नई दिल्ली। भारत में निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में जुलाई में चार साल के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अगस्त में मामूली सुधार हुआ। शुक्रवार को जारी HSBC के फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) सर्वे के मुताबिक, सेवा क्षेत्र में बेहतर ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग की धीमी रफ्तार की भरपाई की।
S&P Global द्वारा तैयार किया गया कंपोजिट PMI अगस्त में बढ़कर 54.6 हो गया, जो जुलाई में 54.3 था। जुलाई का स्तर 2022 की शुरुआत के बाद सबसे कम था। सूचकांक लगातार 61वें महीने 50 से ऊपर बना हुआ है। PMI का 50 से ऊपर रहना कारोबारी गतिविधियों में विस्तार और इससे नीचे रहना गिरावट का संकेत देता है। हालांकि, अगस्त का आंकड़ा मार्च 2022 के बाद दूसरा सबसे कमजोर स्तर रहा।
सर्वे के मुताबिक, अगस्त में नए ऑर्डर की ग्रोथ में सुधार हुआ, लेकिन इसकी रफ्तार हाल के वर्षों के मुकाबले कमजोर रही। S&P Global ने कहा कि अगस्त में कारोबारी गतिविधियों में सुधार मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र के कारण हुआ।
जुलाई में सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों और नए कारोबार की ग्रोथ 53 महीनों में सबसे कमजोर रही थी। अगस्त में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और वृद्धि की रफ्तार बढ़ी। इसके उलट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार अगस्त में और धीमी हो गई। उत्पादन और नए ऑर्डर में वृद्धि पांच साल में सबसे कमजोर रही।
मैन्युफैक्चरिंग PMI घटा
HSBC Flash India Manufacturing PMI जुलाई के 53.5 से घटकर अगस्त में 52.9 रह गया। वहीं, Flash India Services PMI Business Activity Index जुलाई के 53.3 से बढ़कर अगस्त में 54.5 हो गया। इससे संकेत मिलता है कि अगस्त में निजी क्षेत्र की गतिविधियों को मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र से सहारा मिला, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ की रफ्तार कमजोर हुई।
HSBC की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा कि निजी क्षेत्र के कुल उत्पादन की ग्रोथ मोटे तौर पर स्थिर रही और इसे सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों से मदद मिली। उन्होंने कहा कि अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग की वृद्धि और कमजोर हुई और इसमें सुधार की रफ्तार पांच साल में सबसे धीमी रही। उत्पादन और नए ऑर्डर में वृद्धि जारी रही, लेकिन इसकी रफ्तार कम हो गई।
फिनिश्ड गुड्स का स्टॉक हाई बना रहा, जबकि कच्चे माल की खरीद की रफ्तार धीमी हुई। लागत का दबाव कम हुआ, लेकिन कंपनियों ने अपने बिक्री मूल्य ज्यादा तेजी से बढ़ाए। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का ज्यादा हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही हैं।
सेवा क्षेत्र में बढ़ीं नौकरियां
सेवा क्षेत्र में सुधार के चलते अगस्त में कुल रोजगार सृजन भी बेहतर हुआ। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती की सर्वे में कहा गया, “रोजगार में यह सुधार मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में रहा, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में कर्मचारियों की संख्या ढाई साल में पहली बार घटी।”
अगस्त में कंपनियों की इनपुट लागत सात महीने की सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ी। हालांकि, ग्राहकों से वसूली जाने वाली अंतिम कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार तेज हुई। सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि वे बढ़ी हुई लागत का ज्यादा हिस्सा ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर रही हैं।

