कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने बुधवार को धर्मसभा में कहा कि धर्म जीवन का सार है, जबकि अन्य सभी विषय असार हैं। श्रद्धा के माध्यम से ही जीव भगवान बनने की दिशा में आगे बढ़ता है।
मुनिश्री ने कहा कि आधे घंटे तक प्रवचन सुनने मात्र से मनुष्य के योगों की प्रवृत्ति अशुभ से हटकर शुभ की ओर होने लगती है। आज सुना गया धर्मोपदेश भविष्य में किसी भी भव में जातिस्मरण के माध्यम से सम्यग्दर्शन का कारण बन सकता है। इसलिए अधर्मद्रव्य सहित छह द्रव्यों के स्वरूप को समझकर सम्यग्दर्शन को दृढ़ करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मां यदि अपनी संतान और परिवार को धर्म के मार्ग पर ले जाए तो वह सौ शिक्षकों से भी बढ़कर है। जीवन में धर्म को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने विरागोदय तीर्थ पथरिया में आचार्यश्री के मार्गदर्शन में हुए निर्माण कार्य तथा श्रेयांसगिरि (चांला) में कराए गए जीर्णोद्धार का भी उल्लेख किया।
इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्यक डॉ. आचार्यगुरु भक्त अक्षत भैया का मंदिर कमेटी की ओर से अभिनंदन किया गया। उन्होंने चातुर्मास कराने के महात्म्य पर प्रकाश डाला।
मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि धर्मसभा में निर्मल अजमेरा, सुरेंद्र पहाड़िया, रामबाबू जैन, राजेंद्र बगड़ा, महावीर बडला, प्रदीप पापड़ीवाल, आशीष ठोला, अशोक पापड़ीवाल, पारस लुहाड़िया, वर्धमान खटोड़ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सदस्य उपस्थित रहे।

