Saturday, May 16, 2026
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India-US trade deal: ट्रंप के 10% टैरिफ के बीच वाशिंगटन पहुंचेंगे अधिकारी

नई दिल्ली। India-US trade deal: भारत के करीब एक दर्जन अधिकारी 20 अप्रैल को वाशिंगटन पहुंच रहे हैं। वहां तीन दिन तक अमेरिकी अधिकारियों से पहली चरण की द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत होगी। एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

दोनों देशों के बीच पहले से तैयार किया गया फ्रेमवर्क अब टैरिफ के नए माहौल को देखते हुए फिर से नजर डालने की जरूरत पड़ सकती है। यह फ्रेमवर्क 7 फरवरी को जारी किया गया था।

अमेरिका में टैरिफ का पूरा परिदृश्य बदल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए बड़े पैमाने के टैरिफ को गलत ठहराया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, जो 150 दिनों तक रहेगा।

मौजूदा बैठक 20 से 22 अप्रैल तक वाशिंगटन में होगी। भारत की तरफ से मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन (वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव) टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। टीम में कस्टम्स और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हैं।

बैठक में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा शुरू की गई दो एकतरफा जांच भी चर्चा का मुद्दा बन सकती हैं। भारत ने इन जांचों में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि इनकी कोई ठोस वजह नहीं दी गई। भारत ने इन जांचों को बंद करने की मांग की है।

पिछले फरवरी में दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों की बैठक तय थी, लेकिन टैरिफ में आए बदलाव के चलते उसे टाल दिया गया। अब अप्रैल 2026 में यह मुलाकात हो रही है।

टैरिफ घटाने का पुराना समझौता
फ्रेमवर्क के मुताबिक अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी। रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को पहले ही हटा दिया गया था। बाकी 25 प्रतिशत को भी 18 प्रतिशत तक लाने का प्रावधान था।

20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए लागू कर दिया।

इन बदलावों के बाद अब दोनों पक्ष समझौते को फिर से देख रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, समझौते को रीकैलिब्रेट और फिर से लिखना पड़ेगा। सूत्र ने कहा, “उनकी तरफ से काफी बदलाव होने वाले हैं। हमारा समझौता अभी साइन नहीं हुआ है, इसलिए जरूरी बदलाव हम अभी कर सकते हैं।”

भारत के प्रस्ताव
समझौते के फ्रेमवर्क में भारत ने अमेरिका के सभी औद्योगिक सामान पर टैरिफ खत्म करने या घटाने का प्रस्ताव रखा था। साथ ही अमेरिका के कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर भी छूट दी जानी थी। इनमें ड्राई डिस्टिलर्स ग्रेन (DDG), पशु चारे के लिए रेड सॉरघम, ट्री नट्स, ताजा और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स जैसी चीजें शामिल हैं।

भारत ने अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, एयरक्राफ्ट और उसके पार्ट्स, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने का भी इरादा जताया था।

पहले भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति मिली हुई थी। लेकिन अब जब अमेरिका के सभी व्यापारिक साझेदारों पर एक समान 10 प्रतिशत टैरिफ लग गया है, तो इस समझौते को नई सूरत देनी होगी। हर देश अब अमेरिका से अपने व्यापार समझौतों की नई शक्ल तय करने में जुटा हुआ है।

व्यापार के आंकड़े
वित्त वर्ष 2025-26 में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। इससे पहले अमेरिका चार साल तक (2024-25 तक) लगातार सबसे बड़ा पार्टनर रहा था।

पिछले वित्त वर्ष में भारत का अमेरिका को निर्यात महज 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पहुंचा। वहीं आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। नतीजतन, व्यापार अधिशेष 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया।

कच्चे तेल की कीमतें और तिमाही नतीजे तय करेंगे इस सप्ताह बाजार की चाल

नई दिल्ली। Stock Market This Week: इस हफ्ते शेयर बाजार की नजर कई बड़े फैक्टर्स पर रहने वाली है, जिनमें अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं घटनाक्रमों से बाजार की आगे की दिशा तय होगी।

ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव फिलहाल सबसे अहम ट्रिगर बना हुआ है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेश माहौल पर पड़ता है।

उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच घोषित संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।

घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों पर रहेगा। इन नतीजों से कंपनियों की कमाई और आगे के कारोबार की स्थिति का अंदाजा लगेगा।

इसके अलावा, विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई की ट्रेडिंग गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी। अगर विदेशी निवेशकों की खरीद या बिकवाली बढ़ती है तो उसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिख सकता है।

शेयर बाजार में इस हफ्ते निवेशकों की नजर सबसे पहले देश के बड़े प्राइवेट बैंकों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञ मिश्रा के अनुसार, शुरुआत में एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गजों के परिणामों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। इसके बाद एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, हैवेल्स, इंडसइंड बैंक और श्रेयराम फाइनेंस जैसी कई बड़ी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी।

इस बीच देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। बैंक का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.04 प्रतिशत बढ़कर 20,350.76 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर छोटे कारोबारियों से जुड़े लोन सेगमेंट पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में कुछ जोखिम बने रह सकते हैं।

आईसीआईसीआई बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 9.28 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 14,755 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। बैंक के मुनाफे में यह तेजी मुख्य रूप से प्रोविजनिंग में करीब 90 फीसदी की भारी गिरावट की वजह से आई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीना का कहना है कि इस सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी दिशा तय करने वाली चीज कंपनियों के तिमाही नतीजों की भरमार होगी। इसके साथ ही अमेरिकी मैक्रो आर्थिक डेटा और वैश्विक हालात भी बाजार की चाल पर असर डालेंगे।

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 943.29 अंक यानी 1.21 फीसदी बढ़कर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 302.95 अंक यानी 1.25 फीसदी मजबूत हुआ।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि निवेशकों की नजर खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर रहेगी। अगर इसमें स्थायी समाधान की ओर संकेत मिलते हैं तो इसका असर वैश्विक जोखिम वाले एसेट्स, पूंजी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है।

इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात लगातार बदल रहे हैं। फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग से आवाजाही रोक दी थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई।

बाद में शुक्रवार को ईरान ने इसे वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने की बात कही, लेकिन शनिवार को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने दोनों पक्षों के बीच बनी समझ का उल्लंघन किया है।

इस बार अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी का 20 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान

नई दिल्ली। Akshaya Tritiya 2026 :अक्षय तृतीया को भारतीय परंपरा में कभी न खत्म होने वाली ‘समृद्धि’ का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 की यह अक्षय तृतीया अपनी भारी-भरकम कीमतों के कारण इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है। सोने और चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं, लेकिन फिर भी लोगों की आस्था कम नहीं हुई है।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, इस साल देश भर में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के व्यापार का अनुमान है, जो पिछले साल के 16,000 करोड़ रुपये के मुकाबले एक बड़ी उछाल है। अकेले देश की राजधानी दिल्ली में करीब 6 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद जताई गई है।

चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि अक्षय तृतीया हमेशा से सोना खरीदने का सबसे शुभ मुहूर्त रहा है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन किया गया निवेश कभी घटता नहीं है। हालांकि, इस बार कीमतों ने सबको चौंका दिया है।

पिछले साल सोना जहां 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, वहीं इस साल यह उछलकर लगभग 1.58 लाख रुपये तक पहुंच गया है। चांदी की स्थिति और भी हैरान करने वाली है; यह 85,000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.55 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर है।

खंडेलवाल के मुताबिक, इन ऊंची कीमतों ने ग्राहकों के खरीदने के तरीके को बदल दिया है। लोग अब अंधाधुंध खरीदारी के बजाय बहुत सोच-समझकर और बजट को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं। बाजार में मांग तो मजबूत है, लेकिन खरीदारी का स्वरूप अब मूल्य-आधारित (Value-based) हो गया है।

बाजार के बदलते रुख को देखते हुए देशभर के सर्राफा व्यापारियों ने भी अपनी तैयारी बदल ली है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी. सी. भरतिया ने बताया कि ज्वैलर्स अब भारी आभूषणों के बजाय हल्के वजन वाले गहनों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। मिडिल क्लास बजट को ध्यान में रखते हुए चांदी और हीरे के ऐसे उत्पाद तैयार किए गए हैं जो रोजमर्रा में पहने जा सकें।

