Thursday, July 23, 2026
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हजारों भक्तों की मौजूदगी में श्याम बाबा का सजा दरबार, भजनों से भक्तिमय हुआ कोटा

कोटा। शहर के दशहरा मैदान में शनिवार की रात्रि को आयोजित श्याम बाबा के दिव्य दरबार के समक्ष देर रात तक उमड़े हजारों श्रद्धालुओं ने रसपूर्ण भजनों के साथ ऐसा आध्यात्मिक वातावरण रचा कि पूरा परिसर जय श्री श्याम के जयकारों से गूंज उठा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा विशिष्ट अतिथि विधायक संदीप शर्मा थे। अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक-धार्मिक आयोजन समाज में एकता, सकारात्मकता और आस्था की भावना को सशक्त करते हैं।

कार्यक्रम का आयोजन श्री श्याम मित्र मण्डल कोटा के तत्वावधान में किया गया। संस्था के अध्यक्ष सुरेन्द्र गोयल, सचिव राजेश चौधरी एवं कोषाध्यक्ष महेन्द्र मंसाका ने बताया कि यह 30वां रंग-रंगीला फागोत्सव था, जो पिछले तीन दशकों से निरंतर आयोजित हो रहा है।

भजनों से सजा बाबा का दरबार
जयपुर के भजन गायक गोविंद शर्मा ने सर्वप्रथम गणेश वंदना के साथ भजन संध्या का शुभारंभ किया और तत्पश्चात “कीर्तन की है रात बाबा आज थाने आनो है…” जैसे पौराणिक कीर्तन से श्याम बाबा का आह्वान किया। उनकी मधुर प्रस्तुति के साथ ही श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।

इसके बाद कोलकाता के सुप्रसिद्ध भजन प्रवाहक रवि बेरीवाल ने “श्याम धणी ने ये दरबार लगाया है, हम सबसे मिलने का ख्याल बाबा को आया है…” और “हाथों में लेकर निशान चला रे, मैं तो अपने बाबा के धाम चला रे…” जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

शुभम रूपम ने “हो रयो बाबा की नगरी में केशर चंदन को छिड़काव…”, “जाके सिर पर हाथ श्याम धणी को होवे है, वो तो खूंटी तान के सोवे है…”, “म्हारे मन की बात बाबा थारे से न छानी है…” और “म्हारा खाटू का राजा रे, तू तो बेगो-बेगो आजा रे…” जैसे भावपूर्ण भजनों से पंडाल को श्याममय कर दिया।

पुष्पवर्षा और छप्पन भोग
सेवादार कमल अग्रवाल व पंकज बजाज ने बताया कि श्याम बाबा के दरबार को कोलकाता, दिल्ली एवं चंडीगढ़ से मंगाए गए रंग-बिरंगे पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया। जयपुर के कुशल सजावटी कलाकारों द्वारा सुसज्जित मंच, अखंड ज्योत, छप्पन भोग, आकर्षक श्रृंगार तथा पूरे पंडाल में की गई इत्र एवं पुष्प-वर्षा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। गणेशजी एवं सालासर बालाजी का दरबार भी स्थापित किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा एवं वरिष्ठ नागरिक परिवार सहित उपस्थित रहे। श्रद्धालु पूरी रात्रि भजनों की रसधारा में डूबे रहे और “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” के जयघोष से दशहरा मैदान गुंजायमान हो उठा।

कनवास, मांदलिया और कसार में 47 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास

कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को सांगोद विधानसभा के कनवास में 37 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस दौरान 18 करोड़ रुपए की लागत से बने 132 केवी जीएसएस का लोकार्पण तथा धूलेट व खजूरना में 33-33 केवी के जीएसएस सहित प्रस्तावित राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय का शिलान्यास किया गया।

बिरला ने कहा कि पॉलिटेक्निक महाविद्यालय से ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सड़क, बिजली और पेयजल सुविधाओं में लगातार सुधार हुआ है। किसानों को अब दिन में बिजली मिल रही है और घर-घर जल पहुंचाने की दिशा में काम तेज़ी से चल रहा है।

खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है।उन्होंने कहा कि विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। गर्भवती महिलाओं के पोषण, मोबाइल मेडिकल यूनिट से स्वास्थ्य जांच और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि 2 वर्ष में ही सांगोद विधानसभा क्षेत्र में 33/11 केवी के 15 नए जैसे स्वीकृत कराए हैं। सांगोद में 400 केवी का जीएसएस बनकर चालू हो गया है। इनसे गुणवत्तापूर्ण निर्बाध बिजली मिलना प्रारंभ हो गई है। आज किसानों को 6 घंटे दिन में बिजली देना सुनिश्चित किया गया है।

पहले चूल्हा चौका करते हुए बिजली ट्रिप कर जाती थी तो बहुत परेशानी होती थी। अब उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली मिल रही है। खजूरना, गिरधरपुरा धूलेट में जीएसएस बनने से आवा जीएसएस का लोड कम होगा और बिजली की गुणवत्ता में सुधार होगा। पॉलिटेक्निक कॉलेज का फायदा पूरे पूरे हाड़ौती क्षेत्र को मिलेगा।

मांदलिया-कसार में 10 करोड़ से अधिक के कार्य
मांदलिया ग्राम पंचायत में करीब 10 करोड़ 30 लाख रुपए के विकास कार्यों की शुरुआत की गई। 50 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन बनेगा तथा विद्यालयों में नए कक्ष, बाउंड्री और खेल मैदान विकसित किए जाएंगे। हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है।

पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा और 25 लाख रुपये तक निःशुल्क इलाज जैसी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। कसार में भी विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास किया गया। यहां 50 लाख रुपए से सामुदायिक भवन का निर्माण होगा। पेयजल समस्या के समाधान और चंबल का पानी खेतों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य आगे बढ़ रहा है।

विधायक कल्पना देवी ने कहा कि दो वर्षों में ही लाडपुरा क्षेत्र को अनेकों सौगात मिली है। लोकसभा अध्यक्ष के नेतृत्व में हमने जो क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया है उसे पूरा करेंगे। एक पंचायत में करोड़ों रुपए के कामों की शुरूआत इसकी बानगी है। जो बरसों से इस क्षेत्र की समस्याएं थी वो अब एक एक करके पूरी हो रही है।

कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के देहात जिला अध्यक्ष प्रेम गोचर, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष मोतीलाल मीणा, जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल, सांगोद प्रधान जयवीर सिंह अमृतकुआं, सुल्तानपुर प्रधान कृष्णा शर्मा भी मौजूद रहे।

कोटा महोत्सव: हेरिटेज वॉक में पारंपरिक साफा पहन कर चलेंगे शहरवासी

कचौरी फेस्ट और निरोगी कोटा टॉक शो होंगे विशेष आकर्षण

कोटा। Kota Mahotsav 2026: शहर में 21 फरवरी से शुरू हो रहे दो दिवसीय ‘कोटा महोत्सव 2026’ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। महोत्सव के दूसरे दिन 22 फरवरी को प्रातः 7 बजे भव्य हेरिटेज वॉक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शहरवासी पारंपरिक साफा पहनकर अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे।

यह हेरिटेज वॉक मथुराधीश मंदिर से प्रारंभ होकर गढ़ पैलेस, पद्मनाभ मंदिर, किशोरपुरा गेट, कोटड़ा हाउस, कैथूनीपोल और सुभाष चौक होते हुए रामपुरा कोतवाली तक निकाली जाएगी। स्वागत में समूचा कोटा व्यापार महासंघ जुटा हुआ है। मार्ग में जगह-जगह भव्य अगवानी के साथ प्रशासनिक टीम का अभिनंदन भी किया जाएगा।

महोत्सव की भव्यता को बढ़ाने के लिए गढ़ पैलेस के दरीखाने में विशेष ‘कचौरी फेस्ट’ का आयोजन होगा। वहीं शनिवार को जिला कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम सीलिंग कृष्णा शुक्ला, नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा और केडीए सचिव मुकेश चौधरी सहित उच्चाधिकारियों ने पूरे रूट का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने व कचरा पॉइंट हटाने के निर्देश दिए।

होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान (कोटा संभाग) के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने विश्वास जताया कि व्यापार और उद्योग जगत के सक्रिय सहयोग से यह आयोजन अभूतपूर्व होगा। महोत्सव के दौरान रिवर फ्रंट के नंदी घाट पर प्रातः 11 बजे ‘निरोगी कोटा’ कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. मामराज अग्रवाल, डॉ. अशोक शारदा और डॉ. नितेश बौद्ध जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों का टॉक शो होगा, जहां आमजन स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं का समाधान पा सकेंगे।

इसके अतिरिक्त 21 और 22 फरवरी को किशोर सागर तालाब पर प्रातः 11 से सायं 6 बजे तक फ्लावर शो सजेगा तथा सायं काल में पुलिस, आर्मी व आरएसी के बैंड द्वारा मधुर स्वर लहरियां बिखेरी जाएंगी, जो इस दो दिवसीय उत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाएंगी।

Kota Mandi: नए धनिये की दस्तक, ऊपर में 8500 रुपये क्विंटल बिका

मांग कमजोर रहने से सोयाबीन 100 रुपये, सरसों 50 रुपये मंदी बिकी

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को नए धनिये की दस्तक हुई। कारोबारियों के अनुसार नया गीला धनिया ऊपर में 8500 रुपये क्विंटल बिका। ऊंचे भाव पर मांग कमजोर रहने से सोयाबीन 100 रुपये, सरसों 50 रुपये मंदी रही।

मिलर्स की लिवाली से धान 75 रुपये तेज रहा। सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब 60 हजार कट्टे और लहसुन की 500 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं 2371 से 2432, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 1800 से 2050, मक्का लाल 1400 से 1550, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ 2000 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3201, धान (1509) 3000 से 3761, धान (1847) 3200 से 3701, धान (1718-1885) 3700 से 4375, धान (पूसा-1) 3800 से 4100, धान (1401-1846) 3800से 4200, धान दागी 1500 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 4000 से 5381 सरसो 6200 से 6700, सरसों नयी 5500 से 6750, अलसी 6000 से 6700, तिल्ली 7000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 6000 से 6900, उड़द 4500 से 8200, चना देशी 4700 से 5151, चना मौसमी 4700 से 5100, चना पेप्सी 4800 से 5251, चना डंकी 3500 से 4700, चना काबुली 6000 से 7500 रुपये प्रति क्विंटल।

पुराना लहसुन 3000 से 8000, नया लहसुन 3500 से 10000, मैथी 4000 से 5300, धनिया बादामी 7500 से 8800 धनिया ईगल 9200 से 9500 धनिया नया गीला 6500 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल।

दो दिवसीय कोटा महोत्सव 21 फरवरी से, स्पीकर बिरला होंगे मुख्य अतिथि

लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कोटा महोत्सव के लोगो का किया विमोचन

कोटा। दो दिवसीय कोटा महोत्सव 21 एवं 22 फरवरी को होगा। समारोह के मुख्य अतिथि लोक सभा स्पीकर ओम बिरला होंगे। शनिवार को बिरला ने कोटा महोत्सव में मुख्य आतिथ्य का आमंत्रण स्वीकार कर इसकी पुष्टि कर दी है।

जिला कलेक्टर पीयूष समारिया की अगवाई में अतिरिक्त जिला कलेक्टर सीलिंग कृष्णा शुक्ला, होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान कोटा डिवीजन के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी एवं प्रशिक्षु आईपीएस अनुराग चौहान ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर भेंट कर उन्हें कोटा महोत्सव का आमंत्रण पत्र देकर मुख्य आतिथ्य स्वीकार करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से समस्त कार्यक्रमों के लिए महोत्सव के लोगो का भी विमोचन किया गया। उन्होंने कहा कि कोटा महोत्सव के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर के साथ हमारे पर्यटन स्थलों का प्रदर्शन करना चाहिए। इस आयोजन से जन-जन को जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से इन सभी पयर्टन स्थलो का राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार होगा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ऐसे आयोजनों में स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी प्रतिभा का मंच प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस तरह का आयोजन का प्रचार प्रसार राष्ट्रीय स्तर पर किया जाए। ताकि बाहर के पर्यटक भी आकर्षित होकर कोटा में आए।

