वन्यजीव पर्यटन, पारंपरिक चित्रकला व एआई में करियर के नए अवसर खोलेगी यूनिवर्सिटी 

0
19

कोटा यूनिवर्सिटी में कौशल, तकनीक और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा: कुलगुरु सारस्वत

कोटा। बदलते रोजगार बाजार और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कोटा विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कई नए रोजगारोन्मुखी एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इनमें वन्यजीव पर्यटन, बूंदी-कोटा पारंपरिक चित्रण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा साइंस तथा खेल प्रबंधन एवं पर्यटन जैसे उभरते क्षेत्र शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, अनुसंधान और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि आज उच्च शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को बदलती तकनीक और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ कौशल, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करे तथा उन्हें रोजगार के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी सक्षम बनाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्थानीय संभावनाओं को उच्च शिक्षा से जोड़कर युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

वन्यजीव पर्यटन में पीजी डिप्लोमा: पर्यटन एवं आतिथ्य विभाग द्वारा ‘पीजी डिप्लोमा इन वाइल्डलाइफ टूरिज्म’ शुरू किया जा रहा है। हाड़ौती क्षेत्र की प्राकृतिक एवं वन्यजीव संपदा को देखते हुए यह पाठ्यक्रम विशेष महत्व रखता है। कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में वन क्षेत्र, जैव विविधता, नदियां, आर्द्रभूमियां तथा प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत मौजूद है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व सहित अन्य वन्यजीव क्षेत्रों को अध्ययन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा।

पाठ्यक्रम में वन्यजीव प्रबंधन, पारिस्थितिकी, सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन, आतिथ्य प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर रहेगा। वन्यजीव रिसॉर्ट प्रबंधन, सफारी संचालन, प्रकृति फोटोग्राफी तथा पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के अवसर विकसित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

बूंदी-कोटा चित्रशैली को मिलेगा अकादमिक मंच: विश्वविद्यालय द्वारा बूंदी-कोटा पारंपरिक चित्रण शैली में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा भी प्रस्तावित है। इसमें लघुचित्र एवं भित्ति चित्रण की ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक परंपरा के साथ पारंपरिक चित्रण तकनीक, प्राकृतिक रंगों, चित्र निर्माण प्रक्रिया और संरक्षण का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस पाठ्यक्रम के जरिए क्षेत्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ विद्यार्थियों में शोध, सृजनात्मकता, नवाचार और उद्यमिता विकसित करने का प्रयास होगा। कला शिक्षा, संग्रहालय अध्ययन, सांस्कृतिक पर्यटन, कला संरक्षण, डिजाइन, कला विपणन और स्वरोजगार के क्षेत्र में रोजगारपरक दक्षताओं के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।

एआई और डेटा साइंस में बीएससी: तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए विश्वविद्यालय बीएससी इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस शुरू कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इसमें लचीले प्रवेश-निकास विकल्प होंगे। चार सेमेस्टर पूरा करने पर डिप्लोमा, छह सेमेस्टर पर बीएससी तथा आठ सेमेस्टर पर बीएससी ऑनर्स/रिसर्च की डिग्री का प्रावधान है।

पाठ्यक्रम में एप्लाइड स्टैटिस्टिक्स, प्रेडिक्टिव मॉडलिंग, मशीन लर्निंग, एमएलऑप्स, एनएलपी, बिग डेटा सिस्टम्स और एआई एथिक्स जैसे विषय शामिल होंगे। विद्यार्थियों को पाइथन, आर,टेन्सरफ्लो, पाईटॉर्च,एसक्यूएल और क्लाउड प्लेटफॉर्म जैसे उद्योग-मानक टूल्स का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया जाएगा। औद्योगिक इंटर्नशिप, तकनीकी बूट कैंप, वास्तविक दुनिया के केस स्टडी और कैपस्टोन रिसर्च प्रोजेक्ट भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।

खेल प्रबंधन और पर्यटन पर भी जोर: पर्यटन एवं आतिथ्य विभाग में ‘स्पोर्ट्स मैनेजमेंट एंड टूरिज्म’ को भी शामिल किया जा रहा है। विद्यार्थियों को खेल आयोजनों के प्रबंधन, मार्केटिंग, वित्तपोषण और खेल पर्यटन की रणनीतियों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। बड़े खेल आयोजनों और एडवेंचर स्पोर्ट्स के माध्यम से पर्यटन स्थलों के विकास के साथ पर्यावरण एवं स्थानीय संस्कृति के संरक्षण पर भी ध्यान रहेगा।