मां के बनाए नोट्स से गंभीर बीमारी से ग्रस्त बेटे को मिला आईआईटी दिल्ली में प्रवेश

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कोटा। Success Story of Gunjan Kumar: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और साथ में मां का अटूट आशीर्वाद हो, तो दुनिया की कोई भी चुनौती आपका रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायी सफलता की कहानी राजस्थान के कोचिंग हब कोटा से सामने आई है, जिसने देश भर के छात्रों और अभिभावकों का दिल जीत लिया है।

यह कहानी बिहार के सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार और उनकी मां गुंजा की है। गुंजन ने गंभीर शारीरिक बीमारियों और मुश्किल परिस्थितियों से लड़ते हुए देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली जेईई एडवांस्ड परीक्षा को पास कर लिया है और अब वे आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के सबसे पसंदीदा कंप्यूटर साइंस (CS) ब्रांच में दाखिला लेने जा रहे हैं।

70% आंखों की रोशनी थी गायब, 9.5 नंबर का चश्मा
गुंजन कुमार बचपन से ही एक बड़ी शारीरिक चुनौती से जूझ रहे हैं। उनकी आंखों की रोशनी 70 प्रतिशत से भी अधिक कमजोर है, जिसके कारण उन्हें बेहद मोटे यानी 9.5 पावर का चश्मा लगाना पड़ता है। इसके बावजूद उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। साल 2021 के जेईई टॉपर मृदुल अग्रवाल के एक वीडियो से प्रेरित होकर, गुंजन ने ठान लिया था कि वे भी आईआईटी से इंजीनियरिंग करेंगे। उन्होंने अपने माता-पिता को मनाया और साल 2023 में कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट में एडमिशन ले लिया।

परीक्षा से ठीक पहले फेफड़ा हुआ कोलैप्स
कोटा में गुंजन की पढ़ाई बहुत अच्छी चल रही थी और उन्होंने 10वीं में 82.5% और 12वीं में 70% अंक हासिल किए थे। लेकिन असली परीक्षा अक्टूबर 2025 में शुरू हुई। एक रुटीन टेस्ट देने के अगले ही दिन गुंजन के सीने में तेज दर्द हुआ। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि कोई भारी सामान उठाने के कारण उनके बाएं फेफड़े पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ गया था, जिससे उन्हें ‘न्यूमोथोरेक्स’ फेफड़े का बैठ जाना या कोलैप्स होना नाम की गंभीर बीमारी हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें लगभग तीन महीने तक पूरी तरह से बेड रेस्ट की सलाह दे दी। परीक्षा नजदीक थी और गुंजन का क्लास जाना पूरी तरह बंद हो चुका था।

खुद ऑनलाइन क्लास देखकर बनाए नोट्स
गुंजन को इस संकट से उबारने के लिए उनकी मां गुंजा ढाल बनकर सामने आईं। गुंजा एक गृहिणी हैं और उन्होंने बीएड की पढ़ाई की हुई है। बेटे का साल खराब न हो, इसलिए उन्होंने खुद दोबारा पढ़ाई शुरू की। गुंजन जब बिस्तर पर लेटे रहते थे, तो मां उनके लैपटॉप पर ऑनलाइन लेक्चर वीडियो चलाती थीं। मां खुद पूरी क्लास को ध्यान से देखती थीं और गुंजन के लिए हर विषय के नोट्स तैयार करती थीं। वह एक क्लासमेंट की तरह गुंजन को पूरा सिलेबस रिवाइज करने में मदद करती थीं।

मेहनत लाई रंग
गुंजन ने अपनी मां के बनाए नोट्स की मदद से दिन-रात पढ़ाई जारी रखी। जब नतीजे आए, तो हर कोई हैरान रह गया। गुंजन ने पहले जेईई मेन में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल किए। इसके बाद जेईई एडवांस्ड में अपनी श्रेणी में कमाल करते हुए पीडब्ल्यूडी-ओबीसी कैटेगरी में ऑल इंडिया 50वीं रैंक और कॉमन पीडब्ल्यूडी कैटेगरी में 120वीं रैंक हासिल की। गुंजन ने बताया, “परीक्षा सिर्फ आपकी पढ़ाई की नहीं, बल्कि आपके साहस की भी होती है। विपरीत समय में मेरी मां के नोट्स और शिक्षकों का मार्गदर्शन ही मेरी सफलता की असली चाबी बना।”