भरतिया ने कहा, “ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्ज में अच्छी-खासी छूट दी जा रही है और छोटे-छोटे सोने के सिक्कों जैसे ऑफर भी खूब चलाए जा रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि पहली नजर में कारोबार का कुल पैसा बढ़ता हुआ दिखता है, लेकिन अगर इसे वजन या मात्रा के हिसाब से देखें, तो असली तस्वीर कुछ अलग ही दिखाई देती है।

क्या कहते हैं आंकड़े
ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने आंकड़ों के जरिए बाजार की असली तस्वीर समझाई। उनके मुताबिक, 16,000 करोड़ रुपये के सोने के कारोबार का मतलब आज की कीमतों के हिसाब से करीब 10,000 किलो (यानी 10 टन) सोने की बिक्री है। अगर इसे देशभर के करीब 2 से 4 लाख ज्वैलर्स में बांटें, तो हर ज्वैलर के हिस्से में औसतन सिर्फ 25 से 50 ग्राम सोना ही आता है।

चांदी का भी कुछ ऐसा ही हाल है। 4,000 करोड़ रुपये की चांदी की बिक्री का मतलब करीब 157 टन चांदी बिकना है। इस हिसाब से हर ज्वैलर औसतन सिर्फ 400 से 800 ग्राम चांदी ही बेच पा रहा है। अरोड़ा के मुताबिक ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने से कारोबार की रकम तो बढ़ गई है, लेकिन असल में लोग कम सोना-चांदी खरीद रहे हैं। यही वजह है कि इस बार छोटे सिक्कों और हल्के गहनों की मांग सबसे ज्यादा है।

व्यापारियों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ी परेशानी स्टॉक संभालने की है, क्योंकि कीमतें लगातार बदल रही हैं। साथ ही लोग अब पारंपरिक खरीदारी के साथ-साथ डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और गोल्ड ETF जैसे विकल्पों की तरफ भी बढ़ रहे हैं, जो एक नई चुनौती बनकर सामने आ रहा है।

वीवो, रियलमी और ओप्पो 5G स्मार्टफोन की पहली सेल 21 से, जानिए ऑफर्स और कीमत

नई दिल्ली। Vivo T5 Pro 5G, Realme Narzo 100 Lite 5G, Infinix Note 60 Pro 5G और Oppo F33 Pro 5G फोन की पहली सेल भारत में 21 अप्रैल को शुरू होगी। आइये जानते हैं किस पर क्या ऑफर है-

Vivo T5 Pro 5G
यह फोन भारत में 21 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से Flipkart और Vivo India के ऑनलाइन स्टोर के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। फोन कॉस्मिक ब्लैक और ग्लेशियर ब्लू कलर्स में उपलब्ध होगा। भारत में Vivo T5 Pro 5G की कीमत बेस वेरिएंट के लिए 29,999 रुपये से शुरू होती है, जिसमें 8GB RAM और 128GB स्टोरेज मिलता है।

इसके 8GB+256GB वेरिएंट की कीमत 33,999 रुपये और 12GB+256GB वेरिएंट की कीमत 39,999 रुपये है। हालांकि, कंपनी HDFC Bank, SBI और Axis Bank के कार्ड पर 3,000 रुपये तक का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट और छह महीने तक की ब्याज-मुक्त EMI का विकल्प दे रही है। इसके अलावा, ग्राहक Vivo T5 Pro 5G को 3,000 रुपये तक के एक्सचेंज बोनस के साथ भी खरीद सकते हैं।

इस फोन में 6.83-इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जो 144Hz तक का रिफ्रेश रेट देता है। यह IP68 + IP69 रेटिंग के साथ आता है। इसमें Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट है। फोन में 50-मेगापिक्सेल का मेन कैमरा। सेल्फी के लिए फोन में 32-मेगापिक्सेल कैमरा है। यह आगे और पीछे, दोनों कैमरों से 4K वीडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम है। Vivo T5 Pro 5G में 9,020mAh की सिलिकॉन कार्बन बैटरी दी गई है। यह फोन 90W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है।

Realme Narzo 100 Lite 5G
यह फोन भारत में 21 अप्रैल को Amazon और Realme India के ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसे दो कलर्स – Frost Silver और Thunder Black में लॉन्च किया गया है। भारत में फोन की कीमत 13,499 रुपये से शुरू होती है, जो इसके बेस मॉडल (4GB+64GB) के लिए है। इसके 4GB+128GB वेरिएंट की कीमत 14,499 रुपये है। टॉप मॉडल (6GB+128GB स्टोरेज) 16,499 रुपये में मिलेगा। लॉन्च के मौके पर कंपनी 1,500 रुपये तक का बैंक ऑफर भी दे रही है।

