ऐप से लोन बांटने वाली कंपनियों पर RBI पर कसेगी लगाम

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नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए लोन बांटने के कारोबार को नियंत्रित करने के मकसद से वर्किंग ग्रुप बनाया है। यह कदम देशभर में ऐसे एप्लिकेशन की आई बाढ़ के बीच वसूली के गलत तौर-तरीकों को लेकर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए उठाया गया है। हाल के समय में लोन ऐप के बहुत ही ऊंचे इंटरेस्ट रेट, उनसे जुड़े फ्रॉड और डेटा रिस्क को लेकर पब्लिक की तरफ से काफी चिंताएं जताई जा रही थीं।

ऐप बेस्ड डिजिटल लेंडिंग से जुड़ी चिंताओं को लेकर रिजर्व बैंक ने बुधवार को एक बयान जारी किया। उसने बयान में कहा है कि ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल लेंडिंग ऐप यानी डिजिटल लेंडिंग में तेज उछाल आई है, इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। रिजर्व बैंक का कहना है कि इसने कुछ चिंताएं पैदा की हैं, जो सिस्टम के लिए नुकसानदेह होने की तरफ इशारा करती है।

रिजर्व बैंक ने कहा कि वर्किंग ग्रुप डिजिटल लेंडिंग के तौर-तरीकों को हर एंगल से स्टडी करेगा। स्टडी के दायरे में रेगुलेटेड फाइनेंशियल और अनरेगुलेटेड प्लेयर को लाया जाएगा। इससे उनके लिए समुचित रेगुलेटरी सिस्टम बनाया जा सकेगा।

छह मेंबर वाले वर्किंग ग्रुप में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट भी
छह मेंबर वाले वर्किंग ग्रुप में रिजर्व बैंक के चार अफसर होंगे। वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष आरबीआई के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर जयंत कुमार दास होंगे। ग्रुप को अपनी रिपोर्ट तीन महीने में तैयार करनी होगी। मोनेक्सो के को-फाउंडर विक्रम मेहता और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट राहुल शशि ग्रुप के बाहरी मेंबर होंगे। वर्किंग ग्रुप से अनरेगुलेटेड लेंडिंग ऐप से कंज्यूमर को होने वाले खतरों की पहचान करने के लिए कहा गया है।

रिजर्व बैंक का कहना है कि फिनटेक कंपनियों के इनोवेशन कुछ साल पहले तक सपोर्टिंग रोल निभाते थे। ये अब फाइनेंशियल प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज की डिजाइनिंग, प्राइसिंग और डिलीवरी का अहम हिस्सा हो गए हैं। फाइनेंशियल सेक्टर में डिजिटल मेथड की बढ़ती पहुंच स्वागतयोग्य है, लेकिन इनमें फायदों के साथ जोखिम भी होते हैं। ऐसे में लेंडिंग स्पेस में इनोवेशन को सपोर्ट देने के लिए संतुलित तरीका अपनाना जरूरी है। इसके साथ ही डेटा सिक्योरिटी, प्राइवेसी और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

RBI ने संदिग्ध लेंडिंग ऐप से बचने को लेकर आगाह किया था
रिजर्व बैंक ने दिसंबर में फटाफट लेकिन ऊंची ब्याज दर पर लोन बांटने वाले संदिग्ध ऐप से बचने को लेकर आगाह किया था। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि फटाफट लोन बांटने वाले ऐप बहुत ज्यादा ब्याज ले रहे हैं। उनमें कुछ ऐसे चार्ज होते हैं जिनके बारे में लोन लेते वक्त बॉरोअर को बताया नहीं जाता और वसूली के गलत तौर तरीके अपनाए जाते हैं। कलेक्शन एजेंटों के हाथों बॉरोअर के मोबाइल डेटा का गलत इस्तेमाल होने की भी खबरें आई थीं।