नई दिल्ली। India-Russia Energy Ties: पश्चिम एशिया संकट ने पूरी दुनिया को ऊर्जा के महत्व का एहसास करा दिया है। मुश्किल की इस घड़ी में रूस भारत के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहा है। अब यह सहयोग कच्चे तेल (क्रूड) की सप्लाई से आगे निकलने वाला है।
भारत और उसके अहम रणनीतिक साझेदार रूस के बीच इसे लेकर बातचीत जारी है। इसका मकसद गैस सप्लाई और जॉइंट वेंचर्स के जरिए एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ाना है। इसमें हाइड्रोकार्बन फील्ड्स का विकास भी शामिल है।
यह खबर ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे हैं। रूबियो की इस यात्रा का मकसद पिछले साल के मध्य से तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना है।
भारत में रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबूशकिन के मुताबिक, जहां रूस भारत के लिए कच्चे तेल का भरोसेमंद सप्लायर बना हुआ है। वहीं दोनों पक्ष अब भारतीय शहरों को गैस सप्लाई, सीएनजी फिलिंग स्टेशनों के विस्तार और नई तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल फैसिलिटी (संयंत्र) के अवसरों की तलाश कर रहे हैं।
रूस के ऑफर की अहमियत
- यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट ने एनर्जी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।
- रूस भारत को कच्चे तेल के सबसे बड़े सप्लायर के तौर पर अपनी स्थिति बनाए हुए है।
- दोनों देशों के बीच यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की पूरी उम्मीद है।
- कारण है कि अमेरिका ने भारत को रूसी तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में दी गई छूट (सैंक्शन्स वेवर) को बढ़ा दिया है।
भारत आयातित ऊर्जा पर बहुत ज्यादा निर्भर है। रूस उसकी किल्लत को आसानी से पूरी कर सकता है। दोनों देशों के आपसी रिश्ते बहुत गहरे हैं।
रूस से LPG खरीद पर बातचीत
ईटी को मिली जानकारी के अनुसार, भारत और रूस ने हाल के हफ्तों में रूस से एलपीजी खरीदने के मुद्दे पर उच्च-स्तरीय बातचीत की है। इसके अलावा, ऐसी भी खबरें हैं कि भारत देश के पूर्वी हिस्से में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज करने पर विचार कर रहा है।
बाबूशकिन ने भारत और रूस के बीच सिविल न्यूक्लियर सहयोग में आई तेजी का भी जिक्र किया। कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट की सफलता को सराहा। इस प्रोजेक्ट में रूस की अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें ऐसी तकनीकें भी शामिल हैं जिनका इस्तेमाल छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) में किया जा सकता है।
उन्होंने हाल ही में पारित ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) एक्ट’ का भी हवाला दिया। इसे भविष्य में सहयोग बढ़ाने में मददगार बताया।
यहां भी रूस बना हुआ है भरोसेमंद सप्लायर
रूस भारत को सूरजमुखी तेल (51%), उर्वरक (25%) और बीन्स (10%) का भी एक भरोसेमंद सप्लायर बन गया है। बाबूशकिन के अनुसार, कृषि क्षेत्र में भी जॉइंट वेंचर्स स्थापित किए जा रहे हैं।
रूसी राजनयिक गुरुवार को आयोजित एक बैठक में उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों और विद्वानों के एक चुनिंदा समूह को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक का आयोजन ‘इंडो-रशिया इनोप्रतिका टेक्नोलॉजी हब’ की ओर से किया गया था। यह नीति आयोग के साथ मिलकर काम करता है।

