Tuesday, June 23, 2026
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कृषि भूमि पर उद्योग संचालन संबंधी नोटिसों पर पुनर्विचार हो: एसएसआई एसोसिएशन

​नियमों के तहत 1 एकड़ तक ‘डीम्ड कन्वर्जन’ का प्रावधान

कोटा। स्मॉल स्केल इंडस्ट्री एसोसिएशन, कोटा ने तहसीलदार, चेचट द्वारा क्षेत्र की 26 औद्योगिक इकाइयों को कृषि भूमि के कथित गैर-कृषि उपयोग के संबंध में जारी किए गए नोटिसों पर गहरा आश्चर्य और चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मगंलवार को बैठक आयोजित कर इस प्रशासनिक कार्रवाई को राज्य सरकार की औद्योगिक मित्र नीतियों के विपरीत बताया है।

एसोसिएशन के सचिव समीर सूद ने स्पष्ट किया कि राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बेहद स्पष्ट एवं उदार कानूनी प्रावधान किए गए हैं। “राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए रूपांतरण) नियम, 2007” के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर उद्योग स्थापित करने के लिए कड़े नियमों को शिथिल किया गया है।

सरकार के नियमों और 3 अक्टूबर 2017 के आदेश के अनुसार, यदि कोई खातेदार किसान अपनी स्वयं की खातेदारी भूमि पर सूक्ष्म या लघु औद्योगिक इकाई अथवा छोटा ईंट-भट्ठा (कजावा) स्थापित करना चाहता है, तो 1 एकड़ (4046.86 वर्ग मीटर) तक की भूमि के लिए किसी पूर्व लिखित अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।

नियमों के तहत इस प्रक्रिया को “डीम्ड कन्वर्जन” या “स्वचालित रूपांतरण” माना जाता है। जिसके लिए उद्यमियों से कोई रूपांतरण शुल्क या अतिरिक्त प्रभार नहीं लिया जा सकता। इस रूपांतरण के बाद भी भूमि की स्थिति खातेदार के नाम ही बनी रहती है।

इस प्रावधान के अंतर्गत उद्यमी को केवल उद्योग स्थापित कर संबंधित उप-विभागीय अधिकारी (SDO) या तहसीलदार को इसकी सूचना देनी होती है। इस संबंध में जिला उद्योग केंद्र द्वारा भी समय-समय पर उद्योग विभाग एवं स्थानीय प्रशासन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा चुका है।

एसोसिएशन का कहना है कि जब क्षेत्र की ये 26 औद्योगिक इकाइयाँ पूरी तरह से राज्य सरकार की नीतियों, उद्योग विभाग के दिशा-निर्देशों और कानूनी सीमाओं के भीतर संचालित हो रही हैं, तो ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया जाना न्यायसंगत नहीं है। इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाई से स्थानीय उद्यमियों और निवेशकों के बीच अनावश्यक भ्रम, भय और चिंता का माहौल पैदा हो रहा है, जो राज्य के औद्योगिक विकास के लिए बाधक है।

अतः ‘SSI कोटा’ ने तहसीलदार से पुरजोर आग्रह किया है कि वे राज्य सरकार की प्रचलित औद्योगिक नीतियों, 2017 के आदेशों और भू-राजस्व नियमों के इस विशेष प्रावधान की तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त कर मामले का पुनः परीक्षण करें। साथ ही, भविष्य में इस प्रकार की कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने या नोटिस जारी करने से पूर्व जिला उद्योग केंद्र एवं संबंधित विभागों से आवश्यक समन्वय स्थापित करें।

उद्योग जगत प्रदेश और जिले के आर्थिक विकास, राजस्व वृद्धि और स्थानीय युवाओं के रोजगार सृजन में मुख्य भूमिका निभा रहा है। इसलिए, उद्योगों के हितों की रक्षा करते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, स्पष्टता और आपसी समन्वय बनाए रखना नितांत आवश्यक है।

विदेशी खाद्य तेलों का आयात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार पर असर

