जल संकट रोकने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी, वक्ताओं ने दिए सुझाव

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कोटा। जियो गीता परिवार कोटा एवं राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को सभागार में जल है जीवन का आधार, संरक्षण ही समाधान विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में जल संरक्षण को लेकर सामाजिक जागरूकता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया गया। जियो गीता परिवार के अध्यक्ष चंद्रकांत खंडेलवाल ने बताया कि संगोष्ठी में मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत रहे।

कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा प्रवक्ता एवं संरक्षक पंकज मेहता, समिति के प्रदेश संयोजक किशन पाठक, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि मनोज जैन मंचासीन रहे।

मुख्य अतिथि प्रो. सारस्वत ने उपस्थित जनों को जल संरक्षण की शपथ दिलाते हुए कहा कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से जल संकट को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा नहीं बनाया गया तो भविष्य में जल संघर्ष गंभीर रूप ले सकता है।

उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर उपलब्ध जल का केवल तीन प्रतिशत ही पेयजल योग्य है, जिसे मानव लगातार व्यर्थ बहा रहा है। स्वागत भाषण में किशन पाठक ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की। पाठक ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।

घर, विद्यालय, कार्यालय और सार्वजनिक स्थलों पर जल के विवेकपूर्ण उपयोग की आदत विकसित करनी होगी। वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण, तालाबों एवं बावड़ियों का पुनर्जीवन तथा भूजल पुनर्भरण जैसे उपाय समय की आवश्यकता हैं।

प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा ने संस्कृत उद्बोधन में जल को देवतुल्य बताया, जबकि पंकज मेहता ने जल के दुरुपयोग और अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई।

विशिष्ट अतिथि एवं शिक्षाविद् मनोज जैन ने कहा कि जल संरक्षण के संस्कार बचपन से विकसित किए जाने चाहिए। विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में विशेष भूमिका निभानी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर गीता मनीषी महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी ज्ञानानंद महाराज के प्रेरक संदेश का वाचन जियो गीता परिवार की पदाधिकारी सारिका मित्तल द्वारा किया गया, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता के दृष्टिकोण से जल संरक्षण का महत्व बताया गया।

जियो गीता परिवार कोटा के अध्यक्ष खंडेलवाल ने बताया कि संगोष्ठी में जल संकट, वर्षा जल संचयन, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ मे अतिथियो द्वारा भारत माता एवं धन्वन्तरि देवी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर, माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, सभी अतिथियो का उपरना उडा कर, तुलसी का पौधा एवम गीता मनीषी महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज द्वारा लिखित गीता प्रेरणा पुस्तक भेंट की गई।

कार्यक्रम में अतिरिक्त निदेशक आयुर्वेद डॉ. अंजना शर्मा, बाबूलाल भाट, हरिसूदन शर्मा, नवल गर्ग, आचार्य चन्द्रशेखर, जगदीश बडेरा, कुंजबिहारी नदंवाना, सारिका मित्तल, रचना पाठक, घनश्याम शर्मा, ललित चितौडा, जगदीश शर्मा, लीलाधर गुप्ता, महेंद्र विजय, सहित अनेक गणमान्यजन एवं विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे।