गुरु वशिष्ठ प्राकट्य महोत्सव में दिखा ब्राह्मण समाज का संगम, कथक नृत्य ने बांधा समां

0
63

कोटा। सनाढ्य समाज के आराध्य एवं कुलगुरु ब्रह्मर्षि गुरु वशिष्ठ का प्राकट्य महोत्सव रविवार को जवाहर नगर में मनाया गया। अखिल राजस्थान सनाढ्य ब्राह्मण महासभा एवं सनाढ्य समाज कोटा की ओर से आयोजित समारोह में ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, संत-महात्मा एवं समाजबंधु एक मंच पर जुटे।

वैदिक मंत्रोच्चार, संतों के आशीर्वचन, सम्मान समारोह और बाल कलाकारों की मनमोहक कथक प्रस्तुतियों ने आयोजन को आध्यात्मिकता एवं सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि विधायक संदीप शर्मा रहे।

प्रदेश महामंत्री किशन पाठक ने बताया कि समारोह का शुभारंभ ब्रह्मर्षि गुरु वशिष्ठ का वरिष्ठ समाजबंधुओं ने पूजन-अर्चन किया। वहीं राम धाम वेद विद्यालय के बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार कर वातावरण को आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना दिया। इसके बाद संत-महात्माओं एवं अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया गया।

मुख्य अतिथि विधायक शर्मा ने कहा कि गुरु वशिष्ठ भगवान श्रीराम के गुरु थे। उन्होंने श्रीराम को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की शिक्षा देकर धर्म और मर्यादा के मार्ग पर आगे बढ़ाया। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु वशिष्ठ का जीवन ज्ञान, तप, नीति और धर्म की प्रेरणा देता है।

उन्होंने ब्राह्मण समाज से अपने गौरव एवं अस्तित्व को पहचानने का आह्वान करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज का दायित्व केवल अपने समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संपूर्ण समाज और जगत को दिशा देने का कार्य करता है। यदि ब्राह्मण समाज अपने सामाजिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करेगा, तो पूरा समाज उसके पीछे चलेगा।

प्रदेश अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाकर सामाजिक एकता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष मिश्रा ने योग वशिष्ठ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा का अमूल्य भंडार है। इसमें भगवान श्रीराम और महर्षि वशिष्ठ के संवाद के माध्यम से जीवन, आत्मज्ञान, विवेक और धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को समझाया गया है। योग वशिष्ठ मनुष्य को आत्मचिंतन, सत्य के मार्ग पर चलने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा देता है।

प्रदेश महामंत्री किशन पाठक ने बताया कि गुरु वशिष्ठ ब्रह्मा के मानस पुत्र तथा सप्तर्षि मंडल के प्रमुख ऋषियों में से एक हैं। ऋषि पंचमी के अवसर पर प्रतिवर्ष उनका प्राकट्य महोत्सव आयोजित किया जाता है। इस वर्ष समारोह में सनाढ्य समाज के साथ ब्राह्मण समाज के विभिन्न घटकों एवं अन्य वर्गों को सहभागी बनाया गया। आयोजन का उद्देश्य गुरु वशिष्ठ जी के तप, ज्ञान, सत्य, संस्कार एवं लोककल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।

महंत शैलेंद्र जी भार्गव ने कहा कि गुरु वशिष्ठ केवल एक समाज के आराध्य नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीय ऋषि परंपरा के गौरव हैं। आचार्य भरत जी कर्षणी महाराज ने युवा पीढ़ी को संस्कारित एवं चरित्रवान बनाने पर जोर दिया।

महंत सत्य प्रकाश शर्मा ने शिक्षा, संस्कार, सेवा और संगठन से समाज को जोड़ने का संदेश दिया। महामंडलेश्वर संत दशरथ दास जी महाराज ने कहा कि गुरु वशिष्ठ भारतीय ऋषि परंपरा के महान आचार्य थे। जनेऊ, तिलक और चोटी जैसे धार्मिक संस्कारों के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि ये संस्कार हमारी गौरवशाली परंपरा, धार्मिक पहचान और संस्कृति के प्रतीक हैं।

महामंडलेश्वर माता नीति अंबाजी जी ने गुरु-शिष्य परंपरा और संस्कारों को सनातन संस्कृति की शक्ति बताते हुए युवाओं एवं मातृशक्ति से भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। मायापुरवासी प्रभु जी ने भक्ति, सेवा और सद्भाव को भारतीय संस्कृति का मूल आधार बताया।

महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज, पीठाधीश्वर बड़ा भक्तमाल, अयोध्या धाम ने आशीर्वचन में कहा कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति उसकी ऋषि परंपरा में निहित है। गुरु वशिष्ठ ने ज्ञान, धर्म, नीति और मर्यादा के माध्यम से समाज को दिशा दी। आज आवश्यकता है कि समाज अपनी जड़ों से जुड़े और आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बनाए।

प्रदेश महामंत्री किशन पाठक ने बताया कि समारोह का सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। राष्ट्रीय नृत्यांगना बरखा जोशी की शिष्याओं वेन्या शर्मा, आरोही पाल, डोनल, यूवीशिका शर्मा एवं शिवांशी व्यास ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।