मुम्बई। क्रूड खनिज तेल के बढ़ते वैश्विक बाजार मूल्य से भारत के नीति निर्माताओं के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं लेकिन खाद्य तेलों का ऊंचा भाव उन्हें ज्यादा परेशान नहीं कर रहा है। आपूर्ति एवं उपलब्धता की जटिल स्थिति एवं आयात खर्च में हो रही बढ़ोत्तरी के कारण खाद्य तेल की कीमतों में पिछले कुछ महीनों से तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है।

वार्षिक आधार पर अप्रैल 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर खाद्य तेल एवं वसा में 9.2 प्रतिशत बढ़ गई जबकि मार्च में भी इसमें 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। निकट भविष्य में इससे राहत मिलने की संभावना बहुत कम है क्योंकि घरेलू एवं वैश्विक बाजार की परिस्थितियों में ज्यादा बदलाव नहीं आ सकेगा।

विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर भारत की निर्भरता बढ़कर 60 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है इसलिए यहां अत्यन्त विशाल मात्रा में विदेशी खाद्य तेल नियमित रूप से मंगाया जा रहा है। दूसरी ओर विभिन्न कारणों से निर्यातक देशों में खाद्य तेलों का भाव तेज होता जा रहा है।

क्रूड खनिज तेल के अभाव एवं ऊंचे मूल्य के कारण इंडोनेशिया एवं मलेशिया जैसे पाम तेल के शीर्ष उत्पादक एवं निर्यातक देशों को बायो डीजल के निर्माण एवं उपयोग का नियम बदलना पड़ रहा है।

इंडोनेशिया में बायो डीजल के निर्माण में 40 प्रतिशत पाम तेल के उपयोग का अनिवार्य नियम पहले ही लागू हो चुका है जबकि जुलाई से इसका स्तर बढ़ाकर 50 प्रतिशत निर्धारित किए जाने की संभावना है। मलेशिया और थाईलैंड में भी पाम तेल का स्तर बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

इससे वहां पाम तेल के निर्यात योग्य स्टॉक में कमी आ रही है जबकि चालू वर्ष में अब तक इसके दाम में 18 प्रतिशत की भारी वृद्धि हो गई है। इसी तरह सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल के दाम में भी 13 से 19 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। रुपया का जबरदस्त अवमूल्यन होने से स्थिति और भी खराब हो गई है।

Ultraviolette X-47 इलेक्ट्रिक बाइक भारत में लॉन्च, जानिए कीमत और फीचर्स

नई दिल्ली। अल्ट्रावॉयलेट (Ultraviolette) ने इंडियन मार्केट में अपनी पॉप्युलर इलेक्ट्रिक क्रॉसओवर मोटरसाइकिल- Ultraviolette X-47 का एक नया और अफोर्डेबल बेस वेरिएंट लॉन्च कर दिया है। इस नए एंट्री-लेवल वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 2.49 लाख रुपये है।

इस प्राइस के साथ यह पूरी X-47 सीरीज का सबसे किफायती मॉडल बन गया है। भारतीय ग्राहकों के बजट को ध्यान में रखते हुए कंपनी का यह फैसला काफी बड़ा माना जा रहा है।

यह मोटरसाइकिल महज 2.8 सेकंड में 0 से 60 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 145 kmph है। फुल चार्ज पर यह बाइक 211 किलोमीटर तक की रेंज ऑफर करती है। आइए डीटेल में जानते हैं इसके बारे में।

हटाना पड़ा रडार सिस्टम
इस नए बेस वेरिएंट में सबसे बड़ा बदलाव इसकी टेक्नोलॉजी में देखने को मिलता है। बाइक की कीमत को कम करने के लिए कंपनी ने इसमें से अपना फेसम ‘हाइपरसेंस’ (Hypersense) रडार सिस्टम हटा दिया है, जो इससे पहले इस सीरीज के सभी वेरिएंट्स में स्टैंडर्ड तौर पर ऑफर किया जा रहा था। इस रडार पैकेज के हटने की वजह से अब राइडर्स को ब्लाइंड-स्पॉट डिटेक्शन, रियर कोलिजन वॉर्निंग, लेन चेंज असिस्ट और ओवरटेक अलर्ट जैसे एडवांस फीचर्स नहीं मिलेंगे। हालांकि, इन फीचर्स के हटने से बाइक की कीमत में पूरे 15,000 रुपये की सीधी कटौती हुई है, जिससे यह अपने पुराने ‘ओरिजिनल’ वेरिएंट के मुकाबले काफी सस्ती हो गई है। रडार सिस्टम के अलावा बाइक के बाकी सभी फीचर्स और डिजाइन पहले जैसे ही हैं।