जिला कलेक्टर समारिया ने संपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 21 फरवरी को प्रातः 8:00 बजे गोदावरी धाम बालाजी पर गणेश वंदना से इस आयोजन की शुरुआत होगी। सायं 5:30 बजे चंबल महाआरती दीपदान एवं 7:00 बजे सेलिब्रिटी नाइट शार्य घाट पर किया जाएगा अतिरिक्त जिला कलेक्टर कृष्णा शुक्ला ने बताया कि चंबल रिवर फ्रंट पर कोटा डोरिया फैशन शो का आयोजन किया जाएगा।

होटल फेडरेशन ऑफ़ राजस्थान कोटा डिवीजन के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने बताया कि 22 फरवरी को प्रातः 7:00 बजे श्री मथुराधीश मंदिर से हेरिटेज वाक का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान क्षेत्रीय व्यापार महासंघ द्वारा स्वागत द्वार बनाये जायेंगे। जिला कलक्टर समारिया ने बताया कि कोटा महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई है।

उत्पादकता में कमी से हल्दी के भाव में अधिक मंदी की संभावना नहीं

नई दिल्ली। Turmeric Price: वर्तमान में हल्दी के भाव मंदे के साथ बोले जा रहे है। अधिकांश उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर नए मालों की आवक शुरू हो चुकी है और दूसरे वर्ष भी देश में हल्दी का उत्पादन बढ़ने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में देश में हल्दी की पैदावार 50/55 लाख बोरी का रहा था जोकि वर्ष 2025 में बढ़कर 70/72 लाख बोरी का हो गया। जबकि चालू सीजन 2026 के दौरान उत्पादन अनुमान 80/85 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 60 किलो) के लगाए जा रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि उत्पादक केन्द्रों पर नए मालों की बढ़ती आवक एवं वायदा के मंदे समाचार मिलने के कारण हाल ही में हल्दी के भाव 3/4 रुपए प्रति किलो तक घट गए है। आगामी दिनों में मंडियों में नए मालों की आवक का दबाव बनने पर अभी कीमतों में नरमी रहेगी।

लेकिन खपत की तुलना में कुल उपलब्धता कमजोर रहने के कारण वर्ष 2026 में हल्दी के भावों में अच्छी तेजी आने के अनुमान लगाए जा रहे। सूत्रों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान कुल उत्पादन 80/85 लाख बोरी एवं बकाया स्टॉक 12/15 लाख बोरी को मिलाकर कुल उपलब्धता लगभग एक करोड़ बोरी के आसपास रहेगी।

जबकि घरेलू खपत एवं निर्यात को मिलाकर 1.10/1.20 करोड़ बोरी की आवश्यकता होती है। वर्तमान में दिल्ली बाजार में हल्दी सिंगल पोलिश गट्ठा का भाव 150/152 रुपए प्रति किलो बोला जा रहा है।

वर्तमान में निजामाबाद मंडी के अलावा ईरोड, सांगली एवं हिंगोली मंडी में भी नए मालों की आवक शुरू हो गई है जबकि बसमत, नान्देड, वारंगल, दुगीराला मंडियों में आवक मार्च माह में शुरू होने के समाचार है।

उत्पादक केन्द्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार चालू सीजन के दौरान मराठवाड़ा (बसमत, हिंगोली, नांदेड) लाइन पर हल्दी उत्पादन 32/35 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे है। जबकि सांगली लाइन पर उत्पादन 10/12 लाख बोरी, निजामाबाद 12/13 लाख बोरी उत्पादन होने के समाचार है।

इरोड एवं सेलम लाइन पर उत्पादन 14/15 लाख बोरी होने के समाचार मिल रहे हैं। वारंगल लाइन पर 2 लाख बोरी एवं दुगीराला, कडप्पा लाइन पर 2.50/3 लाख बोरी उत्पादन होने के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी 5/6 लाख बोरी पैदावार होने के व्यापारिक अनुमान लगाए जा रहे है।

मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन अप्रैल-नवम्बर 2025 के दौरान हल्दी का निर्यात 127530 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 1951.34 करोड़ की रही।

जबकि अप्रैल-नवम्बर- 2024 में निर्यात 121601 टन का दिया गया था और 1984.47 करोड़ की आय प्राप्त हुई। वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान हल्दी का कुल निर्यात 176325 टन का रहा था।

