विश्व तंबाकू निषेध दिवस: धूम्रपान से कोरोना मरीजों को मौत का खतरा अधिक

1446

कोटा। प्रत्येक वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2021 थीम है ‘कमिट टू क्विट’ (छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध)। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह चेतावनी दी है कि धूम्रपान करके और अपने फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को कोरोना से मौत का खतरा 50 फीसदी अधिक होता है। इसलिए कोरोना संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए धूम्रपान जैसे तंबाकू उत्पादों का सेवन न करने में ही भलाई है।

भारत में हर साल लगभग 13 लाख के के करीब मौतें तंबाकू और धूम्रपान के कारण होती हैं, जो लगभग 3,500 मौतें प्रतिदिन हैं। धूम्रपान या स्मोकिंग करने से सबसे ज्यादा नेगेटिव असर हमारे फेफड़ों के ऊपर होता है। जो लोग चेन स्मोकर होते हैं, उनमें फेफड़ों का कैंसर होने की समस्या सबसे अधिक होती है। दुनिया में हर साल तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से करीब 80 लाख लोगों की मौत होती है, लेकिन इसके बावजूद लोग लगातार तंबाकू के आदि बनते जा रहे हैं।

तंबाकू, गुटखा, बीडी एवं धूम्रपान के सेवन से कई दुष्परिणामों को झेलना पड़ सकता है। इनमें मुँह का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, आंतों का कैंसर, पेशाब की नली में कैंसर, ह्नदय रोग, स्ट्रोक, अल्सर, दमा, डिप्रेशन आदि भयंकर बीमारियाँ भी हो सकती है। देश में गुटखा तंबाकू 50 प्रतिशत से अधिक रोगियों में मुख कैंसर का प्रमुख कारण है। महिलाओं में तंबाकू का सेवन गर्भपात या होने वाले बच्चे में विकार उत्पन्न कर सकता है।

सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा के नेत्र सर्जन डाॅ. सुरेश पाण्डेय के अनुसार धूम्रपान करने वाले को आंखों में मोतियाबिन्द एवं मेकुलर डिजनरेशन होने की संभावना अधिक होती है। तंबाकू के साथ आने वाले चूने के पाउच को बच्चे दबाकर खेलते है जिसके कारण चूना बच्चों की आंखों में चला जाता है और आंखों की रोशनी सदा के लिए जा सकती है। आइये विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर हम सब मिलकर सिगरेट, तंबाकू, गुटखा, छोड़ने का संकल्प लेवें। कोरोना कालखण्ड के दौरान तंबाकू रहित समाज आज का सबसे बड़ा युग धर्म है।