बड़े मथुराधीश मंदिर में देवशयनी एकादशी मनाई, प्रभु का किया मुकुट कंचनी शृंगार

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कोटा। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ, पाटनपोल स्थित श्री बड़े मथुराधीश जी मंदिर में देवशयनी एकादशी का पावन पर्व शनिवार को अपार श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।

प्रथम पीठ के युवराज गोस्वामी मिलन बावा की पावन सन्निधि और निर्देशन में मंदिर के सेवा-मनोरथ विधि-विधान से संपन्न हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में वैष्णव जनों ने प्रभु के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

​देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर प्रभु श्री मथुराधीश जी को ‘मुकुट कंचनी’ का विशेष और मनमोहक शृंगार धराया गया। स्वर्ण और रत्नों की आभा से दीप्तिमान प्रभु का यह रूप अत्यंत मनभावन प्रतीत हो रहा था।

​शृंगार के पश्चात भोग आरती के समय प्रभु को विशेष सामग्रियों का अरोगन कराया गया। जिसमें स्वास्थ्यवर्धक सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स) और मिश्री को मिलाकर तैयार किया गया विशेष भोग समर्पित किया गया। प्रभु के इस अलौकिक दर्शन को पाकर उपस्थित सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

​’चतुर्मास’ का शुभारंभ
​देवशयनी एकादशी के साथ ही पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार चार माह के चतुर्मास व्रत एवं विशेष नियम-संयम विधिवत प्रारंभ हो गए हैं। इस संदर्भ में युवराज मिलन बावा ने बताया गया कि पुष्टिमार्ग में चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठान के साथ स्वास्थ्य रक्षा का एक वैज्ञानिक और भक्तिमय विधान भी है। ​इन चार महीनों के दौरान वैष्णव जन ऋतु परिवर्तन के स्वास्थ्यवर्धक सिद्धांतों और भक्ति मार्ग का सूक्ष्मता से पालन करेंगे। इसके तहत सभी श्रद्धालु अपने खान-पान, आचार-विचार और दैनिक दिनचर्या में विशेष संयम रखेंगे। सात्विक आहार, भगवद-स्मरण, सेवा और नियमों के कठोर पालन के साथ इन चार महीनों में प्रभु भक्ति का विशेष आनंद लिया जाएगा।