नई दिल्ली। Stock Market This Week: इस हफ्ते शेयर बाजार की नजर कई बड़े फैक्टर्स पर रहने वाली है, जिनमें अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं घटनाक्रमों से बाजार की आगे की दिशा तय होगी।
ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव फिलहाल सबसे अहम ट्रिगर बना हुआ है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेश माहौल पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच घोषित संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।
घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों पर रहेगा। इन नतीजों से कंपनियों की कमाई और आगे के कारोबार की स्थिति का अंदाजा लगेगा।
इसके अलावा, विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई की ट्रेडिंग गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी। अगर विदेशी निवेशकों की खरीद या बिकवाली बढ़ती है तो उसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर दिख सकता है।
शेयर बाजार में इस हफ्ते निवेशकों की नजर सबसे पहले देश के बड़े प्राइवेट बैंकों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञ मिश्रा के अनुसार, शुरुआत में एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गजों के परिणामों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। इसके बाद एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, हैवेल्स, इंडसइंड बैंक और श्रेयराम फाइनेंस जैसी कई बड़ी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी।
इस बीच देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। बैंक का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.04 प्रतिशत बढ़कर 20,350.76 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर छोटे कारोबारियों से जुड़े लोन सेगमेंट पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में कुछ जोखिम बने रह सकते हैं।
आईसीआईसीआई बैंक ने मार्च तिमाही के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 9.28 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 14,755 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। बैंक के मुनाफे में यह तेजी मुख्य रूप से प्रोविजनिंग में करीब 90 फीसदी की भारी गिरावट की वजह से आई है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीना का कहना है कि इस सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी दिशा तय करने वाली चीज कंपनियों के तिमाही नतीजों की भरमार होगी। इसके साथ ही अमेरिकी मैक्रो आर्थिक डेटा और वैश्विक हालात भी बाजार की चाल पर असर डालेंगे।
पिछले सप्ताह शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 943.29 अंक यानी 1.21 फीसदी बढ़कर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 302.95 अंक यानी 1.25 फीसदी मजबूत हुआ।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि निवेशकों की नजर खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर रहेगी। अगर इसमें स्थायी समाधान की ओर संकेत मिलते हैं तो इसका असर वैश्विक जोखिम वाले एसेट्स, पूंजी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है।
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात लगातार बदल रहे हैं। फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग से आवाजाही रोक दी थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई।
बाद में शुक्रवार को ईरान ने इसे वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने की बात कही, लेकिन शनिवार को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने दोनों पक्षों के बीच बनी समझ का उल्लंघन किया है।


