कोटा में लगेगा साहित्य का महाकुंभ, आयोजित होगा विशाल पुस्तक मेला: ओम बिरला
कोटा। श्री भारतेंदु समिति, कोटा के शताब्दी समारोह में हिंदी साहित्य के गौरव एवं आधुनिक हिंदी भाषा के युग प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र की 176वीं जयंती एवं शताब्दी वर्ष के अवसर पर साहित्यकार सम्मान समारोह बुधवार की शाम को श्री माहेश्वरी भवन में आयोजित किया गया।
समारोह में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे को ‘हनुमान प्रसाद सक्सेना हिंदी सम्मान’ तथा राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित कोटा की आस्था सक्सेना को ‘स्वर सुधा श्री सम्मान’ सहित 19 साहित्यकारो को साहित्यश्री से सम्मानित किया गया।
अर्थमंत्री राजेन्द्र शारदा ने बताया कि इससे पूर्व सुबह भारतेंदु भवन, लाड़पुरा में भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रतिमा पर सहकार नेता राजेश कृष्ण बिरला की अगुवाई में माल्यार्पण कर उनके साहित्यिक योगदान को याद किया गया। सम्मान समारोह का संचालन रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैया’ ने किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में संस्कार, संवेदना और राष्ट्रीय चेतना का संचार करते हैं। बिरला ने कहा कि उनका खाली समय साहित्य और कविता पढ़ने में व्यतीत होता है।
उन्होंने कहा कि कोटा में शीघ्र ही पुस्तक मेले और साहित्यकारों का विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साहित्य और कविता अलग-अलग भाषाओं एवं संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
बिरला ने संस्था के 100 वर्ष पूर्ण होने पर कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और मील का पत्थर है। संस्था लंबे समय से साहित्य के उत्थान और साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बहुभाषी और विविध संस्कृतियों वाले देश में साहित्य और कविता के प्रति प्रेम ही हमें एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति से जोड़ता है।
कार्यक्रम समन्वयक व रेडक्रॉस के स्टेट प्रसिडेंट राजेश कृष्ण बिरला कहा कि वर्ष 1926 में गठित यह संस्था आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। संस्था से जुडे साहित्यकारों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है।
शताब्दी समारोह के अवसर पर दिल्ली से तेलंगाना तक के साहित्यकारों को एक मंच पर लाकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि संस्था ने 100 वर्षों में हजारों साहित्यकारों को सम्मानित और प्रोत्साहित करते हुए उन्हें साहित्य सृजन के लिए प्रेरित किया है।
राजेश बिरला ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्रजी हिंदी साहित्य के पितामह व हिंदी में आधुनिकता के पहले रचनाकार रहे है। श्रीभारतेंदुजी ने रीतिकाल की विकृत सामन्ती संस्कृति की पोषक वृत्तियों को छोड़कर स्वस्थ परंपरा की भूमि अपनाई और नवीनता के बीज बोये। निज भाषा उन्नति अहै…का जो मंत्र भारतेंदु हरिश्चंद्र ने दिया वह अब मूर्त रूप ले रहा है।
नवल किशोर गर्ग ने कहा कि हिंदी आज केवल देश में ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है। ऐसे में हिंदी के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को मजबूत करने के साथ साहित्यकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन देना समय की आवश्यकता है।
वरिष्ठ भाजपा नेता पंकज मेहता ने कहा कि नई पीढ़ी में हिंदी के प्रति गौरव का भाव विकसित करने के साथ साहित्यकारों और रचनाकारों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
इन्हें मिला साहित्य श्री सम्मान
साहित्य सम्मान समारोह में नीलाक्षी श्रीवास्तव, प्रशांत तेलियानी, श्यामा शर्मा, अनुराधा अनुज्ञा, बाबू बंजारा, विजय शर्मा, रामगोपाल गौतम, शैलजा विजय, हेमेन्द्र सिंह पुरोहित, राधेश्याम शर्मा, संजू श्रृंगी, प्रभात सिंघल, डॉ. मोहनलाल साह (कोटा), श्री दयाल परमार (छबड़ा), डॉ. मंजू महिमा (अहमदाबाद), जगदीश प्रसाद (दौसा), श्री ज्ञानचंद मर्मज्ञ (बेंगलुरु), कर्नल प्रवीण त्रिपाठी (दिल्ली), डॉ. कमल बाला (तेलंगाना) को साहित्य श्री सम्मान से नवाजा गया।
इनकी भी रही उपस्थिति
समारोह में उपाध्यक्ष महेशचंद अजमेरा, महामंत्री सुनील जायसवाल, साहित्य मंत्री प्रदीप सक्सेना, प्रचार मंत्री गोपाल सोमानी, प्रबंधकीय मंत्री गोपाल शारदा, शिक्षा एवं पुस्तकालय मंत्री उमेश कुमार गांधी, पंकज जायसवाल, राजेन्द्र कुमार जैन, सुरेश चंद काबरा, केजी जाखेटिया, प्रमोद भण्डारी, रवि कुमार झंवर, राजीव मेवाडा, महेन्द्र खण्डेलवाल आदि में उपस्थित रहे।

