लोकसभा में हंगामे के बीच न्यायाधिकरण सुधार विधेयक बिना चर्चा के पारित

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नई दिल्ली। विपक्ष की नारेबाजी के कारण लोकसभा में हंगामा हुआ। इसी हंगामे के बीच लोकसभा ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया।

हमें नए Bill को समझने के लिए 2021 के Tribunal Reforms Act का कानूनी इतिहास भी जानना होगा। 19 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने Act के नियुक्ति, tenure और service conditions से जुड़े कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया था।

कोर्ट ने माना कि कानून में ऐसे प्रावधान फिर से दोबारा शामिल हुए, जिन्हें पहले के अदालती फैसलों में रद्द किया जा चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून का नया रूप देकर पहले से तय न्यायिक सिद्धांतों को प्रभावहीन या बेकार नहीं किया जा सकता।

Tribunal व्यवस्था में कार्यपालिका के प्रभाव से पर्याप्त संस्थागत सुरक्षा जरूरी है। इसी पृष्ठभूमि में स्वतंत्र National Tribunals Commission की स्थापना को एक structural safeguard के रूप में महत्वपूर्ण माना गया।

नये बिल में National Tribunals Commission का गठन
संसद में प्रस्तावित कानून 16 ट्रिब्यूनलों को एक संस्थागत निगरानी ढांचे के तहत लाने की बात करता है, जिसके लिए National Tribunals Commission के गठन का प्रावधान है। इनमें Central Administrative Tribunal, National Green Tribunal और Armed Forces Tribunal जैसे प्रमुख निकाय शामिल हैं। Securities Appellate Tribunal, Debts Recovery Tribunals, National Company Law Appellate Tribunal और Income-tax Appellate Tribunal भी प्रस्तावित दायरे में हैं। इन ट्रिब्यूनलों का काम अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता आधारित विवादों का निपटारा करना है। Bill का उद्देश्य नियुक्ति और प्रशासन से जुड़े मामलों में एकरूपता लाना भी है।

NTC में होंगे पांच सदस्य, CJI से परामर्श के बाद नियुक्ति
वर्तमान Bill के मुताबिक National Tribunals Commission पांच सदस्यों वाला निकाय होगा। इसमें एक Chairperson के अलावा दो judicial members और दो technical members होंगे। Chairperson के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या हाई कोर्ट के Chief Justice के स्तर का अनुभव निर्धारित किया गया है। Chairperson का कार्यकाल पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, प्रस्तावित है। आयोग के Chairperson और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी, लेकिन इसमें भारत के मुख्य न्यायधीश की सलाह का प्रावधान रखा गया है।

लोकसभा की कार्यवाही कल तक स्थगित
संसद के मानसून सत्र में आज भी विपक्ष का जोरदार हंगामा जारी रहा। हंगामे के कारण लोकसभा को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

राज्यसभा की कार्यवाही कल तक स्थगित
राज्यसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। उपसभापति ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बैंककार बही सुरक्षा विधेयक पेश करने के लिए बुलाने की कोशिश की। हालांकि, दो मिनट बाद ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसद विरोध कर रहे थे। वे मांग कर रहे थे कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर जवाब दें।

सभी सवालों का चर्चा के लिए तैयार सरकार: रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि सरकार छात्र आंदोलन के सभी मुद्दों पर पूरी और विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, सरकार की ओर से दिया गया प्रस्ताव बिल्कुल साफ है। मैंने कहा है कि सरकार छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़ी गतिविधियों पर पूरी और विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष से मैं सिर्फ एक बात स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि जब चर्चा होगी और जवाब दिया जाएगा, तब उन्हें सदन में कोई हंगामा नहीं करना चाहिए। इससे सदन की कार्यवाही बाधित होती है और माननीय गृह मंत्री के बयान को रोकने की कोशिश होती है। उन्हें गृह मंत्री और सरकार का जवाब सुनना चाहिए। एक बार चर्चा शुरू हो जाए तो हमें हर पहलू पर विस्तार से चर्चा करनी चाहिए।