दिल्ली में प्रियंका गांधी से प्रहलाद गुंजल की मुलाकात के सियासी मायने, जानिए क्या

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कोटा। कोटा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब केंद्रीय आलाकमान के पास दिल्ली पहुंच गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने बुधवार को दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की। 10 जनपथ पर करीब 40 मिनट तक चली इस बैठक में कोटा के ताजा घटनाक्रम समेत राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर विस्तृत चर्चा हुई।

प्रहलाद गुंजल ने बताया कि मंगलवार रात को बुलावा आने के बाद वे बुधवार सुबह दिल्ली पहुंचे थे। मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी ने कोटा में टिकट वितरण को लेकर हुई खींचतान और प्रदेश के सियासी घटनाक्रम के एक-एक पहलू को बहुत बारीकी से सुना और नोट किया।

गुंजल ने कहा कि पार्टी हाईकमान की स्पष्ट नीति रही है कि सड़क पर संघर्ष करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिले। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा भी लगातार संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के पक्ष में थे, लेकिन सहमति न बनने पर मामला प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा तक गया, जिन्होंने राहुल गांधी से परामर्श के बाद सह-प्रभारी पूनम पासवान को ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था।

30 सितंबर (रविवार) को जयपुर में हुई बैठक से पहले गुटबाजी खुलकर सामने आ गई थी। विधायक शांति धारीवाल के आवास पर अशोक चांदना, हरिमोहन शर्मा, सीएल प्रेमी और दोनों जिलाध्यक्षों की अलग बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि टिकट विधानसभा क्षेत्रवार ही बंटेंगे।

दूसरी ओर, सह-प्रभारी पूनम पासवान के साथ गुंजल की अलग बैठक में 30 फीसदी समर्थकों को टिकट देने पर शुरुआती सहमति बनी थी। हालांकि, जैसे ही इस बात की खबर धारीवाल गुट को लगी, माहौल गरमा गया। आरोप है कि शांति धारीवाल, अशोक चांदना और जिलाध्यक्षों ने सह-प्रभारी पूनम पासवान व कोटा प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज के साथ तल्ख व्यवहार किया और फाइलें तक फेंक दीं। इसके बाद फैसले को बदलकर विधानसभा वार टिकट बांटना तय किया गया।

बैठक के सियासी मायने
प्रहलाद गुंजल की ओर से दी गई सूची में से कुछ कॉमन नाम तो फाइनल हो गए, लेकिन बाकी पर विवाद बरकरार रहा। पार्टी पदाधिकारियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के बाद दिल्ली दरबार द्वारा गुंजल को अचानक बुलाए जाने को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भले ही इस मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया हो, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आलाकमान कोटा में गुटबाजी और अनुशासनहीनता के इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।