मिलर्स की मांग से चने का भाव बढ़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य के करीब पहुंचा

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मुम्बई। शानदार घरेलू उत्पादन के बावजूद बेहतर सरकारी खरीद एवं विदेशों से कम आयात के कारण चना का थोक मंडी भाव पिछले एक माह में 9 प्रतिशत तथा गत वर्ष की तुलना में 4 प्रतिशत बढ़कर अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास और कहीं-कहीं उससे ऊपर पहुंच गया है। आगे भी इसका दाम मजबूत रहने की संभावना है।

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार केन्द्रीय पूल के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से चना की जोरदार खरीद की जा रही है जबकि विदेशों से देसी चना एवं पीली मटर का आयात अपेक्षाकृत कम हो रहा है।

मानसून एवं लग्नसरा के सीजन में चना तथा बेसन की मांग मजबूत रहने की संभावना है इसलिए बाजार में नरमी आने की उम्मीद बहुत कम है। मंडियों में चना की आवक भी कम हो रही है।

केन्द्र सरकार ने 2024-25 सीजन की तुलना में 2025-26 सीजन के दौरान चना का घरेलू उत्पादन 111 लाख टन से 12.5 प्रतिशत बढ़कर 125.14 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है जबकि दलहनों का कुल उत्पादन 6.7 प्रतिशत बढ़कर 274.09 लाख टन होने की आशा जताई है।