सुवि नेत्र चिकित्सालय में राजस्थान का प्रथम ‘टेक्निस ओडिसी’ लेंस का सफल प्रत्यारोपण

कोटा। Tecnis Odyssey lens implant: शहर के सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं रिसर्च सेंटर में मोतियाबिंद सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है।

वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में अत्याधुनिक ‘टेक्निस ओडिसी’ लेंस का राजस्थान में पहली बार सफल प्रत्यारोपण किया गया। यह सर्जरी मरीज कोटा निवासी कैलाश चंद जैन की बायीं आंख में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

ऑपरेशन के बाद मरीज ने अपनी दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार, स्पष्टता और बेहतर विजन अनुभव होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। चिकित्सकों के अनुसार यह अत्याधुनिक लेंस नई ‘फुल विजुअल रेंज’ तकनीक पर आधारित है, जो मरीजों को दूर, पास और मध्यम दूरी -जैसे कंप्यूटर पर काम करना या वाहन का डैशबोर्ड देखना, तीनों में उत्कृष्ट दृष्टि प्रदान करता है।

नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने बताया कि यह लेंस पारंपरिक मल्टीफोकल लेंसों की तुलना में कम रोशनी में बेहतर कंट्रास्ट देता है तथा ग्लेयर और हेलोज जैसी समस्याओं को न्यूनतम करता है। इससे मरीजों को बिना चश्मे के अधिक प्राकृतिक और आरामदायक दृष्टि मिलती है।

इस सर्जरी में डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. सत्येन्द्र कुमार गुप्ता और डॉ. निपुण बागरेचा सहित विशेषज्ञ टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मरीज कैलाश चंद जैन ने सफल सर्जरी और उत्कृष्ट परिणामों के लिए पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

सुवि नेत्र चिकित्सालय की टीम ने इसे कोटा के चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि अब शहर के मरीजों को विश्वस्तरीय नेत्र चिकित्सा सुविधाएं अपने ही शहर में उपलब्ध हो रही हैं। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा तकनीक में प्रगति का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र के मरीजों के लिए बेहतर और आधुनिक उपचार का नया विकल्प भी प्रस्तुत करती है।

क्या है ‘टेक्निस ओडिसी’ लेंस

यह मोतियाबिंद सर्जरी के लिए डिज़ाइन किया गया एडवांस्ड इंट्राओकुलर लेंस है। यह दूर से पास तक पूरी विज़ुअल रेंज देता है, जिससे चश्मे पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। इसमें एक प्रोप्राइटरी वायलेट लाइट-फ़िल्टरिंग क्रोमोफ़ोर, एक बाईकॉन्वेक्स डिज़ाइन और विज़ुअल क्लैरिटी बढ़ाने और विज़ुअल डिस्टर्बेंस को कम करने के लिए एडवांस्ड ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी हैं।

क्या भारत के साथ अमेरिका से एक तरफा हुई ट्रेड डील, जानिए क्यों उठ रहे सवाल

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। एक खेमे की आलोचना और दूसरे खेमे में चल रहे जश्न के बीच अमेरिकी ट्रेड डील पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी है। ऐसा इसलिए क्योंकि असल में भारत और अमेरिका के बीच का ट्रेड डील अभी तक बनकर तैयार ही नहीं हुआ है।

पिछले हफ्ते रेसिप्रोकल ट्रेड पर एक अंतरिम एग्रीमेंट के लिए फ्रेमवर्क की घोषणा की गई, जिसके तहत उस प्रोसेस पर चला जाएगा। जबकि मोदी सरकार का मकसद इंडियन इकॉनमी को बढ़ाना और उस असहनीय बोझ को कम करना होना चाहिए, जिसे 50 प्रतिशत टैरिफ के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद लागू किया था।

इसीलिए भारत के लिए ये सवाल पूछना जरूरी है कि क्या यह भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच होने वाले किसी भी दूसरे एग्रीमेंट में भी, चाहे वो रणनीतिक हों, या आर्थिक या फिर रक्षा से जुड़े हों, क्या उनके भी अमेरिका ट्रेड डील की तरह ही समझौते करेगा?

