कार्य की सफलता केवल श्रम से नहीं, बल्कि भाग्य पर भी निर्भर है: मुनि विश्वास सागर

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के दौरान धर्मसभा में मुनि विश्वास सागर महाराज ने रोठ तीज व्रत की कथा पर प्रवचन दिए, जबकि मुनि निर्वाण सागर महाराज ने द्रव्यसंग्रह की गाथा क्रमांक 16 के माध्यम से धर्म और वाणी संयम का महत्व समझाया।

मुनि विश्वास सागर महाराज ने कहा कि जीवन में कोई न कोई एक व्रत अवश्य लेना चाहिए। व्रत और नियम का पालन मनुष्य को धीरे-धीरे मोक्षमार्ग की ओर ले जाता है। व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मसंयम और जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है।

मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को सदैव सत्य बोलना चाहिए। उसकी वाणी से किसी दूसरे को दुख नहीं पहुंचना चाहिए और न ही वह कलहप्रिय होनी चाहिए। मधुर, सत्य एवं हितकारी वाणी जीवन में शांति और सद्भाव बढ़ाती है।

धर्मकार्य करने से पुण्य की वृद्धि होती है और पुण्य के उदय से लौकिक कार्यों में भी कम प्रयास से सफलता प्राप्त हो सकती है। कार्य की सफलता केवल मेहनत पर नहीं, बल्कि भाग्य अर्थात पुण्य पर भी निर्भर करती है। इसलिए मनुष्य को धर्म, व्रत और नियमों का पालन करते हुए पुण्य का संचय करना चाहिए।

धर्मसभा में सकल समाज के महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा, मंत्री पंकज खटोड़, टीकम पाटनी, कैलाश सोनी, संतोष डूंगरवाल, महेंद्र गोधा, वर्धमान खटोड़, आशीष साकुनिया, मनोज मित्तल, संजय खटोड़, जम्बू बज, विजय सेठी सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे।