नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर बेलारूस ने भारत की तारीफों के पुल बांध दिए। राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने अपने भाषण में भारत को दुनिया के ताकतवर देशों की लिस्ट में शामिल किया है। खास बात है कि इसमें अमेरिका का नाम शामिल नहीं है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हो रहे सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए हैं।
लुकाशेंको ने कहा, ‘इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि हम कितने ही बराबर है। हम मानते हैं कि तीन ताकतवर देश हैं। चीन, रूस और भारत आर्थिक रूप से ताकतवर परमाणु देश हैं।’ एससीओ में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।
SCO सदस्य देशों ने मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘दोहरा मापदंड’ अपनाए जाने को ‘अस्वीकार्य’ बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस खतरे से निपटने का आह्वान किया। संयुक्त बयान में सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर गहरी चिंता जताई और ईरान पर अमेरिका के हमलों की निंदा की। इस बयान को ‘बिश्केक घोषणा-पत्र’ कहा गया है।
इस संयुक्त बयान पर प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और एससीओ के अन्य नेताओं ने हस्ताक्षर किए। घोषणापत्र में कहा गया है, ‘सदस्य देशों ने आतंकवादी, अलगाववादी और उग्रवादी उद्देश्यों के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल को रोकने के महत्व को रेखांकित किया। सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय सूचना सुरक्षा, सूचना संरक्षण और नए प्रकार के अपराधों से निपटने के क्षेत्रों में आपसी समन्वय को मजबूत करेंगे।’
संयुक्त बयान में कहा गया है कि एससीओ सदस्य देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि स्वार्थी उद्देश्यों के लिए ऐसे समूहों का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं हैं। एससीओ राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की अगली बैठक 2027 में पाकिस्तान में आयोजित की जाएगी।
भारत ने शिखर सम्मेलन के कई अहम निर्णय को मंगलवार को रेखांकित किया, जिनमें सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने तथा आतंकवाद और चरमपंथ जैसे अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने के उपाय शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने 13 निर्णय की जानकारी दी, जिनमें से एक है, ‘एससीओ सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए चुनौतियों और खतरों से निपटने के वास्ते एक सार्वभौमिक केंद्र के नियमों को मंजूरी देना।’
सुरक्षा से जुड़ा यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जिनपिंग और अन्य नेताओं की मौजूदगी में इस समूह से कहा कि वह आतंकवाद को ‘सरकार की नीति’ के तौर पर इस्तेमाल करने वाले देशों का मुकाबला करे।
विदेश मंत्रालय ने जिन निर्णय पर जोर दिया है, उनमें ‘बिश्केक घोषणा’ भी शामिल है। उम्मीद है कि इससे भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा, विकास और कनेक्टिविटी पर अपना पक्ष रखने के लिए एक मंच मिलेगा और मध्य एशिया तथा व्यापक यूरेशिया क्षेत्र के साथ उसके संबंध और मजबूत होंगे।