टॉप स्पीड और रेंज
परफॉर्मेंस और पावर के मामले में कंपनी ने कोई समझौता नहीं किया है। इस नए वेरिएंट में भी पहले की तरह ही 27kW की दमदार इलेक्ट्रिक मोटर और 7.1kWh का बड़ा बैटरी पैक दिया गया है।

कंपनी का दावा है कि यह मोटरसाइकिल महज 2.8 सेकंड में 0 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 145 किलोमीटर प्रति घंटा है।

एक बार फुल चार्ज करने पर यह बाइक 211 किलोमीटर (IDC सर्टिफाइड) की शानदार रेंज देती है। ये आंकड़े साफ करते हैं कि कम कीमत के बावजूद यह भारतीय बाजार में मौजूद सबसे तेज और दमदार इलेक्ट्रिक बाइक्स में से एक है।

सेफ्टी फीचर
भले ही इस बाइक में रडार टेक्नोलॉजी न हो, लेकिन प्रीमियम फीचर्स की इसमें कोई कमी नहीं है। राइडर्स की सेफ्टी के लिए इसमें ड्यूल-चैनल ABS, डायनैमिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, हिल-होल्ड असिस्ट और पार्किंग असिस्ट जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड दिए गए हैं। इसके अलावा, राइडिंग के शौकीनों के लिए इसमें तीन अलग-अलग मोड्स – ग्लाइड, कॉम्बैट और बैलिस्टिक मिलते हैं। कनेक्टिविटी के लिए ब्लूटूथ और वाई-फाई का सपोर्ट भी इसमें दिया गया है। इस नए बेस वेरिएंट के आने के बाद अब Ultraviolette X-47 का लाइनअप टोटल छह वेरिएंट्स का हो गया है, जिसकी शुरुआती कीमत 2.49 लाख रुपये से लेकर टॉप-स्पेक ‘डेजर्ट विंग’ वेरिएंट के लिए 3.09 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।

Stock Market: सेंसेक्स 479 अंक लुढ़ककर 76009 पर, निफ्टी 24 हजार के नीचे बंद

नई दिल्ली। Stock Market Closed : घरेलू शेयर बाजार कल यानी सोमवार की भारी भरकम तेजी के बाद आज गिरावट का शिकार हो गया है। सेंसेक्स और निफ्टी में लाल निशान पर बंद हुए हैं। क्लोजिंग के वक्त पर 30 संवेदी सूचकांक वाला सेंसेक्स 0.63 प्रतिशत या फिर 479 अंक की गिरावट के बाद 76009.79 अंक पर बंद हुआ है।

निफ्टी 0.49 प्रतिशत या फिर 118 अंक की गिरावट के बाद 23913.70 अंक पर बंद हुआ है। बता दें, आज घरेलू शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत हुई थी। लेकिन उसके बाद मार्केट में रिकवरी देखने को मिली। लेकिन जल्द ही शेयर बाजार ने वह बढ़त गवां दी।

30 संवेदी सूचकांक वाले सेंसक्स में आज मंगलवार को 30 में से 22 कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। ट्रेंट, भारती एयरटेल, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, टाइटन, रिलायंस के शेयर आज गिरावट के साथ बंद हुए हैं।

दूसरी तरह टेक महिंद्रा, इटरनल, मारुति, हिन्दुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में बाजार की गिरावट का असर कम दिखा। इन सभी कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए हैं।

शरुआती कारोबार में सुबह सेंसेक्स और निफ्टी नीचे लुढ़क गए। 30 संवेदी सूचकांक वाला सेंसेक्स 0.27 प्रतिशत या फिर 207.78 अंक की गिरावट के बाद 76281.18 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, निफ्टी 0.18 प्रतिशत या फिर 42.70 अंक नीचे लुढ़क गया था। इस गिरावट के बाद निफ्टी 23989 अंक पर गया था।