Realme Narzo 100 Lite 5G में 6.8-इंच की LCD स्क्रीन है, जो 144Hz तक का रिफ्रेश रेट और 900 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस देती है। यह IP64 रेटिंग के साथ आता है। फोन में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट है। फोन में पीछे की तरफ डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें 13-मेगापिक्सेल का मेन कैमरा है। सेल्फी के लिए, इस फोन में सामने की तरफ 5-मेगापिक्सेल का कैमरा भी दिया गया है। फोन में 7,000mAh की बैटरी है जो 15W वायर्ड चार्जिंग और रिवर्स वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

Oppo F33 Pro 5G
यह फोन भारत में 23 अप्रैल को Flipkart, Amazon और Oppo India के ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। फोन तीन कलर्स – Misty Forest, Passion Red और Starry Blue में खरीदने के लिए उपलब्ध होगा। भारत में फोन के 8GB+128GB वेरिएंट की कीमत 37,999 रुपये और 8GB+256GB वेरिएंट की कीमत 40,999 रुपये है। कंपनी चुनिंदा बैंकों के कार्ड पर 10 प्रतिशत तक का इंस्टेंट कैशबैक दे रही है। ग्राहक छह महीने तक की ब्याज-मुक्त EMI सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं।

इस स्मार्टफोन में 6.57-इंच का एमोलेड डिस्प्ले है, जो 120 हर्ट्ज तक का रिफ्रेश रेट, 1400 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस, 240 हर्ट्ज का टच सैंपलिंग रेट का सपोर्ट करता है। फोन IP66 + IP68 + IP69K रेटिंग के साथ आता है। इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6360 मैक्स चिपसेट लगा है। फोन में 50-मेगापिक्सेल का मेन रियर कैमरा है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 50-मेगापिक्सेल का कैमरा है। फोन में 7000mAh की बैटरी है, जो 80W सुपरवूक वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

Infinix Note 60 Pro 5G
यह नया फोन भारत में 20 अप्रैल से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसे Flipkart और Infinix के ऑनलाइन स्टोर से खरीदा जा सकेगा। भारत में फोन की कीमत 31,999 रुपये से शुरू होती है। यह कीमत इसके बेस वेरिएंट के लिए है, जिसमें 8GB रैम और 128GB स्टोरेज है। इसके 8GB+256GB वेरिएंट की कीमत 34,999 रुपये है। इसे तीन कलर्स Deep Ocean Blue, Mocha Brown और Solar Orange में लॉन्च किया गया है। ग्राहक SBI, ICICI Bank, Yes Bank, Bank of Baroda और IDFC Bank के कार्ड इस्तेमाल करके 3,000 रुपये की तुरंत छूट पा सकते हैं।

इसके अलावा, कंपनी 12 महीने तक की ब्याज-मुक्त ईएमआई का विकल्प भी दे रही है। कंपनी ने अनुसार, ऑफर्स का लाभ लेकर इसे 25,399 रुपये की शुरुआती प्रभावी कीमत पर खरीदा जा सकता है। जिन लोग इसे प्री-बुक किया है, उन्हें कई एडिशनल बेनिफिट्स मिलेंगे- जैसे कि 12 महीने तक की नो-कॉस्ट ईएमआई, 3,000 रुपये तक का बैंक डिस्काउंट, 3,999 रुपये कीमत वाला एक मुफ्त मैगपावर स्पीकर, एक साल का मुफ्त स्क्रीन रिप्लेसमेंट, 18 महीने के लिए मुफ्त गूगल जेमिनी प्रो प्लान का सब्सक्रिप्शन और जियो की ओर से 5000GB मुफ्त क्लाउड स्टोरेज; इसके साथ ही, ऑर्डर पूरा होने पर 1+1 साल की वारंटी और 2,000 रुपये का वाउचर भी मिलेगा।

