RBI ने देश के विकास अनुमान को एक बार फिर घटाकर 6.1 फीसदी किया

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नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था के हर मोर्चे पर मायूस करने वाली खबरों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फिर एक बार देश के विकास अनुमान को घटा दिया। चालू वित्त वर्ष की चौथी दोमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश के विकास अनुमान को एक बार और घटाकर 6.9 फीसदी से 6.1 फीसदी कर दिया।

पिछली समीक्षा में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को 7.1 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी पर रख दिया था। आरबीआई ने विकास अनुमान में ऐसे समय कटौती की है, जब सरकार ने इकोनॉमी में जान फूंकने के लिए एक-के-बाद-एक कई बूस्टर डोज देने वाले कदम उठाए हैं। गौरतलब है कि अप्रैल-जून तिमाही में देश की विकास दर पांच फीसदी रही थी, जो गत छह साल का निचला स्तर है।

घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए सरकार के द्वारा की गई हाल की घोषणाओं के बारे में कहा कि सरकार ने सही दिशा में कदम उठाए हैं। एमपीसी ने कहा कि गत दो महीने में सरकार ने जो भी कदम उठाए हैं, उनसे माहौल बेहतर होने की उम्मीद है।

इससे खास तौर से निजी क्षेत्र में खपत बढ़ेगी और घरेलू मांग में तेजी आएगी। कृषि क्षेत्र के बारे में एमपीसी ने कहा कि माहौल सुधरा है। इससे रोजगार और आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू मांग भी बढ़ सकती है।

आरबीआई के अन्य प्रमुख फैसले

  • रेपो दर को 0.25 फीसदी घटाकर 5.15 फीसदी किया। यह साल की पांचवीं कटौती है।
  • विकास दर में तेजी लाने के लिए नरम मौद्रिक रुख को रखा कायम।
  • चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में खुदरा महंगाई के अनुमान को 3.5-3.7 फीसदी के दायरे में रखा।
  • माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेने वालों के लिए घरेलू सीमा बढ़ाई और हर योग्य कर्जदार के लिए सीमा को एक लाख रुपए से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपए कर दिया।