India US Deal: भारत और अमेरिका की डील से कैसे उड़ी चीन की नींद, जानिए

नई दिल्ली। India US Deal: भारत और अमेरिका ने मिलकर एक ऐसी डील की है, जिससे चीन की नींद उड़नी तय है। भारत और अमेरिका ने मंगलवार को क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) और रेयर अर्थ्स (दुर्लभ खनिजों) को लेकर एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करना है।

दोनों देशों के बीच यह डील सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा तकनीकों के लिए जरूरी संसाधनों की सुरक्षित आपूर्ति को बढ़ावा देगी। यह समझौता क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मौजूदगी में हुआ।

क्या हैं इस डील के मायने
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘आज हम महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ्स के खनन व प्रोसेसिंग की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ढांचे पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। चाहे हम इसे द्विपक्षीय रूप से करें, क्वाड के मंच पर करें या समान विचारधारा वाले देशों के बड़े समूह के साथ, यह फैसला बेहद समयोचित और महत्वपूर्ण है।’

रुबियो बोले- साझेदारी बेहद जरूरी

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका के बीच इस रणनीतिक साझेदारी को दोनों देशों के राष्ट्रीय हित के लिए बेहद जरूरी बताया। रुबियो ने कहा, ‘हमारी इनोवेशन इकोनॉमी के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और उनकी सप्लाई चेन तक दीर्घकालिक व विश्वसनीय पहुंच सुनिश्चित करना दोनों देशों का साझा रणनीतिक हित है।’
  • उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका जैसी जीवंत अर्थव्यवस्थाएं इन उद्योगों के लिए बुनियादी माने जाने वाले कच्चे माल को किसी एकतरफा एकाधिकार वाले देश के भरोसे कमजोर नहीं छोड़ सकतीं।
  • रुबियो के मुताबिक ऐसा एकाधिकार न केवल युद्ध के समय, बल्कि आम दिनों में भी हमारी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्यों खास है यह समझौता
आज के दौर में बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम और एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। वैश्विक स्तर पर इसके प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन पर चीन का एकछत्र राज है। ऐसे में भारत और अमेरिका का यह समझौता वैश्विक स्तर पर नए विकल्पों को खड़ा करने और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

नीट री एग्जाम को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों को लिखा खत, जानिए क्या है निर्देश

नई दिल्ली। NEET re-exam: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों को पत्र लिखकर 21 जून को होने वाली नीट यूजी रीज एग्जाम के सुगम और निष्पक्ष आयोजन के लिए उनका सहयोग मांगा है।

शिक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मौजूदा भीषण गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए प्रधान ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अभ्यर्थियों की सुविधा तथा सेहत के लिए परीक्षा केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

उन्होंने पत्र में लिखा, ”मौजूदा हीटवेव की स्थिति को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में परीक्षा आयोजित करने वाले जिले के अधिकारियों और सभी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा दूसरे संस्थानों को अभ्यर्थियों की सुविधा के लिहाज से जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उचित निर्देश जारी करें।”

मंत्री ने बताया कि इन सुविधाओं में स्वच्छ पेयजल, उचित बैठक व्यवस्था, चालू पंखे और कूलर, साफ वॉशरूम, छायादार प्रतीक्षा स्थल, बिना रुकावट बिजली आपूर्ति और जहां भी जरूरत हो पोर्टेबल टॉयलेट शामिल हो सकते हैं।

विद्यार्थियों की सेहत को सबसे जरूरी बताते हुए, प्रधान ने राज्य सरकारों से कहा कि वे परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों के लिए आने-जाने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराएं। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करने में पूरा सहयोग करेंगे कि नीट-यूजी 2026 री परीक्षा सुगमता से, पारदर्शी तरीके से और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाए।

स्नातक स्तरीय मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए 3 मई को हुई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने 12 मई को निरस्त कर दिया था। इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है और 21 जून को री एग्जाम होनी है।

