नई दिल्ली। Brent crude oil Price पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 83 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा।
तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या कच्चे तेल की यह तेजी आगे भी जारी रहेगी और इसका असर महंगाई पर भी पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 90.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो करीब 2.3% की बढ़त है। वहीं WTI क्रूड 83.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था, जिसमें करीब 2.1% की तेजी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तेज कर दिया है। इससे तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। बाजार को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा तो वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिससे कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। इसका असर धीरे धीरे रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है। अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो दुनिया के कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है।
महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच यह उम्मीद भी बढ़ी है कि अमेरिका समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में जल्द कटौती नहीं करेंगे। जरूरत पड़ने पर वे ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकते हैं। यही वजह है कि बाजार अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मीटिंग पर नजर बनाए हुए है।
भारत पर असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो आयात बिल बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव, महंगाई में बढ़ोतरी और पेट्रोल डीजल की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ सकती है।

