के बड़े स्लैब्स और उसके चार्जेस सही नहीं हैं, और आनुपातिक चार्जेस के कॉन्सेप्ट की भी धज्जियां उड़ाते हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि मल्टीनैशनल बैंकों की पेनल्टी पब्लिक सेक्टर बैंकों की पेनल्टी के मुकाबले ज्यादा आनुपातिक है। ऐसा इसलिए भी है कि मल्टिनैशनल बैंक कि मिनिमम बैलेंस जरूरत भी अधिक होती है और वह पूरा न होने पर उन्हें बड़ी पेनल्टी मिलती है। दूसरी तरफ पब्लिक सेक्टर बैंकों में जरूरी मिनिमम बैलेंस अमाउंट कम होता है।

दास ने बताया, ‘बैंक मिनिमम बैलेंस की लिमिट सेट करने को स्वतंत्र हैं हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि पेनल्टी लगाते वक्त वह वर्चुअल मिनिमम बैलेंस तय कर लें और उसके आधार पर जुर्माना लगाएं।’

उन्होंने कहा, ‘आरबीआई यह कहता है कि मिनिमम बैलेंस पर पेनल्टी लगाते वक्त बैंक सेविंग्स अकाउंट सर्विस पर होने वाले खर्च को भी शामिल करें, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बैंक अपनी ओवरऑल कॉस्ट या बैड लोन्स की कॉस्ट भी शामिल कर लें।’