दिल्ली की एक अदालत ने नीट पेपर लीक मामले में पुणे स्थित भौतिकी की व्याख्याता मनीषा संजय हवलदार को सोमवार को छह दिन की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में भेज दिया। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने आरोपी को छह दिन हिरासत में रखकर पूछताछ करने संबंधी सीबीआई की याचिका को स्वीकार कर लिया।

सुनवाई के दौरान एजेंसी ने कहा कि हवलदार राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के लिए अनुवादक के रूप में काम कर रही थी। हवलदार ने अनुवाद के लिए आए भौतिकी के प्रश्नों को अन्य आरोपियों के साथ मिलकर प्रसारित किया।

सीबीआई ने हवलदार को 22 मई को पुणे में गिरफ्तार किया और उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाया। सीबीआई के अनुसार, पुणे के सेठ हीरालाल सर्राफ प्रशाला में कार्यरत हवलदार एक अन्य प्रमुख आरोपी है, जिसे नीट-यूजी 2026 के भौतिकी के प्रश्नों के लीक का स्रोत माना जा रहा है।

कुल 11 लोग गिरफ्तार
इस मामले में अब तक हवलदार को मिलाकर कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य आरोपियों में नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार, मांगीलाल खटीक, विकास और दिनेश बिवाल शामिल हैं, तीनों को जयपुर से गिरफ्तार किया गया। यश यादव को गुरुग्राम से और धनंजय लोखंडे को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से गिरफ्तार किया गया।

अन्य आरोपियों में कथित सरगना प्रहलाद विट्ठलराव कुलकर्णी और मनीषा संजय वाघमारे शामिल हैं, जिन्हें 16 मई को सीबीआई की 10 दिन की हिरासत में भेजा गया था। सीबीआई ने उसी दिन जीव विज्ञान की व्याख्याता मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया, जो राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा-निर्धारण समिति की सदस्य थीं। उन्हें 17 मई को सीबीआई की 14 दिन की हिरासत में भेजा गया। लातूर में गिरफ्तार किए गए रेणुकाई करियर सेंटर (आरसीसी) के संस्थापक शिवराज रघुनाथ को 18 मई को सीबीआई की नौ दिन की हिरासत में भेज दिया गया।

Gold Price: सोना 900 रुपये सस्ता, चांदी 3404 रुपये लुढ़की, जानिए आज के भाव

नई दिल्ली। Gold Silver Price Today: आज मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। सर्राफा बाजार में सोना कल के मुकाबले सस्ता हो गया है। 24 कैरेट गोल्ड का रेट आज मंगलवार को 900 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर गया है।

बुलियंस मार्केट में 24 कैरेट गोल्ड का रेट 157722 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। इससे पहले सोमवार को सोने का रेट 158622 रुपये प्रति 10 ग्राम था। बता दें, चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।

सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में भी आज गिरावट देखने को मिली है। कल सोमवार को चांदी का रेट 269754 रुपये प्रति किलोग्राम था। जोकि आज मंगलवार को 266350 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। यानी कल के मुकाबले चांदी की कीमतों में 3404 रुपये की गिरावट देखने को मिली है।

इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की तरफ से जारी रेट्स के अनुसार 23 कैरेट गोल्ड का रेट आज मंगलवार को 157090 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 144473 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 18 कैरेट गोल्ड का रेट 118292 रुपये प्रति 10 ग्राम है। आज 26 मई को 14 कैरेट गोल्ड का रेट 92267 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है।

इंटरनेशनल मार्केट
आज मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। गोल्ड का आज रेट आज करीब आधा प्रतिशत और चांदी का रेट एमसीएक्स पर 1 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया है। बता दें, इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड और सिल्वर का रेट नीचे गिरा है।

अमेरिका ने ईरानी नौकाओं एवं मिसाइल ठिकानों पर किया हमला

नई दिल्ली। US-Iran War: अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी हिस्से में सैन्य कार्रवाई के बाद मंगलवार को एशियाई बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। इससे बाजार में तनाव और बढ़ गया है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.5 प्रतिशत बढ़कर 97.56 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। हालांकि सोमवार को इसमें 7 प्रतिशत की भारी गिरावट आई थी। वहीं अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई 91.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह शुक्रवार के मुकाबले अब भी करीब 5.5 प्रतिशत नीचे है। सोमवार को अमेरिका में मेमोरियल डे की छुट्टी के कारण बाजार बंद था।

अमेरिका ने ईरान में किए सैन्य हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान के दक्षिणी हिस्से में मिसाइल लॉन्च साइट्स और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई उसके सैनिकों की सुरक्षा के लिए की गई।

ईरानी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में विदेशी जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है। इससे दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हुई और तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत तक उछाल आया।

ईरान के विदेश मंत्री और उसके मुख्य वार्ताकार सोमवार को कतर की राजधानी दोहा पहुंचे, जहां अमेरिका के साथ संभावित समझौते पर बातचीत हुई। दोनों देशों ने कहा है कि शुरुआती समझौते पर प्रगति हुई है। इसके तहत युद्ध रोका जाएगा और अंतिम समझौते के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा।

जापानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के तहत ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाएगा। इसके बाद सभी देशों के जहाज सुरक्षित तरीके से वहां से गुजर सकेंगे।

बाजार को समझौते का इंतजार
केसीएम ट्रेड के मार्केट एनालिस्ट टिम वाटरर ने कहा कि बाजार को उम्मीद है कि अगर समझौता हो जाता है तो लंबे समय से फंसे तेल टैंकर फिर से चलना शुरू हो जाएंगे। जहाजों के डेटा से पता चला है कि हाल के दिनों में एलएनजी और कच्चा तेल लेकर कई जहाज पाकिस्तान, चीन और भारत की ओर रवाना हुए हैं।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फिर दोहराया कि ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपे ताकि उसे नष्ट किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के इस बयान से साफ है कि आखिरी समय में भी समझौता टूट सकता है, जैसा पहले कई बार हो चुका है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव, पर वैश्विक झटकों से निपटने को तैयार भारत: वित्त मंत्री

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की ऊंची कीमतें विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं। यह बात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज एक कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने की अपील को अस्थिर वैश्विक जिंस बाजार और बढ़ती आयात लागत के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मुंबई में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा, ‘ऐसा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण है और कच्चे तेल की ये कीमतें लगातार बदल रही हैं।’ उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया का संकट केवल कूटनीति या भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है।

व्यवसायों और आम लोगों के लिए इसका मतलब ईंधन की ऊंची लागत, माल ढुलाई में देर, महंगी शिपिंग, कच्चे माल की किल्लत, कार्यशील पूंजी पर दबाव और निर्यात ऑर्डर में अनिश्चितता हो सकती है।‘ उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने न केवल भारत बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

सीतारमण ने कहा कि ईंधन की कीमतें ऊंची हैं और लगातार बदल रही हैं। वै​श्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में अकल्पनीय वृद्धि हुई है। सोने की ऊंची कीमतें भी बाहरी मोर्चे पर चुनौतियां पैदा कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘इन तीनों मदों के लिए भुगतान विदेशी मुद्रा में किया जाता है और रुपये में कोई कारोबार नहीं होता है। मौजूदा स्थिति में ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा (तीन एफ) पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।’ वित्त मंत्री ने कहा कि इस संदर्भ में प्रधानमंत्री का विदेशी मुद्रा को संरक्षित करने का आह्वान बहुत महत्त्वपूर्ण है।

वित्त मंत्री के बयान ऐसे समय आए हैं जब पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक प्रभावों- शिपिंग मार्गों के लिए जोखिम, माल ढुलाई की उच्च लागत और ऊर्जा बाजार में व्यवधान को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालांकि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें शुरू में अपरिवर्तित रहीं लेकिन अब तेल मार्केटिंग कंपनियां बढ़ी लागत के भार का एक हिस्सा ग्राहकों पर डालने लगी हैं। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम चार बार बढ़ गए हैं।

सीतारमण ने कहा, ‘नागरिकों को कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। इससे वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी खजाने पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का असर पड़ेगा।‘ वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर भी दबाव पर प्रकाश डाला और कहा कि लंबी अनिश्चितता से व्यावसायिक योजना बनाना मुश्किल हो गया है।

