Market: शेयर बाजार अगले सप्ताह चमकेगा या रहेगा लाल, जानिए एक्सपर्ट की राय

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नई दिल्ली। Stock Market This Week: लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार के लिए नया सप्ताह कई अहम घटनाक्रम लेकर आ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति का फैसला, कंपनियों के तिमाही नतीजों की शुरुआत और अमेरिका में बॉन्ड पर बढ़ता ब्याज निवेशकों की दिशा तय कर सकता है। पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के लिए अहम रहेंगी।

बीते हफ्ते बिकवाली का दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 4 दिन में 1800 अंक से ज्यादा गिर गया। निफ्टी में भी 3 फीसदी के करीब गिरावट दर्ज हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सोमवार को सेंसेक्स 1.52 फीसदी टूटा। सप्ताह के बीच में गिरावट कुछ थमी, लेकिन गुरुवार को बाजार फिर दबाव में आ गया और यह 0.79 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चलेगी। ब्याज दरों पर फैसला 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे आएगा। निवेशक समिति के फैसले के साथ उसके रुख पर भी ध्यान देंगे। यह संकेत बाजार को बताएगा कि आगे महंगाई और आर्थिक हालात को देखते हुए ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक की सोच क्या है।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे इस हफ्ते शुरू होंगे। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज 8 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेगी। कंपनी के नतीजों और कारोबार पर प्रबंधन की टिप्पणी से निवेशकों को आईटी क्षेत्र की मांग और कंपनियों के प्रदर्शन के बारे में शुरुआती संकेत मिल सकते हैं।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें अहम हैं। बीते हफ्ते ब्रेंट कच्चा तेल 0.11 फीसदी बढ़कर 102.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। शुक्रवार को इसमें मामूली गिरावट आई। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत सप्ताह में 1.6 फीसदी घटकर 91.11 डॉलर प्रति बैरल रही।

इसके बावजूद पश्चिम एशिया के घटनाक्रम से तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के बाद सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने की आशंका भी ऊर्जा बाजार में जोखिम बढ़ा रही है।

अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ता ब्याज
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ब्याज कई साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। निवेशक देखेंगे कि यह स्तर आगे बढ़ता है या इसमें नरमी आती है। अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची रहने पर उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर पड़ सकता है।

सेंसेक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर
बीते सप्ताह गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुए। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, बॉन्ड पर बढ़ता ब्याज और कच्चे तेल में तेजी ने बाजार की धारणा कमजोर की। सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 फीसदी गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ। दिन में यह 1,187.41 अंक तक टूटकर 71,292.88 पर पहुंच गया, जो उसका 52 हफ्ते का नया निचला स्तर था। निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 फीसदी गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ।