नई दिल्ली। अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेन्टीना तथा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में मौसम की हालत पूरी तरह फसल के अनुकूल नहीं होने तथा रूस-यूक्रेन से शिपमेंट में बाधा पड़ने के कारण गेहूं का वैश्विक बाजार भाव काफी ऊंचा एवं तेज चल रहा है।
इससे दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ सकती है। भारत सरकार गेहूं तथा इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को नियंत्रण मुक्त कर दिया है।
पहले गेहूं का वैश्विक बाजार भाव नीचे होने से भारतीय निर्यातकों को कठिनाई हो रही थी क्योंकि भारत के गेहूं का भाव अनाकर्षक या गैर प्रतिस्पर्धी चल रहा था। अब परिदृश्य बदल रहा है। रूस-यूक्रेन का गेहूं सबसे सस्ता होता है लेकिन दोनों देशों के बीच भयंकर युद्ध जारी है और वे काला सागर क्षेत्र में अवस्थित एक-दूसरे के बंदरगाहों पर भीषण अटैक कर रहे हैं।
इससे वहां जहाजों की आवाजाही बंद होने लगी है और गेहूं के निर्यात शिपमेंट में भारी बाधा पड़ रही है। दोनों देशों में गेहूं का विशाल निर्यात योग्य स्टॉक उपलब्ध है।
गेहूं के सकल वैश्विक निर्यात में इन दोनों देशों की भागीदारी 25 प्रतिशत से ज्यादा रहती है। उधर ऑस्ट्रेलियाई गेहूं का भाव उछलकर गत तीन वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। ऑस्ट्रेलिया एवं कनाडा का दायरा सीमित है। यूरोप में उत्पादन कम होने की संभावना है।