उन्होंने निराशावादी विमर्श गढ़ने वालों पर भी निशाना साधा और कहा कि इस समय भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता। हमें अपने शब्दों और अपने कार्यों से लोगों में भरोसा पैदा करने की जरूरत है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह संकट बाहरी घटनाओं के कारण उत्पन्न हुआ है और घरेलू अर्थव्यवस्था सकारात्मक तथा मजबूत बनी हुई है।

सीतारमण ने भू-राजनीतिक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दर्शाने वाले आर्थिक संकेतकों जीएसटी संग्रह, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के खराब ऋणों में कमी का हवाला दिया। भारतीय उद्योग परिसंघ के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में सितंबर 2025 में 67 फीसदी की वृद्धि हुई जो निजी क्षेत्र के निवेश में सुधार का संकेत है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया ‘बहुत संतुलित’ रही है और समग्र विकास की गति को बनाए रखते हुए एमएसएमई, निर्यातकों और कार्यशील पूंजी तनाव का सामना करने वाले क्षेत्रों का समर्थन करने पर केंद्रित है। उन्होंने केंद्रीय बजट में आर्थिक ​स्थिरता कोष के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक देने के सरकार के फैसले का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने इसे बाहरी झटकों के खिलाफ एक एहतियाती बफर बताया।

उन्होंने कहा, ‘यह पश्चिम एशिया की स्थिति के पूर्ण प्रभाव से पहले बनाया गया एक आपातकालीन उपाय था ताकि भारत वैश्विक झटकों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों और किसी भी क्षेत्र में अचानक तनाव पर तेज प्रतिक्रिया कर सके।’

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से केंद्र सरकार को अ​धिशेष हस्तांतरण पर सीतारमण ने कहा कि भुगतान एक समिति द्वारा अनुशंसित स्थापित सूत्र के अनुसार किया गया है और उन्हें आरबीआई के मूल्यांकन पर पूरा भरोसा है।

पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरित करने का निर्णय लिया था। यह राशि कई अर्थशास्त्रियों द्वारा अनुमानित राशि से थोड़ी कम थी। रुपये की गिरावट और संभावित संप्रभु डॉलर बॉन्ड जारी करने के बारे में वित्त मंत्री ने कहा, “सरकार मुद्रा प्रबंधन, निवेश और गोल्ड बॉन्ड सहित अन्य मुद्दों पर सुझाव एकत्र कर रही है। हम इन सभी समाधानों पर गौर करेंगे।’

Stock Market: सेंसेक्स 207 अंक लुढ़क कर 76281 पर, निफ्टी 24 हजार के नीचे

नई दिल्ली। Stock Market, 26 May 2026: घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट देखने को मिली है। कल की तेजी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी नीचे लुढ़क गए हैं। 30 संवेदी सूचकांक वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 0.27 प्रतिशत या फिर 207.78 अंक की गिरावट के बाद 76281.18 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, निफ्टी 0.18 प्रतिशत या फिर 42.70 अंक नीचे लुढ़क गया था। इस गिरावट के बाद निफ्टी 23989 अंक पर गया था।

अमेरिका द्वारा ईरान में किए गए ताजा सैन्य हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी दबाव में भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कमजोर खुले और शुरुआती कारोबार में नकारात्मक रुख देखने को मिला।

ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख
बड़े सूचकांकों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में थोड़ा अलग रुझान देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 0.14 प्रतिशत की हल्की तेजी में रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।

सेक्टोरल प्रदर्शन में भी अंतर
सेक्टरवार बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल, हेल्थकेयर और रियल्टी इंडेक्स में कमजोरी देखी गई। दूसरी ओर आईटी और मीडिया सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ सहारा दिया।

कल बाजार में दिखी थी तेजी
सोमवार को तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,073.61 अंक यानी 1.42 प्रतिशत चढ़कर 76,488.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 1,143.72 अंक यानी 1.51 प्रतिशत बढ़कर 76,559.07 अंक पर पहुंच गया। इसी प्रकार, पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 312.40 अंक यानी 1.32 प्रतिशत बढ़कर 24,031.70 अंक पर रहा।