जयपुर। राजस्थान में इस वर्ष 11 अगस्त तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 150.51 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर यह गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 158.01 लाख हेक्टेयर से 7.50 लाख हेक्टेयर कम था। इस वर्ष राजस्थान में खरीफ फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 164.10 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
राज्य कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान राजस्थान में धान का उत्पादन क्षेत्र तो 3.47 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 3.43 लाख हेक्टेयर रह गया मगर ज्वार का क्षेत्रफल 4.98 लाख हेक्टेयर से उछलकर 6.61 लाख हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 39.09 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 40.26 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 8.88 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.75 लाख हेक्टेयर पर पहुंचने से अनाजी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र भी 56.42 लाख हेक्टेयर से उछलकर 60.06 लाख हेक्टेयर हो गया। पहले मोटे अनाजों की बिजाई काफी पिछड़ गई थी।
लेकिन मूंग की वजह से दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 39.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 36.75 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। हालांकि समीक्षाधीन अवधि के दौरान राजस्थान में मोठ का बिजाई क्षेत्र 8.59 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.09 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का रकबा 3.79 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 3.99 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। लेकिन मूंग का उत्पादन क्षेत्र 26.57 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 23.11 लाख हेक्टेयर तथा चौला का रकबा 66 हजार हेक्टेयर से गिरकर 56 हजर हेक्टेयर रह गया। तुवर का क्षेत्रफल सीमित रहा।
दलहनों की भांति तिलहन फसलों की बिजाई भी घट गई है। इसका कुल उत्पादन क्षेत्र 26.85 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 23.44 लाख हेक्टेयर रह गया। इसके तहत तिल का रकबा तो 1.44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.85 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 12.86 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.11 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 9.89 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 9.32 लाख हेक्टेयर तथा अन्य तिलहनों का रकबा 2.66 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.16 लाख हेक्टेयर रह गया।
इसके अलावा राजस्थान में कपास का उत्पादन क्षेत्र 6.44 लाख हेक्टेयर से गिरकर 5.35 लाख हेक्टेयर तथा ग्वार का बिजाई क्षेत्र 24.82 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 20.89 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया है।