शीर्ष आठ कंपनियों की मार्केट कैप 1.87 लाख करोड़ बढ़ी, टॉप गेनर बना एयरटेल

नई दिल्ली। Market Cap: बीते हफ्ते शेयर बाजार में मजबूती का रुख देखने को मिला, जिसका सीधा असर देश की टॉप 10 सबसे बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन पर भी पड़ा। छुट्टियों से छोटे रहे इस हफ्ते में इन आठ कंपनियों की संयुक्त वैल्यू में कुल 1,87,497.45 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।

बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 943.29 अंक यानी 1.21 प्रतिशत चढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी में 302.95 अंक यानी 1.25 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के एसवीपी रिसर्च अजित मिश्रा ने कहा कि पिछले सप्ताह बाजार लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त के साथ बंद हुआ। उनके अनुसार वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों में नरमी और निवेशकों की बेहतर होती धारणा ने बाजार को सपोर्ट दिया।

साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। घरेलू आर्थिक स्थिति स्थिर रहने से भी बाजार को मजबूती मिली।

टॉप कंपनियों में भारती एयरटेल सबसे बड़ा लाभ पाने वाली कंपनी रही। इसका बाजार मूल्यांकन 58,831.52 करोड़ रुपये बढ़कर 11,25,125.21 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का मार्केट कैप 27,608.62 करोड़ रुपये बढ़कर 5,32,691.31 करोड़ रुपये हो गया।

आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की और इसका बाजार मूल्य 20,731.64 करोड़ रुपये बढ़कर 9,34,063.56 करोड़ रुपये हो गया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज भी पीछे नहीं रही। कंपनी का मार्केट कैप 20,231.05 करोड़ रुपये बढ़कर 18,47,317.84 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं लार्सन एंड टूब्रो, (L&T) का मूल्यांकन 18,577.91 करोड़ रुपये बढ़कर 5,63,314.50 करोड़ रुपये हो गया।

बैंकिंग सेक्टर में भी तेजी देखने को मिली। आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 18,266.82 करोड़ रुपये बढ़कर 9,65,008.67 करोड़ रुपये हो गया। भारतीय स्टेट बैंकI (SBI) का मूल्यांकन 12,599.79 करोड़ रुपये बढ़कर 9,97,229.77 करोड़ रुपये पहुंच गया। आईटी कंपनी इंफोसिस का मार्केट कैप भी 10,650.1 करोड़ रुपये बढ़कर 5,34,774.50 करोड़ रुपये हो गया।

हालांकि, हर कंपनी के लिए यह हफ्ता सकारात्मक नहीं रहा। एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 16,163.04 करोड़ रुपये घटकर 12,31,315.53 करोड़ रुपये रह गया। इसके अलावा Bajaj Finance का मूल्यांकन भी 9,769.3 करोड़ रुपये घटकर 5,65,437.17 करोड़ रुपये पर आ गया।

अगर सबसे ज्यादा वैल्यू वाली कंपनियों की बात करें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टूब्रो, इंफोसिस और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का नाम शामिल रहा।

Soybean Price: मिलों की मजबूत खरीद से सोयाबीन की कीमतों में तेजी

नई दिल्ली। Soybean Price: क्रशिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स से ज़बरदस्त खरीदारी की वजह से, महाराष्ट्र में सोयाबीन की प्लांट डिलीवरी कीमत में 11-17 अप्रैल के हफ़्ते में ₹150-160 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई, जबकि मध्य प्रदेश में ₹50-100 की बढ़ोतरी हुई।

हालांकि, राजस्थान में मिला-जुला ट्रेंड देखा गया। मंडियों (थोक बाज़ार) में सोयाबीन की आवक नॉर्मल लेवल से थोड़ी कम रही। तीनों राज्यों में, सोयाबीन की प्लांट डिलीवरी कीमत अभी मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) से ऊपर ट्रेड कर रही है।

सोया रिफाइंड तेल
हालांकि, ऊंचे प्राइस लेवल पर डिमांड कम होने की वजह से रिफाइंड सोया ऑयल की कीमतों में 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बड़ी गिरावट देखी गई। महाराष्ट्र के मुकाबले मध्य प्रदेश में कीमतों में गिरावट कम देखी गई।

