सरकारी मेडिकल कॉलेज में 22,342 रैंक तक दाखिला
नई दिल्ली। NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी 2026 की पहले चरण की सीट आवंटन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है। चिकित्सा काउंसलिंग समिति ने संशोधित अस्थायी परिणाम जारी किया है।
समिति के अनुसार, प्राथमिक आकलन केंद्र ने दिव्यांगता प्रमाणपत्र अपलोड करने में गलती की थी। इसी वजह से परिणाम में संशोधन करना पड़ा। किसी गलती पर 22 अगस्त सुबह आठ बजे तक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
आकड़ों के मुताबिक 11.94 लाख रैंक वाले अभ्यर्थियों को भी एमबीबीएस सीट मिली है। हालांकि सरकारी कॉलेज में सामान्य वर्ग की सबसे पीछे की रैंक 22,342 रही। यह सीट आंध्र प्रदेश के पिदुगुरल्ला स्थित सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय में मिली।
कई अन्य सरकारी महाविद्यालयों में भी 20 हजार से अधिक रैंक पर सीट आवंटित हुई। इसकी वजह निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की सीटें हैं। इनमें स्ववित्तपोषित योग्यता सीट भी शामिल हैं। इन सीटों पर नीट की योग्यता के आधार पर दाखिला होता है। इनकी शुल्क व्यवस्था सरकारी कॉलेजों से अलग होती है। इसी कारण काफी पीछे की रैंक पर भी सीट मिल सकती है।
एमबीबीएस की 1.36 लाख सीटों पर होना है दाखिला
देश में 2026-27 सत्र के लिए एमबीबीएस की कुल सीटें 1,36,939 हैं। लेकिन इन सभी सीटों की काउंसलिंग एक ही जगह नहीं होती। सरकारी सीटों का कुछ हिस्सा अखिल भारतीय कोटे से भरा जाता है। बाकी सीटों के लिए राज्यों की अलग प्रवेश प्रक्रिया होती है। निजी और अन्य संस्थानों की सीटों की व्यवस्था भी अलग है। इसलिए सीटों की कुल संख्या और नीट रैंक की सीधी तुलना नहीं की जा सकती।
काउंसिलिंग के लिए जरूरी दस्तावेज
जिन अभ्यर्थियों का नाम आवंटन सूची में है, उन्हें अंतिम परिणाम के बाद संबंधित संस्थान में प्रवेश लेना होगा। इसके लिए नीट यूजी प्रवेश पत्र, सीट आवंटन पत्र, 10वीं की अंकतालिका, 12वीं की अंकतालिका, लागू वर्ग का प्रमाणपत्र, अन्य जरूरी मूल दस्तावेज अनिवार्य हैं।
| वर्ग | अंतिम रैंक |
|---|---|
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 11,94,233 |
| अनुसूचित जाति (SC) | 11,94,131 |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 11,77,113 |
| सामान्य वर्ग (General) | 9,96,653 |
| आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) | 9,83,455 |