ट्रंप प्रशासन ने अभी तक इस डील पर हर घोषणा एकतरफा ही की है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने उससे वादा किया है कि रूसी तेल नहीं खरीदा जाएगा। ट्रंप ने धमकी भी दी है कि अगर भारत ने रूसी तेल खरीदा तो 25 प्रतिशत टैरिफ वापस आ जाएगा।

ट्रंप ने 6 फरवरी को जिस एग्जक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए हैं, उनमें इसी बात का जिक्र किया गया है। इसमें ये भी कहा गया है कि भारत, अमेरिका से बहुत ज्यादा सामान खरीदेगा।

इसके अलावा भारत, भारतीय सामानों पर 18% अमेरिकी टैरिफ के बदले में अमेरिका के खिलाफ टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को “जीरो” कर देगा। जबकि मोदी ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने का भी वादा किया है।

विदेश नीति पर US के साथ एलाइन करेगा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने एक पोस्ट करते हुए अमेरिका से ट्रेड डील होने के लिए देशवासियों को बधाई दी और कहा कि टैरिफ कम किए जाएंगे। इसके चार दिन बाद (अमेरिकी समय के मुताबिक सुबह 4 बजे), वॉशिंगटन ने रूस और ईरान पर संयुक्त बयान और दो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किए और उसके बाद एक “फैक्ट शीट” भी जारी की। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने कुछ घंटों बाद ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया। सरकार ने तब से अपने सार्वजनिक बयानों में दूसरे डॉक्यूमेंट्स पर बात करने से मना कर दिया है। लेकिन एकतरफा ‘ज्वाइंट स्टेटमेंट’ लाने का पूरा तरीका यह सवाल खड़ा करता है। फैसले कौन ले रहा है?

अमेरिका ने साफ किया है कि उसने भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ को तीन समझौतों के तहत रद्द कर दिया और अगर भारत ने रूसी तेल सप्लाई फिर से शुरू की तो US फिर से टैरिफ लगाएगा। भारत, रूस से तेल खरीद रहा है या नहीं, इसपर नजर रखने के लिए ट्रंप ने टॉप अधिकारियों का एक पैनल भी बना दिया है।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, शायद इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि ऑर्डर में कहा गया है कि “भारत राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक मामलों को लेकर यूनाइटेड स्टेट्स के साथ काफी हद तक अलाइन होने” के लिए सहमत हो गया है। ये काफी हैरान करने वाले दावे हैं।

अमेरिकी दावों को खारिज क्यों नहीं करता है भारत
भारत सरकार ने अब तक इनमें से किसी भी दावे से इनकार नहीं किया है, बल्कि भारत की एनर्जी सोर्सिंग प्रायोरिटी और अपने सप्लाई सोर्स को डायवर्सिफाई करने की जरूरत को बताते हुए लंबे बयान जारी किए हैं। वहीं, जमीनी स्तर पर दिख रहा है कि नवंबर 2025 से भारत का रूसी तेल खरीदना कम होने लगा है। दिसंबर 2025 में तेल की खरीद 38 महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई। 2024 में अपने तेल इनटेक के 40% से दिसंबर 2025 में रूस का हिस्सा 25% हो गया है। इसके अलावा अगर अमेरिका से इतना ज्यादा सामान भी खरीदा जाएगा तो फिर दूसरे देशों से खरीददारी जाहिर तौर पर होगी, तो फिर भारत के ‘विविधता’ लाने वाली बातों का क्या होगा?

अमेरिका से भारत को क्यों पूछने ही पड़ेंगे कुछ सख्त सवाल?

  • अमेरिका से कारोबार करने का एकमात्र तरीका अगर टैरिफ हो तो फिर अमेरिका के साथ स्ट्रैटजिक रिश्तों का क्या मतलब है?
  • क्या डिफेंस डील, मिलिट्री अलाइनमेंट, QUAD और इंडो-पैसिफिक, काउंटर-टेररिज्म और भारत के पड़ोस सहित स्ट्रेटेजिक रिश्तों पर अमेरिका के साथ हर समझौता इसी पैटर्न पर आधिरित होगा?
  • पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ अमेरिका के डील और डील करने के तरीके ने साफ दिखाया है कि वॉशिंगटन को नई दिल्ली से रिश्तों की कोई खास परवाह भी नहीं है।
  • अमेरिका ने भारत को चाबहार से हटने, रूसी तेल खरीदना बंद करने, ईरान से कारोबार बंद करने के लिए मजबूर किया है।

जबकि सिर्फ भारत ही वो इकलौता देश है, जिसपर अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था। उसने चीन और तुर्की जैसे देशों को छुआ भी नहीं। इसीलिए भारत को आकलन करने की जरूरत है कि अमेरिका के साथ ऐसे रिश्ते में रहने का क्या मतलब है? या फिर डोनाल्ड ट्रंप जो कहेंगे, उसे मानते रहना होगा और भारत क्या, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का अब खत्म होने का इंतजार करेगा?