अपनी इन्वेंट्री कम करने के लिए, मिलों को अपनी कीमतें थोड़ी कम करनी पड़ीं। मुंबई में कीमतें 1,500 प्रति 10 kg के अपने पिछले लेवल पर स्थिर रहीं, जबकि कांडला में यह 10% गिरकर 1,510 प्रति 10 kg पर आ गईं; कोटा में 20% गिरकर 1,540 प्रति 10 kg पर आ गईं; और हल्दिया में ₹50 गिरकर 1,460 प्रति 10 kg पर आ गईं। कांडला पोर्ट पर क्रूड डीगम्ड सोया ऑयल की कीमतें नरम रहीं।

सोया डीओसी: सोया DOC की घरेलू और एक्सपोर्ट डिमांड ठीक-ठाक रही, जिससे कीमत में ₹500-1,000 प्रति टन की रिकवरी हुई। महाराष्ट्र में एक फैसिलिटी में, सोया मील की कीमत ₹1,000 बढ़कर *44,000 प्रति टन के हाई लेवल पर पहुंच गई।

बुआई : सोयाबीन की बुआई जून में शुरू होने वाली है; हालांकि, अभी इस बात को लेकर कुछ पक्का नहीं है कि इस मौसम में मौसम और मॉनसून अच्छा रहेगा या नहीं।

Mustard: व्यापारिक मांग कमजोर रहने से बीते सप्ताह सरसों की कीमतें गिरी

नई दिल्ली। Mustard Price: रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहनी फसल- सरसों की आवक का अभी पीक सीजन चल रहा है। प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में सरसों की जोरदार आपूर्ति होने तथा व्यापारिक मांग कुछ कमजोर रहने से 11-17 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान इसकी कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट आ गई।

42% कंडीशन सरसों: 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का भाव दिल्ली एवं जयपुर में 50 रुपए गिरकर क्रमशः 6750 रुपए प्रति क्विटल एवं 7150 रुपए प्रति क्विटल रह गया। इसी तरह सामान्य औसत क्वालिटी वाली सरसों की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई। कोटा में भाव 200 रुपए घटकर 6000/6600 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश की मंडियां भी कमजोर रहीं।

सरसों तेल: सरसों तेल एक्सपेतर तथा कच्ची घानी की कीमतों में 1 से 4 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ गई। बल्क खरीदारों ने लिवाली में कम दिलचस्पी दिखाई। दिल्ली में एक्सपेलर का भाव 15 रुपए गिरकर 1435 रुपए प्रति 10 किलो तथा मुरैना में कच्ची घानी का दाम 40 रुपए घटकर 1430 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया। अन्य केन्द्रों में सरसों तेल के मूल्य में प्रति 10 किलो पर 10 से 20 रुपए तक की नरमी देखी गई।

आवक: राष्ट्रीय स्तर पर मंडियों में सरसों की दैनिक आवक 11 अप्रैल को 11 लाख बोरी, 13 अप्रैल को भी 11 लाख बोरी, 14 अप्रैल को 9 लाख बोरी, 15 अप्रैल को 11 लाख बोरी, 16 अप्रैल को 10 लाख बोरी तथा 17 अप्रैल को 9.50 लाख बोरी दर्ज की गई जबकि प्रत्येक बोरी 50 किलो की होती है।

सरसों खल (डीओसी): सरसों खल एवं डीओसी का हाल भी सरसों सीड एवं सरसों तेल जैसा ही रहा। कमजोर कारोबार के पास इसके दाम में 100-200 रुपए की गिरावट देखी गई। निर्यातकों की लिवाली कम हुई।

मंडी भाव: कीमतों में थोड़ी नरमी आने के बावजूद सरसों का थोक मंडी भाव अभी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊंचा चल रहा है इसलिए नैफेड एवं हैफेड जैसी सरकारी एजेंसियों को इसकी खरीद में ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है।

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद किया, आने-जाने वाले जहाजों पर फायरिंग

नई दिल्ली। US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को ईरान ने अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया और वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर फायरिंग भी की।

ईरान का कहना है कि यह कदम उसने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने के जवाब में उठाया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक इस रास्ते को बंद रखा जाएगा।

गार्ड की ओर से यह भी कहा गया है कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर में खड़े किसी भी जहाज को अपनी जगह से हिलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर कोई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब जाता है, तो उसे दुश्मन का साथ देने जैसा माना जाएगा और उस पर कार्रवाई की जाएगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुजदुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20 फीसदी वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इसके बंद होने से पहले से चल रहे वैश्विक ऊर्जा संकट के और गहराने का खतरा बढ़ गया है। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के आठवें हफ्ते में हालात और बिगड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

