कोटा। कोटा विश्वविद्यालय का 24वां स्थापना दिवस धन्वंतरि भवन में गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. डा. भगवती प्रसाद सारस्वत ने की।
मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि विश्वविद्यालय, कोटा की कुलगुरु प्रो. विमला डुंकवाल उपस्थित रहीं। कुलसचिव राजपाल सिंह भी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. भवानी सिंह ने बताया कि समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, कुलगीत एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सारस्वत के कार्यकाल के एक वर्ष पूर्ण होने पर उनका साफा एवं माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जॉली भंडारी ने किया।
समारोह में ‘सारस्वत मॉडल’ के अंतर्गत विश्वविद्यालय में बीते एक वर्ष में किए गए नवाचारों, शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध गतिविधियों, आधारभूत संरचना विकास तथा प्रशासनिक सुधारों की डिजिटल प्रस्तुति दी गई। इस दौरान विश्वविद्यालय की विकास यात्रा और भावी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान उत्कृष्टता और छात्र-केंद्रित प्रशासन को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में विश्वविद्यालयों को निजी संस्थानों के समकक्ष सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान और उनके समग्र विकास के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने सभी अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों एवं शिक्षकों से समन्वय, सद्भाव और टीम भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
कुलगुरू आरटीयू प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि कोटा विश्वविद्यालय वर्तमान में विकास के स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से कुलगुरु के नेतृत्व में एकजुट होकर संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि कुलगुरू कृषि विश्वविद्यालय प्रो. विमला डुंकवाल ने युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि इस ऊर्जा को सही दिशा मिले तो वह विकास का आधार बनती है।
उन्होंने कहा कि कुलगुरु प्रो. सारस्वत विद्यार्थियों और शिक्षकों की सकारात्मक ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।
समारोह में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं अपनी विविध प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर उपस्थितजनों की खूब सराहना प्राप्त की।
इस अवसर पर प्रो. घनश्याम शर्मा, प्रो. सौरभ दलेला, प्रो. रीना दाधीच, प्रो. नीलू सिंह चौहान, डॉ. विजय सिंह, डॉ. कृष्णाराम चौधरी, प्रवीण भार्गव, डॉ. मनीष वशिष्ठ, डॉ. विपुल शर्मा, डॉ. चक्रपाणि गौतम, डॉ. चमन तिवारी, हरीश नागर, भगत सिंह धाकड़ सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्षों, अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