आधार पर अब कार्ड होल्डर की फोटो और एक QR कोड दिखेगा

नई दिल्ली। Aadhaar Card Update: आधार कार्ड डिटेल्स की चोरी रोकने के लिए सरकार Aadhaar Card का डिजाइन बदलने जा रही है। नए आधार ऐप के लॉन्च के बाद, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए इसमें बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपडेटेड आधार कार्ड पर सिर्फ कार्ड होल्डर की फोटो और एक QR कोड दिखेगा। इस कदम का मकसद आधार कार्ड की फोटोकॉपी का गलत इस्तेमाल रोकना है, जिसमें सेंसिटिव पर्सनल जानकारी होती है। खबर है कि इस बड़े बदलाव की तैयारी पिछले साल से ही चल रही है।

नया आधार ऐप लॉन्च
UIDAI ने हाल ही में अपने नए आधार ऐप का फुल वर्जन लॉन्च किया है। यह ऐप कार्डहोल्डर्स को कई ऐसी सर्विसेज देता है जिनके लिए पहले आधार सेंटर जाना पड़ता था।

यूजर्स अब ऐप के जरिए सीधे अपना मोबाइल नंबर, पता और दूसरी डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं। यह कार्ड होल्डर्स को एक क्लिक से अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक और अनलॉक करने में भी मदद करता है।

UIDAI के CEO भुवनेश कुमार ने एक ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में कंफर्म किया कि फोटोकॉपी के जरिए आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए नए नियम बनाए जा रहे हैं।

आधार कार्ड भारतीय निवासियों के लिए एक बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट बन गया है। बैंक अकाउंट खोलने हो, सिम कार्ड खरीदने हो, जमीन खरीदना हो, लोन लेना हो या फिर किसी सरकारी स्कीम का फायदा उठाना हो, लगभग हर काम के लिए इसकी जरूरत होती है।

अभी, कार्ड होल्डर ऐसी सर्विस के लिए अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करते हैं। इन कॉपी में आधार नंबर, नाम, पता, जन्मतिथि और दूसरी जानकारी होती है, जिसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।

लोगों की इसी चिंता को दूर करने के लिए, फिजिकल आधार कार्ड पर सिर्फ कार्ड होल्डर की फोटो और QR कोड शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इससे कार्ड सेंसिटिव जानकारी को सुरक्षित रखते हुए फोटो आइडेंटिटी कार्ड के तौर पर काम कर सकेगा।

QR कोड-बेस्ड वेरिफिकेशन
प्रस्तावित बदलावों के तहत, आधार कार्ड पर QR कोड स्कैन करने से बैंकिंग, सिम जारी करने और सरकारी योजनाओं जैसी सर्विसेस के लिए वेरिफिकेशन हो सकेगा। इस सिस्टम से प्राइवेसी बढ़ने और गलत इस्तेमाल का खतरा कम होने की संभावना है। इस संभावित नियम के बारे में रिपोर्ट पिछले साल दिसंबर में सामने आई थी, हालांकि इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।

नया आधार ऐप लॉगिन के बाद कार्ड होल्डर की फोटो के साथ एक QR कोड दिखाता है, जबकि दूसरी पर्सनल डिटेल्स छिपी रहती हैं। ऐप में लॉग इन किए बिना कार्ड होल्डर की जानकारी सामने नहीं आती है।

रेरा की कामकाज की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल, जानिए क्या कहा

नई दिल्ली। देश के रियल एस्टेट क्षेत्र को विनियमित करने के लिए बनाए गए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी RERA को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों ने पूरे सेक्टर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