मध्य पूर्व में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा नाजुक युद्धविराम बुधवार तक खत्म होने वाला है। इस बीच ईरान ने कहा है कि उसे अमेरिका की ओर से नए प्रस्ताव मिले हैं और पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच एक और दौर की सीधी बातचीत कराने की कोशिश की जा रही है।

ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अब फिर से उसका नियंत्रण पहले जैसा हो गया है और वहां सेना की कड़ी निगरानी में संचालन किया जा रहा है।

उधर, समुद्र में तनाव की स्थिति भी बनी हुई है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की गनबोट्स ने एक तेल टैंकर पर फायरिंग की, जबकि एक कंटेनर जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे उसके कुछ कंटेनर क्षतिग्रस्त हो गए।

भारत ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को तलब किया और भारत के झंडे वाले दो व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग को गंभीर मामला बताया। खास बात यह है कि इससे पहले ईरान ने भारत आने वाले कई जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना ईरान के लिए एक बड़ा रणनीतिक हथियार है। यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ा सकता है। वहीं अमेरिका के लिए यह नाकेबंदी ईरान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव बनाने का जरिया है।

इस बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने सख्त रुख दिखाते हुए कहा है कि देश की नौसेना अपने दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। गौरतलब है कि अपने पिता की मौत के बाद पद संभालने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

ईरान ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह वाणिज्यिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल रहा है। यह फैसला इजरायल और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन के युद्धविराम के बाद लिया गया। जलडमरूमध्य खुलने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।

हालांकि, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक तेहरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंचता। पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई आमने-सामने की अहम बातचीत बिना नतीजे के खत्म होने के बाद ट्रंप ने यह सख्त कदम उठाया था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 23 जहाजों को ईरान की ओर वापस भेजा जा चुका है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतिबजादेह ने कहा कि अमेरिका के ये कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे युद्धविराम की पूरी प्रक्रिया भी कमजोर पड़ सकती है।

वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अमेरिकी नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। परिषद ने कहा है कि वह जलडमरूमध्य को किसी भी तरह के आंशिक या शर्तों के साथ खोलने की कोशिशों को रोकने के लिए तैयार है। हाल के समय में यह परिषद देश के प्रमुख फैसले लेने वाली संस्था के रूप में उभरी है।

खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ कहा है कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर उसकी नजर और नियंत्रण बना रहेगा। इसके तहत ईरान ने अपने तय किए गए समुद्री मार्गों का पालन, शुल्क भुगतान और ट्रांजिट सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने का संकेत दिया है।

वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना के बयान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसमें कहा गया है कि फिलहाल किसी भी जहाज को इस जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

यह तनातनी ऐसे समय बढ़ी है जब पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश में जुटा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कम करने की कोशिश कर रहा है। अगले हफ्ते पाकिस्तान में बातचीत का दूसरा दौर हो सकता है।

ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख की हालिया यात्रा के दौरान अमेरिका की तरफ से कुछ नए प्रस्ताव दिए गए हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, ईरान फिलहाल सीधे बातचीत के लिए तैयार नहीं है। उसका कहना है कि अमेरिका अपने सख्त रुख से पीछे नहीं हटा है।

हॉर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों पर फायरिंग, भारत ने ईरानी राजदूत को किया तलब

नई दिल्ली। भारत ने शनिवार को ईरान के राजदूत मोहम्मद फतेह अली को तलब किया। आज दोपहर दो भारतीय जहाजों को हॉर्मुज स्ट्रेट में ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स की फायरिंग के बाद रास्ता बदलना पड़ा था।

इनमें एक सुपरटैंकर भी शामिल था, जो इराकी तेल ले जा रहा था। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, टैंकरट्रैकर्स.कॉम ने यह जानकारी दी। ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इन जहाजों पर फायरिंग की, जिसके बाद वे मुड़ गए।

सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर राजदूत के सामने जोरदार विरोध दर्ज कराया। हालांकि, विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि ईरान ने आज होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया था। ईरान का आरोप था कि अमेरिका सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है इसलिए 24 घंटे के भीतर उसने अपने फैसले को बदला है।

ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को कुछ देर के लिए खोलने के फैसले को पलट दिया। अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए ब्लॉकेड को जारी रखने के बीच ईरान ने जहाजों पर फायरिंग शुरू कर दी।

ईरान के संयुक्त सैन्य कमांड ने शनिवार को कहा कि स्ट्रेट अब पहले जैसी स्थिति में लौट आया है और उस पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने साफ किया कि जब तक अमेरिका का ब्लॉकेड जारी रहेगा, तब तक यहां आवाजाही सीमित रहेगी।

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड के गनबोट्स ने एक टैंकर पर फायरिंग की। एक अलग कंटेनर जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिसमें माल को नुकसान पहुंचा।

बता दें कि हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के करीब एक-पांचवें तेल के परिवहन का रास्ता है। यहां की अनिश्चितता से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान दोनों पक्ष अब अगले हफ्ते के बीच में खत्म होने वाले सीजफायर को बढ़ाने के लिए बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।

सांगोद एवं सुल्तानपुर मंडियों में 7.28 करोड़ के विकास कार्यों की वित्तीय स्वीकृति

कोटा/ सुल्तानपुर/सांगोद। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के प्रयासों से क्षेत्र के किसानों की सुविधाओं और कृषि विपणन ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है।

राजस्थान सरकार के कृषि विपणन निदेशालय, जयपुर ने कोटा (अनाज) मंडी के अंतर्गत आने वाले सांगोद और सुल्तानपुर सब-यार्ड में विभिन्न नवीन निर्माण कार्यों के लिए 728.34 लाख की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। इस स्वीकृति से क्षेत्र के किसानों को फसल बेचने और उनके भंडारण के लिए आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। जिससे लंबे समय से चली आ रही आधारभूत ढाँचे की मांग पूरी होगी।

जारी आदेश के अनुसार, सांगोद सब-यार्ड में किसानों की सुविधा के लिए 705.73 लाख रुपए की लागत से 400’×100′ आकार के विशाल ‘सेल्फ सपोर्टिंग मेटल डोम रूफिंग’ ऑक्शन प्लेटफार्म का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही वहां आवागमन को सुगम बनाने के लिए सर्कुलेटिंग और एप्रोच रोड का निर्माण भी किया जाएगा। इस आधुनिक डोम शेड के बनने से किसानों की फसलें मौसम की मार और बारिश से सुरक्षित रह सकेंगी।

​निर्माण कार्यों के साथ-साथ मंडियों के आधुनिकीकरण और सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। विभाग द्वारा सांगोद और सुल्तानपुर सब-यार्ड में विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 22.61 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।

इसके तहत सांगोद मंडी यार्ड में सर्विस कनेक्शन और स्ट्रीट लाइट स्थापना के लिए 7.12 लाख रुपए तथा सुल्तानपुर सब-यार्ड में 15.49 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इन कार्यों से मंडी परिसर रात्रि के समय भी दूधिया रोशनी से सराबोर रहेंगे। जिससे किसानों और व्यापारियों को कार्य करने में सुगमता होगी।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि इन सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और सार्वजनिक निर्माण विभाग के मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। ऊर्जा मंत्री ने इस बड़ी सौगात के लिए मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के सर्वांगीण विकास और उन्हें उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने हेतु बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए संकल्पबद्ध है। इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से सांगोद विधानसभा क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ पहुँचेगा।

कृषि क्षेत्र में विकास की गति तेज हुई है
“सांगोद और सुल्तानपुर की मंडियों का कायाकल्प होना क्षेत्र के किसानों की पुरानी मांग थी। इस बड़ी सौगात के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री, प्रदेश के कृषि मंत्री और विशेष रूप से कोटा-बूंदी सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का हृदय से आभार है। ओम बिरला जी के मार्गदर्शन और केंद्र व राज्य सरकार के समन्वय से ही हाड़ौती के किसानों को निरंतर नई सुविधाएं मिल रही हैं। उनके प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र में विकास की गति तेज हुई है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ‘अन्नदाता’ के कल्याण के लिए समर्पित है। कृषि उपज मंडी समिति कोटा अनाज के माध्यम से होने वाले इन कार्यों से स्थानीय व्यापार को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी।” हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री