अदालत ने विभिन्न राज्यों में RERA के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगहों पर यह संस्था डिफॉल्टर बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें राहत देने जैसी भूमिका निभाती दिख रही है। यहां तक कि अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अगर व्यवस्था प्रभावी नहीं है तो ऐसी संस्था के अस्तित्व पर ही पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों और रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी केवल नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि अब जोर कानून की मजबूती पर नहीं, बल्कि उसके सख्त और ईमानदार क्रियान्वयन पर रहेगा। यदि राज्यों के RERA प्राधिकरण अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं करते हैं तो उनके कामकाज की समीक्षा और जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत की टिप्पणी के बाद प्राधिकरणों पर यह दबाव बढ़ेगा कि वे परियोजनाओं की समयसीमा की निगरानी गंभीरता से करें, एस्क्रो खातों के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करें और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करें।

कई राज्यों में खरीदारों की शिकायतें वर्षों तक लंबित रहती हैं, जिससे घर खरीदारों का भरोसा कमजोर होता है। अब संभावना है कि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाएगा।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि RERA का प्रवर्तन सख्त होता है तो इसका सीधा असर उन डेवलपर्स पर पड़ेगा जो परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं करते या वित्तीय नियमों का पालन नहीं करते।

ऐसे छोटे या कमजोर डेवलपर्स के लिए बाजार में टिके रहना कठिन हो सकता है। दूसरी ओर, मजबूत वित्तीय स्थिति और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस वाले बड़े डेवलपर्स को इससे लाभ मिल सकता है, क्योंकि निवेशकों और खरीदारों का भरोसा संगठित और जिम्मेदार कंपनियों की ओर बढ़ेगा।

रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी Anarock के चेयरमैन अनुज पुरी का भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी राज्यों में नियमों के कड़ाई से पालन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। इससे परियोजनाओं की निगरानी मजबूत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही डेवलपर्स पर समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव भी बढ़ेगा।

घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह घटनाक्रम सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि RERA संस्थाएं सक्रिय और जवाबदेह बनती हैं तो खरीदारों की शिकायतों का समाधान जल्दी होगा और उन्हें कानूनी सुरक्षा का वास्तविक लाभ मिलेगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में विश्वास बहाली की प्रक्रिया को बल मिल सकता है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। उसका प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन ही वास्तविक बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य स्तरीय RERA प्राधिकरण इस संदेश को किस गंभीरता से लेते हैं और अपनी कार्यप्रणाली में क्या ठोस सुधार करते हैं।

रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लागू किए गए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी कानून को लेकर हाल में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने नई बहस को जन्म दिया है। उद्योग जगत और उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी कानून की मूल भावना पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

साया ग्रुप के प्रबंध निदेशक विकास भसीन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां नियामक प्रणाली को और सुदृढ़ करने के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकती हैं। उनके अनुसार, यदि कानून में व्यावहारिक और सकारात्मक संशोधन किए जाएं तथा सभी राज्यों में एक समान तरीके से इसका पालन सुनिश्चित किया जाए, तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में जिम्मेदार और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

डेवलपर्स के लिए बढ़ेगी जवाबदेही
अश्विन शेठ ग्रुप के मुख्य व्यवसाय अधिकारी भाविक भंडारी का मानना है कि संभावित बदलावों के संकेत से डेवलपर्स को अपनी कार्यशैली में और अधिक अनुशासन लाना होगा। उनका कहना है कि शासन व्यवस्था, पूंजी प्रबंधन और समयबद्ध परियोजना निष्पादन पर विशेष ध्यान देना अब अनिवार्य हो जाएगा। इससे परियोजनाओं में देरी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

आंकड़े क्या बताते हैं
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कानून लागू होने के आठ वर्षों में देशभर में 99 हजार से अधिक परियोजनाएं और 1.12 लाख से ज्यादा रियल एस्टेट एजेंट पंजीकृत हो चुके हैं। पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां 50 हजार से अधिक परियोजनाएं दर्ज हैं। इसके बाद गुजरात का स्थान है, जहां 7,500 से अधिक परियोजनाएं रेरा के तहत पंजीकृत हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कानून को व्यापक स्तर पर अपनाया गया है, लेकिन प्रभावशीलता का सवाल अब भी बना हुआ है।